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गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

उदय शंकर

उदय शंकर 
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#26sep 
🎂 जन्म- 8 दिसम्बर, 1900 ई., राजस्थान; 
⚰️मृत्यु- 26 सितम्बर, 1977 ई., कोलकाता) 
भारत के प्रसिद्ध नर्तक, नृत्य निर्देशक और बैले निर्माता थे। उन्हें भारत में 'आधुनिक नृत्य के जन्मदाता' के रूप में भी जाना जाता है। उदय शंकर ने यूरोप और अमेरिका का भारतीय नृत्य और संस्कृति से परिचय करवाया और भारतीय नृत्य को दुनिया के मानचित्र पर प्रभावशाली ढंग से स्थापित किया। उन्होंने ताण्डव नृत्य, शिव-पार्वती, लंका दहन, रिदम ऑफ़ लाइफ़, श्रम और यंत्र, रामलीला और भगवान बुद्ध नाम से नवीन नृत्यों की रचना की थी। इनमें वेशभूषा, संगीत, संगीत-यंत्र, ताल और लय आदि चीजें उन्हीं के द्वारा आविष्कृत थीं। वर्ष 1971 में भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मविभूषण' और 1975 में विश्वभारती ने 'देशीकोत्तम सम्मान' प्रदान किये थे।

जन्म तथा परिवार
सुप्रसिद्ध नर्तक उदय शंकर का जन्म 8 दिसम्बर, 1900 ई. को राजस्थान के उदयपुर में हुआ था। वैसे मूलत: वे नरैल (आधुनिक बांगला देश) के एक बंगाली परिवार से ताल्लुक रखते थे। इनके पिता का नाम श्याम शंकर चौधरी और माँ हेमांगिनी देवी थीं। उदय शंकर के पिता अपने समय के प्रसिद्ध वकील थे, जो राजस्थान में ही झालावाड़ के महाराज के यहाँ कार्यरत थे। माँ हेमांगिनी देवी एक बंगाली ज़मींदार परिवार से सम्बन्धित थीं। उदय के पिता को नवाबों द्वारा 'हरचौधरी' की उपाधि दी गई थी, किंतु उन्होंने 'हरचौधरी' में से 'हर' को हटा दिया और अपने नाम के साथ सिर्फ़ 'चौधरी' का प्रयोग करना ही पसन्द किया। उदय शंकर अपने भाइयों में सबसे बड़े थे। इनके अन्य भाइयों के नाम थे- राजेन्द्र शंकर, देवेन्द्र शंकर, भूपेन्द्र शंकर और रवि शंकर। इनके भाई भूपेन्द्र की मौत वर्ष 1926 में ही हो गई थी।

शिक्षा
उदय शंकर के पिता संस्कृत के माने हुए विद्वान् थे। उन्होंने 'कलकत्ता विश्वविद्यालय' से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। बाद में वे 'ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय' में अध्ययन करने गये और वहाँ वे 'डॉक्टर ऑफ़ फ़िलोसफ़ी' बने। पिता को अपने काम के सिलसिले में बहुत अधिक घूमना पड़ता था, इसलिए परिवार ने अधिकांश समय उदय शंकर के मामा के घर नसरतपुर में उनकी माँ और भाइयों के साथ व्यतीत किया। उदय शंकर की शिक्षा भी विभिन्न स्थानों पर हुई थी, जिनमें नसरतपुर, गाज़ीपुर, वाराणसी और झालावाड़ शामिल हैं। अपने गाज़ीपुर के स्कूल में उदय शंकर ने अपने चित्रकला एवं शिल्पकला के शिक्षक अंबिका चरण मुखोपाध्याय से संगीत और फ़ोटोग्राफ़ी की भी बखूवी शिक्षा हासिल की थी।

विवाह

उदय शंकर, पत्नी अमला शंकर के साथ
उदय शंकर का विवाह अमला शंकर से हुआ और वर्ष 1942 में उनके यहाँ पुत्र आनंद शंकर और वर्ष 1955 में पुत्री ममता शंकर का जन्म हुआ। आनंद शंकर एक संगीतकार और संगीत कम्पोजर थे, जिन्होंने अपने चाचा रवि शंकर की बजाय डॉ. लालमणि मिश्रा से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वे उस समय अपने फ्यूजन संगीत के लिए जाने गए थे, जिसमें पश्चिमी और भारतीय संगीत शैली दोनों को शामिल किया गया था। ममता शंकर अपने माता-पिता की तरह ही नर्तकी थी, जो एक प्रख्यात अभिनेत्री बनीं, जिन्होंने भारत के ख्यातिप्राप्त फ़िल्म निर्माता-निर्देशक सत्यजीत रे और मृणाल सेन की फ़िल्मों में काम किया। ममता शंकर कोलकाता में 'उदयन डांस कंपनी' भी चलाती हैं।

नृत्य का प्रदर्शन
वर्ष 1918 ई. में मात्र अठारह वर्ष की आयु में उदय शंकर को 'जे. जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट' और उसके बाद 'गंधर्व महाविद्यालय' में प्रशिक्षण के लिए मुंबई भेज दिया गया। तब तक उनके पिता श्याम शंकर ने भी झालावाड़ में अपने पद से इस्तीफा दे दिया और लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने एक श्वेत महिला से विवाह कर लिया और एक शौकिया संयोजक बनने से पहले क़नून की प्रैक्टिस करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन में भारतीय संगीत और नृत्य की शुरुआत की। बाद में उदय शंकर अपने पिता के साथ शामिल हो गए और 23 अगस्त, 1920 को सर विलियम रोथेंस्टीन के अधीन चित्रकारी का अध्ययन करने के लिए लंदन के 'रॉयल कॉलेज ऑफ़ आर्ट' प्रवेश लिया। यहीं पर उन्होंने अपने पिता द्वारा लंदन में आयोजित करवाए गए कुछ चैरिटी कार्यक्रमों में नृत्य का प्रदर्शन किया। ऐसे ही एक अवसर पर प्रख्यात रूसी बैले नर्तकी अन्ना पावलोवा भी मौजूद थीं।

नई नृत्य शैली की रचना
उदय शंकर ने 'भारतीय शास्त्रीय नृत्य' के किसी भी स्वरूप में कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था। उनकी प्रस्तुतियाँ रचनात्मक थीं। यद्यपि कम उम्र से ही वे भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्य शैलियों के संपर्क में आते रहे थे। यूरोप निवास के दौरान वे बैले नृत्य से इतना अधिक प्रभावित हुए थे कि उन्होंने दोनों शैलियों के तत्वों को मिलाकर नृत्य की एक नयी शैली की रचना करने का फैसला कर लिया, जिसे 'हाई-डांस' कहा गया। उदय शंकर ने ताण्डव नृत्य, शिव-पार्वती, लंकादहन, रिदम ऑफ़ लाइफ़, श्रम और यंत्र, रामलीला और भगवान बुद्ध नाम से नवीन नृत्यों की रचना की। इनमें वेशभूषा, संगीत, संगीत-यंत्र, ताल और लय आदि चीजें उन्हीं के द्वारा आविष्कृत थीं। रामायण पर उन्होंने नृत्य नाटिका की भी रचना की। उन्होंने यूरोप, अमेरिका आदि देशों में अपने नर्तक दल के साथ वर्षों घूमकर भारतीय नृत्यों का प्रदर्शन किया।

योगदान
अमला शंकर के साथ नृत्य प्रस्तुती देते उदय शंकर
उदय शंकर ने 'भारतीय शास्त्रीय नृत्य' के स्वरूपों और उनके प्रतीकों को नृत्य रूप प्रदान किया। इसके लिए उन्होंने ब्रिटिश संग्रहालय में राजपूत चित्रकला और मुग़ल चित्रकला की शैलियों का गम्भीर अध्ययन किया। इसके अतिरिक्त ब्रिटेन में अपने प्रवास के दौरान वे नृत्य प्रदर्शन करने वाले कई कलाकारों के संपर्क में आये। बाद में वे फ़्राँसीसी सरकार के वजीफे 'प्रिक्स डी रोम' पर कला में उच्च-स्तरीय अध्ययन के लिए वे रोम चले गए। शीघ्र ही इस तरह के कलाकारों के साथ उदय शंकर का संपर्क बढ़ता चला गया। साथ ही भारतीय नृत्य करने को एक समकालीन रूप देने का उनका विचार भी मजबूत हुआ।

रूसी नर्तकी से मुलाकात
उनकी कामयाबी के रास्ते में क्रांतिकारी परिवर्तन प्रख्यात रूसी बैले नर्तकी अन्ना पावलोवा से एक मुलाक़ात के रूप में आया। अन्ना भारत आधारित विषयों पर सहयोग के लिए कलाकारों की खोज कर रही थीं। इसी कारण हिन्दू विषयों पर आधारित बैले की रचना हुई, जिसमें अन्ना के साथ एक युगल राधा-कृष्ण' और 'हिन्दू विवाह' को अन्ना के प्रोडक्शन 'ओरिएंटल इम्प्रेशंस' में शामिल किया गया। इस बैले का प्रदर्शन लंदन के कोवेंट गार्डन में स्थित रॉयल ओपेरा हाउस में किया गया था। वे स्वयं कृष्ण बने और पावलोवा ने राधा की भूमिका का रोल किया। बाद में भी वे बैले की रचना और कोरियोग्राफ़ी में जुटे रहे, जिनमें से एक अजन्ता की गुफाओं के भित्तिचित्रों पर आधारित थी।

पुरस्कार व सम्मान
उदय शंकर ने 'भारतीय शास्त्रीय नृत्य' और यहाँ की संस्कृति को विश्व के हर कोने में पहुँचाने में विशेष योगदान किया। ये उनकी अथक लगन और कार्य के प्रति समर्पण की भावना ही थी कि भारत की संस्कृति से समूचा विश्व परिचित हो सका। उदय शंकर को उनके अतुलनीय योगदान के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया था-

शर्मिला टैगोर

शर्मिला टैगोर
🎂जन्म : 8 दिसंबर 1944  कानपुर
पति: मंसूर अली ख़ान पटौदी (विवा. 1968–2011)
बच्चे: सबा अली खान, सैफ़ अली ख़ान, सोहा अली ख़ान
माता-पिता: गितिन्द्रनाथ टैगोर, इरा बरुहा
बहन: रोमिला टैगोर, टिंकु टैगोर
हिन्दी एवं बांगला सिनेमा की अभिनेत्रियों में से एक हैं।

शर्मिला टैगोर
के पिता गितिन्द्रनाथ टैगोर ब्रिटिश भारत निगम में महाप्रबन्धक थे और उनकी माँ ईरा टैगोर (जन्म बरुवा) थीं। टैगोर के पिता कुलीन बंगाली हिन्दू ठाकुर परिवार से थे और नोबेल विजेता रबीन्द्रनाथ ठाकुर के दूर के सम्बंधी थे जबकि उनकी माँ आसामी हिन्दू परिवार से थीं और बरुवा परिवार से सम्बंधित थी।
शर्मिला टैगौर ने नाम बदलकर आयशा सुल्ताना कर लिया था। लेकिन अधिकतर लोग उन्हें अब भी उन्हें उनके असली नाम से ही पुकारते हैं।
टैगोर ने इस्लाम धर्म अपना लिया, अपना नाम बदलकर बेगम आयशा सुल्ताना रख लिया,और 27 दिसंबर 1968 को पटौदी और भोपाल के नवाब और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी से शादी कर ली । उनके तीन बच्चे थे: बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान (जन्म 1970); सबा अली खान (बी. 1976), एक आभूषण डिजाइनर; और सोहा अली खान (जन्म 1978), एक बॉलीवुड अभिनेत्री और टीवी हस्ती। मंसूर अली खान पटौदी का 22 सितंबर 2011 को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

1991 से 2004 तक सैफ ने अभिनेत्री अमृता सिंह से शादी की थी । उनके दो बच्चे हैं, बेटी सारा अली खान (जन्म 1995), एक अभिनेत्री, और बेटा इब्राहिम अली खान (जन्म 2001)। उनकी दूसरी शादी 2012 में अभिनेत्री करीना कपूर से हुई , जिनसे उनके दो बेटे हैं, तैमूर अली खान (जन्म 2016) और जहांगीर अली खान (जन्म 2021)।  सोहा ने 2015 में अभिनेता कुणाल खेमू से शादी की, और उनकी एक बेटी इनाया नौमी खेमू (जन्म 2017) है। 

स्वागत और विरासत

टैगोर को भारतीय सिनेमा की महानतम अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है । टैगोर को एक अभिनेता के रूप में उनकी विविधता, उनकी सुंदरता और उनकी फैशन समझ और शैली के लिए अत्यधिक सम्मान दिया जाता है। 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में सबसे अधिक भुगतान पाने वाली अभिनेत्रियों में से एक, वह 1969 और 1973 में बॉक्स ऑफिस इंडिया की "शीर्ष अभिनेत्रियों" में दिखाई दीं ।  फ़र्स्टपोस्ट के सुभाष के. झा ने उन्हें 'शीर्ष अभिनेत्रियों' की संज्ञा दी। "निर्देशन की व्यापक छलाँग" वाली एकमात्र अभिनेत्री और कहा, "शर्मिला के अलावा किसी अन्य बॉलीवुड अभिनेत्री ने शादी के बाद इतनी शानदार पारी नहीं खेली है।" अमेरिकी आलोचक पॉलीन केल ने कहा, "वह उत्कृष्ट, परिपूर्ण हैं - एक ऐसा शब्द जिसका मैं यूं ही उपयोग नहीं करती।"  फेमिना की हेमाछाया डे ने कहा, "शर्मिला टैगोर ने विविध फिल्म शैलियों: आर्टहाउस, क्रॉसओवर और मुख्यधारा को सफलतापूर्वक फैलाया।" 

टैगोर को व्यापक रूप से "60 और 70 के दशक के स्टाइल आइकन" के रूप में जाना जाता था और उन्हें एक सेक्स प्रतीक के रूप में जाना जाता था ।बीहाइव हेयरडू और विंग्ड आईलाइनर टैगोर के कुछ स्टाइल स्टेटमेंट थे जो आज भी फैशन की दुनिया में प्रासंगिक हैं और उन्हें "नाटकीय आंखों के मेकअप की रानी" की उपाधि मिली।  प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण सहित कई अभिनेत्रियां उनकी शैली से प्रेरित हैं। उनकी बहू अभिनेत्री करीना कपूर ने कहा, "मुझे अपनी सास शर्मिलाजी का ड्रेसिंग सेंस ऑन और ऑफ-स्क्रीन दोनों जगह पसंद है।"  टैगोर को उनकी फिल्मों अपुर संसार और कश्मीर की कली के लिए Rediff.com की "सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड डेब्यू" सूची में दूसरा स्थान दिया गया था । टैगोर को देवी , नायक , आराधना , सफर , अमर प्रेम , दाग और मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाने के लिए जाना जाता था ।  फिल्मफेयर ने मौसम में उनके प्रदर्शन को बॉलीवुड के "80 प्रतिष्ठित प्रदर्शनों" की सूची में शामिल किया। उन्हें टाइम्स ऑफ इंडिया की "50 खूबसूरत चेहरों" की सूची में भी रखा गया था। 

2022 में, उन्हें आउटलुक इंडिया की 75 सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड अभिनेत्रियों की सूची में रखा गया । टैगोर को एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में जाना जाता था जो हमेशा अपने समय से आगे रहती थीं। वह अपनी फिल्म एन इवनिंग इन पेरिस (1967) के लिए ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनीं। टैगोर को अब तक की सबसे हॉट बॉलीवुड अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है।  वह अपने विभिन्न प्रकार के किरदारों के लिए जानी जाती थीं - सबसे पारंपरिक भूमिकाओं से लेकर सबसे बिंदास भूमिकाओं तक। द संडे गार्जियन के सुरेंद्र कुमार ने कहा, "उन्होंने अपने दो अवतारों को खूबसूरती से संतुलित किया - यथार्थवादी बंगाली फिल्मों का गंभीर व्यक्तित्व, और बॉक्स ऑफिस पर सफलता पर केंद्रित गीत-और-नृत्य दृश्यों वाली फिल्मों का बॉलीवुड व्यक्तित्व।" फिल्म इतिहासकार संजय मुखोपाध्याय ने कहा, "भारतीय सिनेमा में टैगोर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान गरिमा और अनुग्रह की भावना है - वहीदा रहमान के बाद, वह अपने समय की एकमात्र अभिनेत्री थीं जिन्होंने इसे प्रदर्शित किया।" आदित्य चोपड़ा की 2008 की फिल्म रब ने बना दी जोड़ी के गाने " फिर मिलेंगे चलते-चलते " में , अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने टैगोर को श्रद्धांजलि देने के लिए अपने बालों को अपने प्रसिद्ध मधुमक्खी के छत्ते से सजाया था।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...