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गुरुवार, 18 जनवरी 2024

अदिति भागवत

#18jan
अदिति भागवत
 🎂जन्म 18 जनवरी 1981 

एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कथक और लावणी विशेषज्ञ, अभिनेत्री, नृत्य प्रशिक्षक और कोरियोग्राफर हैं । वह एकल प्रदर्शन के साथ-साथ कई अन्य भारतीय संगीत कलाकारों के साथ मिलकर स्टेज शो में भाग लेने के लिए दुनिया भर में यात्रा करती हैं।
अदिति की संगीत यात्रा जीवन में बहुत पहले ही शुरू हो गई थी, वह अपनी मां रागिनी भागवत, जो एक शास्त्रीय गायिका थीं, से बहुत प्रेरित थीं। जयपुर शैली में उनका प्रारंभिक कथक प्रशिक्षण , रोशन कुमारी और नंदिता पुरी के मार्गदर्शन में था ।झेलम परांजपे के मार्गदर्शन में " ओडिसी " में उनके प्रशिक्षण ने उन्हें अभिनय (अभिव्यक्ति) और अड्डा - सुंदर मुद्रा में निखारने में मदद की है, जिसके लिए अदिति अच्छी तरह से पहचानी जाती हैं। उन्होंने गंधर्व महाविद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ डांस) से नृत्य में मास्टर डिग्री ली है ।

भारतीय शास्त्रीय संगीत और कला की संरचना के भीतर रहते हुए , अदिति ने पारंपरिक नृत्य कला और संगीत को जैज़ और अन्य प्रकार के पश्चिमी संगीत के साथ मिश्रित करने में बड़े पैमाने पर प्रयोग किए हैं और सफल रही हैं। वह फ्रांस में कार्तिक और गोतम: बिजनेस क्लास रिफ्यूजी बैंड के साथ कथक और इलेक्ट्रॉनिक संगीत सहयोग में शामिल थीं। वह न्यूयॉर्क पियानोवादक रॉड विलियम्स के साथ इश्यू प्रोजेक्ट में भी शामिल थीं ।उन्होंने कथक की शैलीगत भंगिमाओं और तत्कार, चक्रधरों और विभिन्न तालों की परिष्कृत लय को अलग-अलग समय चक्रों के साथ डीजेम्बे, ड्रम , घम्बरी, कुआत्रो , सरोद , सितार और कई अन्य वाद्ययंत्रों के साथ खूबसूरती से मिश्रित किया है। भागवत ने कहा है कि बदलाव और प्रयोग एक व्यक्ति को एक कलाकार के रूप में विकसित होने में मदद करते हैं। द हिंदू के अनुसार उनकी कथक नृत्य शैली "मुहावरे में महारत" दर्शाती है ।

अदिति को 2012 में सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम 'वन बीट' के तहत प्रतिष्ठित यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेट फ़ेलोशिप से सम्मानित किया गया था ।

उन्होंने नृत्य के विभिन्न पहलुओं पर एमआई मराठी लाइव ई-पेपर में एक कॉलम पेश किया है। श्रृंखला का पहला लेख 13 सितंबर 2015 को प्रदर्शित हुआ, और यह साप्ताहिक फीचर के रूप में जारी रहेगा। 
📽️
ट्रैफिक सिग्नल(हिन्दी मूवी, 2007, विशेष प्रस्तुति)
चालू नवरा भोली बाइको (मराठी फिल्म, 2008)
अदला बादली (मराठी फिल्म, 2008)
माया सज्जना (मराठी फिल्म, 2008)
तहान (मराठी फिल्म, 2008)
सुंबरन(मराठी मूवी, 2009)
म्योहो (हिन्दी मूवी, 2012, विशेष प्रस्तुति)
शासन(मराठी मूवी, 2016)
अरसा (इंटरनेशनल शॉर्ट, 2016)

बुधवार, 17 जनवरी 2024

के . एल. सहगल

#11april
#18jan 
कुन्दन लाल सहगल
प्रसिद्ध नाम के.एल. सहगल

🎂जन्म 11 अप्रॅल, 1904
जन्म भूमि जम्मू, जम्मू और कश्मीर
⚰️मृत्यु 18 जनवरी, 1947
मृत्यु स्थान जालंधर, पंजाब

अभिभावक अमरचंद सहगल, केसरीबाई कौर
पति/पत्नी आशा रानी
संतान मदन मोहन (पुत्र), नीना और बीना (पुत्री)
कर्म भूमि मुम्बई, महाराष्ट्र
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, गायक
मुख्य फ़िल्में देवदास, पुराण भगत (1933), सूरदास (1942), तानसेन (1943) आदि।
प्रसिद्धि गायक व अभिनेता
नागरिकता भारतीय
लोकप्रियता सहगल की आवाज़ की लोकप्रियता का यह आलम था कि कभी भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय रहा रेडियो सीलोन कई साल तक हर सुबह सात बज कर 57 मिनट पर इस गायक का गीत बजाता था।
अन्य जानकारी भारत रत्न सम्मानित लता मंगेशकर सहगल की बड़ी भक्त हैं। वह चाहती थीं कि सहगल की कोई निशानी उनके पास हो। सहगल की बेटी ने रतन जड़ी अंगूठी लता को दी। लता जी ने मरने तक उसे संभाल कर रखा था।

कुंदन लाल सहगल अपने चहेतों के बीच के. एल. सहगल के नाम से मशहूर थे। उनका जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवाशहर में हुआ था। उनके पिता अमरचंद सहगल जम्मू शहर में न्यायालय के तहसीलदार थे। बचपन से ही सहगल का रुझान गीत-संगीत की ओर था। उनकी माँ केसरीबाई कौर धार्मिक क्रिया-कलापों के साथ-साथ संगीत में भी काफ़ी रुचि रखती थीं।

शिक्षा
सहगल ने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नहीं ली थी, लेकिन सबसे पहले उन्होंने संगीत के गुर एक सूफ़ी संत सलमान युसूफ से सीखे थे। सहगल की प्रारंभिक शिक्षा बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी। उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ी थी और जीवन यापन के लिए उन्होंने रेलवे में टाईमकीपर की मामूली नौकरी भी की थी। बाद में उन्होंने रेमिंगटन नामक टाइपराइटिंग मशीन की कंपनी में सेल्समैन की नौकरी भी की।कहते हैं कि वे एक बार उस्ताद फैयाज ख़ाँ के पास तालीम हासिल करने की गरज से गए, तो उस्ताद ने उनसे कुछ गाने के लिए कहा। उन्होंने राग दरबारी में खयाल गाया, जिसे सुनकर उस्ताद ने गद्‌गद्‌ भाव से कहा कि बेटे मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं है कि जिसे सीखकर तुम और बड़े गायक बन सको।

पहली फ़िल्म
वर्ष 1930 में कोलकाता के न्यू थियेटर के बी. एन. सरकार ने उन्हें 200 रूपए मासिक पर अपने यहां काम करने का मौक़ा दिया। यहां उनकी मुलाकात संगीतकार आर.सी.बोराल से हुई, जो सहगल की प्रतिभा से काफ़ी प्रभावित हुए। शुरुआती दौर में बतौर अभिनेता वर्ष 1932 में प्रदर्शित एक उर्दू फ़िल्म ‘मोहब्बत के आंसू’ में उन्हें काम करने का मौक़ा मिला। वर्ष 1932 में ही बतौर कलाकार उनकी दो और फ़िल्में ‘सुबह का सितारा’ और ‘जिंदा लाश’ भी प्रदर्शित हुई, लेकिन इन फ़िल्मों से उन्हें कोई ख़ास पहचान नहीं मिली।

बतौर गायक
वर्ष 1933 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘पुराण भगत’ की कामयाबी के बाद बतौर गायक सहगल कुछ हद तक फ़िल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। वर्ष 1933 में ही प्रदर्शित फ़िल्म ‘यहूदी की लड़की’, ‘चंडीदास’ और ‘रूपलेखा’ जैसी फ़िल्मों की कामयाबी से उन्होंने दर्शकों का ध्यान अपनी गायकी और अदाकारी की ओर आकर्षित किया।

देवदास की कामयाबी

चट्टोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित पी.सी.बरूआ निर्देशित फ़िल्म ‘देवदास’ की कामयाबी के बाद बतौर गायक-अभिनेता सहगल शोहरत की बुलंदियों पर जा पहुंचे। कई बंगाली फ़िल्मों के साथ-साथ न्यू थियेटर के लिए उन्होंने 1937 में ‘प्रेंसिडेंट’, 1938 में ‘साथी’ और ‘स्ट्रीट सिंगर’ तथा वर्ष 1940 में ‘ज़िंदगी’ जैसी कामयाब फ़िल्मों को अपनी गायिकी और अदाकारी से सजाया। वर्ष 1941 में सहगल मुंबई के रणजीत स्टूडियो से जुड़ गए। वर्ष 1942 में प्रदर्शित उनकी ‘सूरदास’ और 1943 में ‘तानसेन’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का नया इतिहास रचा। वर्ष 1944 में उन्होंने न्यू थियेटर की ही निर्मित फ़िल्म ‘मेरी बहन’ में भी काम किया।

मृत्यु
अपने दो दशक के सिने करियर में सहगल ने 36 फ़िल्मों में अभिनय भी किया। हिंदी फ़िल्मों के अलावा उन्होंने उर्दू, बंगाली और तमिल फ़िल्मों में भी अभिनय किया। सहगल ने अपने संपूर्ण सिने करियर के दौरान लगभग 185 गीत गाए, जिनमें 142 फ़िल्मी और 43 गैर-फ़िल्मी गीत शामिल हैं। अपनी दिलकश आवाज़ से सिने प्रेमियों के दिल पर राज करने वाले के.एल.सहगल 18 जनवरी, 1947 को केवल 43 वर्ष की उम्र में इस संसार को अलविदा कह गए।

मनीषा लाम्बा

#18jan
मिनीषा लाम्बा
🎂18जनवरी 1985एक भारतीय हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्री है।
हिंदू हैं 
जीवनसाथी
रियान थाम 2015 से अबतक।
मिनीषा लाम्बा शेरवुड हाई स्कुल में पढ़ाई की और बाद में चेत्तीनाद विद्याश्रम चेन्नई में पढ़ी। 2004में उन्होंने अंग्रेज़ी में स्नातक डिग्री दिल्ली के मिरांडा हाउस से पुरी की।

लाम्बा की इच्छा पत्रकार बनने की थी। दिल्ली में अपनी डिग्री करते वक्त उन्हें एलजी, सोनी, कैडबरी, हाजमोला, एयरटेल, सनसिल्क आदि के विज्ञापनों में काम करने के प्रस्ताव मिले परन्तु वह कैडबरी का विज्ञापन था जिसने उन्हें प्रकाश्ज्योत में ला खड़ा किया। उन्हें बॉलीवुड निर्देशक शूजित सिरकार ने अपनी फ़िल्म यहाँ (२००५) के लिए निमंत्रित किया। उन्होंने इसे स्वीकार कर अभिनय क्षेत्र में यहाँ से कदम रखा। समीक्षकों ने उनके अभिनय को काफ़ी सराहा।

2008में उन्होंने सिद्धार्थ आनंद की फ़िल्म बचना ए हसीनो में बिपाशा बसु, दीपिका पदुकोने और रणबीर कपूर के साथ मुख्य भूमिका अदा की। इस फ़िल्म को यश राज फिल्म्स ने निर्मित किया था। उनका अगला मुख्य किरदार श्याम बेनेगल की फ़िल्म वेल डन अब्बा (2010) में था जिसकी कैनंस फ़िल्म समारोह में काफ़ी तारीफ की गई। उन्होंने कॉर्पोरेट, रॉकी: द रेबेल, अन्थोनी कौन है, हनीमून ट्रेवेल्स प्राइवेट लिमिटेड, अनामिका, शौर्य और दस कहानियाँ में सह सह-अदाकारा की भूमिका निभाई। उन्होंने मैक्सिम इण्डिया के लिए चित्र भी निकलवाया।

लाम्बा फिलहाल शिरीष कुंदर की जोकर में श्रेयस तलपदे के साथ भूमिका अदा की

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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...