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रविवार, 3 सितंबर 2023

शक्ति कपूर

शक्ति कपूर 
जन्म सुनील कपूर ;
 🎂03 सितंबर 1952
एक भारतीय अभिनेता और हास्य अभिनेता हैं जो बॉलीवुड फिल्मों में दिखाई देते हैं। हिंदी फिल्मों में अपनी खलनायक और हास्य भूमिकाओं के लिए जाने जाने वाले , उन्होंने 600 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। 1980 और 1990 के दशक में, कपूर ने अभिनेता असरानी और कादर खान के साथ 100 से अधिक फिल्मों में हास्य या दुष्ट टीम के रूप में काम किया।वह 2011 में भारतीय रियलिटी शो बिग बॉस में एक प्रतियोगी थे।
जन्म
सुनील कपूर
🎂03 सितम्बर 1952
दिल्ली , भारत
अल्मा मेटर
किरोड़ीमल कॉलेज
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया
व्यवसायों
अभिनेताहास्य अभिनेता
सक्रिय वर्ष
1974-वर्तमान
जीवनसाथी
शिवांगी कपूर ​( 1982 )
कपूर का जन्म दिल्ली में एक पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में कपड़े की दुकान चलाते थे । बॉलीवुड में लंबे संघर्ष के बाद , कपूर को सुनील दत्त ने तब देखा जब वह अपने बेटे संजय दत्त को लॉन्च करने के लिए रॉकी बना रहे थे । फिर उन्हें फिल्म में प्रतिपक्षी के रूप में लिया गया। लेकिन दत्त को लगा कि उनका नाम "सुनील कपूर" उनके खलनायक अभिनय के साथ न्याय नहीं करेगा और इसलिए, "शक्ति कपूर" का जन्म हुआ।
बॉलीवुड में एक संघर्षशील व्यक्ति के रूप में, शुरुआत में शक्ति कपूर ने फिल्मों में कई महत्वहीन भूमिकाएँ निभाईं, जबकि वह एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उपयुक्त भूमिका की तलाश में थे। उन्होंने 1977 में फिल्म खेल खिलाड़ी का (दरमेंद्र और हेमा मालिनी अभिनीत) से अपनी बॉलीवुड यात्रा शुरू की। 1980-81 के वर्षों ने शक्ति कपूर को उनकी दो फिल्मों - कुर्बानी और रॉकी - के साथ बॉलीवुड में एक अभिनेता के रूप में स्थापित किया, जहां वह खलनायक थे । 1983 में, कपूर ने हिम्मतवाला और सुभाष घई निर्देशित फिल्म हीरो में भूमिकाएँ निभाईं । इन दोनों फिल्मों में कपूर ने खलनायक की भूमिका निभाई थी।

1990 के दशक में, उन्होंने अक्सर सकारात्मक हास्य भूमिकाओं में विविधता लायी और उन्हें राजा बाबू जैसी फिल्मों में समान कुशलता के साथ निभाया । डेविड धवन की फिल्म राजा बाबू में नंदू की भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता श्रेणी में फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया और एक बार पुरस्कार भी जीता। उनकी कुछ हास्य भूमिकाएँ ' इंसाफ' में इंस्पेक्टर भिंडे, 'बाप नंबरी बेटा दस नंबरी' में प्रसाद , 'अंदाज अपना अपना' में क्राइम मास्टर गोगो , ' तोहफा' , ' चालबाज ' में बटुकनाथ और ' बोल राधा बोल' में गूंगा की भूमिका में हैं ।

कपूर मिमिक्री कलाकारों के लिए एक संदर्भ रहे हैं जो उनकी शैली और संवादों का अनुकरण करते हैं जैसे कि फिल्म तोहफा से "आओ लोलिता", फिल्म चालबाज से "मैं नन्हा सा छोटा सा बच्चा हूं" और "नंदू सबका बंधु, समझता नहीं है यार"। फिल्म राजा बाबू . 2000 के बाद से, कपूर प्रियदर्शन की हंगामा , हलचल , चुप चुप के , मालामाल वीकली और मलयालम रीमेक भागम भाग जैसी फिल्मों में नियमित रूप से काम करते रहे हैं । उन्होंने कोलकाता की कुछ बंगाली फिल्मों में भी काम किया, उड़िया फिल्म और एक असमिया फीचर फिल्म में। 2011 में, वह रियलिटी टेलीविजन शो बिग बॉस 5 में एक प्रतियोगी के रूप में थे। वह अपनी भाभी पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ संगीतमय कॉमेडी आसमान से गिरे खजूर पे अटके में दिखाई दिए हैं । वह सर्वोकॉन के ब्रांड एंबेसडर भी हैं।
विवाद
मार्च 2005 में, इंडिया टीवी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें कथित तौर पर शक्ति कपूर को फिल्म उद्योग में प्रवेश के बदले में एक महत्वाकांक्षी अभिनेत्री के रूप में प्रस्तुत एक अंडरकवर रिपोर्टर से यौन संबंध बनाने की मांग करते हुए दिखाया गया था। उन्होंने अंडरकवर रिपोर्टर से कहा: "मैं तुमसे प्यार करना चाहता हूं...तुम्हें चूमना चाहता हूं" इंडिया टीवी के अनुसार, यह बॉलीवुड में प्रचलित कास्टिंग काउच की घटना को उजागर करने के लिए एक स्टिंग ऑपरेशन था। इस घटना ने बॉलीवुड में विवाद खड़ा कर दिया और कपूर को फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मोशन पिक्चर्स और टीवी प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स ने उन पर प्रतिबंध नहीं लगाने का फैसला किया क्योंकि उनके खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ था। हालाँकि, एक सप्ताह बाद, फ़िल्म और टेलीविज़न प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने प्रतिबंध हटा दिया।

कपूर ने दावा किया कि संबंधित वीडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई है और उन्हें फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि अंडरकवर रिपोर्टर ने उनसे कई बार मुलाकात की और धमकी दी कि अगर वह उनके द्वारा बुक किए गए होटल के कमरे में नहीं आएंगे तो आत्महत्या कर लेंगे।

शनिवार, 2 सितंबर 2023

मनोज जोशी

मनोज जोशी
🎂03 सितम्बर 1965
उनके पिता नवनीत जोशी थे और उनके छोटे भाई राजेश जोशी भी एक अभिनेता थे। ⚰️भाई: राजेश जोशी की 1998 में मृत्यु हो गई। जोशी उत्तरी गुजरात में हिम्मतनगर के पास अदपोदरा गांव के रहने वाले हैं ।
 हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। इन्होने अपना करियर मराठी थिएटर से आरम्भ किया था,साथ ही साथ इन्होने अपना योग्यदान गुजराती एवं हिन्दी थिएटर् में भी दिया। सन १९९८ से अब तक इन्होने ६० से अधिक फ़िल्मो में अभिनय किया है, जिनमें अधिकतर हास्य अभिनय है।
जन्म
अदापोदारा, तालुका : हिम्मतनगर,जिला: साबरकांठा जिला गुजरात, भारत
राष्ट्रीयता
भारतीय
उपनाम
मनोज जोशी
शिक्षा
ललित कला स्नातक
पेशा
अभिनेता, हास्य अभिनेता
प्रसिद्धि का कारण
चक्रवर्तीं अशोक सम्राट, भोपाल (फिल्म), देवदास (उपन्यास), धूम (2004 फ़िल्म), गुरु (२००७ फ़िल्म), रेडी(2011 फिल्म), भूल भुलैया (2007 फ़िल्म), भागम भाग (2006 फ़िल्म), विवाह (2006 फ़िल्म)

2015 
किस किसको प्यार करूँ || ||

2008 मेरे बाप पहले आप चिराग 
2007 भूल भुलैया 
2007 गुरु घनश्याम भाई 
2006 फिर हेरा फेरी कचरा सेठ 
2006 विवाह भगत 
2006 गोलमाल 
2006 चुप चुप के 
2006 भागम भाग 
2006 हमको दीवाना कर गये 
2005 मुंबई गॉडफ़ादर 
2005 क्योंकि 
2005 शिकार अमृत पाटील 
2005 गरम मसाला 
2004 धूम 
2004 हलचल 
2004 आन माणकराव 
2003 हंगामा 
2002 देवदास

पंडित किशन जी महाराज

पंडित किशन महाराज
🎂जन्म 3 सितंबर, 1923
जन्म भूमि काशी, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 4 मई, 2008
मृत्यु स्थान वाराणसी
अभिभावक पंडित हरि महाराज
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र तबला वादक
पुरस्कार-उपाधि पद्मश्री, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी सम्मान
प्रसिद्धि तबला वादक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी किशन महाराज तबले के उस्ताद होने के साथ साथ मूर्तिकार, चित्रकार, वीर रस के कवि और ज्योतिष के मर्मज्ञ भी थे।
किशन महाराज का जन्म काशी के कबीरचौरा मुहल्ले में 3 सितंबर 1923 को एक संगीतज्ञ के परिवार में हुआ। कृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्म होने के कारण उनका नाम किशन पड़ा। उन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षों में पिता पंडित हरि महाराज से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। पिता के देहांत के बाद उनके चाचा एवं पंडित बलदेव सहाय के शिष्य पंडित कंठे महाराज ने उनकी शिक्षा का कार्यभार संभाला।

तबला वादन
किशन महाराज ने तबले की थाप की यात्रा शुरू करने के कुछ साल के अंदर ही उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ाँ, पंडित ओंकार ठाकुर, उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली खां, पंडित भीमसेन जोशी, वसंत राय, पंडित रवि शंकर, उस्ताद अली अकबर खान जैसे बड़े नामों के साथ संगत की। कई बार उन्होंने संगीत की महफिल में एकल तबला वादन भी किया। इतना ही नहीं नृत्य की दुनिया के महान् हस्ताक्षर शंभु महाराज, सितारा देवी, नटराज गोपी कृष्ण और बिरजू महाराज के कार्यक्रमों में भी उन्होंने तबले पर संगत की। उन्होंने एडिनबर्ग और वर्ष 1965 में ब्रिटेन में कॉमनवेल्थ कला समारोह के साथ ही कई अवसरों पर अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर प्रतिष्ठा अर्जित की। उनके शिष्यों में वर्तमान समय के जाने माने तबला वादक पंडित कुमार बोस, पंडित बालकृष्ण अय्यर, सुखविंदर सिंह नामधारी सहित अन्य नाम शामिल हैं।

प्रभावशाली व्यक्तित्व
आदरणीय स्वर्गीय पंडित किशन महाराज प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी थे, माथे पर एक लाल रंग का टिक्का हमेशा लगा रहता था, वे जब संगीत सभाओं में जाते, संगीत सभायें लय ताल से परिपूर्ण हो गंधर्व सभाओं की तरह गीत, गति और संगीतमय हो जाती। तबला बजाने के लिए वैसे पद्मासन में बैठने की पद्धति प्रचलित हैं, किंतु स्वर्गीय पंडित किशन महाराज जी दोनों घुटनों के बल बैठ कर वादन किया करते थे, ख्याल गायन के साथ उनके तबले की संगीत श्रोताओं पर जादू करती थी, उनके ठेके में एक भराव था, और दांये और बांये तबले का संवाद श्रोताओं और दर्शकों पर विशिष्ट प्रभाव डालता था। अपनी युवा अवस्था में पंडित जी ने कई फ़िल्मों में तबला वादन किया, जिनमें नीचा नगर, आंधियां, बड़ी माँ आदि फ़िल्में प्रमुख हैं। कहते हैं न महान् कलाकार एक महान् इंसान भी होते हैं, ऐसे ही महान् आदरणीय स्वर्गीय पंडित किशन महाराज जी भी थे, उन्होंने बनारस में दूरदर्शन केन्द्र स्थापित करने के लिए भूख हड़ताल भी की और संगत कलाकारों के प्रति सरकार की ढुलमुल नीति का भी पुरजोर विरोध किया।[1]

बिंदास जीवन शैली
किशन महाराज का ज़िंदगी जीने का अन्दाज़ बहुत बिंदास रहा। उन्होंने ज़िंदगी को हमेशा 'आज' के आइने में देखा और अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ बिंदास जिया। लुंगी कुर्ते में पूरे मुहल्ले की टहलान और पान की दुकान पर मित्रों के साथ जुटान ताज़िंदगी उनका शगल बना रहा। मर्ज़ी हुई तो भैंरो सरदार को एक्के पर साथ बैठाया और घोड़ी को हांक दिया। तबीयत में आया तो काइनेटिक होंडा में किक मारी और पूरे शहर का चक्कर मार आए।

दिनचर्या
उनकी दिनचर्या पूजा पाठ, टहलना, रियाज, अपने शौक़ पूरे करना, मित्रों से गप्पे मारना था। यह सब ज़िंदगी की आखिरी घड़ी तक जारी रहा। वे बड़ी बेबाकी से कहते थे कि मैं कोई उलझन या दुविधा नहीं पालता बल्कि उसे जल्दी से जल्दी दूर कर देता हूं। ताकि न रहे बांस और न बजे बांसुरी। साठ साल पहले शेविंग के दौरान मूंछें सेट करने में एक तरफ छोटी तो दूसरी तरफ बड़ी हो जाने की दिक्कत महसूस की तो झट से उसे पूरी तरह साफ़ करा दिया। इसके बाद फिर कभी मूंछ रखने की जहमत नहीं उठाई। उनकी दिनचर्या बड़ी नियमित थी। प्रात: छह बजे तक उठ जाते थे। बगीचे की सफाई, चिड़ियों को दाना पानी और फिर टहलने निकल जाते थे।

पसंद-नापसंद
किशन महाराज का खानपान का भी अपना अलग स्टाइल था। दाल, रोटी, चावल के साथ छेना या केला और लौकी चाप उन्हें काफ़ी पसंद था। गर्मी के सीजन में दोपहर में सप्ताह में दो तीन रोज सत्तू भी खाते थे। परंपरागत बनारसी नाश्ता पूड़ी-कचौड़ी उन्हें पसंद नहीं था। कभी-कभार किसी पार्टी में पंडित जी पैंट-शर्ट में भी जलवा बिखेरते दिख जाते थे। मगर अलीगढ़ी पायजामा और कुर्ता उनका पसंदीदा पहनावा था। गहरेबाजी, पतंगबाजी और शिकार के शौकीन रहे पंडित जी क्रिकेट और हॉकी में भी ख़ासी दिलचस्पी रखते थे।[2]

सम्मान और पुरस्कार
लय भास्कर, संगीत सम्राट, काशी स्वर गंगा सम्मान, संगीत नाटक अकादमी सम्मान, ताल चिंतामणि, लय चक्रवती, उस्ताद हाफिज़ अली खान व अन्य कई सम्मानों के साथ पद्मश्री व पद्म विभूषण अलंकरण से इन्हें नवाजा गया।

निधन
किशन महाराज 3 सितम्बर 1923 की आधी रात को ही इस धरती पर आए थे और 4 मई, 2008 की आधी रात को ही वे इस धरती को छोड़, स्वर्ग की सभा में देवों के साथ संगत करने हमेशा के लिए चले गए। उनके जाने से भारत ने एक युगजयी संगीत दिग्गज को खो दिया।

रविवार, 23 जुलाई 2023

उत्तम कुमार

अभिनेता फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, गायक और संगीतकार उत्तम कुमार
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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
अरुण कुमार चटर्जी
प्रसिद्ध नाम उत्तम कुमार
🎂जन्म 03 सितम्बर, 1926
जन्म भूमि कोलकाता, बंगाल
⚰️मृत्यु 24 जुलाई, 1980
मृत्यु स्थान पश्चिम बंगाल
पति/पत्नी गौरी चटर्जी
संतान गौतम कुमार चटर्जी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र बांग्ला और हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'छोटी सी मुलाक़ात', 'अमानुष', 'आनंद आश्रम', 'क़िताब', 'दूरियां' आदि।
विद्यालय 'साउथ सबर्बन स्कूल (मेन)', कोलकाता; 'गोयेनका कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स एंड बिजनेस ऐडमिनिस्ट्रेशन'
प्रसिद्धि अभिनेता, निर्माता-निर्देशक, संगीतकार
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख सुचित्रा सेन, सिनेमा
अन्य जानकारी अभिनेता उत्तम कुमार की बतौर नायक पहली फ़िल्म 'दृष्टिदान' थी, जिसे मशहूर निर्देशक नितिन बोस ने निर्देशित किया था। कोलकाता में हाजरा अंचल में उनके नाम पर 'उत्तम थियेटर' है।
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उत्म कुमार हिंदी बांग्ला फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। 
उनका मूल नाम 'अरुण कुमार चटर्जी' था। मुख्य रूप से बंगाली सिनेमा में काम करने वाले उत्तम कुमार एक अभिनेता होने के साथ-साथ फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, गायक और संगीतकार भी थे। जिस तरह हिन्दी सिनेमा में राज कपूर और नरगिस की जोड़ी याद की जाती है, उसी तरह बंगाली सिनेमा में उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन का कोई मुकाबला नहीं था। बंगाली सिनेमा में उत्तम कुमार को 'महानायक' की पदवी दी गई है।
अभिनेता उत्तम कुमार की बतौर नायक पहली फ़िल्म 'दृष्टिदान' थी, जिसे मशहूर निर्देशक नितिन बोस ने निर्देशित किया था। सुचित्रा सेन के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई। सुचित्रा के साथ उनकी 'सप्तपदी', 'पौथे होलो देरी', 'हारानो सुर', 'चावा पावा', 'बिपाशा', 'जीवन तृष्णा' और 'सागरिका' जैसी फ़िल्में बेहद लोकप्रिय रहीं। बंगाली के साथ-साथ उन्होंने कई हिन्दी फ़िल्मों में भी अभिनय किया, जैसे-

'छोटी सी मुलाक़ात' - 1967 (स्वयं निर्माता)
'अमानुष' - 1975
'आनंद आश्रम' - 1977
'क़िताब' - 1979
'दूरियां' - 1979
उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन का कोई मुकाबला नहीं था। प्रेम को इस तीव्रता से वे अपने अभिनय में व्यक्त करते थे कि दर्शक दंग रह जाते थे। यही वजह रही कि दर्शक इस जोड़ी से कभी बोर नहीं हुए। दो दशक तक तीस फ़िल्मों में दोनों ने अपने अभिनय के रंग बिखेरे और इनमें से ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं। उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन बंगाली सिनेमा के व्यवसाय को एक बार फिर ऊपर की ओर ले गए, क्योंकि जब उन्होंने बंगाली सिनेमा में कदम रखा था, तब वहां के फ़िल्म उद्योग की हालत खस्ता थी। ऐसे में उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन के स्टारडम ने दर्शकों के बीच पहचान बनाई और बंगाली फ़िल्में फिर सफल होने लगीं। फ़िल्म 'अग्निपरीक्षा' से उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की जोड़ी सफल हुई थी। दोनों ने फ़िल्म में इस कदर डूब कर रोमांस किया कि कई लोग उन्हें पति-पत्नी मानने लगे। फ़िल्मी पर्दे पर जिस तरह से वे रोमांस करते थे, उस कारण आज भी कई लोग मानते हैं कि उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन में प्रेम था। पर्दे पर दर्शक दोनों को खुशहाल जोड़ी के रूप में देखना पसंद करते थे। फ़िल्म 'शिल्पी' में उत्तम कुमार के किरदार की आखिर में मौत दिखाई गई और इस कारण फ़िल्म फ्लॉप हो गई थी। सु‍चित्रा और उत्तम कुमार बेहतरीन कलाकार थे। दोनों साथ काम करते तो उनका अभिनय और निखर जाता था। उन्होंने कई अलग-अलग भूमिकाएँ अभिनीत कीं और अपने बेहतरीन अभिनय से यादगार बनाया। बिना कहे दोनों बहुत कुछ कह जाते थे और दोनों के रोमांटिक सीन में पर्दा जगमगाने लगता था। उन पर फ़िल्माए गए गीत सुपरहिट रहे।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...