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रविवार, 31 दिसंबर 2023

बेन किंग्सले

#31dic 
बेन किंग्सले लोकप्रिय हॉलीवुड अभिनेता है। उन्होने 1967 में थिएटर शुरू किया।
बेन किंग्सले का जन्म 

🎂31दिसंबर 1943 में उत्तरी योर्कशायर,  इंग्लैण्ड में हुआ।
पत्नी: डनिएला लैवेंडर (विवा. 2007)
बच्चे: फर्डीनांड किंग्सले, जास्मीन भांजी, एडमंड किंग्सले, ज़्यादा
इनाम: अकेडमी पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, ज़्यादा
माता-पिता: रहीमतुल्ला हरजी भांजी, एना लीना मैरी गुडमैन
नामांकन: अकेडमी पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, ज़्यादा
उन्होने 1972 में पहली फिल्म ‘फीयर इज द की’ रिलीज हुई। इस दौरान टीवी पर काफी काम किया।

1882 में आई फिल्म ‘गांधी’ में उन्होने गांधी की भूमिका निभाई।

इसके लिए बेस्ट एक्टर का ऑस्कर मिला। दो गोल्डन ग्लोब के साथ ग्रैमी, बाफ्टाऔर स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवॉर्ड भी अपने नाम कर चुके है।

जन्म
बेन किंग्सले का जन्म 31दिसंबर 1943 में उत्तरी योर्कशायर,  इंग्लैण्ड में हुआ।

उन्हे कृष्ण पंडित भांजी के नाम से भी जाना जाता है।

उनके पिता का नाम रहिमतुल्ला हरी भांजी था जोकि एक भारतीय डॉक्टर थे तथा उनकी माता का नाम ऐना लीना मेरी एक अभिनेत्री व मॉडल थी। किंग्सले के पिता केन्या में जन्मे गुजराती भारतीय वंश के है; उनके दादा मसालों के व्यापारी थे जो जंजीबार से भारत आए थे जहां किंग्सले 14 की उम्र तक रहे जिसके पश्च्यात वे इंग्लैण्ड चले गए।

वे पेंडल्बरी, सैल्फोर्ड में बड़े हुए। उन्होने चार बार शादी की। उनकी पत्नियों के नाम इस प्रकार है – एंजेला मोरांत (1966–72; तलाकशुदा; 2 बच्चे), एलीसन सूटक्लिफे (1978–92; तलाकशुदा; 2 बच्चे),  अलेक्सैंड्रा क्रिस्टमैन (2003–2005; तलाकशुदा), डैनियला लैवेंडर (2007–अबतक)

करियर
उन्होने 1967 में थिएटर शुरू किया। उन्होने 1972 में पहली फिल्म ‘फीयर इज द की’ रिलीज हुई। इस दौरान टीवी पर काफी काम किया। वे 1998 में बनी फ़िल्म ‘गांधी’ में महात्मा गांधी की भूमिका के लिए जाने जाते है जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्होंने शिंडलर्स लिस्ट (1993), सेक्सी बिस्ट (2000), हाउस ऑफ़ सैंड एंड फोग (2003) और ह्यूगो (2011) जैसी फ़िल्मों में भी अभिनय किया है।

पुरस्कार – बेन किंग्सले की जीवनी
फिल्म ‘गांधी’ के लिए उन्हे बेस्ट एक्टर का ऑस्कर अवॉर्ड प्रदान किया गया।
अकादमी पुरस्कार, बाफ्टा, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार और स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवार्ड्स से नवाज़ा जा चूका है।

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

राजेश दीवाना

#27april
#31dic 
राकेश दीवाना
🎂जन्म 31 दिसंबर 1969
हाथरस , उत्तर प्रदेश , भारत
⚰️मृत27अप्रैल 2014 
इंदौर , मध्य प्रदेश , भारत
पेशा
अभिनेता
के लिए जाना जाता है
ये रिश्ता क्या कहलाता है
राकेश दीवाना ( सी.  1969 - 27 अप्रैल 2014) उत्तर प्रदेश के हाथरस के एक भारतीय चरित्र अभिनेता थे ।  अप्रैल 2014 की सुबह इंदौर में बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद हुई बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई ।
📽️
या रब (2014)
हेलो हम लल्लन बोल रहे हैं (2010)
बाबर नन्हा के रूप में (2009)
मनोरंजन: द एंटरटेनमेंट (2006)
📺
कुंभकर्ण के रूप में रामायण (2008)
ये रिश्ता क्या कहलाता है महाराज के रूप में (2009-2014)
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में वनराज हाथी के रूप में (2008 -2014)
देवों के देव...महादेव कुबेर के रूप में (2013)

कविता राधेशाम

कविता राधेश्याम एक भारतीय अभिनेत्री हैं जिन्होंने निर्देशक विक्रम भट्ट की थ्रिलर टीवी श्रृंखला हू डन इट उलझन से डेब्यू किया था ।वह कुछ कन्नड़ , तमिल फिल्मों में सहायक भूमिका और हिंदी फिल्मों में दिखाई देती हैं।

कविता राधेश्याम
 🎂जन्म 31 दिसंबर 1985 

#31dic
राधेश्याम ने एक अभिनय संस्थान में डिग्री प्राप्त की 2009 में। उन्होंने सुभाष घई के व्हिस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल के तहत बनी लघु फिल्मों में अभिनय करना जारी रखा । कविता ने प्रसिद्ध निर्देशक फैसल सैफ की हिंदी फीचर फिल्म पांच घंटे मियां पांच करोड़ से शुरुआत की, जिसे टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा 2012 की शीर्ष 10 बोल्ड फिल्म श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था । फिल्म निर्माता रूपेश पॉल ने अपनी फिल्म कामसूत्र 3डी के लिए उनसे संपर्क किया , लेकिन उन्होंने इसमें अभिनय करने से इनकार कर दिया।वह 1988 की क्लासिक खून भरी मांग के मराठी रीमेक में भी दिखाई दीं , जिसका शीर्षक भरला मालवत रखाना है ।

राधेश्याम ने फैसल सैफ द्वारा निर्देशित फिल्मों में अक्सर सहयोग किया है , जिसमें पांच घंटे मियां पांच करोड़ , मैं हूं रजनीकांत , अम्मा और निर्माणाधीन श्राप 3डी शामिल हैं ।

राधेश्याम ने 2014 की फैसल सैफ की विवादास्पद फिल्म मैं हूं रजनीकांत में अभिनय किया , जहां तमिल अभिनेता रजनीकांत ने फिल्म की रिलीज और स्क्रीनिंग को रोकने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया।हालांकि, फिल्म एक नए बदले हुए शीर्षक मैं हूं (भाग) के साथ रिलीज हुई। -समय मारनेवाला ।
ऑरलैंडो नाइट क्लब में हुई गोलीबारी के बाद , फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट करने के बाद राधेश्याम को आलोचना का सामना करना पड़ा: "#ऑरलैंडो शूटिंग के बारे में बहुत दुख हुआ.. क्या #LGBT प्रकृति के खिलाफ नहीं हैं? जो भी प्रकृति के खिलाफ है, उसे जीना नहीं चाहिए.." इंडिया टुडे घटना के बारे में एक लेख का शीर्षक था, "सीधे और पागल: अभिनेत्री कविता राधेश्याम का कहना है कि ऑरलैंडो पीड़ित मौत के लायक थे"।

फेसबुक पर उन्होंने एलजीबीटी समुदाय को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ​​का हवाला दिया, जिन्होंने 2008 में सुप्रीम कोर्ट को दिए एक संबोधन में समलैंगिक यौन संबंध को "अप्राकृतिक", "अत्यधिक अनैतिक और सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ" कहा था । 

आरोपों के जवाब में कि उनकी ऑनलाइन टिप्पणियाँ एक प्रचार स्टंट थीं, उन्होंने कहा कि उन्होंने तीन साल पहले समलैंगिक विरोधी कानून धारा 377 के लिए समर्थन व्यक्त किया था। उन्होंने यह कहकर एक और विवाद खड़ा कर दिया कि "जो सेलेब्रिटी एचआईवी संक्रमित हैं वे या तो समलैंगिक हैं या उभयलिंगी, मैं चाहती हूं कि मेरे नफरत करने वाले लोग एक छोटा सा शोध करें।"
📽️
2012 पांच घंटे मियां पांच करोड़

2014 भरला मालवत राखताना

2014 रागिनी आईपीएस

2015 मैं हूं रजनीकांत

2016 एक प्रकार का जानवर

2017 इस्लामी ओझा

2017 शेइतान

2019 कोमाली

📺

2011 ग़ज़ब देश की अजब कहानियाँ 
2010 कौन डनिट उलझन

गुरुवार, 14 सितंबर 2023

पंडित मलिकार्जुन मंसूर

मल्लिकार्जुन भीमारयप्पा मंसूर हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में जयपुर-अतरौली घराने के खयाल शैली के गायक थे। इनको भारत सरकार द्वारा सन १९७६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये कर्नाटक से हैं।
🎂जन्म की तारीख और समय: 31 दिसंबर 1910, मंसूर
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 12 सितंबर 1992, धारवाड़

महान क्लासिकल गायक पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

वो महान कलाकार जिसे देर से मिली पहचान पर जब मिली तो दुनिया जान गई
वो पूरी जिंदगी संगीत में जीते रहे. एक गुरु से दूसरे गुरु, दूसरे से तीसरे गुरु के चरणों में बैठकर स्वरों की साधना करते रहे. अलग-अलग घराने, अलग-अलग अंदाज के रंग सीखते रहे और जब तक संगीत जगत ने उनकी प्रतिभा को सलाम किया तब तक वो जीवन के 60 बसंत देख चुके थे. यानी जब तक संगीत की दुनिया में उन्हें पहचान मिली उनकी उम्र 60 बरस हो चुकी थी.

जाहिर है पहचान देर से मिली, लेकिन जब मिली तो ऐसी मिली कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के धुरंधरों में उनका नाम शुमार हो गया. मसलन- भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण से नवाजा. ऐसे थे जयपुर-अतरौली घराने के गायक पंडित मल्लिकार्जुन भीमारायप्पा मंसूर

दरअसल, मल्लिकार्जुन मंसूर की गायकी में बिल्कुल अलग कैफियत है. सबसे अलग. नशे में डूबी मतवाली सी आवाज. एक स्वर से दूसरे स्वर की यात्रा कैसे पूरी होती है, आंदोलित होते हुए वो कब मंद्र स्वर से तार सप्तक की ओर बढ़ जाते हैं पता ही नहीं लगता. हल्की भर्राई सी आवाज लेकिन एक खास तरह का सम्मोहन और मस्ती. ताल के साथ लगातार लयकारी का खेल ऐसे चलता रहता है जैसे आप ऊंट पर बैठकर आंखें मूंदें हिचकोले खा रहे हों. इस वीडियो को देखिए आप इस बात को महसूस करेंगे.

कर्नाटक के धारवाड़ जिले से 5 किलोमीटर पश्चिम में एक गांव है मंसूर. इसी गांव में 1 जनवरी, 1911 को मल्लिकार्जुन पैदा हुए थे. परिवार में संगीत का माहौल पहले से था. पिता भीमारायप्पा गांव के सरपंच थे. यूं तो वो खेती-किसानी करते थे लेकिन संगीत से बहुत लगाव था, कन्नड़ संगीत नाटकों से भी जुड़े हुए थे. बड़े भाई बासवराज का अपना थिएटर ग्रुप था. 8 साल की उम्र में मल्लिकार्जुन ने स्कूल छोड़ दिया और सिंगर-ऐक्टर के तौर पर भाई का ग्रुप ज्वाइन कर लिया था.

बचपन में ध्रुव और प्रह्लाद जैसी भूमिकाएं निभाने की वजह से उन्हें खूब सराहना मिली. उनके सबसे पहले गुरु बने अप्पैय्या स्वामी जो कर्नाटक शैली के गायक, और वॉयलिन वादक थे. बड़े भाई बासवराज अप्पैय्या स्वामी के पास गाना सीखने जाते थे, उन्हीं के जरिए मंसूर को भी मौका मिला. अप्पैय्या स्वामी ने मंसूर को कर्नाटक संगीत की बुनियादी तालीम दी. थिएटर ग्रुप के साथ दौरे करते हुए मल्लिकार्जुन को ग्वालियर घराने के लिए दिग्गज गायक नीलकंठ बुआ अलूरमठ के सामने परफॉर्म करने का मौका मिला. गुरु नीलकंठ बुआ मल्लिकार्जुन को सिखाने को तैयार हो गए. 12 साल से लेकर 18 साल तक उनकी ट्रेनिंग अलूरमठ से हुई. इसके बाद आगे की राह और अगला गुरु खोजते हुए मंसूर बॉम्बे (मुंबई) पहुंच गए.

थिएटर के दिनों से ही मल्लिकार्जुन मंसूर ने जयपुर-अतरौली घराने के उस्ताद अल्लादिया खां के बारे में खूब सुना था. उनका बहुत मन था कि वो उस्ताद अल्लादिया खां से गाना सीखें. अल्लादिया खां के पास पहुंचे तो खां साहब ने मल्लिकार्जुन को अपने बेटे मंजी खान के हवाले कर दिया. मल्लिकार्जुन मंसूर की जयपुर-अतरौली घराने की विधिवत तालीम शुरू हो गई. हालांकि 2 ही साल बाद 1937 में मंजी खान का इंतकाल (निधन) हो गया. इसके बाद 10 साल तक मल्लिकार्जुन ने मंजी खान के भाई भुर्जी खान से सीखा.

जयपुर-अतरौली घराने के ध्रुपद स्टाइल खयाल गायकी में मल्लिकार्जुन की मास्टरी हो गई. मल्लिकार्जुन मंसूर ने कहीं खुद कहा है कि भुर्जी खान से तालीम पूरी होते-होते उन्होंने 125 राग तैयार कर लिए थे. मंसूर की गायकी में तीन घरानों, तीन परंपराओं का संगम मिलता है क्योंकि बचपन में कर्नाटक संगीत सीखा, जवान हुए तो ग्वालियर घराने के विद्वानों से सीखा और आखिरकार जयपुर-अतरौली घराने से जुड़ गए. हालांकि जयपुर-अतरौली घराने के खान बंधुओं की तालीम की उनकी शैली पर अमिट छाप दिखाई देती है.

मल्लिकार्जुन मंसूर की खासियत थी वो बड़े ही अप्रचलित राग गाते थे जैसे- शुद्ध नट, शिवमत भैरव, हेम नट, लाजवंती, संपूर्ण मालकौंस, रामदास मल्हार, बिहारी वगैरह. आपको भी उनके गाए ये राग सुनाते हैं.

शुरू-शुरू में मल्लिकार्जुन मंसूर घर चलाने के लिए संगीत से जुड़ी नौकरियां करते रहे. ऑल इंडिया रेडियो में गाते थे, एचएमवी में प्रोड्यूसर रहे, एआईआर धारवाड़ में 10 साल तक संगीत सलाहकार भी रहे. 1969 में उन्हें बॉम्बे में गाने का मौका मिला जिसके बाद वो तेजी से मशहूर हुए. मंसूर का संगीत सुननेवालों पर फौरन असर करता है. उन्हें माहौल बनाने के लिए ज्यादा वक्त नहीं चाहिए होता था. बचपन में थिएटर करने की वजह से भी वो अपने श्रोताओं से कनेक्ट फौरन बना लेते थे.

मल्लिकार्जुन मंसूर को वर्ष 1970 में पद्मश्री, 1976 में पद्म भूषण और 1992 में पद्म विभूषण दिया गया. 1982 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी की फेलोशिप भी मिली. पत्नी गंगम्मा ने उन्हें 7 बेटियां और एक बेटा दिया. पुत्र राजशेखर मंसूर और पुत्री नीला कोडली आज जाने-माने शास्त्रीय गायक रहे. 12 सितंबर, 1992 को 81 साल की उम्र में पंडित जी ने आखिरी सांस ली.

अपनी संगीतमय यात्रा को लेकर उन्होंने कन्नड़ में एक किताब लिखी- नन्ना रसयात्रे. उनके पुत्र राजेशखर मंसूर ने इस किताब को ‘माय जर्नी इन म्यूजिक’ नाम से अंग्रेजी में अनुवाद किया. धारवाड़ के मंसूर गांव में जहां पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर जन्मे, उस घर को अब मेमोरियल में तब्दील कर दिया गया है.



भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...