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रविवार, 4 फ़रवरी 2024

पूजा कुमार

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पूजा कुमार

🎂: 04 फ़रवरी 1977

 सेंट लुइस, मिसूरी, संयुक्त राज्य अमेरिका
भाई: पराग कुमार
 एक इंडो-अमेरिकन अभिनेत्री हैं जो भारतीय फिल्मों में अपने काम के लिए जानी जाती हैं।
मिस इंडिया यूएसए का खिताब जीतने के बाद, उन्होंने एक अमेरिकी अभिनेत्री, निर्माता और मॉडल के रूप में अपना वैश्विक करियर शुरू किया।
भारतीय अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उन्हें चमकीले नए सितारों में से एक के रूप में चुना, जहां उन्होंने उस मान्यता के लिए लड़ रहे 60,000 से अधिक प्रतियोगियों को देखा।
उन्होंने उन्हें प्रियदर्शन से मिलवाया और उन्होंने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की मेजबानी करने का अवसर दिया, जिसका 50 से अधिक देशों में सीधा प्रसारण किया गया।
वह मैन ऑन ए लेज, ब्रॉल इन सेल ब्लॉक 99, बॉलीवुड हीरो, (एसएनएल स्टार क्रिस कट्टन के साथ अभिनीत), फ्लेवर्स, हिडिंग दिव्या, पार्क शार्क, बॉलीवुड बीट्स, नाइट ऑफ मेंहदी, एनीथिंग फॉर जैसी हॉलीवुड फीचर फिल्मों में दिखाई दी हैं। आप, चाक के साथ ड्राइंग, और गांठें अर्बन।
उनकी अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में विश्वरूपम और अभिनेता कमल हासन और उत्तम विलेन के साथ विश्वरूपम 2 शामिल हैं।
इन्हें हिंदी और तमिल दोनों भाषाओं में एक साथ शूट किया गया था।
उन्होंने राजशेखर अभिनीत पीएसवी गरुड़ वेगा से टॉलीवुड में पदार्पण किया। वह भारत के चैनल वी के लिए बीपीएल ओए के लिए वीजे थीं, जावेद जाफरी के साथ बजाज की लहरें नामक एक भारतीय फिल्म शो, और ज़ी टीवी के लिए मिलान, इटली में जागो और जीतो नामक गेम शो की मेजबानी की।

पूजा कुमार भट्ट का जन्म 4 फरवरी, 1977 को सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था ।  उनके माता-पिता, रविंदर और निरुपमा भट्ट, 1970 में भारत से आए थे।उन्होंने वाशिंगटन विश्वविद्यालय में दाखिला लिया , जहां उन्होंने डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की राजनीति विज्ञान और वित्त में ।  वह भारतीय शास्त्रीय नृत्य में भी प्रशिक्षित हैं । कुमार ने 1995 में मिस इंडिया यूएसए का खिताब जीता। कुमार की शादी विशाल जोशी से हुई है। उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 2020 में हुआ।

वरुण शर्मा

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वरुण शर्मा
 
🎂जन्म 04 फरवरी 1990

वरुण शर्मा का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और वह दिल्ली से हैं। उनके पिता दिल्ली से हैं और माँ एक मराठी हैं। उन्होंने मारवाह इंस्टीट्यूट, नोएडा से एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से जनसंचार की पढ़ाई की । उन्होंने मॉडलिंग और थिएटर किया. 🌹


 एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं जिन्होंने फुकरे (2013) और किस किसको प्यार करूं (2015) सहित व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में अभिनय किया है।
वित्तीय विफलताओं की एक श्रृंखला के बाद, उनकी सबसे अधिक कमाई वाली रिलीज़ एक्शन कॉमेडी दिलवाले (2015), फुकरे रिटर्न्स (2017), और छिछोरे (2019) के साथ आई।शर्मा ने अपनी शिक्षा सनावर के लॉरेंस स्कूल में पूरी की, बाद में कक्षा 11 और 12 को पूरा करने के लिए जालंधर के एपीजे स्कूल में स्थानांतरित हो गए। उन्होंने आईटीएफटी चंडीगढ़ से मीडिया, मनोरंजन और फिल्म प्रौद्योगिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
📽️2013 फुकरे दिलीप "
रब्बा मैं क्या करूं 

📽️ 2014 यारां दा कैचअप
अंग्रेज 
डॉली की डोली
📽️2015किस किस को प्यार करूं 
दिलवाले
📽️2017 Raabta 
फुकरे रिटर्न्स
📽️2018 फ्राईडे 
2019अर्जुन पटियाला
खानदानी शफाखाना 
छिछोरे
📽️2020 जय मम्मी दी
📽️2021 रूही
चुट्ज़पाह
📽️2022 फोन भूत
सर्कस
📽️2023 डार्क डार्लिंग 
फुकरे 3

बुधवार, 24 जनवरी 2024

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी

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#24jan 
पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी
🎂जन्म 04 फ़रवरी, 1922
जन्म भूमि गडग, कर्नाटक
⚰️मृत्यु 24 जनवरी, 2011
मृत्यु स्थान पुणे, महाराष्ट्र
अभिभावक गुरुराज जोशी
संतान श्रीनिवास जोशी (पुत्र)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शास्त्रीय गायन
मुख्य रचनाएँ 'मिले सुर मेरा तुम्हारा'
विषय शास्त्रीय संगीत
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्‍न, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म श्री
प्रसिद्धि हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी पंडित जोशी किराना घराने के गायक हैं। उन्हें उनके ख़्याल शैली और भजन गायन के विशेष रूप से जाना जाता है।

उन्होंने 19 साल की उम्र से गायन शुरू किया था और वे सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे। भीमसेन जोशी ने कर्नाटक को गौरवान्वित किया है। भारतीय संगीत के क्षेत्र में इससे पहले एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी, उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान, पंडित रविशंकर और लता मंगेशकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी योग्यता का आधार उनकी महान् संगीत साधना है। देश-विदेश में लोकप्रिय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान् गायकों में उनकी गिनती होती थी। अपने एकल गायन से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में नए युग का सूत्रपात करने वाले पंडित भीमसेन जोशी कला और संस्कृति की दुनिया के छठे व्यक्ति थे, जिन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्‍न' से सम्मानित किया गया था। 'किराना घराने' के भीमसेन गुरुराज जोशी ने गायकी के अपने विभिन्‍न तरीकों से एक अद्भुत गायन की रचना की। देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान मिलने के बारे में जब उनके पुत्र श्रीनिवास जोशी ने उन्हें बताया था तो भीमसेन जोशी ने पुणे में कहा था कि-

"मैं उन सभी हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायकों की तरफ से इस सम्मान को स्वीकार करता हूं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी संगीत को समर्पित कर दी।"
वर्ष 1941 में भीमसेन जोशी ने 19 वर्ष की उम्र में मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी। उनका पहला एल्बम 20 वर्ष की आयु में निकला, जिसमें कन्नड़ और हिन्दी में कुछ धार्मिक गीत थे। इसके दो वर्ष बाद वह रेडियो कलाकार के तौर पर मुंबई में काम करने लगे। अपने गुरु की याद में उन्होंने वार्षिक 'सवाई गंधर्व संगीत समारोह' प्रारम्भ किया था। पुणे में यह समारोह हर वर्ष दिसंबर में होता है। भीमसेन के पुत्र भी शास्त्रीय गायक एवं संगीतकार हैं।

बुलंद आवाज़ तथा संवेदनशीलता
पंडित भीमसेन जोशी को बुलंद आवाज़, सांसों पर बेजोड़ नियंत्रण, संगीत के प्रति संवेदनशीलता, जुनून और समझ के लिए जाना जाता था। उन्होंने 'सुधा कल्याण', 'मियां की तोड़ी', 'भीमपलासी', 'दरबारी', 'मुल्तानी' और 'रामकली' जैसे अनगिनत राग छेड़ संगीत के हर मंच पर संगीत प्रमियों का दिल जीता। पंडित मोहनदेव ने कहा, "उनकी गायिकी पर केसरबाई केरकर, उस्ताद आमिर ख़ान, बेगम अख़्तर का गहरा प्रभाव था। वह अपनी गायिकी में सरगम और तिहाईयों का जमकर प्रयोग करते थे। उन्होंने हिन्दी, कन्नड़ और मराठी में ढेरों भजन गाए थे।
Pt. Bhimsen Joshi
भीमसेन जोशी को 1972 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया।
'भारत सरकार' द्वारा उन्हें कला के क्षेत्र में सन 1985 में 'पद्म भूषण' पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पंडित जोशी को सन 1999 में 'पद्म विभूषण' प्रदान किया गया था।
4 नवम्बर, 2008 को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्‍न' भी जोशी जी को मिला। कला और संस्कृति के क्षेत्र से संबंधित उनसे पहले सत्यजीत रे, कर्नाटक संगीत की कोकिला एम.एस.सुब्बालक्ष्मी, पंडित रविशंकर, लता मंगेशकर और उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ को 'भारत रत्न' मिल चुका था। भीमसेन जोशी दूसरे शास्त्रीय गायक रहे, जिन्हें 'भारत रत्न' प्रदान किया गया था।
'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका था।
अविस्मरणीय संगीत
पंडित भीमसेन जोशी को मिले सुर मेरा तुम्हारा के लिए याद किया जाता है, जिसमें उनके साथ बालमुरली कृष्णा और लता मंगेशकर ने जुगलबंदी की। 1985 से ही वे ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के जरिये घर-घर में पहचाने जाने लगे थे। तब से लेकर आज भी इस गाने के बोल और धुन पंडित जी की पहचान बने हुए हैं।

फ़िल्मों के लिए गायन
पंडित भीमसेन जोशी ने कई फ़िल्मों के लिए भी गाने गाए। उन्होंने ‘तानसेन’, ‘सुर संगम’, ‘बसंत बहार’ और ‘अनकही’ जैसी कई फ़िल्मों के लिए गायिकी की। पंडित जी शराब पीने के शौकीन थे, लेकिन संगीत कैरियर पर इसका प्रभाव पड़ने पर 1979 में उन्होंने शराब का पूरी तरह से त्याग कर दिया।

भीमसेन जोशी बड़े सादे इंसान थे। उन्हें कार चलाने का शौक था। मर्सिडीज की कारें उनकी कमज़ोरी थीं। जवान थे तो तैराकी, योग और फ़ुटबॉल खेलने का शौक रखते थे। शराब पीना उनका शौक था, लेकिन कहते हैं कि कॅरियर पर असर होते देखकर उन्होंने पीना छोड़ दिया था। संगीतज्ञों के बीच एक कहावत है- "जब तक कला जवान होती है, तब तक कलाकार बूढ़ा हो चुका होता है।" जोशी जी भी तन से बूढ़े हुए और उनका निधन 24 जनवरी, 2011 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। आज के संगीत जगत् में भीमसेन जोशी घर के एक बड़े बुजुर्ग की तरह थे। बुजुर्ग, जिनके रूप में एक पूरा का पूरा युग हमारे बीच मौजूद रहता है, जिनकी उपस्थिति ही शुभ का, सुरक्षा का अहसास देती है, बताती है कि हम अनाथ नहीं हुए हैं। जोशी जी के जाने के साथ ही समकालीन संगीत के सिर से एक बड़े-बुजुर्ग का हाथ उठ गया।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...