18 अगस्त लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
18 अगस्त लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 19 अगस्त 2023

दिलेर मेंहदी

प्रसिद्ध पॉप गायक दलेर मेंहदी के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
🎂18 अगस्त 1967
पंजाबी के मशहूर पॉप गायक दलेर मेंहदी 1995 में अपने पहले एल्बम बोलो ‘ता रा रा रा’ के आते ही छा गए थे. फिर 1997 में उनका गाना आया ‘ना ना ना ना ना रे ना रे ना’. ये गाने दशकों तक लोगों की जुबान पर छाए रहे. दलेर मेहंदी का जन्म 18 अगस्त 1967 को बिहार के पटना में हुआ था. गायक होने के साथ ही दलेर मेहंदी गीतकार, लेखक और रिकॉर्ड प्रोड्यूसर भी हैं.

दलेर मेहंदी के जन्मदिन पर उनके नाम के पीछे की कहानी जरूर सुननी चाहिए, क्योंकि इस सिंगर के नाम की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है. दरअसल, उनके माता-पिता ने उस वक्त डाकू दलेर सिंह के नाम से प्रभावित होकर उनका यह नाम रखा था. जब दलेर बड़े हुए तो मशहूर गायक परवेज मेहंदी के नाम पर उनके नाम के आगे ‘सिंह’ की जगह ‘मेहंदी’ जोड़ दिया गया. इस तरह दलेर सिंह ‘दलेर मेहंदी’ बन गए.

फिल्मों में और फिल्मी गीतों में दलेर मेंहदी की दिलचस्पी शुरू से थी. उनका करियर शुरू भी हो चुका था. शुरुआती दिनों में बोलो तारा रा रा धूम मचा रहा था. कुछ रोज बाद उनके एक दोस्त ने पूछा कि मुंबई में काम कब करोगे? दलेर के मुंह से निकला- जब पाजी बुलाएंगे. दोस्त ने पूछा- कौन धर्मेंद्र पाजी? उन्होंने कहा नहीं बच्चन पाजी. इस बारे में बताते हुए दलेर कहते हैं- “उस रोज कहने को तो मैंने वो बात कह दी लेकिन दोस्त ने पलटकर पूछ लिया कि वो तुझे क्यों बुलाएंगे? मैंने कहा देखना वो मुझे जरूर बुलाएंगे. इस बात को दो महीने ही बीते होंगे कि बच्चन साहब का फोन आ गया”. इसके बाद तो परदे पर बच्चन साहब के साथ दलेर ने ठुमके लगाए.

रिपोर्ट की माने तो बख्शीश सिंह नाम के एक शख्स ने दलेर पर केस दर्ज करवाया था. उसका आरोप था कि दलेर लोगों को विदेश भेजने के लिए मोटी रकम ऐंठते थे. उसने आरोप लगाया था कि दलेर ने 3 लड़कियों सहित 10 लोगों को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर भेजा है. बख्शीश का आरोप था कि दलेर ने उनसे विदेश भेजने के लिए पैसे लिए थे लेकिन उसे विदेश नहीं भेजा और पैसे चट कर गए. दलेर पर लगे आरोपों के अनुसार, दलेर जब विदेशों में शो करने जाते तो अपने साथ कई सिंगरों को विदेश ले जाते. पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि यह धंधा 1998 से जारी था. जिसके बाद दलेर को अरेस्ट कर लिया गया. दलेर मेहंदी के बड़े भाई शमशेर भी इस मामले में आरोपी रहे.
वैसे दलेर मेहंदी ने एक बड़ा बवाल तब भी खड़ा किया था जब उन्होंने यशराज फिल्म्स पर केस कर दिया था. यह केस ‘झूम बराबर झूम’ फिल्म के ट्राइटल ट्रैक को लेकर किया गया था. दलेर का आरोप था कि यशराज ने गाने में उनकी जगह शंकर महादेवन की आवाज डाल दी. बाद में जब यशराज ने कहा कि अमिताभ ऐसा ही चाहते थे तो दलेर ने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता. दरअसल ना ना ना ना ना रे ना रे ना गाना उन्होंने अमिताभ की फिल्म ‘मृत्युदाता’ के लिए ही गाया था. जिसने आज भी अपनी चमक नहीं खोई है

गुरुवार, 17 अगस्त 2023

अरुणा ईरानी

अरुणा ईरानी
जन्म की तारीख और समय: 18 अगस्त 1946 (आयु 76 वर्ष), मुम्बई
पति: सन्देश कोहली (विवा. 1990)
भाई: इंद्र कुमार, आदि ईरानी, फ़िरोज़ ईरानी, सुरेखा ईरानी, चेतना ईरानी, ज़्यादा
माता-पिता: फरीदून ईरानी, शगुना ईरानी
भांजी या भतीजी: श्वेता कुमार
अरुणा ईरानी हिन्दी फिल्मों की एक चरित्र अभिनेत्री हैं। उन्होंने ज्यादातर सहायक भूमिका या चरित्र भूमिकाओं में हिन्दी, कन्नड़, मराठी और गुजराती सिनेमा में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। उनके प्रदर्शन ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक भूमिका के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार में नामांकन दिलाये हैं।
उनके पिता फरीदुन ईरानी ने नाटक मंडली चलाई, और उनकी माँ सगुना अभिनेत्री थीं। वह आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी है और उन्होंने छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उनके परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह सभी बच्चों को शिक्षित कर सके।
🎂18 अगस्त 1946
अरुणा ईरानी मिश्रित ईरानी पारसी और हिंदू पृष्ठभूमि की एक भारतीय अभिनेत्री हैं। अपने समय की एक निपुण अभिनेत्री और नृत्यांगना, अरुणा ईरानी ने लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया है, जिसमें कई यादगार अभिनय का श्रेय उन्हें जाता है। ईरानी फिल्म निर्माता इंद्र कुमार की बहन हैं।
उन्होंने फिल्म निर्देशक कुकू कोहली से शादी की है। 1952 में जन्मी, ईरानी ने फिल्म गूंगा जमना (1961) में अपनी शुरुआत की, जब वह नौ साल की थीं और एक बच्चे के रूप में वैजयंतीमाला का किरदार निभा रही थीं। जहां आरा 1964    फर्ज  1967उपकार(1967) और   आया सावन झूम के (1969 ) जैसी फ़िल्मों में कई छोटी भूमिकाएँ करने के बाद, और औलाद (1968), हमजोली (1970), और नया जैसी फ़िल्मों में कॉमेडियन महमूद के साथ जोड़ी बनाने के बाद ज़माना (1971)।

आखिरकार उन्होंने सुपरहिट  कारवां(1971) में एक आक्रामक जिप्सी महिला के रूप में अपने शानदार प्रदर्शन के साथ प्रसिद्धि हासिल की, जिन्होंने हिंदी, कन्नड़, मराठी और गुजराती सिनेमा में 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है, ज्यादातर सहायक और चरित्र भूमिकाएँ निभाई हैं। इसके बाद उन्होंने जहांआरा जैसी फिल्मों में कई छोटी भूमिकाएँ कीं।

 नायिकाके रूप में सफलता अभी भी उससे दूर है, और विडंबना यह है कि जिन नए अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का उसने समर्थन किया, वे उसके साथ अभिनय करते हुए सितारे बन गए:

उन्होंने फिल्म ज्योति के गाने "थोड़ा रेशम लगता है",  चढ़ती जवानी मेरी चाल मतानी"दिलबर दिल से प्यारे", फिल्म कारवां के "अब जो मिले है",  बॉबी फिल्म के "  मै शायर तो नही            और फिल्म "लावारिस" अपनी तो जैसे तैसे"   अन्य के साथ।

दोनों फिल्मों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक भूमिका के लिए फिल्मफेयर अवार्ड्स में नामांकित किया। वह इस श्रेणी में अधिकतम नामांकन जीतने का रिकॉर्ड रखती हैं और पेट प्यार और पाप और बेटा में उनकी भूमिकाओं के लिए दो बार पुरस्कार प्राप्त किया। जनवरी 2012 में, उन्हें 57वें फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

गुलजार

🎂जन्म की तारीख और समय: 18 अगस्त 1934 , दिना, पाकिस्तान
पत्नी: राखी गुलज़ार (विवा. 1973)
बच्चे: मेघना गुलज़ार
पोता या नाती: समय संधू
इनाम: साहित्य अकादमी पुरस्कार (2002), पद्म भूषण (2004),
ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक नाटककार तथा प्रसिद्ध शायर हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं, परन्तु ब्रज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होंने रचनायएँ कीं।
ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा (जन्म-१८ अगस्त १९३४)हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक नाटककार तथा प्रसिद्ध शायर हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं, परन्तु ब्रज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होंने रचनायएँ कीं। गुलज़ार को वर्ष २००२ में सहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष २००४ में भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष २००९ में डैनी बॉयल निर्देशित फ़िल्म स्लम्डाग मिलियनेयर में उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हें ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
गुलज़ार का जन्म भारत के झेलम जिला पंजाब के दीना गाँव में, जो अब पाकिस्तान में है, १८ अगस्त १९३६ को हुआ था। गुलज़ार अपने पिता की दूसरी पत्नी की इकलौती संतान हैं। उनकी माँ उन्हें बचपन में ही छोड़ कर चल बसीं। माँ के आँचल की छाँव और पिता का दुलार भी नहीं मिला। वह नौ भाई-बहन में चौथे नंबर पर थे। बंटवारे के बाद उनका परिवार अमृतसर (पंजाब, भारत) आकर बस गया, वहीं गुलज़ार साहब मुंबई चले गये। वर्ली के एक गेरेज में वे बतौर मेकेनिक [पेंट के रंग मैचिंग-(डेंटिंग होने पर)] का काम करने लगे और खाली समय में किताबें पढने लगे, और लिखने का आकर्षण बढने लगा। फ़िल्म इंडस्ट्री में उन्होंने बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर काम शुरू किया। बिमल राय की फ़िल्म बन्दिनी के लिए गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा। गुलज़ार त्रिवेणी छ्न्द के सर्जक हैं।
गुलजार द्वारा लिखी गई पुस्तकों की सूची-

चौरस रात (लघु कथाएँ, 1962)
जानम (कविता संग्रह, 1963)
एक बूँद चाँद (कविताएँ, 1972)
रावी पार (कथा संग्रह, 1997)
रात, चाँद और मैं (2002)
रात पश्मीने की
खराशें (2003)
फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ गीतकार - १९७७, १९७९, १९८०, १९८३, १९८८, १९८८, १९९१, १९९८, २००२, २००५
साहित्य अकादमी पुरस्कार २००२ में
पद्मभूषण - २००४ गुलज़ार को भारत सरकार द्वारा सन २००४ में कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं।
ऑस्कर (सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत का) - २००९ में अंग्रेजी चलचित्र 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के गीत 'जय हो' के लिए
ग्रैमी पुरस्कार- २०१० में।
दादा साहब फाल्के सम्मान - २०१३

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...