27 दिसंबर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
27 दिसंबर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 27 दिसंबर 2023

सलमान खान

#27dic 
वर्तमान युग के प्रसिद्ध अभिनेता सलमान खान के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
🎂जन्‍म 27 दिसम्बर, 1965 को इंदौर, मध्‍य प्रदेश
सलमान ख़ान  हिन्‍दी फ़िल्‍मों के मशहूर अभिनेता तो हैं हीं, इसके साथ-साथ वे निर्माता, टेलीविजन पर्सनालिटी और समाजसेवी भी हैं। उन्‍होंने अपने कॅरियर में कई छोटी-बड़ी फ़िल्‍मों में काम किया और धीरे धीरे उनके प्रशंसकों की संख्‍या लगातार बढ़ती गई। उन्‍होंने फ़िल्म इंडस्‍ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्‍थापित किया है और वे हिंदी सिनेमा के अग्रणी अभिनेताओं में से एक हैं। मौजूदा समय में उन‍के चाहने वालों का ये आलम है कि उनके घर (गैलेक्‍सी अपार्टमेंट्स) के बाहर उनकी भीड़ लगी रहती है। उनके फैंस की दीवानगी कुछ ऐसी है कि उनकी एक झलक पाने के लिए उनके प्रशंसक बेताब रहते हैं। कई बार तो ऐसा हुआ है कि उनको अपने फैंस से काफ़ी दिक्‍कतों का भी सामना करना पड़ा है। टाइम्स सेलेबेक्‍स बॉलीवुड ऐक्‍टर्स इंडेक्‍स रेटिंग में वे बराबर टॉप पर रहते हैं। लोग उन्‍हें प्‍यार से सल्‍लू भाई, भाई जान आदि नामों से पुकारते हैं

परिचय
सलमान ख़ान का जन्‍म 27 दिसम्बर, 1965 को इंदौर, मध्‍य प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम सलीम ख़ान है, जो कि मशहूर फ़िल्‍म लेखक रहे हैं। उनकी माँ का नाम सुशीला चरक है। उनके पिता जम्मू कश्मीर से हैं और उनकी माँ महाराष्ट्रीयन हैं। पूर्व अभिनेत्री हेलेन उनकी सौतेली माँ हैं। उनके दो भाई भी हैं जिनका नाम अरबाज ख़ान और सोहेल ख़ान है। अरबाज की शादी अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ख़ान से हुई है। सलमान की दो बहनें भी हैं जिनका नाम अलवीरा और अर्पिता है।

शिक्षा

सलमान ख़ान की पढ़ाई सिंधिया स्‍कूल, ग्वालियर से हुई, जहां वे अपने भाई अरबाज ख़ान के साथ पढ़ते थे। इसके बाद की पढ़ाई उन्‍होंने मुम्बई के बांद्रा इलाके में स्थित सेंटस्‍टैनिसलॉस हाईस्‍कूल से की।

व्यक्तिगत जीवन

सलमान ख़ान की सौतेली माँ हेलन बॉलीवुड के बीते ज़माने की एक मशहूर अभिनेत्री हैं, जिन्होंने उनके साथ 'खामोशी' (1996) और 'हम दिल दे चुके सनम' (1999) में सह-कलाकार के रूप में कार्य किया था। ये एक समर्पित बॉडीबिल्डर हैं। वे प्रतिदिन मेहनत करते हैं और मूवी तथा स्टेज शो में अपनी कमीज उतारने के लिए प्रसिद्ध हैं। अमेरिका की पीपुल पत्रिका द्वारा वर्ष 2004 में इन्हें दुनिया का 7वां सबसे सुंदर पुरुष और भारत के सबसे सुंदर पुरुष का खिताब मिला। बहुत-सी अभिनेत्रियों के साथ रोमांस और अपनी पूर्व प्रेमिका ऐश्वर्या राय, सोमी अली और संगीता बिजलानी के साथ संबंधों के बावजूद सलमान भारतीय मीडिया जगत में बालीवुड के सबसे चहेते कुंवारे अभिनेता बनते रहे हैं। अपने कैरियर में वह विभिन्न धर्मार्थ संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।

फ़िल्मी कॅरियर

सलमान ख़ान ने अपने अभिनय कॅरियर की शुरुआत 1988 में सहायक अभिनेता के तौर पर फ़िल्‍म 'बीवी हो तो ऐसी' से की थी। 1989 में मुख्‍य अभिनेता के तौर पर उनकी पहली फ़िल्‍म 'मैंने प्‍यार किया' थी जो कि सुपरहिट रही थी। यह फ़िल्म भारत की सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्मों में से एक बन गई। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ नए अभिनेता का पुरस्कार मिला एवं फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार के लिए नामांकन भी प्राप्त हुआ। उनकी फ़िल्‍म 'हम आपके हैं कौन' ने सभी का दिल जीता तो वहीं फ़िल्‍म 'तेरे नाम' में उनके अभिनय की काफ़ी प्रशंसा हुई और अपने अभिनय से उन्‍होंने सभी को भावुक कर दिया था। इसके बाद उन्‍होंने कई फ़िल्‍मों में काम किया, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उनके प्रशंसकों में इसलिए भी इजाफा हुआ क्‍योंकि उन्‍हें एक्‍शन फ़िल्‍मों में ज्‍यादा पसंद किया गया। फ़िल्‍म 'वांटेड' के बाद से उन्‍होंने लगातार हिट फ़िल्‍मों की झड़ी लगा दी है

वर्ष 2000 में इन्होंने छ: फ़िल्मों में काम किया जो आलोचकों की दृष्टि में व्यापार करने में असफल रहीं, इनमें से दो फ़िल्में जैसे 'हर दिल जो प्यार करेगा' और 'चोरी चोरी चुपके चुपके' कुछ सफल रहीं। इन दोनों में रानी मुखर्जी और प्रिटी जिन्टा इनकी सह कलाकार थीं। वर्ष 2001 तक देर से रिलीज होने वाली इनकी फ़िल्म 'चोरी चोरी चुपके चुपके' में इनके प्रदर्शन की सराहना की गई। सरोगेट चाइल्ड बर्थ के मुद्दे को सुलझाने वाली बालीवुड की यह पहली फ़िल्म थी जिसमें सलमान ने एक धनी उद्योगपति की भूमिका निभाई थी। वर्ष 2002 में इन्होंने फ़िल्म 'हम तुम्हारे हैं सनम' में काम किया जो बॉक्स ऑफिस पर सेमी हिट रही। उन्होंने 2003 में 'तेरे नाम' फ़िल्म से अपनी वापसी की।

सलमान ने 'मुझसे शादी करोगी' (2004) और 'नो एन्ट्री' (2005) जैसी हास्य फ़िल्मों के द्वारा बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता जारी रखी। वर्ष 2006 इनकी फ़िल्में 'जान-ए-मन' और 'बाबुल' दोनों ही बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। सलमान ने वर्ष 2007 की शुरुआत में इनकी फ़िल्म 'सलाम ए इश्क' आयी जो बॉक्स ऑफिस पर कुछ अच्छा न कर सकी। उसके बाद अगली फ़िल्म 'पार्टनर' का बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन रहा और इन्हें ब्लॉकबस्टर की छवि दिलवाई। इसके बाद वे हॉलीवुड की एक फ़िल्म में मैरीगोल्ड (Marigold: An Adventure in India) अमरीकी महिला कलाकार अली लार्टर के साथ दिखाई दिए। वर्ष 2008 में सलमान अपनी गेम शो 'दस का दम' के साथ छोटे परदे पर उतरे जो अंतरराष्ट्रीय शो पॉवर ऑफ़ टेन पर आधारित था।

क़ानूनी विवाद

सलमान ख़ान पर एक से अधिक क़ानूनी केस हो चुके हैं जिनमें से कुछ का निपटारा हो गया है और कुछ मामले अभी भी विचाराधीन हैं। इनमें से मुख्य निम्न हैं[2]–

28 सितम्बर, 2002 को सलमान के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए फुटपाथ पर सोये हुए व्यक्ति की मृत्यु के सम्बन्ध में केस दायर किया गया जिस पर लम्बे समय तक चली। सुनवाई के बाद इन्हें दोषी नहीं पाया और इस केस में कुछ और पहलुओं के लिए जाँच अभी लंबित है। यह केस 'हिट एंड रन' (hit and run case) के नाम से जाना जाता है।
17 फ़रवरी, 2006 को एक दुर्लभ प्रजाति के हिरन चिंकारा के शिकार के सम्बन्ध में उन्हें अदालत ने दोषी पाया और एक साल की सजा सुनाई लेकिन बाद में उच्च न्यायालय में अपील करने के बाद सजा पर रोक लगा दी गयी। यह मामला 'काले हिरन के शिकार' के नाम से मशहूर है। सलमान ने छह दिन जेल में भी बिताए, जहाँ से उन्हें 31 अगस्त, 2007 को जमानत मंजूर किये जाने के कारण इन्हें रिहा कर दिया गया।

नवोदित कलाकारों की परख

सलमान ख़ान इंडस्ट्री के एक ऐसे अकेले सुपरस्टार हैं, जो हमेशा अपने दोस्तों को साथ में लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। इसके साथ उन्होंने ऐसे कई एक्टर और एक्ट्रेस के करियर को संभाला हैं, जो एक खास मौके की तलाश में रहते हैं। बिपाशा और सलमान की दोस्ती भी सालों पुरानी है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि सलमान दोस्ती के मामले में दरियादिल इंसान हैं। उन्होंने अब तक कई लोगों के नाम के आगे अपना नाम जोड़ा है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं

कैटरीना कैफ़- फ़िल्म बूम से कैटरीना कैफ़ ने अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन एक साइड एक्टर की तरह इंडस्ट्री ने उन्हें नकार दिया था। ऐसे में उनकी मदद के लिए सलमान ख़ान ने हाथ आगे बढ़ाया। उन्होंने 'मैंने प्यार क्यों किया' और 'पार्टनर' फ़िल्म से कैटरीना को इंडस्ट्री में फिर लांच किया।
जैकलीन फर्नांडिस- अलादीन और मर्डर जैसी फ़िल्मों में जैकलीन का करियर कुछ खास रंग नहीं जमा पा रहा था। ऐसे में उनके कॅरियर को सलमान ख़ान ने अपनी फ़िल्म 'किक' से एक अच्छी हिट दी। इसके बाद वह 'ब्रदर्स' और 'हाउसफुल 3' जैसी फ़िल्मों का हिस्सा बनने लगीं।
सोनाक्षी सिन्हा- मशहूर एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी होने के बावजूद सोनाक्षी सिन्हा के लिए हिंदी सिनेमा में एंट्री के दरवाजे खोलने का रास्ता उनके परिवार को नहीं मिल रहा था। ऐसे में सलमान ख़ान की नजर सोनाक्षी पर पड़ी। उन्होंने अपनी सबसे लोकप्रिय फ़िल्म 'दबंग' की हिरोइन के तौर पर सोनाक्षी को कास्ट कर लिया। यह सिलसिला 'दबंग 2' में भी कायम रहा। वर्तमान में सोनाक्षी इतनी सक्षम हैं कि वह अपने बलबूते पर किसी भी फिल्म की जिम्मेदारी उठा सकती हैं।

सम्मान और पुरस्कार

2016 में फ़िल्म 'बजरंगी भाईजान' के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (बतौर निर्माता- सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय एवं मनोरंजक फ़िल्म)
2012 में फ़िल्म 'चिल्लर पार्टी' के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (बतौर निर्माता- सर्वश्रेष्ठ बाल फ़िल्म )
15 जनवरी, 2008 को लंदन के मैडम तुसाद संग्रहालय में सलमान खान की आदमकद मोम की प्रतिमा लगाई गई और इस तरह संग्रहालय में मोम की प्रतिमा के रूप में दिखाई देने वाले वे चौथे भारतीय अभिनेता बन गए।
1990 में फ़िल्म 'मैंने प्यार किया' के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित कलाकार का पुरस्कार।
1999 में फ़िल्म 'कुछ कुछ होता है' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता।

विजय अरोड़ा

#27dic
#02geb 
विजय अरोड़ा

 🎂27 दिसंबर 1944 
⚰️02 फरवरी 2007

 हिंदी फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों के एक भारतीय अभिनेता थे, जिन्हें यादों की बारात और टेलीविजन धारावाहिक रामायण में इंद्रजीत के रूप में जाना जाता था ।
अरोड़ा की शादी पूर्व मॉडल और मिस इंडिया दिलबर देबारा से हुई थी और उनका एक बेटा फरहाद है।अरोड़ा की पेट की बीमारी के कारण 02 फरवरी 2007 को उनके आवास पर मृत्यु हो गई।
1971 में भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान से स्नातक होने पर अरोड़ा ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने एक और नवागंतुक रीना रॉय के साथ ज़रूरत (1972) में अपनी शुरुआत की। उन्होंने राखी और हथकड़ी (1972) में आशा पारेख के साथ अभिनय किया और यादों की बारात (1973) में गिटार बजाती ज़ीनत अमान (रोमांटिक गीत, चुरा लिया है ) के साथ स्टारडम हासिल किया। दो सशक्त अभिनेत्रियों, जया भादुड़ी और वहीदा रहमान ने फागुन (1973) में उनकी पत्नी और सास की भूमिका निभाई । उन्होंने कादंबरी (1976) में शबाना आज़मी के साथ अभिनय किया; 'इंसाफ' (1973) में तनुजा के साथ ; 36 घंटे (1974) में परवीन बाबी के साथ ; और नाटक (1975) में मौसमी चटर्जी के साथ। फिल्म निर्माता हृषिकेश मुखर्जी ने उन्हें फिल्म सबसे बड़ा सुख (1972) में मुख्य भूमिका दी । अन्य फिल्मों में रोटी (1974), जीवन ज्योति में मुख्य भूमिका (1976), बिंदिया गोस्वामी के साथ , जो साल की आश्चर्यजनक हिट थी, सरगम ​​(1979), बड़े दिल वाला (1983), जान तेरे नाम (1992) और इंडियन बाबू (2003), जहां उनके पात्र कहानी की परिधि के आसपास थे।

80 के दशक के अंत में, रामानंद सागर द्वारा निर्देशित धारावाहिक रामायण में मेघनाद इंद्रजीत की भूमिका से उन्हें फिर से छोटे पर्दे पर सफलता मिली । वह श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित श्रृंखला भारत एक खोज में प्रिंस सलीम/सम्राट जहांगीर के रूप में भी दिखाई दिए ।

2001 में, उन्हें दो धारावाहिकों, लकीरें और तलाश और केतन मेहता की प्रधान मंत्री में देखा गया था । उन्होंने विजय आनंद द्वारा निर्देशित 'जाना ना दिल से दूर' में अभिनय किया । अरोड़ा गुजराती सिनेमा में राजा हरिश्चंद्र जैसी फिल्मों में माधुरी दीक्षित के साथ नजर आए । उन्होंने कई हिंदी और गुजराती नाटकों में अभिनय किया था।उन्होंने 110 से अधिक फिल्में कीं और 500 से अधिक टेलीविजन धारावाहिक एपिसोड प्रसारित किये।
📽️
1972 ज़रुरत 
1972 राखी और हथकड़ी
1972 सबसे बड़ा सुख 
1972 मेरे भैया
1973 यादों की बारात 
1973 फागुन 
1973 एक मुट्ठी आसमान 
1973 इन्साफ
1974 36 घंटे 
1974 रोटी 
1975 नाटक 
1976 जीवन ज्योति
1977 आनंद महल 
1978 सफ़ेद हाथी 
1978 दिल और दीवार 
1979 सरगम
1979 डिकरी अने गै डोरे तिवा जाए (गुजराती फिल्म)
1979 गौतम गोविंदा 
1979 नागिन और सुहागिन
1980 ज़ख़्मों के निशान 
1981 जियो तो ऐसे जियो 
1981 सन्नाटा 
1981 मेरी आवाज सुनो
1981 लेख न माथे मेख (गुजराती फिल्म)
1982 दूल्हा बिकता है 
1982 सती और भगवान 
1982 ये तो कमाल हो गया
1983 एक दिन बहु का 
1983 निसान
1983 सौतेन 
1983 बड़े दिलवाला
1984 यादगार 
1985 साहेब
1985 Bewafai 
1986 विधान 
1986 अम्मा 
1986 अविनाश
1987 अवाम 
1987 डाकू हसीना
1988 सागर संगम
1988 वीराना 
1988 कार्टूट 
1989 पुरानी हवेली 
1989 दोस्त गरीबन का
1990 बाप नंबरी बेटा दस नंबरी
1991 आखिरी चीख 
1991 100 दिन 
1992 जान तेरे नाम
1992 विश्वात्मा 
1992 नेत्रहीन साक्षी 
1993 गीतांजलि
2002 आख़िर 
2003 भारतीय बाबू
📺
1986 विक्रम और बेताल 
1987 रामायण 
1988 भारत एक खोज
2001 ज़ी हॉरर शो
1998-1999 लकेरीन

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023

यश चोपड़ा

यश चोपड़ा
पूरा नाम यश राज चोपड़ा
अन्य नाम किंग ऑफ़ रोमांस
🎂जन्म 27 सितंबर, 1932
जन्म भूमि लाहौर पाकिस्तान
⚰️मृत्यु 21 अक्टूबर, 2012 
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
पति/पत्नी पामेला चोपड़ा
संतान आदित्य चोपड़ा और उदय चोपड़ा
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक
मुख्य फ़िल्में दीवार, दाग़, कभी कभी, डर, चांदनी, दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, दिल तो पागल है, वीर जारा आदि।
पुरस्कार-उपाधि 11 बार फ़िल्मफेयर पुरस्कार, पद्म भूषण, दादा साहब फालके पुरस्कार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी यश चोपड़ा के पुत्र आदित्य चोपड़ा प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक और दूसरे पुत्र उदय चोपड़ा अभिनेता हैं।
अद्यतन‎ 
20:10, 28 सितम्बर 2012 (IST)
यश राज चोपड़ा (अंग्रेज़ी: Yash Raj Chopra, जन्म: 27 सितम्बर, 1932; मृत्यु: 21 अक्टूबर, 2012) भारतीय हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक, पटकथा लेखक एवं फ़िल्म निर्माता हैं। यश चोपड़ा को हिन्दी सिनेमा का “किंग ऑफ रोमांस” कहा जाता है। दीवार, कभी कभी, डर, चांदनी, सिलसिला, दिल तो पागल है, वीर जारा जैसी अनेकों बेहतरीन और रोमांटिक फ़िल्में बनाने वाले यश चोपड़ा ने पर्दे पर रोमांस और प्यार को नए मायने दिए हैं।

जीवन परिचय
यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर, 1932 को लाहौर में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है। स्वतंत्रता के बाद वह भारत आ गए। उनके बड़े भाई बी. आर. चोपड़ा बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता निर्देशक थे। बड़े भाई की प्रेरणा पर ही उन्होंने भी फ़िल्मों में हाथ आजमाया और आज यश चोपड़ा का परिवार बॉलीवुड के प्रतिष्ठित बैनरों में से एक है। उनके बेटे आदित्य चोपड़ा और उदय चोपड़ा भी फ़िल्मों से ही जुड़े हुए हैं। यश चोपड़ा ने अपने भाई के साथ सह निर्देशक के तौर पर काम करना शुरू किया। अपने भाई बी. आर चोपड़ा के बैनर तले उन्होंने लगातार पांच फ़िल्में निर्देशित की। इन फ़िल्मों में ‘एक ही रास्ता’, ‘साधना’ और ‘नया दौर’ शामिल हैं।[१]

फ़िल्मी सफर
यश चोपड़ा ने 1959 में पहली बार अपने भाई के बैनर तले ही बनी फ़िल्म ‘धूल का फूल’ का निर्देशन किया। इसके बाद उन्होंने भाई के ही बैनर तले 'धर्म पुत्र' को भी निर्देशित किया। दोनों ही फ़िल्में औसत कामयाब रहीं पर इसमें यश चोपड़ा की मेहनत सबको नजर आई। वर्ष 1965 में आई फ़िल्म ‘वक्त’ यश चोपड़ा की पहली हिट फ़िल्म साबित हुई। इस फ़िल्म का गीत “ऐ मेरी जोहरा जबीं तुझे मालूम नहीं” दर्शकों को आज भी याद है। फ़िल्म 'इत्तेफाक' उनकी उन चुनिंदा फ़िल्मों में से है जिसमें उन्होंने कॉमेडी और रोमांस के अलावा थ्रिलर पर भी काम किया था।

यश राज बैनर की स्थापना
मुख्य लेख : यश राज फ़िल्म्स
1973 में उन्होंने फ़िल्म निर्माण में कदम रखा और यश राज बैनर की स्थापना की। इसकी शुरूआत राजेश खन्ना अभिनीत ‘दाग’ जैसी सुपरहिट फ़िल्म से की। इस फ़िल्म की कामयाबी ने उन्हें बॉलीवुड में नया नाम दिया। इसके बाद आई 1975 की फ़िल्म 'दीवार' जिसमें अमिताभ बच्चन ने अभिनय किया था। इस फ़िल्म की सफलता ने यश चोपड़ा को कामयाब निर्देशकों की श्रेणी में ला खड़ा किया। जहां उनकी फ़िल्मों में काम करने के लिए अभिनेता उनके घर के चक्कर लगाने लगे। इसके बाद तो यश चोपड़ा ने 'सिलसिला', ‘कभी-कभी’ जैसी फ़िल्मों में अमिताभ के साथ ही काम किया। हालांकि 80 के दशक की शुरूआत में यश चोपड़ा को असफलता का कड़वा स्वाद भी चखना पड़ा पर 1989 में आई 'चांदनी' ने उन्हें दुबारा एक सफल और हिट निर्देशक बना डाला। 1991 में आई 'लम्हे' भी इसी दौर की एक सुपरहिट फ़िल्म साबित हुई। इसके बाद उन्होंने 1995 में बतौर निर्माता फ़िल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में दांव लगाया। शाहरुख खान और काजोल के अभिनय से सजी यह फ़िल्म बॉलीवुड में नया इतिहास रच गई। इसके बाद 1997 में उन्होंने फ़िल्म ‘दिल तो पागल है’ का निर्देशन किया। कुछ सालों तक वह निर्देशन से दूर रहे और फिर लौटे 2004 की सुपरहिट फ़िल्म 'वीर जारा' को लेकर।

किंग ऑफ़ रोमांस
बॉलीवुड में रोमांस के अलग-अलग स्‍वरूप को परदे पर ढालने वाले यश चोपड़ा ने रोमांस को जितने रंगों में दिखाया उतना बॉलीवुड का कोई निर्देशक नहीं दिखा सका, इसीलिए यश चोपड़ा को बॉलीवुड का रोमांस किंग यानी ‘किंग ऑफ़ रोमांस’ कहा जाता है। यश चोपड़ा ने रोमांस को जुनूनी तौर पर, पागलपन के तौर पर, कुर्बानी के तौर पर, दु:ख-दर्द बांटने के तौर पर, कॉमेडी और थ्रिलर के साथ यानी हर तरह से प्‍यार को दिखाने की कोशिश की। यश चोपड़ा वहीं शख्‍सियत हैं जिन्‍होंने सिल्‍वर स्‍क्रीन पर प्‍यार और रोमांस की नई परिभाषा गढ़ी।
 फ़िल्मी सफ़र 📽️
धूल का फूल (1959)
वक़्त 1965)
दाग़ (1973)
दीवार (1975)
त्रिशूल (1978)
काला पत्थर (1979)
सिलसिला (1981)
चांदनी (1989)
डर (1993)
ये दिल्लगी (1994)
दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995)
दिल तो पागल है (1997)
मोहब्बतें (2000)
मेरे यार की शादी है (2002)
हम तुम (2004)
धूम (2004)
वीर ज़ारा (2004)
बंटी और बबली (2005)
धूम 2 (2006)
चक दे इंडिया (2007)
रब ने बना दी जोड़ी (2008)
मेरे ब्रदर की दुल्हन (2011)
जब तक है जां (2012)
सम्मान और पुरस्कार
यश चोपड़ा को अब तक 11 बार फ़िल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें 1964 में प्रदर्शित फ़िल्म 'वक्त' के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए फ़िल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद वह 1969 में फ़िल्म 'इत्तेफाक' सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, 1973 में 'दाग' सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, 1975 में 'दीवार' सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, 1991 में 'लम्हे' सर्वश्रेष्ठ निर्माता, 1995 में 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' सर्वश्रेष्ठ निर्माता, 2001 में वह फ़िल्म जगह के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फालके पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। 2005 में उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' से भी सम्मानित किया गया। फ़िल्म निर्माता यश चोपड़ा को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए फ्रांस का सर्वोच्च ऑफिसियर डी ला लेजन पुरस्कार भी प्रदान किया गया। स्विस सरकार ने उन्हें “स्विस एंबेसडरर्स अवार्ड 2010” से सम्मानित किया है
रोमांस के बादशाह' यश चोपड़ा का निधन
'रोमांस के बादशाह' फ़िल्म निर्माता यश चोपड़ा का निधन 21 अक्टूबर 2012, रविवार को मुंबई के लीलावती अस्पताल में निधन हो गया

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...