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बुधवार, 6 दिसंबर 2023

H.C Aatma

प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता,गायक सी एच आत्मा की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
🎂1923 हैदराबाद
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 6 दिसंबर 1975
सी एच आत्मा बॉलीवुड के पार्श्व गायक, ग़ज़ल गायक और फ़िल्म अभिनेता थे  उनका जन्म 1923 में हैदराबाद (सिंध) में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है।  उनका असली नाम आत्मा हशमतराय चैनानी था  1957 में पूर्वी अफ्रीका के नैरोबी में भारत के बाहर विदेशी दौरे पर गायन करने वाले वह पहले गायक थे 1975 में इंग्लैंड के अपने गायन दौरे के बाद वह बीमार पड़ गए और आठ महीने बाद 6 दिसंबर 1975 को 52 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई

सी एच आत्मा ने 1945 में अपने कैरियर की शुरुआत की उनका सदाबहार गीत 'प्रीतम आन मिलो' है, जिसे उन्होंने 1945 में एक निजी एल्बम के लिए गाया था 1955 में, संगीतकार ओ.पी.नैय्यर के संगीत निर्देशन में गीता दत्त द्वारा फिल्म, मिस्टर एंड मिसेज '55  में वही गीत गाया गया ओ पी नैय्यर सी एच आत्मा के  गायन के बहुत बड़े  प्रशंसक थे उनकी आवाज़ के एल सहगल से काफी मिलती जुलती थी लेकिन उनकी अपनी अनूठी शैली थी जो उनको फिल्म और गैर-फिल्मी संगीत दोनों में बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाने में सहायक सिद्ध हुई उनके सर्वश्रेष्ठ ज्ञात गीतों में उनके एकल और युगल गीतों में गीता दत्त के साथ ओ.पी.नैय्यर की पहली फिल्म आसमान (1952) का गीत और उनकी गैर-फिल्म रिकॉर्डिंग "प्रीतम आन मिलो" शामिल हैं

सी एच आत्मा ने वी शांताराम द्वारा निर्देशित फिल्म गीत गाया पत्थरों में एक गजल गाया उन्होंने फिल्म नगीना के लिए दो गाने भी गाए, जिसका संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया था

उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे गायिकाओं के साथ युगल गीत  भी गाये लेकिन बॉलीवुड में उनका करियर महज 10 साल का था

उन्होंने दो फिल्मों में नायक के रूप में भी काम किया, जिनके नाम हैं, 'भाईसाहब' (1954) (पूर्णिमा और स्मृति विश्वास के साथ) और 'बिल्वा मंगल' (सुरैया के साथ) (1954)

सी एच आत्मा लोकप्रिय गायक, चंदरू आत्मा के बड़े भाई थे

बुधवार, 1 नवंबर 2023

राम मोहन


नाम राम मोहन

🎂जन्म 02 नवंबर, 1929
जन्म भूमि अंबाला
⚰️मृत्यु 06 दिसम्बर, 2015
मृत्यु स्थान मुम्बई

अभिभावक पिता- डॉक्टर साधुराम शर्मा और माता- योगमाया शर्मा
संतान तीन पुत्र और एक पुत्री
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र सिनेमा जगत
मुख्य फ़िल्में 'हरियाली और रास्ता', 'मेरे हुज़ूर', 'तक़दीर', 'शोर', 'किताब', 'जियो तो ऐसे जियो', 'अंगूर', 'सावन को आने दो', 'शान', 'नदिया के पार', 'बंटवारा', 'ग़ुलामी', 'रंगीला' और 'कोयला'
शिक्षा बी. ए.
विद्यालय जी. एम. एन. कॉलेज, अंबाला
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी राम मोहन 4 साल 'सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष और 6 साल महासचिव पद पर रहे तथा इसके अलावा वो सिनेमा से जुड़े लोगों के हित में कार्यरत विभिन्न एसोसिएशनों में भी सक्रिय रहते थे।

हिंदी सिनेमा में खलनायक और चरित्र अभिनेता के तौर पर पहचाने जाते थे। उन्होंने 'मिर्ज़ा ग़ालिब', 'तारा', 'शतरंज', 'संसार', 'बहादुर शाह ज़फ़र', 'ये दिल्ली है' और 'महाभारत' जैसे 15 टेलिविज़न धारावाहिकों में अभिनय भी किया था।

 जीवन परिचय

राम मोहन का जन्म 02 नवंबर, 1929 को अंबाला कैंट में हुआ था। इनके पिता डॉक्टर साधुराम शर्मा मूल रूप से जगाधरी के रहने वाले थे और अंबाला में अपना चिकित्सालय चलाते थे। राम मोहन की माताजी श्रीमती योगमाया शर्मा गृहिणी थीं। ये उनकी इकलौती संतान थे, हालांकि पिता की पहली शादी से भी इनका एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन थे। राम मोहन ने अंबाला के आर्या स्कूल से मैट्रिक शिक्षा प्राप्त की।

: राम मोहन का फ़िल्मी कॅरियर

राम मोहन के एक परिचित और अंबाला के ही रहने वाले महेश उप्पल मुंबई सेंट्रल के पास ही मौजूद 'फेमस आर्ट स्टूडियो' में चित्रकार की नौकरी करते थे और रहते भी स्टूडियो में ही थे। राम मोहन ने क़रीब दो महीने महेश उप्पल के साथ रहकर गुज़ारे। राम मोहन के मुताबिक़़ वो उस दौरान रोज़ाना आसपास के इलाक़ों दादर और महालक्ष्मी में मौजूद 'रंजीत मूवीटोन' और 'फ़ेमस स्टूडियो' जैसे फ़िल्म स्टूडियोज़ के चक्कर काटते थे। कभी कभार उन स्टूडियोज़ में घुसने के लिए उन्हें दरबान को रिश्वत भी देनी पड़ती थी। दो महीने बाद उन्हें महेश उप्पल का स्टूडियो छोड़ना पड़ा तो वो रहने के लिए विले पारले चले आए।

📽️प्रमुख फ़िल्में

 राम मोहन की प्रमुख फ़िल्में
राम मोहन की फ़िल्म 'जग्गू' की कामयाबी के बाद उनके रास्ते आसान हो गये। अगले कुछ सालों में उन्होंने 'श्री चैतन्य महाप्रभु' (1953), 'पेंशनर' (1954), 'होटल', 'लाल-ए-यमन' (दोनों 1956), 'देवर भाभी', 'मिस 58', 'नाईट क्लब', 'राजसिंहासन' (सभी 1958), 'भगवान और शैतान', 'चाचा ज़िंदाबा', 'दो बहनें', 'टीपू सुल्तान' (सभी 1959), 'अंगुलिमाल', 'बहादुर लुटेरा', 'चोरों की बारात', 'काला आदमी' और 'मिस्टर सुपरमैन की वापसी' (सभी 1960) जैसी फ़िल्मों में अहम भूमिकाएं निभायीं।

टेलिविज़न धारावाहिक
राम मोहन ने 'मिर्ज़ा ग़ालिब', 'तारा', 'शतरंज', 'संसार', 'बहादुर शाह ज़फ़र', 'ये दिल्ली है' और 'महाभारत' जैसे 15 टेलिविज़न धारावाहिकों में अभिनय किया। इसके साथ ही 4 साल 'सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष और 6 साल महासचिव पद पर रहने के अलावा वो सिनेमा से जुड़े लोगों के हित में कार्यरत विभिन्न एसोसिएशनों में भी सक्रिय रहे।

निधन
राम मोहन का निधन 86 साल की उम्र में 06 दिसम्बर, 2015 को मुम्बई में हो गया।

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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...