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शनिवार, 4 नवंबर 2023

वी बी राजेंद्र प्रसाद

वी बी राजेंद्र प्रसाद को भले ही हिंदी पट्टी के कम लोग जानते हों लेकिन तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री का वह बड़ा नाम रहे हैं। वह फिल्म निर्माता होने के साथ निर्देशक और पटकथा लेखक भी थे। 
🎂प्रसाद का जन्म 4 नवंबर 1932 में आंध्र प्रदेश के गुडिवाड़ा में हुआ था। आज उन का जन्म दिवस है।
वी बी राजेंद्र प्रसाद तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के अलावा हिंदी और तमिल भाषा की फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत बतौर निर्माता फिल्म अन्नपूर्णा से की थी। साल 1960 में रिलीज हुई इस तेलुगू फिल्म में जमुना ने लीड रोल निभाया था। वहीं, फिल्म का निर्देशन वी. मधुसूदन राव ने किया था। इसके बाद उन्होंने आराधना, आत्मा बालम, अंतस्तुलु, अस्तिपरुलु, अद्रुष्टवंतुलु, अक्का चेल्लेलु जैसी फिल्मों का निर्माण किया। 
फिल्मों को प्रोड्यूस करने के बाद उन्होंने साल 1971 में बतौर निर्देशक फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का फैसला किया है। निर्देशक के रूप में उनकी पहली फिल्म दशारा बुलोडु थी। इस फिल्म की पटकथा भी उन्होंने खुद ही लिखी थी। बाद में उन्होंने कई और फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया। तेलुगू और तमिल फिल्म में अपना सिक्का जमाने के बाद साल 1982 में उन्होंने बॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमाई। हिंदी भाषा में उनकी पहली फिल्म दिग्गज अभिनेता जितेंद्र के साथ थी। फिल्म का नाम 'रास्ते प्यार के' था। इसमें जिंतेंद्र के अलावा रेखा और शबाना आजमी भी नजर आई थीं। 
इसके बाद उन्होंने फिल्म 'बेकरार' में संजय दत्त के साथ काम किया। फिल्म में संजय के अलावा पद्मिनी कोल्होपुरी और सुप्रिया पाठक ने भी अहम किरदार निभाया था। बता दें कि वी बी राजेंद्र प्रसाद फेमस एक्टर जगपति बाबू के पिता हैं। जगपति बाबू अब तक कई साउथ फिल्मों के साथ हिंदी फिल्म में नजर आ चुके हैं। भारतीय सिनेमा में अतुलनीय योगदान देने के लिए वीबी राजेंद्र प्रसाद को साल 2003 में लाइफ टाइम अचीवमेंट से भी नवाजा जा चुका है।

शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

तब्बू

तब्बू एक 

भारतीय फिल्म अभिनेत्री है। हालांकि उन्होंने कई तमिल, तेलुगू, मलयालम, बंगला भाषा एवं साथ ही एक अमरीकी फिल्म में भी काम किया है, लेकिन मुख्यतः उन्होंने हिंदी फिल्मों में ही अभिनय किया है। 
🎂जन्म : 04 नवंबर 1971, हैदराबाद
माता-पिता: जमाल हाशमी, रिज़वाना हाशमी
बहन: फरहा नाज़
कुछ अपवादों के बावजूद, तब्बू मुख्यतः कलात्मक एवं कम बजट फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर आंकड़े (रुपये) जुटाने की बजाय कहीं अधिक आलोचनात्मक सराहना जुटाती हैं। व्यावसायिक तौर पर सफल फिल्मों में उनकी उपस्थिति कम ही रही है और ऐसी फिल्मों में उनकी भूमिका भी बहुत छोटी रही हैं, मसलन-बॉर्डर (1997), साजन चले ससुराल (1996), बीवी नंबर वन Hum Saath-Saath Hain: We Stand United (1999) आदि फ़िल्में. फिल्म माचिस (1996), विरासत (1997), हु तू तू (1999) अस्तित्व (2000), चांदनी बार (2001), मक़बूल (2003) एवं चीनी कम (2007) में उन्होंने उल्लेखनीय अभिनय किया है। मीरा नायर की अमेरिकी फिल्म 'द नेमसेक ' में भी उनकी मुख्य भूमिका को काफी प्रशंसा मिली। अपनी फिल्मों एवं भूमिकाओं के मामले में काफी चुनिन्दा मानी जाने वाली इस अभिनेत्री का कहना है कि 'मैं वही फ़िल्में करती हूं, जो मुझे भावुक बना दे एवं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि फिल्म की यूनिट एवं निर्देशक मुझे प्रभावित करने चाहिए।

प्रारम्भिक जीवन

तब्बू 1971 में हैदराबाद में पैदा हुई जो जमाल हाशमी व रिजवाना की पुत्री हैं, हालांकि कुछ स्रोतों से उनके जन्म का वर्ष 1970 होने के भी संकेत मिले हैं। उनके जन्म के तुरंत बाद ही उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया। उनकी मां एक स्कूल अध्यापिका थीं एवं उनके नाना-नानी, जो एक स्कूल चलाते थे, सेवा-निवृत्त प्राध्यापक थे। उनके नाना, मोहम्मद एहसान, अंकगणित के प्राध्यापक थे और नानी अंग्रेजी साहित्य की प्राध्यापिका थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद के सेंट एन्स हाई स्कूल में की। 1983 में तब्बू मुंबई चली गयी एवं उन्होनें दो वर्षों तक वहां के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की। 

वे शबाना आज़मी की भतीजी एवं अभिनेत्री फरहा नाज़ की छोटी बहन हैं। उनके घर मुंबई एवं हैदराबाद दोनों जगहों पर हैं।

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तबस्सुम 'तब्बू' हाशमी ने अपने करियर की शुरुआत पंद्रह साल की उम्र में 'हम नौजवान ' (1985) फिल्म से की. इस फिल्म में उन्होंने (देव था आनंद की बेटी) एक दुष्कर्म पीड़िता का किरदार निभाया था , बाद मे देव साहब ने ही इन्हे तब्बू नाम दिया। एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली भूमिका एक तेलुगू फिल्म, कुली नंबर 1 में थी। दिसम्बर 1987 में, बोनी कपूर ने अपनी दो बड़ी फिल्मों, रूप की रानी चोरों का राजा एवं प्रेम, की शुरुआत की. प्रेम में तब्बू को संजय कपूर के साथ लिया गया। यह फिल्म आठ साल में बनकर तैयार हुई. तब्बू ने एक बार मजाक में कहा "मुझे इस दशक का, सबसे ज्यादा इंतज़ार करने वाली नयी अभिनेत्री का अवॉर्ड मिलना चाहिए." मुख्य किरदार के रूप में हिंदी में उनकी पहली रिलीज़ हुई फिल्म थी पहला पहला प्यार, जो लोगों का ज़रा भी ध्यान आकर्षित नहीं कर पाई.विजयपथ (1994) में अजय देवगन के साथ उनकी भूमिका के बाद वे प्रतिष्ठित हुईं, इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला नवागंतुक अवॉर्ड हासिल हुआ। इसके बाद भी उनकी कई फ़िल्में आयीं, जो बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पायीं.
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विजय मेहता

विजया मेहता

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1934
जन्म भूमि बड़ौदा, गुजरात
पति/पत्नी हरिन खोटे, फ़ारुख मेहता
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय सिनेमा तथा रंगमंच
शिक्षा स्नातक
विद्यालय 'मुम्बई विश्वविद्यालय'
पुरस्कार-उपाधि सहायक अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' (1986), 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' (1975)
प्रसिद्धि फ़िल्मकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी विजया मेहता की जिस फ़िल्म से हिन्दी फ़िल्म-जगत में सही अर्थों में पहचान बनी, वह थी- 'राव साहब'। सन 1986 में प्रदर्शित यह फ़िल्म बतौर निर्देशिका उनकी पहली फ़िल्म थी।
 भारतीय सिनेमा की एक उच्च श्रेणी की महिला फ़िल्मकार हैं। उन्होंने कई फ़िल्मों में अभिनय भी किया है। विजया मेहता रंगमंच से फ़िल्मी दुनिया में आई थीं। फ़िल्म माध्यम पर उनकी गहरी पकड़ है।

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1934 

को ब्रिटिश शासन काल में बड़ौदा (गुजरात) में हुआ था। उन्होंने 'मुम्बई विश्वविद्यालय' से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में इब्राहीम अलकाज़ी के साथ थियेटर का अध्ययन किया।

विवाह

विजया मेहता का प्रथम विवाह हरिन खोटे के साथ हुआ था, जो अपने समय की जाने मानी अभिनेत्री दुर्गा खोटे के पुत्र थे। लेकिन कुछ समय बाद ही हरिन खोटे का निधन हो गया। इसके बाद विजया मेहता ने फ़ारुख मेहता के साथ दूसरा विवाह कर लिया।

फ़िल्म निर्देशन

रंगमंच से मंझकर आई विजया मेहता की फ़िल्म-माध्यम पर गहरी पकड़ है। उनकी यह पकड़ कितनी पुख्ता है, यह उनकी फ़िल्म्स देखकर जाना जा सकता है। विजया मेहता की जिस फ़िल्म से हिन्दी फ़िल्म-जगत में सही अर्थों में पहचान बनी, वह थी- 'राव साहब'। सन 1986 में प्रदर्शित यह फ़िल्म बतौर निर्देशिका उनकी पहली फ़िल्म थी।

फ़िल्म 'राव साहब' परम्परा और आधुनिकता के द्वंद्व को कई पहलुओं से उकेरती है। यह उस काल (1910-1920 ई.) की कहानी है, जब महाराष्ट्र के ठेठ परम्परावादी माहौल में कई युवक इंग्लैंड से शिक्षा ग्रहण कर स्वदेश लौट रहे थे। वहां के आधुनिक समाज से क्रांति के बीज वे अपने साथ लेकर आए थे। लेकिन यहां की मिट्टी उनके लिये उपयुक्त नहीं थी। अत: उनकी यह क्रांतिकारिता कोरी वैचारिक थी। कामकाज या कहें कृत्य उनके परम्परावादी ही थे। ऐसा ही एक विचार था- 'विधवा विवाह', जिसका वे खुलकर समर्थन नहीं कर सकते थे। फ़िल्म 'राव साहब' जयंत दलवी के प्रसिद्ध मराठी नाटक 'बैरिस्टर' पर आधारित थी। इस नाटक का रंगमंच पर असफलतापूर्वक मंचन स्वयं विजया मेहता कर चुकी हैं। मंच पर बैरिस्टर की भूमिका विक्रम गोखले ने की थी, जबकि फ़िल्म में अनुपम खेर ने भूमिका निभाई थी। इसी नाटक में युवा विधवा की भूमिका सुहास जोशी ने निभाई, जबकि फ़िल्म में तन्वी आकामी ने निभाई थी।

पुरस्कार व सम्मान

नाटक और फ़िल्म दोनों ही जगह विधवा मौसी की भूमिका स्वयं निर्देशिका विजया मेहता ने की थी। उल्लेखनीय है कि 'राव साहब' को न सिर्फ दर्शकों और समीक्षकों की सराहना मिली, बल्कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहुप्रशंसित और पुरस्कृत भी हुई थी। इस फ़िल्म के लिए विजया को सहायक अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' (1986) मिला था। इससे पहले वर्ष 1975 में उन्हें 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' का पुरस्कार भी मिला था।

रीटा भादुड़ी

रीता भादुड़ी

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1955
जन्म भूमि लखनऊ, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 17 जुलाई, 2018
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनय
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी रीता भादुड़ी का नाम जरीना वाहब के साथ उनकी बहन के रूप में कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

हिन्दी सिने जगत की जानीमानी अभिनेत्री थीं। सन 1968 से वह फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं। अपने पांच दशक के कॅरियर में रीता भादुड़ी ने 'कभी हां कभी ना', 'क्या कहना', 'दिल विल प्यार व्यार' और 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' जैसी फिल्मों में काम किया और प्रसिद्धि पाई। उन्होंने गुजराती फिल्मों में भी काम किया था।

परिचय
चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का जन्म 4 नवम्बर सन 1955 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। गौरतलब है कि अपने तीन दशक लंबे कॅरियर में रीता भादुड़ी 30 से ज्यादा टीवी धारावाहिकों के अलावा लगभग 70 फ़िल्मों में नज़र आईं। टीवी शो की बात करें तो ‘छोटी बहू’, ’कुमकुम’, साराभाई वर्सेस साराभाई’, ‘अमानत’ ‘एक महल हो सपनों’ जैसे धारावाहिक हैं। जबकि फ़िल्मों की बात करें तो रीता भादुड़ी ‘सवान को आने दो’, ‘विश्वनाथ’, ‘अनुरोध’ से लेकर हाल के वर्षों में ‘क्या कहना’ और ‘दिल विल प्यार व्यार’ जैसी फ़िल्मों में नज़र आई थीं।

प्रसंग

अक्सर लोग रीता जी के सरनेम की वजह से उन्हें जया भादुड़ी की बहन समझा करते थे। 2011 में हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने एक वाकया बताया था। उन्होंने बताया था कि एक बार जब मैं जयपुर आई थीं तो किसी ने मुझसे पूछा था कि "क्या मैं जया भादूड़ी की बहन हूं?" ये सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया था। उनका कहना था कि "मुझे इंडस्ट्री में इतने साल हो गए हैं, लेकिन लोगों को अभी तक ये नहीं पता चला कि हम दोनों में कोई कनेक्शन नहीं है। लोग मुझे जया की बहन समझने की गलती कर देते हैं।"

रीता भादुड़ी का नाम आदित्य पंचोली की पत्नी जरीना वाहब के साथ भी कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

कार्य के प्रति लगन

रीता भादुड़ी ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि- "बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों के डर से क्या काम करना छोड़ दें। मुझे काम करना और व्यस्त रहना पसंद है। मुझे हर समय अपनी खराब हालत के बारे में सोचना पसंद नहीं, इसलिए मैं खुद को व्यस्त रखती हूं। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे इतनी सपोर्टिव और समझने वाली कास्ट और क्रू के साथ काम करने का मौका मिला है।" रीता भादुड़ी ने अपनी एक्टिंग और काम से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई थी।

मृत्यु

फ़िल्म और टीवी की चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का निधन 17 जुलाई, 2018 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ। वह 62 साल की थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी दोनों किडनी काफी कमजोर हो गयी थीं और लंबे समय से वह हर दूसरे दिन डायलिसिस के लिए जाया करती थीं। अपने अंतिम दिनों में रीता जी मुंबई के सुजय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं, जहां उनका इलाज चल रहा था।

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