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बुधवार, 14 फ़रवरी 2024

दीक्षा सेठ

#14feb 
दीक्षा सेठ
14 फ़रवरी 1990
दिल्ली, भारत
पेशा अभिनेत्री
इनका जन्म दिल्ली में 14 फरवरी 1990 में हुआ था। उनके पिता आईटीसी में कार्य करते थे। उनका लगभग कुछ कुछ समय में स्थानांतरण होता रहता था। इस कारण वह मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जा चुके हैं।
दीक्षा सेठ एक भारतीय फिल्म एक्ट्रेस हैं। वह वर्ष 2009 में फेमिना मिस इंडिया की फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं, दीक्षा ने अपना एक्टिंग डेब्यू तेलुगु ड्रामा वेदम से किया था।

निजी जीवन 
दीक्षा सेठ का  जन्म 14 फरवरी 1990 को हल्द्वानी में हुआ था। दीक्षा के पिता आईटीसी में कार्यरत थे, जिसके चलते उनका कई ट्रान्सफर हुआ, और दीक्षा भारत के कई शहरों में रही, जिनमे मुंबई ,चेन्नई ,कोलकाता, राजस्थान ,गुजरात , उत्तर प्रदेश अदि शामिल हैं। दीक्षा ने अपनी थर्ड क्लास तक की पढ़ाई चेन्नई में की, उसके बाद वह मेयो कॉलेज चली गयी, जहां से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।

करियर 
कॉलेज के पहले साल में दीक्षा ने फेमिना मिस इंडिया में भाग लिया और वह फाइनलिस्ट भी रहीं।  एक्टिंग की दुनिया में दीक्षा को पहला रोल तेलुगु ड्रामा वेदम से मिला, उसके बाद उन्होंने कई तेलुगु फिल्मों में काम किया जिनेम वांटेडम निप्पू, रेबेल जैसी फिल्मे शामिल हैं।

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

मधुबाला

#14feb
#23feb 
मधुबाला
मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी
प्रसिद्ध नाम मधुबाला
जन्म 14 फ़रवरी, 1933
जन्म भूमि दिल्ली
मृत्यु 23 फ़रवरी, 1969
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
अभिभावक अताउल्लाह ख़ान
पति/पत्नी किशोर कुमार
कर्म भूमि मुम्बई, महाराष्ट्र
कर्म-क्षेत्र अभिनेत्री
मुख्य फ़िल्में मुग़ल ए आज़म, हावडा ब्रिज, कालापानी, महल, झुमरू तथा चलती का नाम गाड़ी आदि।
नागरिकता भारतीय

जीवन परिचय

सिने जगत् में मधुबाला के नाम से मशहूर महान् अभिनेत्री मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी का जन्म दिल्ली शहर के मध्य वर्गीय मुस्लिम परिवार में 14 फ़रवरी, 1933 को हुआ था। मधुबाला अपने माता-पिता की 5वीं सन्तान थी। उनके माता-पिता के कुल 11 बच्चे थे। मधुबाला के पिता अताउल्लाह ख़ान दिल्ली में एक कोचमैन के रूप मे कार्यरत थे। मधुबाला के जन्म के कुछ समय बाद उनका परिवार दिल्ली से मुम्बई आ गया।

अभिनय की शुरुआत

बचपन के दिनों से ही मधुबाला अभिनेत्री बनने का सपना देखा करती थी। सबसे पहले वर्ष 1942 में मधुबाला को बतौर बाल कलाकार बेबी मुमताज़ के नाम से फ़िल्म 'बसंत' में काम करने का मौक़ा मिला। बेबी मुमताज़ के अभिनय से प्रभावित होकर हिन्दी फ़िल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री देविका रानी ने उनसे अपने बैनर 'बाम्बे टाकीज' की फ़िल्म 'ज्वार भाटा' में काम करने की पेशकश की लेकिन मधुबाला उस फ़िल्म मे काम नहीं कर सकी। मधुबाला को फ़िल्म अभिनेत्री के रूप में पहचान निर्माता निर्देशक केदार शर्मा की वर्ष 1947 मे प्रदर्शित फ़िल्म 'नील कमल' से मिली। इस फ़िल्म के असफल होने से भले ही वह कुछ ख़ास पहचान नहीं बना पायीं लेकिन बतौर अभिनेत्री उनका सिने कैरियर अवश्य शुरू हो गया।

सफलता

वर्ष 1949 तक मधुबाला की कई फ़िल्में प्रदर्शित हुई लेकिन इनसे मधुबाला को कुछ ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ। वर्ष 1949 मे बॉम्बे टाकीज के बैनर तले बनी फ़िल्म 'महल' की कामयाबी के बाद मधुबाला फ़िल्म इंडस्ट्री मे अपनी पहचान बनाने में सफल हो गयीं। इस फ़िल्म का एक गीत 'आयेगा आने वाला...' सिने दर्शक आज भी नहीं भूल पाये है। वर्ष 1950 से 1957 तक का वक्त मधुबाला के सिने कैरियर के लिये बुरा साबित हुआ। इस दौरान उनकी कई फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल हो गयीं। लेकिन वर्ष 1958 में उनकी फागुन, हावडा ब्रिज, काला पानी तथा चलती का नाम गाड़ी की सफलता ने एक बार फिर मधुबाला को शोहरत की बुंलदियों पर पहुँचा दिया। फ़िल्म हावड़ाब्रिज में मधुबाला ने क्लब डांसर की भूमिका अदा कर दर्शकों का मन मोह लिया। इसके साथ ही वर्ष 1958 में हीं प्रदर्शित फ़िल्म चलती का नाम गाड़ी में उन्होंने अपने कॉमिक अभिनय से दर्शकों को हंसाते-हंसाते लोटपोट कर दिया।

स्वास्थ्य

पचास के दशक मे स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान मधुबाला को यह अहसास हुआ कि वह हृदय की बीमारी से ग्रसित हो चुकी है। इस दौरान उनकी कई फ़िल्में निर्माण के दौर में थी। मधुबाला को लगा यदि उनकी बीमारी के बारे में फ़िल्म इंडस्ट्री को पता चल जायेगा तो इससे फ़िल्म निर्माता को नुकसान होगा इसलिये उन्होंने यह बात किसी को नहीं बतायी। के.आसिफ की फ़िल्म मुग़ल ए आज़म के निर्माण मे लगभग दस वर्ष लग गये। इस दौरान मधुबाला की तबीयत काफ़ी ख़राब रहा करती थी फिर भी उन्होंने फ़िल्म की शूटिंग जारी रखी क्योंकि मधुबाला का मानना था कि अनारकली के किरदार को निभाने का मौक़ा बार-बार नहीं मिल पाता है। वर्ष 1960 में जब मुग़ल ए आज़म प्रदर्शित हुई तो फ़िल्म में मधुबाला के अभिनय को देख दर्शक मुग्ध हो गये। हालांकि बदकिस्मती से इस फ़िल्म के लिये मधुबाला को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्म फेयर पुरस्कार नहीं मिला लेकिन सिने दर्शक आज भी ऐसा मानते है कि मधुबाला उस वर्ष फ़िल्म फेयर पुरस्कार की हकदार थी।

विवाह

साठ के दशक में मधुबाला ने फ़िल्मों मे काम करना काफ़ी हद तक कम कर दिया था। चलती का नाम गाड़ी और झुमरू के निर्माण के दौरान ही मधुबाला किशोर कुमार के काफ़ी क़रीब आ गयी थीं। मधुबाला के पिता ने किशोर कुमार को सूचित किया कि मधुबाला इलाज के लिये लंदन जा रही है और लंदन से आने के बाद ही उनसे शादी कर पायेगी। लेकिन मधुबाला को यह अहसास हुआ कि शायद लंदन में हो रहे आपरेशन के बाद वह जिंदा नहीं रह पाये और यह बात उन्होंने किशोर कुमार को बतायी इसके बाद मधुबाला की इच्छा को पूरा करने के लिये किशोर कुमार ने मधुबाला से शादी कर ली। शादी के बाद मधुबाला की तबीयत और ज़्यादा ख़राब रहने लगी हालांकि इस बीच उनकी पासपोर्ट (1961), झुमरू (1961) ब्वॉय फ्रेंड (1961), हाफ टिकट (1962) और शराबी (1964) जैसी कुछ फ़िल्में प्रदर्शित हुई। वर्ष 1964 में एक बार फिर से मधुबाला ने फ़िल्म इंडस्ट्री की ओर रुख़ किया। लेकिन फ़िल्म चालाक के पहले दिन की शूटिंग में मधुबाला बेहोश हो गयी और बाद में यह फ़िल्म बंद कर देनी पड़ी।

⚰️मृत्यु

अपनी दिलकश अदाओं से लगभग दो दशक तक सिने प्रेमियों को मदहोश करने वाली महान् अभिनेत्री मधुबाला ने मुम्बई में 23 फ़रवरी 1969 को इस दुनिया से अलविदा कह दिया।

बुधवार, 6 दिसंबर 2023

प्रसिद्ध संगीतकाऱ गायक अरुण कुमार मुखर्जी

संगीत निर्देशक और को याद करते हुए
प्रसिद्ध संगीतकाऱ गायक अरुण कुमार मुखर्जी की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
🎂14 फरवरी को जन्म हुआ था
⚰️06 दिसंबर 1955
अरुण कुमार मुखर्जी हिंदी सिनेमा जगत के मशहूर म्यूजिक कंपोजर और एक्टर थे। उन्हें आज भी ज्वार भाटा (1944), परिणीता(1953) और समाज (1954) जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है। अरुण कुमार प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार दादा मुनि के मौसेरे भाई थे
06 दिसंबर 1955 में उनका निधन हो गया

अरुण कुमार मुखर्जी के बारे किसी के पास विस्तृत जानकारी हो तो कृपया शेयर करें

अभिनेता, अरुण कुमार मुखर्जी जो

🎂आज ही के दिन 14 फरवरी को जन्म हुआ था

1912. प्रारंभ में वह एक व्यवसायी थे

के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ना चाहते थे

अपने चचेरे भाई अशोक की सफलता

कुमार। उन्होंने अपना कार्यकाल शुरू किया

बॉम्बे टॉकीज़ में एक गायक के रूप में

निर्मला (1938)। उसकी सफलता

जिसके लिए फिल्म थी बंधन (1940)।

उन्होंने यादगार गाने गाए. पर चला गया

जैसी फिल्मों के लिए संगीत तैयार करना

परिणीता (1953), शमशीर (1953),

Samaj (1954), Teen Bhai (1955),

हातिमताई (1947), और प्रतिमा (1945)।

उन्होंने ज्वार भाटा में भी अभिनय किया था

(1944), अंजान (1941), बेटी (1941),

Naya Sansar (1941), Azad (1940),

Bandhan (1940) and Kangan (1939),

और मां के लिए प्लेबैक प्रस्तुत किया

(1952), Andolan (1951), Mashaal

(1950), Muqaddar (1950), Sangram

(1950), Grah Laxmi (1949), Sehra

(1948), Mulaqat (1947), Samaj Ko

बादल डालो (1947), प्रतिमा (1945),
संगीत निर्देशक और को याद करते हुए
प्रसिद्ध संगीतकाऱ गायक अरुण कुमार मुखर्जी की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
🎂14 फरवरी को जन्म हुआ था
⚰️06 दिसंबर 1955
अरुण कुमार मुखर्जी हिंदी सिनेमा जगत के मशहूर म्यूजिक कंपोजर और एक्टर थे। उन्हें आज भी ज्वार भाटा (1944), परिणीता(1953) और समाज (1954) जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है। अरुण कुमार प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार दादा मुनि के मौसेरे भाई थे
06 दिसंबर 1955 में उनका निधन हो गया

अरुण कुमार मुखर्जी के बारे किसी के पास विस्तृत जानकारी हो तो कृपया शेयर करें

अभिनेता, अरुण कुमार मुखर्जी

🎂आज ही के दिन 14 फरवरी को जन्म हुआ था

1912. प्रारंभ में वह एक व्यवसायी थे

के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ना चाहते थे

अपने चचेरे भाई अशोक की सफलता

कुमार। उन्होंने अपना कार्यकाल शुरू किया

बॉम्बे टॉकीज़ में एक गायक के रूप में

निर्मला (1938)। उसकी सफलता

जिसके लिए फिल्म थी बंधन (1940)।

उन्होंने यादगार गाने गाए. पर चला गया

जैसी फिल्मों के लिए संगीत तैयार करना

परिणीता (1953), शमशीर (1953),

Samaj (1954), Teen Bhai (1955),

हातिमताई (1947), और प्रतिमा (1945)।

उन्होंने ज्वार भाटा में भी अभिनय किया था

(1944), अंजान (1941), बेटी (1941),

Naya Sansar (1941), Azad (1940),

Bandhan (1940) and Kangan (1939),

और मां के लिए प्लेबैक प्रस्तुत किया

(1952), Andolan (1951), Mashaal

(1950), Muqaddar (1950), Sangram

(1950), Grah Laxmi (1949), Sehra

(1948), Mulaqat (1947), Samaj Ko

बादल डालो (1947), प्रतिमा (1945),

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...