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बुधवार, 17 जनवरी 2024

नफीसा अली

#18jan 
नफीसा अली

🎂जन्म18 जनवरी 1957
कोलकाता , पश्चिम बंगाल , भारत
अन्य नामों
नफीसा अली सोढ़ी
व्यवसाय
अभिनेत्री, मॉडल, राजनीतिज्ञ
सक्रिय वर्ष
1978-वर्तमान
राजनीतिक दल
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (2021—वर्तमान) 
अन्य राजनीतिक
संबद्धताएँ
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
समाजवादी पार्टी
जीवनसाथी आरएस सोढ़ी
नफीसा अली का जन्म कोलकाता में हुआ था , जो एक बंगाली मुस्लिम व्यक्ति अहमद अली और एंग्लो-इंडियन विरासत की रोमन कैथोलिक महिला फिलोमेना टॉरेसन की बेटी थीं। नफीसा के दादा एस वाजिद अली एक प्रमुख बंगाली लेखक थे। उनकी मौसी (पिता की बहन) ज़ैब-उन-निसा हमीदुल्लाह थीं , जो एक पाकिस्तानी पत्रकार और नारीवादी थीं। नफीसा का संबंध बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानी और सैनिक बीर प्रतीक अख्तर अहमद से भी है। नफ़ीसा की माँ अब ऑस्ट्रेलिया में बस गयी हैं। 

नफ़ीसा ने ला मार्टिनियर कलकत्ता में भाग लिया , जहाँ वह हाउस कैप्टन थीं। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद द्वारा पढ़ाए गए वेदांत का भी अध्ययन किया है, जिन्होंने चिन्मय मिशन ऑफ वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग केंद्र शुरू किया था।

उनके पति पोलो खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त कर्नल आरएस सोढ़ी हैं। शादी के बाद, उन्होंने काम करना बंद कर दिया और अपने तीन बच्चों: बेटियों अरमाना, पिया और बेटे अजीत पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।  18 साल के ब्रेक के बाद वह फिल्म उद्योग में लौट आईं।
नफीसा अली को कई क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल हैं। वह 1972 से 1974 तक राष्ट्रीय तैराकी चैंपियन थीं। 1976 में, उन्होंने फेमिना मिस इंडिया का खिताब जीता, मिस इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया और दूसरी रनर-अप घोषित की गईं। अली 1979 में कलकत्ता जिमखाना में जॉकी भी थे।
उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें शशि कपूर के साथ जुनून (1979) , अमिताभ बच्चन के साथ मेजर साब (1998) , बेवफा (2005), लाइफ इन ए... मेट्रो (2007) और यमला पगला दीवाना (2010) प्रमुख हैं। ) धर्मेंद्र के साथ ।

उन्होंने ममूटी के साथ बिग बी (2007) नामक एक मलयालम फिल्म में भी अभिनय किया है , और एड्स जागरूकता फैलाने के लिए काम करने वाली संस्था एक्शन इंडिया से जुड़ी हैं।

राजनीतिक कैरियर

नफीसा अली ने 2004 का लोकसभा चुनाव दक्षिण कोलकाता से लड़ा लेकिन असफल रहीं । 5 अप्रैल 2009 को, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व दोषसिद्धि के आधार पर संजय दत्त को अयोग्य ठहराए जाने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ा। फिर वह नवंबर 2009 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में फिर से शामिल हो गईं और कहा कि वह जीवन भर के लिए कांग्रेस में लौट रही हैं।  हालाँकि, वह 2022 गोवा विधान सभा चुनाव से पहले अक्टूबर 2021 में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं ।

📽️
जुनून (1979)
आतंक (1996)
मेजर साब (1998)
ये जिंदगी का सफर (2001)
बेवफ़ा (2005)
बिग बी (2007) मैरी टीचर के रूप में
लाइफ इन ए... मेट्रो (2008)
गुजारिश (2010)
लाहौर (2010)
यमला पगला दीवाना (2011)
साहेब, बीवी और गैंगस्टर 3 (2018) राजमाता यशोधरा के रूप में
बिलाल (2022) मैरी टीचर के रूप में
उंचाई (2022)

मोनिका बेदी

#18jan

मोनिका बेदी 

🎂: 18 जनवरी 1975 , चब्बेवाल

भाई: बॉबी बेदी
माता-पिता: डॉक्टर प्रेम कुमार बेदी, शकुन्तला बेदी
मोनिका ने अबू सलेम से शादी की, अपना धर्म बदलकर इस्लाम अपना लिया, अपना नाम फौजिया रख लिया, भोपाल और हैदराबाद से पासपोर्ट के दो सेट हासिल किए और दोनों 2001 में दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में अपने वर्तमान स्थान से पुर्तगाल के लिस्बन में स्थानांतरित हो गए।

एक अभिनेत्री और टेलीविजन प्रस्तुति है। 1990 के दशक के मध्य में उन्होंने हिंदी फिल्मों में शुरुआत की और उनके उल्लेखनीय काम में प्यार इश्क और मोहब्बत और जोड़ी नम्बर वन शामिल हैं। वह बिग बॉस 2 में भाग लेने के बाद और 2013-2014 से स्टार प्लस 'सरस्वतीचंद्र में नकारात्मक चरित्र खेलने के लिए भी जाने जाते हैं। 
2002 में मोनिका को नकली दस्तावेजों के साथ पुर्तगाल जाते समय गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके साथ अबू सलेम भी था। 2006 में मोनिका को मामले में दोषी पाया गया और उन्हें जेल की सजा हुई। नवंबर 2010 में वह जेल से छूटीं।

बेदी एक पंजाबी हैं और उनका जन्म पंजाब के होशियारपुर जिले के चब्बेवाल गांव में प्रेम कुमार बेदी और शकुंतला बेदी के घर हुआ था । उनके माता-पिता 1979 में ड्रामेन , नॉर्वे चले गए। उन्होंने 1995 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की।
बेदी को पहली भूमिका डी. रामानायडू द्वारा निर्मित तेलुगु भाषा की फिल्म ताज महल (1995) में मिली । रामानायडू ने उन्हें शिवय्या और स्पीड डांसर में भी कास्ट किया ।
बेदी टेलीविजन रियलिटी शो बिग बॉस सीजन 2 में प्रतिभागी थीं ।वह रियलिटी शो झलक दिखला जा 3 और देसी गर्ल की प्रतियोगियों में से एक थीं ।

उन्होंने यूनिवर्सल म्यूजिक पर एक आध्यात्मिक संगीत एल्बम के लिए "एकओंकार" मंत्र गाया। 

बेदी ने हरजीत सिंह रिकी द्वारा निर्देशित पंजाबी फिल्म सिरफिरे (2012) में अभिनय किया।

2013 से 2014 तक बेदी ने स्टार प्लस के शो सरस्वतीचंद्र में घुम्मन की नकारात्मक भूमिका निभाई।
📽️
1994 मैं तेरा आशिक 
1995 जो कि सुरक्षा
1995 आशिक मस्ताने
1996 खिलौना
1997 एक फूल तीन कांटे
1997 जियो शान से
1997 तिरछी टोपीवाले
1998 जबाब दिही
1998 ज़ंजीर
1999 कालीचरण
1999 सिकंदर सड़क का 
1999 जानम समझ करो
1999 काल साम्राज्य
1999 लोहपुरुष 
2001 जोड़ी नंबर 1 
2001 प्यार इश्क और मोहब्बत 
2003 टाडा
2012 सिरफिरे सिमरन पंजाबी
2014 रोमियो रांझा रीत कौर पंजाबी
2017 बन्दुकन

दुलारी

#18april
#18jan 
दुलारी
अन्य नाम अम्बिका 

🎂जन्म 18 अप्रॅल, 1928
जन्म भूमि नागपुर, महाराष्ट्र
⚰️मृत्यु 18 जनवरी, 2013
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

अभिभावक विट्ठलराव गौतम डाकतार
पति/पत्नी जगन्नाथ भीखाजी जगताप
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में ‘रोटी’, 'शहनाई', ‘अलबेला’, 'पापी, ‘जीवन ज्योति’, देवदास, ‘आए दिन बहार के’, ‘पड़ोसन’, ‘आराधना’, ‘आया सावन झूम के’, ‘आन मिलो सजना’, ‘कारवां’, ‘सीता और गीता’, ‘हाथ की सफ़ाई’, ‘दीवार’, ‘प्रेम रोग’, ‘अगर तुम न होते’ आदि।
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
भारतीय सिनेमा की जानीमानी अभिनेत्री थीं। हिंदी सिनेमा में मां का ज़िक़्र होते ही दुर्गा खोटे, ललिता पवार, लीला चिटनिस, निरुपा रॉय, कामिनी कौशल और सुलोचना जैसी अभिनेत्रियों के चेहरे ज़हन में घूमने लगते हैं। इन तमाम अभिनेत्रियों की छवि भले ही फ़िल्मी मां की हो लेकिन हिंदी सिनेमा के सुनहरी दौर के दर्शक इस बात से वाक़िफ़ हैं कि इन सभी ने अपने कॅरियर की शुरुआत बतौर हिरोईन की थी और इनमें से कुछ का शुमार तो अपने दौर की कामयाब हिरोईनों में किया जाता था। इसी सूची में एक नाम है दुलारी का, जिन्हें आमतौर पर दर्शक एक सीधी-सादी और ग़रीब फ़िल्मी मां के तौर पर जानते हैं। दुलारी ने भी शुरुआती कुछ फ़िल्में बतौर हिरोईन और साईड हिरोईन की थीं और ‘आना मेरी जान मेरी जान संडे के संडे’ और ‘जवानी की रेल चली जाए’ जैसे ज़बर्दस्त हिट गीत भी दुलारी पर ही फ़िल्माए गए थे।
दुलारी जी के अनुसार, उनके पूर्वज पीढ़ियों पहले उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र से आकर नागपुर में बस गए थे। अपने माता-पिता की दुलारी जी पहली संतान थीं और घर में उनसे छोटे दो भाई थे। यूँ तो दुलारी जी का नाम अम्बिका रखा गया था, लेकिन घर में उन्हें सब राजदुलारी कहकर पुकारते थे जो आगे चलकर सिर्फ़ ‘दुलारी’ रह गया। उनके पिता विट्ठलराव गौतम डाकतार विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन अभिनय का उन्हें इतना शौक़ था कि अभिनेत्री अरुणा ईरानी के नाना की नाटक कंपनी जब नागपुर आई तो नौकरी छोड़कर वे उस कंपनी के साथ मुंबई आ गए। ये सन 1930 के दशक के शुरू का समय था।नेशनल स्टूडियो’ को सोहराब मोदी की कंपनी ‘मिनर्वा मूवीटोन’ ने ख़रीदा तो उन्होंने दुलारी जी को 7 साल के लिए नौकरी पर रखना चाहा। लेकिन कांट्रेक्ट की कुछ शर्तें मंज़ूर न होने की वजह से दुलारी जी ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ‘बॉम्बे टॉकीज़’ की फ़िल्म ‘हमारी बात’ में उन्होंने हीरो जयराज की छोटी बहन की भूमिका की तो ‘अमर पिक्चर्स’ की ‘आदाब अर्ज़’ में वे बतौर सहनायिका नज़र आयीं, जिसमें उनके हीरो गायक मुकेश थे। ये दोनों ही फ़िल्में साल 1943 में बनी थीं।
अगले क़रीब 35 सालों में दुलारी जी ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘मुझे जीने दो’ ‘अपने हुए पराए’ ‘आए दिन बहार के’, ‘अनुपमा’, ‘तीसरी क़सम’, ‘पड़ोसन’, ‘आराधना’, ‘आया सावन झूम के’, ‘चिराग़’, ‘इंतक़ाम’, ‘आन मिलो सजना’, ‘हीर रांझा’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘कारवां’, ‘लाल पत्थर’, ‘बेईमान’, ‘सीता और गीता’, ‘राजा रानी’, ‘अमीर ग़रीब’, ‘हाथ की सफ़ाई’, ‘दीवार’, ‘दो जासूस’, ‘आहुती’, ‘गंगा की सौगंध’, ‘बीवी ओ बीवी’, ‘नसीब’, ‘रॉकी’, ‘प्रेम रोग’, ‘अगर तुम न होते’ और धर्माधिकारी जैसी क़रीब 135 फ़िल्मों में छोटी-बड़ी चरित्र भूमिकाओं में नज़र आयीं। और फिर एक रोज़ उन्होंने ख़ामोशी से फ़िल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया।

दुलारी जी का कहना था, "बढ़ती उम्र के साथ बिगड़ती सेहत का असर मेरे काम पर भी पड़ने लगा था। साल 1989 में बनी फ़िल्म ‘सूर्या’ के एक सीन में मुझे 200 जूनियर आर्टिस्टों की भीड़ के साथ दौड़ना था। निर्देशक इस्माईल श्रॉफ़ के एक्शन कहते ही मैंने दौड़ना शुरू किया। लेकिन गठिया की बीमारी की वजह से मैं कुछ ही दूर जाकर गिर पड़ी। जूनियर आर्टिस्टों की भीड़ मेरे पीछे दौड़ी चली आ रही थी। अभिनेता सलीम ग़ौस ने, जो मेरे बेटे की भूमिका में थे, बहुत मुश्किल से मुझे कुचले जाने से बचाया, और इस प्रयास में उन्हें भी हल्की चोटें आयीं। ऐसे में मैंने रिटायरमेंट ले लेना ही बेहतर समझा। फिर कई साल बाद निर्देशक गुड्डू धनोवा के आग्रह पर उनकी फ़िल्म ‘ज़िद्दी’ में एक भूमिका की। इस तरह साल 1997 में रिलीज़ हुई ‘ज़िद्दी’ मेरी आख़िरी फ़िल्म साबित हुई।"
दुलारी जी के पति का निधन साल 1972 में हुआ। उनकी इकलौती बेटी की शादी हो चुकी थी। अभिनय से सन्यास लेने के बाद कुछ समय तो वे मुंबई में अकेली रहीं। फिर साल 2002 में अपनी बेटी के पास इंदौर चली गयीं। उनके ससुराल पक्ष के कई क़रीबी रिश्तेदार और उनकी सबसे अच्छी सहेली अभिनेत्री पूर्णिमा मुंबई में रहते हैं, इसलिए अक्सर उनका मुंबई आना-जाना होता रहता था। दुलारी जी पिछले काफ़ी समय से अल्ज़ाईमर की बीमारी से पीड़ित थीं और महाराष्ट्र के ही किसी शहर में वृद्धाश्रम में रह रही थीं। 85 साल की दुलारी जी को दिसंबर 2012 के आख़िरी सप्ताह में पूना के एक अस्पताल में आई.सी.यू. में दाख़िल कराया गया था, जहां 18 जनवरी, 2013 की सुबह क़रीब 10 बजे उनका देहांत हो गया।

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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...