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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024

सोरेश सामी खताबी

#20feb 
सरोश सामी खतीब, 

🎂जन्म 20 फरवरी 1964 मुंबई,

जिन्हें उनके मंच नाम सरोश सामी या सरोश खतीब से बेहतर जाना जाता है, एक भारतीय संगीतकार हैं, जिन्हें यूनिवर्सल म्यूजिक द्वारा जारी उनके 2005 एल्बम हे या के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 20 फरवरी 1964 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। सरोश ने संगीत महाभारती संस्थान में तबला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। दिवंगत पंडित निखिल घोष इस संस्थान की शुरुआत की. गायन में आने से पहले उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत एक तबला वादक के रूप में की थी। राउडी राठौड़ का म्यूजिक एल्बम (2012) ने उन्हें प्रसिद्ध बना दिया। उन्होंने मधुर एल्बम तिश्नगी पर आठ गाने लिखे, जिनमें तिश्नगी, रूबरू, तुम हो तपिश-तपिश, सुन ले, जाना क्या, आसमानी और फॉरएवर ग्रीन शामिल हैं। फॉरएवर ग्रीन गान एक जागरूकता अभियान के रूप में शुरू हुआ जिसका शीर्षक था डू वी ट्रूली थिंक ग्रीन अभियान जिसने फॉरएवर ग्रीन गीत के निर्माण को प्रेरित किया।

तत्कालीन इंडियन आइडल फाइनलिस्ट श्रीराम चंद्र, भूमि त्रिवेदी , राकेश मैनी , और स्वरूप खान सरोश सामी के साथ मेयरल बंगले में राष्ट्रगान का लाइव प्रदर्शन किया। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने भी विश्व पर्यावरण दिवस पर इस प्रयास की सराहना की। संगीतकार ललित पंडित ने राष्ट्रगान की धुन प्रदान की

सरोश सामी खतीब जिन्हें सरोश सामी या सरोश खतीब के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय गायक हैं जो यूनिवर्सल म्यूजिक द्वारा जारी अपने संगीत एल्बम 'हे या' (2005) के लिए जाने जाते हैं। सरोश संगीत महाभारती संस्थान से प्रशिक्षित तबला वादक हैं।संस्थान की स्थापना स्वर्गीय पंडित निखिल घोष ने की थी।  उन्होंने अपने करियर की शुरुआत तबला वादक के रूप में की और फिर गाना शुरू किया।

कैफ भोपाली

#24july
#20feb 

कैफ भोपाली
🎂20 फरवरी 1917
 भोपाल रियासत ब्रिटिश भारत
(अब) भोपाल मध्य प्रदेश  भारत
मौत
⚰️24 जुलाई 1991
भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत
पेशा
शायर,गीतकार, कवि

भारतीय
विधा
गज़ल, उर्दू शायरी
विषय
प्यार, दर्शन
कैफ़ भोपाली ने कई हिंदी फिल्मों में गीत लिखे, किन्तु 1972 में बनी पाक़ीज़ा उनकी यादगार फिल्म रही। इस फिल्म के लगभग सभी गाने लोकप्रिय हुए, जैसे "तीरे नज़र..", "चलो दिलदार चलो, चाँद के पार चलो...." आदि।

सत्तर-अस्सी के दशक में वे लगातार मुशायरों की जान बने रहे। उन्होंने कई प्रसिद्ध गज़लें कही है, जैसे "तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है", झूम के जब रिन्दों ने पिला दी आदि जिसे आवाज़ दी है जगजीत सिंह ने।कमाल अमरोही की एक और फिल्म रज़िया सुल्तान में उनके द्वारा लिखा एक गाना "ऐ खुदा शुक्र तेरा...." काफी लोकप्रिय हुआ। उनकी पुत्री "परवीन कैफ़" भी उर्दू की मशहूर शायरा हैं।
शायर कै़फ़ भोपाली का जन्म 1917 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था लेकिन उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे।
कैफ़ भोपाली ने कई हिंदी फिल्मों में गीत लिखे, किन्तु 1972 में बनी पाक़ीज़ा उनकी यादगार फिल्म रही। इस फिल्म के लगभग सभी गाने लोकप्रिय हुए, जैसे "तीरे नज़र..", "चलो दिलदार चलो, चाँद के पार चलो...." आदि। सत्तर-अस्सी के दशक में वे लगातार मुशायरों की जान बने रहे। उन्होंने कई प्रसिद्ध गज़लें कही है, जैसे "तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है", झूम के जब रिन्दों ने पिला दी आदि जिसे आवाज़ दी है जगजीत सिंह ने।कमाल अमरोही की एक और फिल्म रज़िया सुल्तान में उनके द्वारा लिखा एक गाना "ऐ खुदा शुक्र तेरा...." काफी लोकप्रिय हुआ। उनकी पुत्री "परवीन कैफ़" भी उर्दू की मशहूर शायरा हैं।
सीधा-सरल जीवन जीने वाले क़ैफ़ साहब घुमक्कड़ी स्वभाव के थे और शायरी-शराब उनके दिनचर्या में शामिल रहा। कै़फ़ भोपाली मुशायरों की रूह कहे जाते थे। 
कै़फ़ भोपाली साहब की मूल विधा ग़ज़ल और उर्दू शायरी थी लेकिन वो फिल्मों में भी सक्रिय रहे और 'पाकीजा' के लिखे गीत उनकी यादगार रचनाओं में शामिल है। कहते हैं कै़फ साहब की कमाल अमरोही से मुलाकात एक मुशायरे के दौरान ही हुई थी और उसी दरम्यान कमाल अमरोही ने उन्हें गीत लिखने का मशविरा दे डाला। 

कमाल साहब की सलाहियत पर अमल करते हुए क़ैफ़ भोपाली शायर से गीतकार बन गए। कैफ़ साहब को मुशायरों की रौनक़ कहा जाता था, वह आम चलन से हटकर शेर कहते थे। अपने अंदाजे बयां का लिए जाने जाते थे। विशिष्ट तरन्नुम में शेर सुनाना उनकी पहचान का हिस्सा था। 
रिंदगी और रोमांटिसिज्म की झलक उनकी शायरियों में बख़ूबी दिखती है। 'झूम के जब रिंदों ने पिला दी...' उनकी एक और लोकप्रिय ग़ज़ल है, जिसे गाया था सर्वकालिक मशहूर ग़ज़ल गायक 'पद्मभूषण' जगजीत सिंह ने। 
मुशायरों की रूह कहे जाने वाले कै़फ़ भोपाली ने 1991 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन उनके लिखे गीत-ग़ज़ल हमेशा सुने जाते रहेंगे और इस तरह वो हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेंगे।

जिया खान

#03jun 
#20feb
जिया खान
नफीसा खान
🎂20 फ़रवरी 1988
न्यूयॉर्क नगर, अमेरिका

⚰️03 जून 2013 
जुहू, मुम्बई
उपनाम
24 मई 2013 को उन्होंने अपना अन्तिम ट्विट लिखा था जिसमें उन्होंने अलविदा कह दिया था। जिया ने ट्विटर अकाउंट असली नाम नफीसा खान के नाम से ही बनाया था। उन्होंने 24 मई को आखिरी ट्वीट किया, 'सॉरी मैं ट्विटर से जा रही हूं। थोड़ा ब्रेक ले रही हूं... कभी-कभी आपको अपनी यादें ताजा करने के लिए आराम की जरूरत पड़ती है।' 03 जून 2013 को देर रात उनका फांसी लगा हुआ शव उनके जुहू स्थित घर से बरामद हुआ है। यहाँ वे अपनी माँ के रहती थी।

नफीसा खान
नागरिकता ब्रिटिश
पेशा
अभिनेत्री
कार्यकाल
2007–2013
माता-पिता
अली रिज़वी खान
राबिया अमिन
खान का जन्म 20 फ़रवरी 1988 को न्यूयॉर्क नगर में एक में एक मुस्लिम परिवार में हुआ उनके पिता अली रिज़वी खान एक भारतीय अमरीकी है व माँ रबिया अमीन एक हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्री है जों आगरा, उत्तर प्रदेश से है और ताहिर हुसैन की दूल्हा बिकता है के लिए जाने जाती है।जिया ख़ान की दो छोटी बहने भी हैं।मुम्बई आने से पहले उनका लालन-पोषण लन्दन में हुआ। वे बॉलीवुड में अपना भाग्य आजमाने मुम्बई आईं।वो छः वर्ष की आयु में रामगोपाल वर्मा की पूर्व शिष्य उर्मिला मातोंडकर की फ़िल्म रंगीला से बहुत प्रभावित हुई और बॉलीवुड आने के लिए प्रेरित हुई।

ख़ान प्रशिक्षित ऑपेरा गायक थी और केवल सोलह वर्ष की उम्र में उन्होंने छः पॉप गानों का अभिलेखन कर चुकी थी। वो अपने दोस्तों के साथ एक पुरा संग्राहिक (एलबम) प्रकाशित करना चाहती थी - और ब्रिटनी स्पियर्स, मैडोना और लाउंज संगीत के साथ मिश्रित संगीत देना चाहती थी। ख़ान ने कई वर्षों तक नृत्य का अध्ययन भी किया औरवे साल्सा, जैज़, कत्थक, बैले, रेगी और बेली डांस जैसी नृत्य शैलियां जानती थीं।उनकी शिक्षा मैनहटन में ली स्ट्रेसबर्ग थिएटर एन्ड फ़िल्म इंस्टीट्यूट में हुई, यद्दपि उन्होंने फ़िल्मों के प्रस्ताव प्राप्त होने पर भी छोड़ दिये।

उनके विवाहित होने के बारे में पूर्ण जानकारी उपलब्द्ध नहीं है लेकिन माना जाता है कि उन्होंने किसी विदेशी से शादी भी की थी।कुछ अन्य समाचारों के अनुसार अभिनेता आदित्य पंचोली के पुत्र सूरज पंचोली के साथ उसका सम्बन्ध था।

उन्होंने लंदन में अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई की जिसके बाद उन्होंने शेक्सपियर और अभिनय के बारे में पढ़ाई की। उनकी ज़िंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब क्लिक करें बॉलीवुड निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म ‘निशब्द’ में क्लिक करें अमिताभ बच्चन के साथ लीड रोल दिया।
जिया की प्रथम फ़िल्म एक बाल कलाकार के रूप में दिल से नामक फिल्म थी। जिसमें उन्होंने मनीषा कोईराला के बच्चपन का अभिनय किया है। सोलाह साल की उम्र में उन्होंने मुकेश भट्ट की फ़िल्म तुमसा नहीं देखा से शुरुआत करने की कोशिश की परन्तु किरदार उनके लिए काफी बड़ा होने के कारण पीछे हट गई और उनकी जगह दिया मिर्ज़ा को ले लिया गया। दो साल बाद  2006में उन्होंने विवादास्पद फ़िल्म नि:शब्द में अमिताभ बच्चन के साथ भूमिका अदा की।फ़िल्म को मार्च 2007 में रिलीज़ किया गया। इस फ़िल्म में उन्होंने एक गाना भी गाया था।

उन्होंने आमिर खान के साथ ए. आर. मुरुगादोस की फ़िल्म गजीनी, जों इसी नाम की तमिल फ़िल्म का रीमेक थी, में भूमिका अदा की। उन्हें केन घोष की फ़िल्म चांस पे डांस में एक बड़ा किरदार शाहिद कपूर के साथ दिया गया परन्तु उनकी जगह जेनेलिया डिसूज़ा ने ले ली। खान ने बाद में साजिद खान की फ़िल्म हाउसफुल में देविका का किरदार अदा किया।
अभिनेत्री जिया ख़ान 03 जून 2013 को (भारतीय समयानुसार रात 10:45 बजे) अज्ञात कारणों से जुहू स्थित सागर तंरग अपार्टमेंट में अपने निवास पर फांसी के फंदे पर झूलती हुई पाई गईं। उन्हें तत्काल ही एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ सूत्रों के अनुसार वह डिप्रेशन से ग्रस्त थीं। एकाकीपन उन्हें सालता था। वह पिछले कुछ महीनों से डिप्रेशन में थीं।

ख़ान के साथ कथित तौर पर रिश्ते में और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में सूरज पंचोली को 10 जून 2013 को हिरासत में ले लिया।
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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
04जून 2013 को जिया को सांता क्रुज स्थित कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। राजस्थान में गंगानगर के जवाहरनगर थाना क्षेत्र के गुरूनानक बस्ती में रेहडी लगाने वाले होडल सिंह का 12 वर्षीय पुत्र बाबू सुबह टेलीविजन पर जिया खान की मौत की खबर सुन रहा था और साथ ही वह डीवीडी प्लेयर पर जिया खान अभिनीत फिल्म को बार बार देख रहा था। दोपहर दो बजे से पहले बाबू एकांत पाकर गले में रस्सी का फंदा डालकर झूल गया।
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📽️
1998 दिल से
2007 निशब्द
2008 गजनी 
2010 हाउसफुल

पत्रलेखा

#20feb
पत्रलेखा पाल
उपनाम अन्विता पॉल
जन्म 20 फ़रवरी 1990
शिलांग, मेघालय, भारत

भारतीय
उपनाम अन्विता पॉल
पेशा अभिनेत्री
साथी
राजकुमार राव

पत्रलेखा के पिता उन्हें सीए बनाना चाहते थे लेकिन उनके खिलाफ जाकर उसने ने अभिनय की राह चुनी. 
एक सेट पर उनकी मुलाकात राजकुमार राव से हुई. आज राजकुमार राव और पत्रलेखा पति-पत्नी हैं. पत्रलेखा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं.
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान एक ऑडिशन हुआ और उन्हें एड एजेंसी में काम करने का मौका मिला. उस दौरान पत्रलेखा ने ब्लैकबेरी, टाटा डोकोमो और दूसरे विज्ञापनों में काम किया.

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...