शिव जी का आत्मा अध्याय श्री रामचंद्र बोले पंचभूत के की उत्पत्ति इस सी नवांश किस प्रकार से होता है और इसका स्वरूप क्या है
भगवान विस्तार पूर्वक आप मुझे देख रही श्रीभगवान होली पृथ्वी आदि पंचभूतों बना हुआ यह शरीर भी है इसलिए पृथ्वी प्रधान के और दूसरी दिशा में मिले हुए था सहकार ही झाला
अंदर से राज्य और उद्धृत ये पाँच भौतिक देह ही की चार इतनी और मानसिक प्रगति जो कहलाती है वह पांचवीं है उसे बेहतर कहती हैं उन चारों मिली जहां एक प्रधान ही सर्वप्रथम उसी का हनन करती हूं
इसी तरीके राज पुरुष के बीच से जलाए इसकी उत्पत्ति होती है
जिस समय ऋतुकाल हुई इस स्त्री के गर्भाशय में घुसकर रेलवे प्रवेश करता हूं इस स्त्री का रांची मिले लिखता थी तभी चौड़ाई उस पडती है
इस स्त्री का खर्च अधिक होने से कन्या और भीड़ अधिक होने से ही पुरुष की उत्पत्ति होती है और शुक्र सोने की समान होने में नपुंसक होता है
जब हिस्ट्री ऋतु स्नान कर चुकी तक चौथे दिन से सोलह राष्ट्रीय तक पुलिस काल की अवधि कही है
उनकी मिशन देने वाली पाँच में ही साथ नौवें दिन में इस स्त्री और योग मंदिर में मिली पुरुष की उत्पत्ति होती है
जो सोल्वे राष्ट्रीय ने इस स्त्री के गर्भ में रहता है वरुण चक्रवर्ती राजा उत्पन्न होता है
इसमें संदेह नहीं ऋतु में स्नान करके जो स्त्री कामातुर हो जिस पुरुष का मुख देख सकती है
उसी आकृति का घर होता है
इसी कारण से हिस्ट्री उसने स्वामी का मुफ्त है कि इसी तरीके उधर एक पेशी चमड़ा निर्मित रहता है
उसे जरा खेती ही जिस कारण से शुक्र और शनि का योग उसे गर्म में हिंसा किसी कारण से असली जुलाई कहती हैं
और पक्षी आदि भी अंदाज़ कहलाते हैं
आवश्यक आदि से दर्ज कहलाते हैं
धीरज गुल्म आदि को भी सिखाते हैं और देवऋषि आदि मानव के लातीनी अपने पूर्व जन्म की करम वर्ष पुरानी स्त्री के गर्भाशय में प्राप्त कर शुक्र शनि के मिलने की प्रथम मां मिली शिथिल रहता है कुछ दिनों में थी
धुंध की आकृति होने लगती है कुछ जिलों में झेल लेती हैं
इस कारण में भी ही के समान कुछ गहरा पण आता है
फिर कुछ देर में उसकी पेशी मां बनती है
इस चित्र का शुक्र को सहयोग होते हुए एक माफ हो जाता है
मार्च में मांस पिंड मिलता है
मास में से हाथ आदि उत्पन्न होती हैं
और का आश्रय लेकर रहे चौथे महीने में उत्पन्न होता है तभी घर माता के उधर मिली चलाएं माह होने लगता है
दरअसल पाशा और कन्या वाम पार्श्व में इस स्थित में और नपुंसक उधर के मध्य भाग में स्थित था कि इसका दक्षिण पश्चिम में जन्म लेने के अनन्तर कुक ने वाली शीशी जनता भी को छोड़कर सब अंग
ब्रिटेन के भाग एक सा चौथे माह में जाते ही पुरुष भी गंभीर था इससे आगे धवन और स्त्रियों की चंचलता आदि धर्म चौथे माह में उत्पन्न हो जाती हैं
जिस सूक्ष्म रूप से रहती हैं
डाक घर की स्त्री पुरुषों के मिले हुए धर्म गर्व में उत्पन्न होती हैं और माता के हृदय में सन्निकट इसका हृदय होकर जिस वस्तु की माता इच्छा करती है
उसी वस्तु की यह इच्छा रखता है
इस कारण घर की वृद्धि के लिए मिनिट से माता की इच्छा पूर्ण घर भेजा है और इसीलिए गर्भवती स्त्री को जो हडबडी अर्थ था जो वाली कहती हैं
और उसकी इच्छा पूर्ण न होने से गर्भ में निर्बलता बुद्धिहीनता यंत्र
दोष हो जाती और माता का जिन विषयों में चर्चित होता है उन विषयों में ही और वह पुरुष उठता है
सिलीगुड़ी की इच्छा घूमकर पांचवे महीने ही चित्त बढ़ता है तो माँ से और रखकर पुष्टि होती है
छठे महीने थी इस एनआईए और न न के के इसी तरह शरीर के लोग प्रकट करती हैं
ही माह भर शरीर का भार साल अवयवों की कूदता है और वे घर का भला घुटनों में ही घर हाथों से मेंढक और से व्याकुल होकर बयालीस हुआ था इस सकता है
उस समय को अनेक जन्मों की सुधि हो जाती है
बड़ा दुखी होता है और हा कष्ट की बात है ऐसा कहता हुआ दुखी होता है अपनी आत्मा को विशेषता है
वे रहे और मम्मी में भी आदित्यनाथ को प्राप्त होकर बारह बार कष्ट पाता है
जिसके कारण तपाए रेट में किसी को ढाल तो उसको जो वेदना होती है
ऐसी वेदना को वह प्राप्त होता है
और दुख भोगता है
इसी प्रकार उधर के कीड़े जब काटते ही तो विदित होता है कि के भूख कूद शाल्मली के का के सोमा भी नहीं और यह मुझको अत्यंत प्रेरित करती हैं
घर भी बड़े भारी दुर्गंध और जठराग्नि की ज्वाला थी जो मुझको दुख प्राप्त हुआ है
उस दिन कुमरे पार्क में रखकर दुख कम में मघा रक्त का हो अमंगल पढाती पार करने और घूमते भक्षण करने को मिलती है
शिशिर पदार्थ मल मूत्र आदि में रहने से घर में स्थित अपराधी को पीड़ा ही नहीं चाहती हैं
झूठ घर शैया में पिरोकर मैंने पाया से ये लोग खुद समूह लड़कों में पड़कर प्राप्त नहीं होता इस प्रकार से पूर्व काल में प्राप्त हुई अनेक प्रकार की यातनाओं को स्मरण करता होगा मुक्त होने का उपाय सोचता यही
अभ्यास करता रहता है
आठवें महीने में कक्षा और शक्ति प्राप्त होती है
इसी प्रकार पहुँच इन्द्रिय शक्ति और थी
शरीर के आरंभ करने वाले तथा धातु परिणाम होते होने वाली हृदय की तिथि जो जीवन के मुख्य कारण गई है प्राप्त होती ही कुछ समय तक अदृश्य चंचल होने के कारण किसी समय माता के हृदय में चंचल रूप से
रहता है
कभी गर्भाशय में सफलता को प्राप्त हो जाता है
इसी कारण अष्टम माथुर उत्पन्न हुआ बालक बहुत नहीं जीता कारण कि वे ओछी और तेजी से ही था
छः नौ में मार्क में प्रस्तुति का समय का है
परन्तु शीघ्र प्रसव होने का प्रतिबंधक यह है कि जो कुछ घर की प्रारब्ध कर्म हुए तुमसे और कुछ काल तक घर में रहना पड़ता है
माता की एक रक्तवाहिनी नारी नाभि चक्र की एक नारी से भी हुई है
उसी के द्वारा माता का भक्षण किया घर में पहुंचता है इस प्रकार माता के आहाते पुष्टि को प्राप्त हो घर हो उसी के द्वारा जीवित रहता है
योनि चक्र भी इसकी संपूर्ण अंग थी
कर व्यथित व्यक्ति ही तभी है प्रथम कुक्षी से निकलकर योनि से बाहर आता है
उस समय उसका शरीर में लाल रुधिर थे
और यू से अच्छा नहीं रहता है
वे प्राण अत्यंत दुख से पीड़ित हो नीचे को कर जैसे ही उन्हें चक्र से निकलता है
ऐसे ही ऊंचे स्वर रहता है
इस प्रकार घर वाक्य यंत्र से निकलकर दुखी रोकता है
कहीं सुख नहीं मिलता जल लेकर कुछ भी नहीं कर सकता केवल मां के फील्ड के समान पर्दा हटा है तब इसके माता पिता दंड हाथ में लिए थे मिला तो दान वाले जंतुओं से इसकी रक्षा करते ही उस समय है जान
शून्य ही पिता के समान राक्षसों को भी जाता है
पीली रोड्रिग्स की अभिलाषा करता है
तात्पर्य यह है कि बाल अवस्था में भी महान होता था
जब तक सुषुम्ना नाड़ी कब से आच्छादित रहती है
तब तक इस प्रोडक्शन और वचन बोलने को वे समर्थ नहीं होता इसी कारण भी एक घरों में भी रो नहीं सकता पीछे युवावस्था के आने से कामदेव के चलते झेलो अकस्मात ही कभी कुछ कहता है और कभी
पराक्रम कहने लगता है कभी अभिमान से वृक्षों पर जनता कभी शाम अपराधियों को जिस करता कभी काम क्रोध की मदद से अंधा हो किसी को भी नहीं देखता थी मां को और नारी इनकी सेवाएं इस तरह की मरम्मत था
भी और क्या जिसमें ही मेरठ के फायदे हुए पेज के समान दुर्गंध आती है परन्तु तथा उस नहीं सकते हुआ काम बाढ़ से पीड़ित हो अपनी आत्मा को अत्यंत जाता है
थी माँ और शेरा और अच्छा इसके सिवाय इसके कि शरीर में और क्या जो पुरुष स्त्रियों में आसक्त होकर माया से लोड होने के कारण जगत में कुछ भी नहीं देखता एक सभी प्रधान पवन निकट हो जाए
से भी मिनट के से मित्र गांधी का यह विधि व्यथा को प्राप्त होता है और पांचवें दिन बीतने पर फिर भी दिखता भी नहीं का युवा अवस्था में दुख भोगने के उपरांत को वृद्धावस्था का दुख प्रारंभ होता है
माँ निरादर के था जरा को प्राप्त होकर महान दुखी का है
इस का हृदय गति से व्याप्त हो जाता है
और खाया हुआ अन्न भी जीवन नहीं होता ग्राफ गिर पड़ते ही और दुरुस्ती मंद हो जाती है
तथा अनेक प्रकार के रोग होने के कारण घटित टिक
कसाई औषधियों का सेवन करना पड़ता है ज्वाइन से कमर तोड़ी जाती है करतीं गर्दन हाथ जो उनका ये निर्बल हो जाते ही तब से
लोग इसके शरीर में लिपट जाते ही बंधु तिरस्कार करते ही तभी है पवित्रता रहित हो मगर से व्याप्त शरीर होने के कारण नक्षत्र पर्यंत सब शरीरों से ही तब होता है तथा भी ईश्वर का ध्यान नहीं करता
था और शैय्या श्रेष्ठ भोजन आदि जुलम रोगों का ध्यान करता हुआ इससे का ने किसके हाथ पैर कांपने लगते ही सभी इंद्रियों की शक्ति कुंठित हो जाती है
और कुंभ सामर्थ ना रहने के कारण बालक भी इसकी नहीं करते ही फिर के ही मरण काल के लोगों का तो कोई दृष्टांत ही धड़धड़ाती पीड़ा रोग आदि पीड़ा कितनी ही प्राप्त हो उसको कुछ न लिखकर एक
के भाई से सभी भयभीत होते ही बंधुओं से घिरे हुए प्राणी को मृत्यु ने जाती जिस प्रकार समुद्र में प्राप्त हुए
को गर्म हो जाता है
आप भी धन आप उत्तरों इस पर का विलाप करते हुए इस पुरुष को मिली थी इसी प्रकार ले जाता है जैसे स्तर को संपूर्ण ममी स्थानों के टूटने और शरीर के अवयवों की सुंदरियां भव्य होनी थी जो दुख मरने वाले
का है भी मुमुक्षु को स्मरण करना चाहिए
इसके स्मरण करने वाली संसार से वैराग्य रूककर आवागमन से छूटने के निमित्त नारायण के चरणों में ध्यान रखिएगा यमदूतों की दृष्टि आकर्षित करने और चेतना लुप्त हो जाने से कम पाँच में वृद्धि का कोई रक्षक नहीं होता
तब है
ज्ञान से युक्त हो में चित्त में प्रवेश होने से ही नहीं भूलता और झा भरे आदि पुत्र आदि जाति के लोग घाटी उत्तम दांडेकर नेत्रों से देख लगता है
तभी जीव को लो निर्मित काल पाश से यमदूत से ही एक ओर से ही बंद होगा इसलिए खींचता है
तब में कुछ नहीं कर सकता
रूप से देखता है
हिचकी बढ़ने और श्वास रुकनी तरह तालों के सूखने से को मृत्यु के पकड़े हुए का कोई आश्चर्य नहीं होता संसार रूपी चक्र में आरोन हुआ यमदूतों से घिरा का फारसी में वर्धा महान रखी है मैं कहां जाऊं इस प्रकार से
वे जी विचार करता है
क्या करूँ कहां जाऊं क्या का क्या क्या तुम इस प्रकार चिंतन करता कृतज्ञता पिता से मोड हो शीघ्र ही प्राणों को दिया था
मार्ग यमदूतों से घसीटता हुआ यातना की तह में प्राप्त होकर यहां पर जाकर जी
यम यातना का दुख भोगता है उन्हें खेलने को को भर से शरीर को केसर कटोरी चंदन कपूर आदि लगाकर फरार घोषित किया था जिससे अनेक गहनों से शोभित और वस्त्रों से आच्छादित किया था दृश्य है
वायु के निकट घूमते ही छूने के आयोग के और देखने के लिए भी अयोग्य नहीं जाता है
फिर कोई ही को क्षणमात्र न रखकर घर से निकालने लगते ही कभी शरीर का श्रेय जलाकर क्षण मात्र में भस्म कर दिया जाता है
अथवा श्रृंगार ग्रंथ कुत्ते इस को खा जाते फिर ये करोड़ों जन्मों तक खड़ी दृष्टिगोचर नहीं होता जादूगर के समान उत्पन्न जादू तरीके जगह नहीं मेरी माता मेरे पिता मेरे गुरुजन मेरे
ऐसी कौन प्रतिज्ञा करता है जीव के कर्मों को ही लेकर और लोक में जाता है जिसे मार्क मिली पति को के विश्राम के लिए छाया का कोई छा जाता है
ऐसा ही यह है कि लोग है
जिस प्रकार से पक्षी संध्याकाल में वृक्ष पर आकर बसे रख कर लेती और प्रातःकाल उठकर एक दूसरे को त्यागकर अब
अविनाश इस देश में चली जाती ही इस प्रकार दी जाते जाति के पुरुषों का समान भी कर्मानुसार अपने कुटुम्ब आदि भी जन्म लेकर इस फिट होते ही कम समाप्त होते ही अपनी गति को प्राप्त थी थी मनुष्य को
थे कि प्राणियों के समागम को पथिक समाचर के समान भी यह था मृत्यु के बीच से जल्द और जरूर के बीच से मृत्यु होती है
अर्थात जो उत्पन्न हुआ है उसका अवश्य नाश होगा और नाश हुआ अवश्य जहरीले का ये प्लान इसी प्रकार घटी यंत्र के तमाम निरंतर विल्मा करता रहता है
रामचंद्र घर के वीर के प्राप्त होने से इस प्रकार से ब्रांड का जन्म और मृत्यु होती है यह माह हमारा थे
जीवन मरण दोनों में ही माह दुख का भी इस व्याधि को दूर करने के लिए मिनिट मेरे सिवाय दूसरी औषधि नहीं है