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शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

मदन मोहन

महान संगीतकार मदन मोहन की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
🎂जन्म 25 जून 1924 बगदाद, इराक
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 14 जुलाई 1975
मदन मोहन  हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध 1950, 1960, और 1970 के दशक के बॉलीवुड फ़िल्म संगीत निर्देशक थे।इनका पूरा नाम मदन मोहन कोहली था। उन्हें विशेष रूप से फ़िल्म उद्योग में गज़लों के लिए याद किया जाता है।
मदन मोहन का 🎂जन्म 25 जून 1924 बगदाद, इराक में हुआ था। जहाँ उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल इराकी पुलिस के साथ एक एकाउंटेंट जनरल के रूप में काम कर रहे थे, मध्य पूर्व में जन्मे मदन मोहन ने अपने जीवन के पहले पाँच साल यहाँ क्यू बिताए। उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल फ़िल्म व्यवसाय से जुड़े थे और बाम्बे टाकीज और फ़िल्मीस्तान जैसे बड़े फ़िल्म स्टूडियो में साझीदार थे।
घर में फ़िल्मी माहौल होने के कारण मदन मोहन भी फ़िल्मों में काम कर बड़ा नाम करना चाहते थे लेकिन अपने पिता के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने का फैसला ले लिया और देहरादून में नौकरी शुरू कर दी। कुछ दिनों बाद उनका तबादला दिल्ली में हो गया। लेकिन कुछ समय के बाद उनका मन सेना की नौकरी में नहीं लगा और वह नौकरी छोड़ लखनऊ आ गये।
लखनऊ में मदन मोहन आकाशवाणी के लिये काम करने लगे। आकाशवाणी में उनकी मुलाकात संगीत जगत से जुडे उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ाँ, उस्ताद अली अकबर ख़ाँ , बेगम अख़्तर और तलत महमूद जैसी जानी मानी हस्तियों से हुई। इन हस्तियों से मुलाकात के बाद मदन मोहन काफ़ी प्रभावित हुये और उनका रुझान संगीत की ओर हो गया। अपने सपनों को नया रूप देने के लिये मदन मोहन लखनऊ से मुंबई आ गये
मुंबई आने के बाद मदन मोहन की मुलाकात एस.डी. बर्मन , श्याम सुंदर और सी. रामचंद्र जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों से हुई और वह उनके सहायक के तौर पर काम करने लगे। बतौर संगीतकार वर्ष 1950 में प्रदर्शित फ़िल्म आँखें के ज़रिये मदन मोहन फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए। फ़िल्म आँखें के बाद लता मंगेशकर मदन मोहन की चहेती पार्श्वगायिका बन गयी और वह अपनी हर फ़िल्म के लिये लता मंगेश्कर से हीं गाने की गुज़ारिश किया करते थे। लता मंगेश्कर भी मदन मोहन के संगीत निर्देशन से काफ़ी प्रभावित थीं और उन्हें गज़लों का शहजादा कहकर संबोधित किया करती थी।
मदन मोहन के पसंदीदा गीतकार के तौर पर राजा मेंहदी अली खान, राजेन्द्र कृष्ण और कैफी आजमी का नाम सबसे पहले आता है। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने गीतकार राजेन्द्र किशन के लिये मदन मोहन की धुनों पर कई गीत गाये। जिनमें 'यूं हसरतों के दाग़'..अदालत (1958),हम प्यार में जलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ'.. जेलर (1958), 'सपने में सजन से दो बातें एक याद रहीं एक भूल गयी'..गेटवे ऑफ इंडिया (1957), 'मैं तो तुम संग नैन मिला के'..मनमौजी,'ना तुम बेवफा हो'.. एक कली मुस्काई, 'वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी'..संजोग(1961) जैसे सुपरहिट गीत इन तीनों फनकारों की जोड़ी की बेहतरीन मिसाल है।
पचास_का_दशक
पचास के दशक में मदन मोहन के संगीत निर्देशन में राजेन्द्र कृष्ण के रचित रूमानी गीत काफ़ी लोकप्रिय हुये। उनके रचित कुछ रूमानी गीतों में 'कौन आया मेरे मन के द्वारे पायल की झंकार लिये'.. देख कबीरा रोया (1957), 'मेरा करार लेजा मुझे बेकरार कर जा'.(आशियाना)1952,'ए दिल मुझे बता दे'..भाई-भाई 1956 जैसे गीत
शामिल हैं।
साठ_का_दशक
मदन मोहन के संगीत निर्देशन में राजा मेंहदी अली खान रचित गीतों में 'आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे'..अनपढ़ (1962), 'लग जा गले'..(वो कौन थी) 1964, 'नैनो में बदरा छाये'.., 'मेरा साया साथ होगा'.. मेरा साया(1966) जैसे गीत श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है
सत्तर_का_दशक
मदन मोहन ने अपने संगीत निर्देशन से कैफी आजमी रचित जिन गीतों को अमर बना दिया उनमें 'कर चले हम फिदा जानो तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'... हकीकत (1965),मेरी आवाज़ सुनो..प्यार का राज सुनो'..नौनिहाल (1967), 'ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नही'.. हीर रांझा (1970),'सिमटी सी शर्मायी सी तुम किस दुनिया से आई हो'...परवाना (1972), 'तुम जो मिल गये हो ऐसा लगता है कि जहां मिल गया'.. हंसते जख्म (1973) जैसे गीत शामिल है।

महान संगीतकार ओ.पी. नैयर जिनके निर्देशन में लता मंगेश्कर ने कई सुपरहिट गाने गाये अक्सर कहा करते थे। ..मैं नहीं समझता कि लता मंगेश्कर, मदन मोहन के लिये बनी हुयी है या मदन मोहन लता मंगेशकर के लिये लेकिन अब तक न तो मदन मोहन जैसा संगीतकार हुआ और न लता जैसी पार्श्वगायिका.. मदन मोहन के संगीत निर्देशन में आशा भोंसले ने फ़िल्म 'मेरा साया' के लिये
'झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में'.. गाना गाया जिसे सुनकर श्रोता आज भी झूम उठते हैं। मदन मोहन से आशा भोंसले को अक्सर यह शिकायत रहती थी कि- आप अपनी हर फ़िल्मों के लिये लता दीदी को हीं क्यो लिया करते है,इस पर मदन मोहन कहा करते थे जब तक लता ज़िंदा है मेरी फ़िल्मों के गाने वही गायेगी। आंखों को नम कर देने वाला ऐसा संगीत वर्ष 1965 में प्रदर्शित फ़िल्म हकीकत में मोहम्मद रफी की आवाज़ में मदन मोहन के संगीत से सज़ा यह गीत 'कर चले हम फिदा जानों तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'...आज भी श्रोताओं में देशभक्ति के जज्बे को बुलंद कर देता है। आंखों को नम कर देने वाला ऐसा संगीत मदन मोहन ही दे सकते थे।

वर्ष 1970 में प्रदर्शित फ़िल्म दस्तक के लिये मदन मोहन सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किये गये। मदन मोहन ने अपने ढ़ाई दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 100 फ़िल्मों के लिये संगीत दिया।

अपनी मधुर संगीत लहरियों से श्रोताओं के दिल में ख़ास जगह बना लेने वाले मदन मोहन 14 जुलाई 1975 को इस दुनिया से जुदा हो गए। उनकी मौत के बाद वर्ष 1975 में हीं मदन मोहन की मौसम और लैला मजनू जैसी फ़िल्में प्रदर्शित हुयी जिनके संगीत का जादू आज भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करता है।

कुलवंत जानी

🎂14जुलाई

⚰️28मार्च 

बॉलीवुड गीतकार.

बॉलीवुड फिल्म एक ही रास्ता साल 1993 में रिलीज हुई थी, इसका निर्देशन दीपक बाहरी ने किया था और फिल्म के सितारे अजय देवगन , रवीना टंडन हैं । संगीत किशोर शर्मा , महेश शर्मा द्वारा रचित था और गीत देव कोहली , कुलवंत जानी , गुलशन बावरा , नक्श लायलपुरी द्वारा लिखे गए थे और गायक विनोद राठौड़ , कुमार शानू , बेला सुलखे , साधना सरगम , कविता कृष्णमूर्ति , विपीन देसाई , विपीन सचदेव हैं ।

↔️कुलवंत जानी गीत कार थे

कुलवंत जानी

कुलवंत जानी बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और गीतकार हैं। फ़िल्में : संगीत विभाग: 1998 घर बाज़ार (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1995 फ़ैसला मैं करुंगी (गीतकार) 1994 मोहब्बत की आरज़ू (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1993 एक ही रास्ता (गीतकार - कुलवंत जानी) 1992 सूर्यवंशी (गीतकार) 1990 कसम झूठ की (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1989 गोला बारूद (गीतकार - कुलवंत जानी) 1989 दो क़ैदी (गीतकार) 1988 धर्मयुद्ध (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1987 कौन जीता कौन हारा (गीतकार - कुलवंत जानी) 1987 मददगार (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1986 मोहब्बत की कसम (गीत - कुलवंत जानी के रूप में) 1985 कला सूरज (गीतकार - कुलवंत जानी) 1985 ज़ुल्म का बदला (गीतकार - कुलवंत जानी) 1985 पत्थर (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1984 सरदार (गीतकार) 1982 अफ़्रीका का आदमी और भारत की लड़की (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1982 राख और चिंगारी (गीतकार) 1981 ज्वाला डाकू (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1980 एक बार कहो (गीतकार - कुलवंत जानी) 1979 दादा (गीतकार) 1979 शैतान मुजरिम (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1977 महा बदमाश (गीतकार) 1977 पापी (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1976 लगाम (गीतकार) 1975 जग्गू (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1974 हमराही (गीतकार) 1974 एक लड़की बदनाम सी (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1972 ललकार (द चैलेंज) (गीतकार) लेखक : 1995 मुक़द्दर (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1992 कल की आवाज़ (पटकथा - कुलवंत जानी) 1992 सूर्यवंशी (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1987 ईमानदार (कहानी - कुलवंत जानी के रूप में) 1986 अधिकार (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1983 धरती आकाश (टीवी मूवी) (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) / (पटकथा - कुलवंत जानी के रूप में) 1982 तेरी मेरी कहानी (टीवी मूवी) (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1979 हम तेरे आशिक हैं (अतिरिक्त संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) / (अतिरिक्त पटकथा - कुलवंत जानी के रूप में) 1974 ठोकर (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) गीत संगीत : 1989 गोला बारूद (गीत: "डोली उठेगी.. आज तेरी बहना", "सिपाही मेरे पीछे पह गया", "दर्द दिल का मेरे इलाज करदे", "याद आई", "शब्बा शब्बा.. क्या रात है") 1989 दो क़ैदी (गीत: "ये चली वो चली चुराके ले चली") 1982 अफ़्रीका का आदमी और भारत की लड़की (गीत: "किसी को मुजरिम")

कुलवंत सिंह जानी उम्र 64 वर्ष की कैंसर से एक साल की लंबी लड़ाई के बाद 28 मार्च को सुबह 9:19 बजे उनके परिवार के आराम के बीच उनके घर में मृत्यु हो गई। जानी का जन्म पुंछ भारत में हुआ था और वह छोटी उम्र से ही अमेरिका में रहने की इच्छा रखते थे। एक बड़े परिवार में गरीब होने के कारण उन्हें स्कूल छोड़कर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानी ने अपने जीवनकाल में कई तरह की नौकरियाँ कीं और पूरे भारत और यूरोप की यात्रा की। कठिन परिस्थितियों और बाधाओं के बावजूद वह अमेरिका जाने के अपने सपने को साकार करने में सफल रहे। जिन उपलब्धियों पर उन्हें सबसे अधिक गर्व था उनमें से एक थी वारविक ब्लव्ड पर स्थित एक स्थानीय सुविधा स्टोर जानी फूड मार्ट की स्थापना करना। हम सभी जानी को एक दयालु व्यक्ति के रूप में याद करते हैं जो किसी भी कमरे में जाने पर उसे रोशन करने की क्षमता रखता था। वह हर किसी से प्यार करता था चाहे आप श्वेत मुस्लिम काले बैपटिस्ट हों; उन्होंने हर किसी को सिर्फ इंसान के रूप में देखा। उनका मानना ​​था कि हर किसी में ईश्वर का एक अंश है। कृपया कुलवंत सिंह जानी के जीवन को मनाने के लिए शनिवार 31 मार्च 2018 को हमसे जुड़ें। अंतिम संस्कार सेवा वेमाउथ अंतिम संस्कार गृह में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की जाएगी: 12746 नेट्टल्स ड्राइव न्यूपोर्ट न्यूज़ वीए 23606। अंतिम संस्कार के बाद चेसापीक गुरुद्वारा में प्रार्थना और दोपहर का भोजन किया जाएगा: 780 फिनक लेन चेसापीक वीए 23320। व्यवस्थाएं वेमाउथ द्वारा की जाती हैं अंतिम संस्कार की जगह।

*Aa jaan-e-jaan - Paapi - Bappi Lahiri - Kulwant Jani - Lata Mangeshkar -.mp3*1977

डेली प्रेस द्वारा 30 मार्च 2018 को प्रकाशित कुछ अंश।

डांसर शिवानी झा

शिवानी झा नए जमाने की डांसर
🎂जन्म 14 जुलाई 1998 को मुंबई, महाराष्ट्र
शिवानी झा हिंदी फिल्म उद्योग के लिए काम करने वाली एक भारतीय नर्तकी हैं। उनका जन्म 14 जुलाई 1998 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। शिवानी अभिनय और मॉडलिंग के क्षेत्र में एक नई दिवा हैं और उन्होंने अपना स्कूल सेंट चार्ल्स हाई स्कूल, मुंबई से पूरा किया और मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह हिंदी टीवी शो में नजर आईंमुझसे शादी करोगेअनिक्ता श्रीवास्तव जैसे कई अन्य प्रतियोगियों के साथ वाइल्ड कार्ड प्रतियोगी के रूप में,जसलीन मथारू,आंचल खुराना. शिवानी हिमालय काजल और देसी हैंगओवर शूज़ जैसे कई टीवी विज्ञापनों में भी दिखाई दीं और वह आईपीएल एंथम में भी दिखाई दीं।

वह एक उत्साही पशु प्रेमी और फिटनेस फ्रीक हैं। शिवानी हमेशा अपने यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड करके अपने प्रशंसकों को प्रेरित करती रहती हैं। वह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी एक्टिव रहती हैं. मराठी फिल्म लागी तो चागी से एक अभिनेता के रूप में अपना करियर शुरू करने के बाद, उन्होंने एक अच्छा प्रशंसक आधार बनाया है। प्रतिभाशाली अभिनेत्री हिंदी टीवी पर कई अन्य रियलिटी शो में दिखाई देंगी।

गीता तमिलनाडु

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गीता (अभिनेत्री), जन्म तिथि, जन्म स्थान
जन्मतिथि: 14-जुलाई -1962

जन्म स्थान: चेन्नई, तमिलनाडु, भारत

व्यवसाय: अभिनेता, टेलीविजन अभिनेतरी

राष्ट्रीयता: भारत
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गीता का जन्म चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। उनके पिता एक एमएनसी में काम करते थे। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा राघवेंद्र हाई स्कूल, बैंगलोर में की। इसके बाद उनका परिवार चेन्नई चला गया। उन्होंने टी नगर गर्ल्स हाई स्कूल से हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की है। उनकी शादी साल 1997 में हुई थी। उनके पति का नाम वासन है। वह चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में काम करते हैं और वह निगमों के व्यवसाय सलाहकार और प्रमोटर के रूप में भी काम करते हैं। यह जोड़ा अब न्यू जर्सी में रहता है। 

गीता एक फिल्म और टीवी अभिनेत्री हैं। उन्होंने लगभग सभी दक्षिण भारतीय भाषाओं में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने साल 1978 में तमिल फिल्म 'बैरवी' से फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने रजनीकांत की बहन का किरदार निभाया है। जब उन्हें फिल्म में यह भूमिका निभाने के लिए कहा गया तो वह 7वीं कक्षा में पढ़ रही थीं। मलयालम फिल्म 'में उनका अभिनय प्रदर्शनपंचाग्नि' (1986) को आलोचकों द्वारा खूब सराहा गया। उस वर्ष उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। उनकी पहली तेलुगू फिल्म 1978 में रिलीज हुई 'मनावुरी पांडवुलु' है। उनकी कुछ प्रमुख तेलुगू फिल्में हैं- पटनम वाचिना पाथिवरथलु जो 1982 में रिलीज हुई थी, सागर संगमम जो 1983 में रिलीज हुई थी और मशहूर निर्देशक के.विश्वनाथ द्वारा निर्देशित थी, कोकिला जो रिलीज हुई थी। 1990 में, आपदाबंधवुडु जो 1992 में रिलीज़ हुई,नुव्वोस्तानान्ते नेनोद्दन्तानाजो 2005 में रिलीज़ और निर्देशित थीप्रभु देवावगैरह।

गीता ने कुछ टीवी सीरियलों में भी काम किया है। उन्होंने तमिल धारावाहिकों जैसे-एंगिरिंधो वंथाई, अवलु मनसु और राजकुमारी में अभिनय किया है। धारावाहिक अवलु मनसु को तेलुगु भाषा में डब किया गया थागुप्पेदंथा मनसु. इसका प्रसारण जेमिनी टीवी पर किया गया. इस धारावाहिक का निर्देशन के. बालाचंदर ने किया था।

उन्हें फिल्म ओरु वडक्कन वीरागधा के लिए केरल राज्य का दूसरा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार और मलयालम फिल्म आधारम के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का दक्षिण फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

 

इस जीवनी का एक और संस्करण...

गीता एक भारतीय अभिनेत्री हैं, जिन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, हिंदी और कन्नड़ जैसे विभिन्न सिनेमा में योगदान दिया है। उनका जन्म साल 1962 में बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था।

उनकी पहली फिल्म तमिल सिनेमा में थी जहां उन्हें ऑस्कर मूवीज़ के निर्देशक एम भास्कर द्वारा निर्देशित फिल्म में दक्षिण भारतीय राजा रजनीकांत के साथ उनकी बहन के रूप में स्क्रीन साझा करने का मौका मिला और फिल्म का नाम बैरावी था। अपने करियर की शुरुआत से ही गीता को अभिनय का शौक रहा है और उनके जुनून ने उन्हें कुल मिलाकर 200 फिल्में करने में मदद की है, जिसमें सभी दक्षिण भारतीय भाषाओं और हिंदी में भी फिल्में करना शामिल है। उसकी प्रतिभा कोई सीमा नहीं थी.  

जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म की, तब वह सातवीं कक्षा में थीं और आठवीं कक्षा तक उन्होंने सिनेमा उद्योग में अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। उनकी प्रतिभा की बहुत सराहना की गई, और उन्हें मलयालम फिल्म पंचगनी से लोकप्रियता मिली, जिसमें उन्होंने इंदिरा का किरदार निभाया था, और उन्हें वर्ष 1986 में मलयालम सिनेमा की लैंडमार्क हीरोइन का खिताब दिया गया था। 

उन्होंने न केवल मलयालम दर्शकों को अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया, बल्कि डॉ. राजकुमार, अंबरीश और विष्णु वर्धन जैसे सितारों के साथ फिल्मों में अपने प्रदर्शन से कन्नड़ सिने प्रेमियों को भी प्रभावित किया।

उन्होंने न केवल बड़े पर्दे पर अभिनय किया है बल्कि तमिल भाषा के छोटे पर्दे पर भी योगदान दिया है। उनके तमिल धारावाहिकों में के. बालाचंदर द्वारा निर्देशित काई एलावु मनसु, हाल ही में राजकुमारी धारावाहिक शामिल हैं, जहां उन्होंने सन टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक में राम्या कृष्णन की मां की भूमिका निभाई थी।

गीता के सौंदर्य काल यानी 80 और 90 के दशक में उनकी बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग बन गई, जहां लोग उनकी खूबसूरती और ग्लैमर की तारीफ करते नहीं थकते थे।

कई अभिनेत्रियों की तरह, गीता ने 1997 में वासन नामक चार्टर्ड अकाउंटेंट, जो एक अमेरिकी सीपीए भी हैं, से शादी के बाद अभिनय से एक छोटा ब्रेक लिया था।

सराहना के साथ-साथ उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार जैसे पुरस्कार भी जीते हैं और वर्ष 1989 में उन्होंने अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता।

संगीतकार रोशन

रोशन (संगीत निर्देशक), जन्म तिथि, जन्म स्थान, मृत्यु तिथि
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रोशन (संगीत निर्देशक)

भारतीय संगीतकार

🎂जन्मतिथि: 14-जुलाई -1917

जन्म स्थान: गुजरांवाला, पंजाब, पाकिस्तान

⚰️मृत्यु तिथि: 16-नवम्बर-1967

पेशा: संगीतकार
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रोशन लाल नागरथ (14 जुलाई 1917 - 16 नवंबर 1967), जिन्हें उनके पहले नाम रोशन से बेहतर जाना जाता है, एक भारतीय एसराज वादक और संगीत निर्देशक थे।
वह अभिनेता और फिल्म निर्देशक राकेश रोशन और संगीत निर्देशक राजेश रोशन के पिता और ऋतिक रोशन के दादा थे।
रोशन का जन्म 14 जुलाई 1917 को गुजरांवाला , पंजाब प्रांत , ब्रिटिश भारत (अब पंजाब , पाकिस्तान ) में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में संगीत की शिक्षा शुरू की और बाद में पंडित एसएन रतनजंकर (संस्थान के प्राचार्य) के प्रशिक्षण के तहत लखनऊ , संयुक्त प्रांत आगरा और अवध के मैरिस कॉलेज में दाखिला लिया। मैहर के प्रसिद्ध सरोद वादक अलाउद्दीन खान के मार्गदर्शन में रोशन एक कुशल सरोद वादक बन गये । 1940 में, ख्वाजा खुर्शीद अनवर , कार्यक्रम निर्माता/संगीत, ऑल इंडिया रेडियोदिल्ली ने रोशन को ईएसराज के लिए स्टाफ कलाकार के रूप में नियुक्त किया , वह वाद्य यंत्र जिसे वह बजाते थे। उन्होंने बंबई में प्रसिद्धि और भाग्य की तलाश में 1948 में यह नौकरी छोड़ दी ।
↔️1948 में, रोशन हिंदी फिल्म संगीत निर्देशक के रूप में काम खोजने के लिए बॉम्बे आए और फिल्म सिंगार (1949) में संगीतकार ख्वाजा खुर्शीद अनवर के सहायक बन गए। उन्हें तब तक संघर्ष करना पड़ा जब तक उनकी मुलाकात तत्कालीन प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक किदार शर्मा से नहीं हुई, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म नेकी और बदी (1949) के लिए संगीत रचना का काम दिया। हालांकि यह फ्लॉप रही, लेकिन किदार शर्मा ने उन्हें अपनी अगली फिल्म में एक और मौका दिया। रोशन बावरे नैन (1950) के साथ हिंदी फिल्म संगीत परिदृश्य में एक खिलाड़ी के रूप में उभरे, जो एक बड़ी संगीत हिट बन गई।

1950 के दशक की शुरुआत में, रोशन ने गायक मोहम्मद रफ़ी , मुकेश और तलत महमूद के साथ काम किया । मल्हार (1951), शीशम , और अनहोनी (1952 फ़िल्म) 1950 के दशक के दौरान उनकी बनाई गई कुछ फ़िल्में थीं। इस दौरान, उन्होंने फिल्म नौबहार (1952) के लिए लता मंगेशकर द्वारा गाया गया मीरा भजन, "ऐरी मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दर्द ना जाने कोई" की भी रचना की, जो बेहद हिट हुआ। 

वह हमेशा व्यावसायिक रूप से सफल नहीं थे। उन्होंने इंदीवर और आनंद बख्शी को गीतकार के रूप में भारतीय फिल्म उद्योग में पहला ब्रेक दिया। बाद में, वे 1960 के दशक के अंत से मुंबई में सबसे अधिक मांग वाले गीतकारों में से दो बन गए ।

आनंद बख्शी को पहला ब्रेक 1956 में संगीत निर्देशक निसार बज़्मी ने अपनी फिल्म भला आदमी (1956) में दिया था। 1956 में आनंद बख्शी द्वारा भला आदमी के चार गाने लिखने के बाद रोशन ने बख्शी को फिल्म सीआईडी ​​गर्ल (1959) दी। कुछ देरी के बाद 1958 में भला आदमी रिलीज हुई। आनंद बख्शी और रोशन ने मिलकर सुपरहिट म्यूजिकल फिल्म 'देवर' (1966) बनाई थी।

1960 का दशक रोशन और उनके संगीत के लिए स्वर्ण युग साबित हुआ। लोक संगीत को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ ढालने की उनकी क्षमता उनका ट्रेडमार्क बन गई और इसके परिणामस्वरूप सफल फिल्म संगीत तैयार हुआ। इस दौरान रोशन ने "बरसात की रात से ना तो कारवां की तलाश है" और "जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात" (बरसात की रात , 1960) जैसी हिट फिल्में दीं। बरसात की रात भी 1960 के दशक की "सुपरहिट" फिल्म थी।

"अब क्या मिसाल दूं" और "कभी तो मिलेगी, कहीं तो मिलेगी" ( आरती , 1962), "जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा", "पाओ छू लेने दो", "जो बात तुझमें है" और "जुर्म-ए- उल्फत पे" ( ताजमहल , 1963), "निगाहें मिलाने को जी चाहता है" और "लागा चुनरी में दाग" ( दिल ही तो है , 1963), "संसार से भागे फिरते हो" और "मन रे तू काहे" ( चित्रालेखा ) , 1964), और "ओह रे ताल मिले" और "खुशी खुशी कर दो विदा" ( अनोखी रात , 1968)। उन्होंने मजरूह सुल्तानपुरी के गीतों के साथ फिल्म ममता (1966) के लिए कुछ धुनें बनाईं ,और हेमंत कुमार के साथ उनका हिट युगल गीत, "चुप्पा लो यूं दिल में प्यार मेरा" । देवर (1966): "आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम, गुज़रा ज़माना बचपन का"; "बहारों ने मेरा चमन लूट कर"; "दुनिया में ऐसा कहां सबका नसीब है"।

रविवार, 25 जून 2023

मदन मोहन कोहली

संगीत के बादशहा श्री मदनमोहन कोहली,जन्म बगदाद,ब्रिटिश इराक,

*🎂जन्म 25जुन 1924*
*⚰️मृत्यू 14जुलाई 1975,(51)साल की उम्र मे ,बंबई मे...

ईश्वरी देन प्राप्त हो जैसे इस संगीत के जादूगर को तभी तो लता दीदी भी इन्हे गजलों के बादशहा कहती थी!यहां तक के जब इनके संगीत निर्देशन मे दिदी ने आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबील मुझे गाया तो संगीतकार नौशाद जी इतने प्रभावित हुए के कहने लगे अगर ये धून मुझे मिल जाए तो अपनी सारा संगीत खजाना इनपर लुटा देने की ख्वाहिश की थी।यहां तक आशा दिदी भी कहती रहती की आप सिर्फ दिदी से ही गंवाते है गाने,फिर इन्होंने आशा दिदी को मेरा साया फिल्म का झुमका गीरा रे...गाना देकर खुश किया इतनी लगन और मेहनत से आशा दिदी ने वो गाना गाया के आज तक लोग भूले नही।
एक सैनिक के रुप मे मदनमोहन जी की जिन्दगी की शुरूआत हुई फिर उन्होंने वह नौकरी छोड ऑल इंडिया रेडिओ पर अपने  संगीत के प्रती लगाव होने से जूड गये,उनके पिता रायबहादूर चुन्नीलाल इराकी पुलीस मे महालेखाकार थे सो उनकी दिली तमन्ना थी के बेटा भी फौजी या पुलिस  की वर्दी पहने बाद उनकी यह इच्छा मदन जी ने पुरी की पर उनका दिल नहीं लगा उस नौकरी मे ।
आकाशवाणी मे जुडते उनका परिचय,उस्ताद फैय्याज खान ,उस्ताद अली अकबर खान, बेगम अख्तर, तलतजी  जैसे बहोत जानेमाने कलाकारों से हुआ वो उनसे प्रभावित हुए फिर खुद संगीत की ओर रुझान करते हुए अपने सपनों को नया रुप देने हेतू वो लखनऊ से बंबई चले आए,वहां उनकी मुलाकात सचीन दा बर्मन, सी रामचंद्र ,श्यामसुंदर,जैसे प्रसिद्ध संगितकारोंसे हुई और वो उनके सहायक  तौर पे काम करने लगे1950की फिल्म आंखे का संगीत निर्देशन का काम उनको मिल गया जो स्वतंत्र रुप मे था,इस फिल्म बाद उनका नाम चर्चीत और बंबई आने का मकसद सफल हुआ,साथ मे लता दिदी उनकी  चहेती  गायिका बन गयी  उनके सभी फिल्म संगीत मे लता दिदी ही थी,एक बार ओ पी नैय्यर जी यह कहने लगे की" मुझे समझ नही आता के लता मदनमोहन के लिए है या मदनमोहन लता के लिये पर एक बात है के ना अब तक मदनमोहन जैसा संगितकार हुआ ना लता जैसी गायिका "सच बात है।
उन्होंने जितने भी फिल्मों को संगीत दिया वो अमर ही हुआ 1957की देख कबीरा रोया,1965की हकीकत उनके नाम का परचम आसमां मे लहराने  लगा और वो सफल संगितकार बन गये फिल्म इन्डस्ट्री मे।
उनके दिए हुए तमाम फिल्मे गीतों की वजह से हिट हुई आम लोगों के दिल को भा गये सभी गीत जिसे आज भी लोग भूल नही पाये।
उनकी कुछ फिल्मे,रिश्ते नाते,छोटे बाबू दुनिया ना माने,जेलर,मेमसाहिब,जब याद किसीकी आती है,रेल्वे प्लॅटफॉर्म, संजोग,अदालत,पाकैटमार,चाचा जिन्दाबाद, सुहागन ,बापबेटे,आशियाना,एक मुठ्ठी आसमान, आंखे,नौनिहाल, अकेली मत जईयो,एक कली मुस्काई,बावर्ची,परवाना,मदहोश, निन्द हमारी ख्वाब तुम्हारे, निला आकाश मनमौजी पुजा के फुल,शराबी,बहाना,गजल,आदी फिल्मे  जो उनके संगीत का जादु हमे देखने मिला और हम सरोबार हुए 🎶🎶🎶🎶🎶
आज आस सम्राट, इस जादूगर का जनमदिन है तो हम उनके ही गीत सुनते उन्हे याद करते है और हमारी तरफ से ऊन्हे नमन करते है🎶💐🙏🎂🌹

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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...