जन्म
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को लश्कर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित कृष्ण बाजपेयी था जो अध्यापन का कार्य करते थे और अटल बिहारी की माता का नाम कृष्णा देवी था जो कि गृहणी थी।
अटल जी अपने माता- पिता की सातवीं संतान थी। उनसे पहले उनके तीन बड़े भाई और तीन बहने थी। अटल बिहारी वाजपेयी के बड़े भाइयों को ‘अटल बिहारी वाजपेयी‘, ‘सदा बिहारी वाजपेयी’ तथा ‘प्रेम बिहारी वाजपेयी’ के नाम से जाना जाता है।
वाजपेयी अपने पूरे जीवन अविवाहित रहे। उन्होंने लंबे समय से दोस्त राजकुमारी कौल और बी॰एन॰ कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को उन्होंने दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया। राजकुमारी कौल की मृत्यु वर्ष 2014 में हुई थी । अटल जी के साथ नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य रहते थे।
मांस और अल्कोहल को छोड़ने वाले शुद्धवादी ब्राह्मणों के विपरीत, वाजपेयी को व्हिस्की और मांस का शौकीन माना जाता था। वह हिंदी में लिखते हुए एक प्रसिद्ध कवि थे। उनके प्रकाशित कार्यों में काइडी कविराई कुंडलियन शामिल हैं, जो 1975-77 आपातकाल के दौरान कैद किए गए कविताओं का संग्रह था, और अमर आग है।
अपनी कविता के संबंध में उन्होंने लिखा, “मेरी कविता युद्ध की घोषणा है, हारने के लिए एक निर्वासन नहीं है। यह हारने वाले सैनिक की निराशा की ड्रमबीट नहीं है, लेकिन युद्ध योद्धा की जीत होगी। यह निराशा की इच्छा नहीं है लेकिन जीत का हलचल चिल्लाओ। ”
शिक्षा
बिहारी वाजपेई की प्रारंभिक शिक्षा बड़नगर के ‘गोरखी विद्यालय’ से पूरी हुई। इस विद्यालय में अटल जी ने 8वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। उन्हे एक अच्छे वक्ता के रूप में इसी स्कूल से पहचान मिली थी। जब वे कक्षा 5 में पढ़ते थे। तो पाठयक्रम गतिविधियों के चलते उन्होंने पहली बार भाषण दिया था, लेकिन बड़नगर में उच्च शिक्षा व्यवस्था न होने के कारण उन्हें ग्वालियर जाना पड़ा। उनका नामांकन विक्टोरिया कॉलेजिएट स्कूल में हुआ और नौवीं कक्षा से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई इसी स्कूल में की।
इंटरमीडिएट करने के बाद अटल जी ने ‘विक्टोरिया कॉलेज’ में स्नातक स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रवेश लिया। स्नातक स्तर की शिक्षा के लिए उन्होंने तीनों विषय भाषा पर आधारित लिए जो संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी थे। अटल जी की साहित्यिक प्रकृति थी, जिससे वह तीनों भाषाओं के प्रति आकृष्ट हुए। कॉलेज जीवन में ही उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। शुरूआत में वे ‘छात्र संगठन’ से जुड़े। नारायण राव ने इन्हें काफ़ी प्रभावित किया, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख कार्यकर्ता थे।
ग्वालियर में रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शाखा प्रभारी के रूप में अपने दायित्वों की पूर्ति की। कॉलेज जीवन में उन्होंने कविताओं की रचना करना शुरू कर दिया था। इनकी साहित्यिक अभिरुचि उसी समय काफ़ी परवान चढ़ी। उनके कॉलेज में अखिल भारतीय स्तर के कवि सम्मेलनों का भी आयोजन होता था। इस कारण से कविता की गहराई समझने में उन्हें काफ़ी मदद मिली। 1943 में वाजपेयी जी कॉलेज यूनियन के सचिव रहे और 1944 में उपाध्यक्ष भी बने।
ग्वालियर की स्नातक उपाधि प्राप्त करने के बाद अटल बिहारी जी कानपुर आ गए ताकि राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकें। वहाँ उन्होंने एम. ए. तथा एलएल. बी. में एक साथ प्रवेश लिया। चूंकि स्नातक परीक्षा इन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी, इस कारण इन्हें छात्रवृत्ति भी प्राप्त हो रही थी। कानपुर के डी. ए. वी. महाविद्यालय से इन्होंने कला में स्नातकोत्तर उपाधि भी प्रथम श्रेणी में प्राप्त की।
करियर
वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और वर्ष 1968 से 1973 तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके थे।
वर्ष 1952 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वर्ष 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे।
1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस साल तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।
मोरारजी देसाई की सरकार में वर्ष 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी।
1980 में जनता पार्टी से अवर्षतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की।
6 अप्रैल,1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया।
वे दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए।
लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1996 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली।
19 अप्रैल,1998 को दोबारा प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।
वर्ष 2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय ( इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भाजपा विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई।
कार्यकाल
भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाना
अटल सरकार ने 12 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीक से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊँचाईयों को छुआ।
पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल
19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी जी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की।
कारगिल युद्ध
इसके कुछ ही समय बाद पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया।
इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य हो गए।
स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना
भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (अंग्रेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी॰क्यू॰ प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्गों से जोड़ा गया। ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था।
अन्य कार्य
एक सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया।
संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया।
राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये।
राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित कीं
आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमन्त्रियों का सम्मेलन बुलाया।
उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया।
आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया।
ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की।
सरकारी खर्चे पर रोजा इफ़्तार शुरू किया
कवि
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी थे। ‘मेरी इक्यावन कविताएँ’ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह थे। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे।
वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे। पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ‘ताजमहल’ थी। इसमें शृंगार रस के प्रेम प्रसून न चढ़ाकर “एक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक” की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया। वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता।
अटल जी ने किशोर वय में ही एक अद्भुत कविता लिखी थी – ”हिन्दू तन-मन (कविता) हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय”, जिससे यह पता चलता है कि बचपन से ही उनका रुझान देश हित की तरफ था।
राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है। उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था।
अटल जी की प्रमुख रचनायें
उनकी कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं –
उनकी कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं –
रग-रग हिन्दू मेरा परिचय
मृत्यु या हत्या
अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)
कैदी कविराय की कुण्डलियाँ
संसद में तीन दशक
अमर आग है
कुछ लेख: कुछ भाषण
सेक्युलर वाद
राजनीति की रपटीली राहें
बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि।
मेरी इक्यावन कविताएँ
पुरस्कार
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 27 मार्च, 2015 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनके घर जाकर भारत रत्न से सम्मानित किया।
वाजपेयी जी के स्वास्थ्य को देखते हुए राष्ट्रपति ने उनके घर जाकर देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह भी वाजपेयी के घर मौजूद रहे। प्रधानमंत्री के पद पर रहे हों या नेता प्रतिपक्ष। बेशक देश की बात हो या क्रान्तिकारियों की, या फिर उनकी अपनी ही कविताओं की। अटल बिहारी वाजपेयी की बरारबरी कोई नहीं कर सकता।
भारत रत्न से उन्हें सम्मानित किए जाने की घोषणा भारत सरकार ने दिसम्बर 2014 में कर दी गई थी। वाजपेयी भारत रत्न ग्रहण करने वाले देश के सातवें प्रधानमंत्री बने । इससे पहले जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मोरारजी देसाई, लाल बहादुर शास्त्री और गुलजारीलाल नंदा को यह सम्मान मिल चुका है।
अन्य पुरस्कार
1992 में पद्म विभूषण
1993 में डी. लिट (कानपुर विश्वविद्यालय)
1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार
1994 में श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार
1994 में भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार।
मृत्यु
वाजपेयी को 2009 में एक दौरा पड़ा था, जिसके बाद वह बोलने में अक्षम हो गए थे। उन्हें 11 जून, 2018 में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था, जहाँ 16 अगस्त 2018 की शाम 05 : 05 बजे उनकी मृत्यु हो गयी।
उन्हें अगले दिन17 अगस्त को हिंदू रीति रिवाज के अनुसार उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या मुखाग्नि दी। उनका समाधि स्थल राजघाट के पास शान्ति वन में बने स्मृति स्थल में बनाया गया है।
उनकी अंतिम यात्रा बहुत भव्य तरीके से निकाली गयी। जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सैंकड़ों नेता गण पैदल चलते हुए गंतव्य तक पहुंचे। वाजपेयी के निधन पर भारत भर में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गयी। अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, ब्रिटेन, नेपाल और जापान समेत विश्व के कई राष्ट्रों द्वारा उनके निधन पर दुःख जताया गया। अटल जी की अस्थियों को देश की सभी प्रमुख नदियों में विसर्जित किया गया
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