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शनिवार, 18 नवंबर 2023

सुष्मिता सेन


सुष्मिता सेन भारत की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और मॉडल है।

🎂जन्म 19 नवंबर 1975 को तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में हुआ।

सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) एक भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और सौंदर्य रानी हैं, जिन्हें 1994 में फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स का ताज पहनाया गया था और बाद में उन्होंने 18 साल की उम्र में मिस यूनिवर्स 1994 की प्रतियोगिता जीती थी। सुष्मिता प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय महिला है। अपने करियर में, सुष्मिता हिंदी, तमिल और बंगाली जैसे विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में दिखाई दी हैं।

सुष्मिता सेन बॉलीवुड की जानी-मानी भारतीय मॉडल और अभिनेत्री हैं. उनका जन्‍म 19 नवंबर 1975 को हैदराबाद में हुआ था. सुष्मिता सेन वायुसेना के सेवानिवृत विंग कमांडर सुबीर सेन और ज्वैलरी डिजाइनर सुभा सेन की बेटी हैं. सुष्मिता सेन पहली बार 1994 में मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद सुर्खियों में आईं. खास बात यह थी कि इस खिताब के लिए उनकी टक्कर ऐश्वर्या राय के साथ थी. उन्होंने ऐश्वर्या को पछाड़ते हुए मिस यूनिवर्स का खिताब हासिल किया. उसी साल ऐश्वर्या राय ने ‘मिस व‌र्ल्ड’ का खिताब जीता.

1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म ‘दस्तक’ से सुष्मिता सेन ने फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा. इस फिल्म में उन्होंने अपने ही चरित्र को जीया. हालांकि फिल्म को सफलता नहीं मिली. दूसरी फ़िल्म ‘जोर’ भी नहीं चली. उनको पहली सफलता फ़िल्म ‘सिर्फ तुम’ के ‘दिलबर दिलबर गाने’ में मिली, जिसमें उनकी अदाओं को दर्शकों ने पसंद किया. डेविड धवन की फ़िल्म ‘बीवी नंबर वन’ में सुष्मिता सेन ने बीवी नंबर टू का रोल किया और यह उनकी पहली हिट फ़िल्म साबित हुई. उनकी चर्चित फ़िल्मों में ‘आंखें’, ‘समय’, ‘मैं हूं ना’, ‘बेवफा’, ‘मैंने प्यार क्यों किया’, ‘चिंगारी’, ‘दस्तक’,‘सिर्फ तुम’, ‘बीवी नंबर वन’, ‘आगाज’, ‘फिजा’, ‘नो प्रॉब्लम’ जैसी फिल्में शामिल हैं.

फ़िल्मी कैरियर

1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म 'दस्तक' से सुष्मिता सेन ने फ़िल्मी दुनिया में पर्दापण किया, जिसमें उन्होंने अपने ही चरित्र को जिया। फ़िल्म को सफलता नहीं मिली। दूसरी फ़िल्म 'जोर' भी नहीं चली। उनको पहली सफलता फ़िल्म 'सिर्फ तुम' के दिलबर दिलबर गाने में मिली, जिसमें उनकी अदाओं को दर्शकों ने पसंद किया। डेविड धवन की फ़िल्म 'बीवी नंबर वन' में सुष्मिता सेन ने बीवी नंबर टू का रोल किया और यह उनकी पहली हिट फ़िल्म साबित हुई। उनकी चर्चित फ़िल्मों में आंखें, समय, मैं हूं ना, बेवफा, मैंने प्यार क्यों किया और फ़िल्म 'चिंगारी' के नाम शामिल हैं।

प्रमुख फ़िल्में

दस्तक, ज़ोर ,सिर्फ तुम , बीवी नंबर वन , हिंदुस्तान की कसम,  आगाज , बस इतना सा ख्वाब है ,  क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता , फिलहाल , तुमको न भूल पाएंगे , आंखें , लीला , समय ,  पैसा वसूल , मैं हूं न , वास्तुशात्र ,  बेवफा , मैं ऐसा ही हूं ,  मैंने प्यार क्यों किया ,  चिंगारी ,  राम गोपाल वर्मा की आग ,  डू नॉट डिस्टर्ब ,  दूल्हा मिल गया ,  नो प्रॉब्लम

मॉडलिंग कैरियर

फेमिना मिस इंडिया

1994 में, किशोरी के रूप में, सुष्मिता ने फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लिया। उन्होंने मिस यूनिवर्स 1994 प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा करते हुए ‘फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स’ का शीर्षक जीता।

मिस यूनीवर्स

मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में, सुष्मिता प्रारंभ में तीसरे स्थान पर रही। सुष्मिता बाद के राउंड में दूसरे, पांचवें और तीसरे स्थान पर रही और आखिर में मिस यूनिवर्स 1994 का खिताब और ताज जीता। वह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय थी।

मिस यूनिवर्स 2016

पेजेंट जीतने के 23 साल बाद 65 वें मिस यूनिवर्स 2016 सौंदर्य पृष्ठ के जज में वह एक के रूप में थी। पेजेंट 30 जनवरी, 2017 को फिलीपींस के मेट्रो मनीला के मॉल ऑफ एशिया एरेना, पासय में हुआ था।

सम्मान और पुरस्कार

o   वर्ष 1994 में सुष्मिता सेन ने मिस इंडिया व मिस यूनिवर्स का ख़िताब जीता ।

o   उन्हें राजीव गांधी पुरस्कार, आईआईएफए (IIFA) पुरस्कार, दो फिल्मफेयर पुरस्कार, स्टार स्क्रीन अवार्ड्स और तीन ज़ी सिने इत्यादि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है ।

o   1994 में मिस इण्डिया का ख़िताब जितने के बाद इन्होंने ऐश्वर्या रॉय को बैकस्टेज में धकेल दिया था । जिसकी वजह से इनकी आलोचना भी हुई थी ।

o   वर्ष 2012 में एथेंस हवाई अड्डे पर इनका पर्स चोरी हो गया था । उसमे इनका डेविट कार्ड और पासपोर्ट भी था । इस वजह से इन्हें एयरपोर्ट पर अपनी पहचान साबित करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था ।

रोचक जानकारियां

o   इनका वास्तविक नाम सुष्मिता सेन है ।

o   इन्हें दो उपनामों सुश और टीटू से भी जाना जाता है ।

o   ये मुख्य रूप से सिनेमा जगत में अभिनेत्री का काम करती हैं ।

o   इनका जन्म 19 नवम्बर 1975 को हुआ था ।

o   इनका जन्म तेलंगाना के हैदराबाद में हुआ था ।

o   ये मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली हैं ।

o   इनकी माता का नाम सुभ्रा सेन तथा पिता का नाम सुबीर सेन है ।

o   एबकि माता आभूषण डिजाइनर हैं ।

o   इनके पिता एयर फ़ोर्स में अधिकारी हैं ।

o   इनके भाई का नाम राजीव सेन है ।

o   इनकी बहन का नाम नीलम सेन है ।

o   इन्हें कविता और गद्य लिखने का शौक है ।

o   इनके घर का पता 6 वीं मंजिल, बीच क्वीन, यारी रोड, वर्सोवा, अंधेरी पश्चिम, मुंबई है ।

o   इन्होंने की सारी फिल्मों में काम किया है ।

सोमवार, 12 जून 2023

दारासिंह


*दारासिंह*
*जन्म की तारीख और समय: 19 नवंबर 1928, अमृतसर*
*मृत्यु की जगह और तारीख: 12 जुलाई 2012, मुम्बई*
*बच्चे: विन्दु दारा सिंह, अमरिक सिंह रंधावा, परदुमन रंधावा, लवलीन सिंह,*
*पत्नी: सुरजीत कौर रंधावा (विवा. 1961–2012),* *बचनो कौर (विवा. 1942–1952)*
उन्नीस सौ साठ के दशक में पूरे भारत में उनकी फ्री स्टाइल कुश्तियों का बोलबाला रहा। बाद में उन्होंने अपने समय की मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ हिन्दी की स्टंट फ़िल्मों में प्रवेश किया। दारा सिंह ने कई फ़िल्मों में अभिनय के अतिरिक्त निर्देशन व लेखन भी किया। उन्हें टी० वी० धारावाहिक रामायण में हनुमान के अभिनय से अपार लोकप्रियता मिली। उन्होंने अपनी आत्मकथा मूलत: पंजाबी में लिखी थी जो 1993 में हिन्दी में भी प्रकाशित हुई। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया। वे अगस्त 2003 से अगस्त 2009 तक पूरे छ: वर्ष राज्य सभा के सांसद रहे।

7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल मुम्बई में भर्ती कराया गया किन्तु पाँच दिनों तक कोई लाभ न होता देख उन्हें उनके मुम्बई स्थित निवास पर वापस ले आया गया जहाँ उन्होंने 12 जुलाई 2012 को सुबह साढ़े सात बजे दम तोड़ दिया।

1947 में दारा सिंह सिंगापुर आ गये। वहाँ रहते हुए उन्होंने भारतीय स्टाइल की कुश्ती में मलेशियाई चैम्पियन तरलोक सिंह को पराजित कर कुआला लंपुर में मलेशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप जीती। उसके बाद उनका विजय रथ अन्य देशों की चल पड़ा और एक पेशेवर पहलवान के रूप में सभी देशों में अपनी धाक जमाकर वे 1952 में अपने वतन भारत लौट आये। भारत आकर 1954 में वे भारतीय कुश्ती चैम्पियन बने।
इसके बाद उन्होंने कामनवेल्थ देशों का दौरा किया और ओरिएंटल चैम्पियन किंग काँग को भी परास्त कर दिया। किंग कांग के बारे मे ये भी कहा जाता है की दारा सिंह ने किंगकांग के मुछ के बाल उखाड़ दिए थे। बाद में उन्हें कनाडा और न्यूजीलैण्ड के पहलवानों से खुली चुनौती मिली। अन्ततः उन्होंने.कलकत्ता में हुई कामनवेल्थ कुश्ती चैम्पियनशिप में कनाडा के चैम्पियन जार्ज गारडियान्का एवं न्यूजीलैण्ड के जान डिसिल्वा को धूल चटाकर यह चैम्पियनशिप भी अपने नाम कर ली। यह 1959.की घटना है।

दारा सिंह ने उन सभी देशों का एक-एक करके दौरा किया जहाँ फ्रीस्टाइल कुश्तियाँ लड़ी जाती थीं। आखिरकार अमरीका के विश्व चैम्पियन लाऊ थेज को 29 मई 1968 को पराजित कर वे फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैम्पियन बन गये। उन्होंने पचपन वर्ष तक पहलवानी की और पाँच सौ मुकाबलों में किसी एक में भी पराजय का मुँह नहीं देखा। 1983 में उन्होंने अपने जीवन का अन्तिम मुकाबला जीता और भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथों अपराजेय पहलवान का खिताब अपने पास बरकरार रखते हुए कुश्ती से सम्मानपूर्वक संन्यास ले लिया।

।☑️यूँ तो दारा सिंह ने पचपन वर्ष के फ़िल्मी कैरियर में कुल मिलाकर एक सौ दस से अधिक फ़िल्मों में बतौर अभिनेता, लेखक एवं निर्देशक के रूप में काम किया किन्तु उनकी कुछ उल्लेखनीय फ़िल्मों का विवरण इस प्रकार है:

↔️2012 अता पता लापता अतिथि
2007 जब वी मैट दादा जी
2006 दिल अपना पंजाबी हरदम सिंह
2006 क्या होगा निम्मो का अमरदीप सहगल (दादाजी)
2004 पारिवारिक व्यवसाय 
2003 सीमा हिन्दुस्तान की जालिम सिंह
2003 कल हो न हो चढा चाचा
2002 शरारत श्री गुजराल
2001 फ़र्ज़ तायाजी
2000 दुल्हन हम ले जायेंगे 
1999 दुर नही ननकाना बख्तावर सिंह
1999 ज़ुल्मी बाबा ठाकुर
1999 दिल्लगी वीर सिंह
1998 ऑटो चालक 
1998 गुरू गोबिंद सिंह 
1997 लव कुश हनुमान
1995 राम शस्त्र पुलिस कमिश्नर
1994 करन 
1993 अनमोल दादा शमसेर
1993 बैचेन 
1992 प्रेम दीवाने लोहा लिंह
1991 मौत की सजा प्यारा सिंह
1991 धर्म संकट दारा
1991 अज़ूबा महाराजा कर्ण सिंह
1990 प्रतिग्या दिलावर सिंह
1990 नाकाबंदी धरम सिंह
1989 घराना विजय सिंह पहलवान
1988 पाँच फौलादी उस्ताद जी
1988 महावीरा दिलेर सिंह
1986 कृष्णा-कृष्णा बलराम
1986 कर्मा धर्म
1985 मर्द राजा आज़ाद सिंह
1981 खेल मुकद्दर का 
1978 भक्ति में शक्ति दयानु
1978 नालायक पहलवान
1976 जय बजरंग बली हनुमानजी
1975 वारण्ट प्यारा सिंह
1975 धरम करम भीम सिंह
1974 दुख भंजन तेरा नाम डाकू दौले सिंह
1974 कुँवारा बाप 
1973 मेरा दोस्त मेरा धर्म 
1970 मेरा नाम जोकर रिंग मास्टर
1970 आनन्द पहलवान
1965 सिकन्दर-ए-आज़म सिकन्दर
1965 लुटेरा 
1962 किंग कौंग जिंगु/किंग कॉग
1955 पहली झलक पहलवान दारा सिंह
1952 संगदिल

दारा सिंह  की रियल स्टोरी और स्टूडियो


दारा सिंह 6'2'' की लंबाई में लहराती मांसपेशियों के साथ खड़ा है, यह पहलवान कई वर्षों से सिनेमा का हिस्सा रहा है और रामायण में हनुमान के चित्रण के लिए जाना जाता है। दारा सिंह पर मूल बातें। दारा सिंह रंधावा का जन्म 19 नवंबर 1928 को हुआ था। अमृतसर, पंजाब, भारत। उन्हें पहलवानी नामक एक प्रकार की कुश्ती में प्रशिक्षित किया गया था और उन्होंने लू थेज़ और स्टैनिस्लास ज़बिसको जैसे पहलवानों को लिया था। दारा सिंह की मूवी। दारा सिंह ने रामायण के टेलीविज़न संस्करण में अनुमन की भूमिका निभाई। उन्होंने संगदिल (1952), शेर दिल (1965), तूफान (1969), दुल्हन हम ले जाएंगे (2000) और जब वी मेट जैसी कई फिल्मों में काम किया।

पिता का नाम :श्री सूरत सिंह
मां का नाम :शरीमती बलवंत कौर
जन्म की तारीख :19 - 11 - 1928
जन्म स्थान :ग्राम धरमूचक, जिला। अमृतसर - पंजाब)
वैवाहिक स्थिति :11 मई 1961 को शादी की
जीवनसाथी का नाम :श्रीमती सुरजीत कौर रंधावा
बच्चों की संख्या :तीन बेटियां और दो बेटे
पेशा :कृषि, कुश्ती, सिने कलाकार (निर्माता और निर्देशक)
संभाले गए पद :
  • अगस्त 2003 राज्य सभा के लिए मनोनीत सितंबर 2003 फरवरी 2004 सदस्य
  • मानव संसाधन विकास समिति फरवरी 2004 - 2006 सदस्य
  • अगस्त 2004 के बाद से युवा मामलों और खेल मंत्रालय के लिए सलाहकार समिति सदस्य
  • सूचना प्रौद्योगिकी समिति 2006 के बाद से सदस्य
  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए सलाहकार समिति
प्रकाशित पुस्तकें :मेरी आत्मकथा (पंजाबी), 1989
देखे गए देश:चीन को छोड़कर पूरी दुनिया में कुश्ती टूर्नामेंट के सिलसिले में
अन्य सूचना :अध्यक्ष
  • 1997 से अखिल भारतीय जाट समाज
  • 1987 से बॉम्बे जाट समाज
  • 2005 से सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन

सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां, साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियां और अन्य विशेष रुचियों ने
दस अन्य पंजाबी और हिंदी फिल्मों के साथ एक हिंदी फिल्म मेरा देश मेरा धरम और एक पंजाबी फिल्म सवा लाख से एक लड़ाई (ऐतिहासिक) लिखी, निर्देशित और निर्मित की है।
  • 1953 में पेशेवर भारतीय कुश्ती चैंपियनशिप जीती
  • 1959 में कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में कनाडा के चैम्पियन जार्ज गोडियांको को हराकर
  • 1968 में अमेरिका के लू थेजे को हराकर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप
  • भारत सरकार द्वारा फिल्म जग्गा के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जो स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा प्रस्तुत किया गया था
↔️दारा फिल्म स्टूडियो की स्थापना 1978 में श्री दारा सिंह रंधावा (विश्व प्रसिद्ध पहलवान और फिल्म अभिनेता) द्वारा की गई थी। स्टूडियो 1980 से फिल्म स्टूडियो के रूप में चालू है। दारा स्टूडियो परिसर के भीतर हर सुविधा के साथ एक स्व-निहित छोटा शहर है।

चंडीगढ़-अमृतसर राजमार्ग की शुरुआत में स्थित, दारा स्टूडियो पंजाब के मोहाली में एक मील का पत्थर है। आसान पहुँच के साथ एक प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ से अधिक भूमि में फैला हुआ; यह चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ 17 किमी दूर है, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से केवल 16 किमी और मोहाली रेलवे स्टेशन से 10.4 किमी दूर है।

स्टूडियो 1980 से शूटिंग के लिए काम कर रहा है और उत्तरी भारत में पहला फिल्म स्टूडियो है । फिल्म की शूटिंग के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं परिसर में उपलब्ध हैं।

स्टूडियो फीचर फिल्मों से लेकर संगीत वीडियो तक सब कुछ शूट करने के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। हमारी सुविधाओं में शामिल हैं:

  • एक विशाल हॉल – 110 फीट x 65 फीट x 40 फीट (ऊंचाई)।
  • बाहरी सेटों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह के साथ बड़ा मैदान
  • ढाबा, पुलिस स्टेशन, कोर्ट रूम और ऑफिस के लिए रेडीमेड सेट।
  • बाहरी शूटिंग के लिए परिसर के भीतर एक आम का बाग
  • फोटो शूट के लिए पूरी तरह सुसज्जित क्रोमा कमरा
  • संलग्न बाथरूम के साथ कमरे, पूरी तरह से सुसज्जित विश्राम कक्ष तैयार है।

 दारा स्टूडियो

फेज 6, एनएच 21
वेरका मिल्क प्लांट के पास
एसएएस नगर (मोहाली)
पंजाब 160055

दारा फिल्म स्टूडियो की स्थापना 1978 में श्री दारा सिंह रंधावा (विश्व प्रसिद्ध पहलवान और फिल्म अभिनेता) द्वारा की गई थी। स्टूडियो 1980 से फिल्म स्टूडियो के रूप में चालू है। दारा स्टूडियो परिसर के भीतर हर सुविधा के साथ एक स्व-निहित छोटा शहर है।

चंडीगढ़-अमृतसर राजमार्ग की शुरुआत में स्थित, दारा स्टूडियो पंजाब के मोहाली में एक मील का पत्थर है। आसान पहुँच के साथ एक प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ से अधिक भूमि में फैला हुआ; यह चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ 17 किलोमीटर दूर है, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से केवल 16 किलोमीटर और मोहाली रेलवे स्टेशन से 10.4 किलोमीटर दूर है।

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भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...