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बुधवार, 27 सितंबर 2023

पी जयराज

पूरा नाम पैदी जयराज
प्रसिद्ध नाम पी जयराज
🎂जन्म 28 सितम्बर, 1909
जन्म भूमि करीमनगर, आंध्र प्रदेश
⚰️मृत्यु 11 अगस्त, 2000
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
संतान पाँच (दो पुत्र दिलीप, जयतिलक और तीन पुत्रियाँ जयश्री, दीपा एवं गीता)
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, निर्माता-निर्देशक
मुख्य फ़िल्में 'हमारी बात', 'नई कहानी', 'शिकारी', 'रायफल गर्ल', 'भाभी' आदि।
शिक्षा स्नातक
विद्यालय वुड नेशनल कॉलेज, हैदराबाद
पुरस्कार-उपाधि दादा साहब फाल्के पुरस्कार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाई अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाईं।
पी. जयराज (पूरा नाम- 'पैदी जयराज', अंग्रेज़ी: Paidi Jairaj, जन्म: 28 सितम्बर, 1909; मृत्यु: 11 अगस्त, 2000) हिन्दी फ़िल्म जगत् के एकमात्र ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने मूक फ़िल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फ़िल्मों में काम किया। हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। नौशाद जैसे महान् संगीतकार को फ़िल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी पी. जयराज को ही जाता है। उनकी ज़िंदगी हिन्दी सिने जगत् के इतिहास के साथ-साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी थी।

जीवन परिचय

जयराज का जन्म 28 सितम्बर, 1909 को निजाम स्टेट के करीमनगर ज़िले में हुआ था। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। हैदराबाद में पले बड़े हुए जिससे उर्दू भाषा पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा हैदराबाद के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढ़ाया गया जहां से उन्होंने संस्कृत की शिक्षा ली। फिर हैदराबाद के 'निजाम हाईस्कूल' में उर्दू पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए लंदन भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी इंग्लैंड जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् 1929 में मुम्बई आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 वर्ष थी।

समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम "रंग्या" था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे। कई जगह काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएँ भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फ़िल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था।

बतौर सहायक निर्देशक
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। दिलीप कुमार की पहली फ़िल्म "प्रतिमा" का निर्देशन जयराज ने किया था।

बतौर निर्देशक
पी. जयराज ने फ़िल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं।

अभिनय की शुरूआत
फ़िल्मों में बतौर अभिनेता वर्ष 1929 में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फ़िल्म 'जगमगाती जवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड़सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे। उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम मुम्बई में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाड़ी चल निकली। 1930 में "रसीली रानी" फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हिरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही हिन्दी फ़िल्म "रसीली रानी" के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फ़िल्म 'रसीली रानी' 1929 में प्रदर्शित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फ़िल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म बहुत सफल रही थी। मूक फ़िल्मों के दौर में वह फ़िल्म कई सिनेमाघरों में पांच सप्ताह चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फ़िल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।

बोलती फ़िल्मों का नया दौर
1931 में जब 'आलम आरा' से बोलती फ़िल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फ़िल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फ़िल्म थी 'शिकारी'। 1932 में प्रदर्शित इस फ़िल्म में जयराज ने एक बौद्ध भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और सांप, बाघ, शेर जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के दृश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ संगीत शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर 1935 से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब सिनेमा संगीतमय हो गया। हमजोली फ़िल्म में नूरजहाँ और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फ़िल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फ़िल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फ़िल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। मुम्बई में उस फ़िल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के सिनेमा थे। जयराज ने मराठी, गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फ़िल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो वर्ष 1965 में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएँ निभानी शुरु कर दीं। महात्मा गांधी की हत्या पर आधारित अमरीकी फ़िल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में जी. डी. बिड़ला की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान में प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फ़िल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फ़िल्में हैं। इन्डो-रशियन फ़िल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फ़िल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।

बतौर निर्माता
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें नर्गिस, भारत भूषण और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था सिने जगत में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। 1951 में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की "इनोच आर्डेन" पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी।

परिवार
1939 में अपने घनिष्ठ मित्र पृथ्वीराज कपूर के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से विवाह कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। 1942 में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो पुत्र, दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता। सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म "शहर और सपना" को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा पुत्र अमेरिका में रहता है। दूसरी बेटी थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी बेटी थीं दीपा, फिर थी गीता सबसे छोटी।

मुख्य फ़िल्में
सन् 1938 - रायफल गर्ल
सन् 1939 - भाभी
सन् 1942 - खिलौना
सन् 1942 - मेरा गाँव
सन् 1943 - नई कहानी
सन् 1954 - बादबान
सन् 1954 - मुन्ना
सन् 1956 - अमरसिंह राठौड़
सन् 1956 - हातिमताई
सन् 1957 - परदेसी
सन् 1959 - चार दिल चार राहें
सन् 1962 - रजिया सुल्तान
पुरस्कार
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। 1982 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी मिला।

निधन
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, मुम्बई में ⚰️11 अगस्त सन् 2000 को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फ़िल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। 11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फ़िल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली

रविवार, 3 सितंबर 2023

पंडित .जी .एस .दूबे.

चन्द्रशेखर दुबे

 🎂04 सितम्बर 1924

⚰️ 28 सितम्बर 1993
जिन्हें आमतौर पर सी.एस. दुबे कहा जाता है , एक भारतीय अभिनेता और रेडियो व्यक्तित्व थे। उनका जन्म कन्नौद में हुआ था और उन्होंने 1950 के दशक में चरित्र अभिनेता के रूप में पतिता (1953) और मिस्टर एंड मिसेज '55 (1955) के साथ 150 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम किया। वह फिल्म ज़िंदा दिल (1975) में अपने वन-लाइनर "धक्कन खोल के" के लिए प्रसिद्ध हुए, जिसे बाद में उन्होंने अपने रेडियो कार्यक्रमों में लगभग हर वाक्य के साथ प्रत्यय के रूप में इस्तेमाल किया। 
दुबे भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय थे जिसके लिए उन्हें जेल में डाल दिया गया था।फिर वह एक अभिनेता के रूप में काम करने के लिए बंबई चले गए। उन्हें एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता था जो गरीब छात्रों को उनकी शिक्षा के लिए भुगतान करने में मदद करते थे।
उन्होंने सबसे पहले निर्माता और निर्देशक अमिया चक्रवर्ती की दो फिल्मों पतिता और सीमा (1955) में काम करने से पहले उनके लिए एक ऑफिस बॉय, प्रोडक्शन मैनेजर और सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। उन्होंने तीसरी कसम , रोटी कपड़ा और मकान , मौसम , अंगूर और राम तेरी गंगा मैली जैसी लगभग 200 फिल्मों में काम किया । उन्हें ज्यादातर ऋणदाताओं, दलालों या बलात्कारियों जैसे नकारात्मक किरदारों को चित्रित करने के लिए जाना जाता था।

उन्होंने रेडियो के लिए काम किया और हवा महल , फौजी भाइयों जैसे रेडियो कार्यक्रमों और रेडियो नाटकों में अभिनय किया।
फ़िल्म/भूमिका/वर्ष
यार मेरी जिंदगी // (2008)
हत्या: द मर्डर / पेड मोरनर/ (2004)
गैर /मंदिर पुजारी/ (1999)
शेयर बाज़ार /साहूकार/(1997)
सरहद: द बॉर्डर ऑफ़ क्राइम // (1995)
आतंक ही आतंक / दुर्गा प्रसाद तिवारी/ (1995)
स्टंटमैन / ज्वैलर/ (1994)
ईना मीना डीका / ईना का पड़ोसी/ (1994)
शुरुआत // (1993)
दलाल / नेता का आदमी/ (1993)
धरतीपुत्र /राज्यपाल के सचिव/(1993)
अंतिम न्याय /वकील/(1993)
नसीबवाला / आदमी जिसने गैराज खरीदा/ (1992)
नरसिम्हा /मुंशी/(1991)
इरादा // (1991)
विद्रोही /देशबंधु/1990
करिश्मा काली का / पार्वती की वकील/ (1990)
आग का गोला // (1990)
घर हो तो ऐसा / महाजन/ (1990)
सैलाब /पंडित/(1990)
जीवन एक संघर्ष / रूप चंद/ (1990)
उस्ताद // (1989)
डेव पेच / मोलेस्टर/ (1989)
निशाने बाजी // (1989)
बड़े घर की बेटी / लाला (साहूकार)/ (1989)
तूफ़ान / दुल्हन के पिता /1989
जादूगर /पुजारी/(1989)
गलियों का बादशाह // (1989)
क्लर्क // (1989)
औरत तेरी यही कहानी / पूजारी/ (1988)
जीते हैं शान से // (1988)
ज़लज़ला / मुखिया/ (1988)
एक नया रिश्ता / राजीव के रिश्तेदार / (1988)
ज़ख्मी औरत / बलात्कारी के पिता/ (1988)
सूरमा भोपाली // (1988)
हम फरिश्ते नहीं // (1988)
आक्रांत // (1988)
रात के अँधेरे में // (1987)
डाकू हसीना // (1987)
मार्टे डैम तक /तिवारीलाल/(1987)
बेसहारा // (1987)
कुदरत का कानून / रामू/ (1987)
ठिकाना / आदमी ने अपनी युवा नौकरानी के साथ बलात्कार किया/ (1987)
कलयुग और रामायण /जगन्नाथ (मंच निर्देशक)/ (1987)
नज़राना / पार्वती के पति/ (1987)
राज दुलारा // (1987)
माँ बेटी / पुरषोतमलाल/ (1986)
अँधेरी रात में दिया तेरे हाथ में // (1986)
सवेरे वाली गाड़ी / पंडित/ (1986)
घर संसार / साहूकार/ (1986)
कर्म // (1986)
किरायदार/एडवोकेट बलवंत बी.देसाई/ (1986)
काला ढांडा गोरे लोग / साहूकार/ (1986)
आप के साथ / शहर में अजनबी #1/ (1986)
पिया मिलन / / (1985)
एक चिट्ठी प्यार भारी / भीकू/ (1985)
हकीकत // (1985)
फाँसी के बाद / लोकनाथ, मप्र/ (1985)
घर द्वार / करोड़ीमल/ (1985)
मर्द / लालाजी (दूल्हे के पिता)/ (1985)
राम तेरी गंगा मैली / पंडित/ (1985)
जिंदगी जीने के लिए // (1984)
एक नया इतिहास // (1984)
ये देश /मंत्री/(1984)
गृहस्थी / लाला / (1984)
कानून क्या करेगा / पकडूलाल मिश्र/ (1984)
प्रेम विवाह /चौबे/(1984)
करिश्मा / आदमी जो गर्म पानी से भीग गया/ (1984)
राम की गंगा / मधु के संरक्षक/ (1984)
गंगवा // (1984)
एक नई पहेली / उपेन्द्रनाथ का दोस्त/ (1984)
शराबी / भावी दुल्हन के पिता / (1984)
भीमा /चौबे/(1984)
मकसद /शर्मा/(1984)
इंकलाब /शिक्षा मंत्री सरस्वती प्रसाद/(1984)
निशान /लाला (1983)
फ़राइब // (1983)
हम से है जमाना / ठाकुर का मुनीम / (1983)
मंजू /अमर सिंह/ (1983)
कुली / दीपा के भावी ससुर/ (1983)
पेंटर बाबू / नेकीराम (मीरा के चाचा)/ (1983)
तक़दीर / मुनीम फूलचंद/ (1983)
कालका (1983 फ़िल्म) / सेवकराम
तेरी मांग सितारों से भर दूं / पोपट लाल (जौहरी)/ (1982)
धरम कांटा / व्यापारी हथियार/ (1982)
तीसरी आंख / सागर की पीड़िता/ (1982)
अपना बना लो/ड्रंक/(1982)
अंगूर / छेदीलाल/ (1982)
शीतला माता / तेजा सिंह/ (1981)
फिफ्टी फिफ्टी / बिहारी का भाई/ (1981)
श्रद्धांजलि / दाह संस्कार प्रभारी/ (1981)
खुदा कसम /पंडित/(1981)
हक़दार // (1981)
रॉकी / मैन एट द कोर्टेसन प्लेस/ (1981)
क्रोधी / आरती के चाचा/ (1981)
बुलुंडी / कॉलेज व्याख्याता/ (1981)
मान अभिमान /मुनीम/(1980)
पतिता / दीन दयाल दुबे/ (1980)
पायल की झंकार / शिवराम - श्यामा के चाचा / (1980)
बिन माँ के बच्चे / गोपाल/ (1980)
हम पांच // (1980)
बे-रेहम / बांके लाल/ (1980)
दो प्रेमी // (1980)
नागिन और सुहागन / ठाकुर ज़ोरावर सिंह/ (1979)
मेरी बीवी की शादी / बनवारी/ (1979)
सलाम मेमसाब / पंडितजी/ (1979)
नैय्या /वैद मकरध्वज/(1979)
घर की लाज / मनफूल अंकल/ (1979)
सांच को आंच नहीं / गणेशी (मुरली के पिता)/ (1979)
मंजिल / धरम चंद/ (1979)
बिन फेरे हम तेरे / मुकंद बिहारी/ (1979)
त्याग पत्र //(1978)
चोर हो तो ऐसा / शुद्ध हिन्दी भाषी दाता/ (1978)
दामाद /पंडित सुन्दर लाल/(1978)
राहु केतु // (1978)
राम कसम // (1978)
घर / बनवारी लाल/ (1978)
काला आदमी // (1978)
चक्रव्यूह (1978 फ़िल्म) // आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता/ 1978
मैं तुलसी तेरे आँगन की / सुब्रमण्यम (लेखाकार)/ (1978)
आज़ाद / श्री मिश्रा / (1978)
शिरडी के साईं बाबा / दूल्हे के पिता/ (1977)
आनंद आश्रम / मुखिया- ग्राम प्रधान/ (1977)
टिंकू / गुब्बारा विक्रेता/ (1977)
ड्रीम गर्ल // (1977)
खेल खिलाड़ी का / नंदन/ (1977)
इम्मान धरम / वकील (गुल्लू मिया के मामले में)/ (1977)
लगाम / / (1976)
तपस्या // (1976)
चितचोर / पोस्टमैन/ (1976)
1976)
दस नंबरी // (1976)
छोटी सी बात / गुरनाम (गैराज मालिक)/ (1976)
एक गाँव की कहानी / बनवारीलाल/ (1975)
जिंदा दिल // (1975)
सन्यासी /मुनीमजी/(1975)
मौसम /दीनू/(1975)
आँधी /गुरुसरन/(1975)
धोखा // (1974)
रोटी कपड़ा और मकान / लाला (किराना विक्रेता)/ (1974)
इम्तिहान / प्रोफेसर बृज भूषण 'पंडितजी' चतुर्वेदी/ (1974)
मेरे ग़रीब नवाज़ / अख़्तर मियाँ/ (1973)
सौदागर // (1973)
बनारसी बाबू / फर्नांडीस/ (1973)
एक खिलाड़ी बावन पत्ते // (1972)
राजा जानी / बगला सेठ का नौकर/ (1972)
समाधि / जूनियर कलाकार/ (1972)
राखी और हथकड़ी / पंडित - अपहरणकर्ता जिसने जानकी को चुराया/ (1972)
शादी के बाद / वकील गोविंद/ (1972)
बाबुल की गलियाँ // (1972)
अपना देश //(1972)
संजोग दुबे/ (अतिथि भूमिका)/ (1972)
पिया का घर / पंडित/ (1972)
लगन / कल्पना के पिता/ (1971)
मैं सुंदर हूं / चिकन मालिक/ (1971)
बिखरे मोती // (1971)
समाज को बदल डालो / कालीचरण/ (1970)
पगला कहीं का / पिंटो/ (1970)
पहचान /सुंदर/ (1970)
हमजोली / श्यामा अंकल/ (1970)
यादगार /चाँद सेठ/(1970)
तुम हसीन मैं जवान / ज़ोरावर सिंह/ (1970)
खिलोना // (1970)
दो भाई // (1969)
जीने की राह / रघुनंदन के पिता / (1969)
प्रिंस डांसर जो बंध गया (1969)
आराधना / द इन कीपर/ (1969)
झुक गया आसमान / बंगाली बाबू / (1968)
सपनों का सौदागर / रामू (जुआरी)/ (1968)
तीसरी कसम / बिरजू/ (1966)
गबन / भगत - पानवाला/ (1966)
आये दिन बहार के // (1966)
गोस्वामी तुलसीदास / तुलसीदास पर संदेह करने वाला व्यक्ति/ (1964)
बिदेसिया / / (1963)
बिन बादल बरसात // (1963)
आरती // (1962)
हमारी याद आएगी // (1961)
पासपोर्ट /दुबे - भगवानदास ज्वैलर्स में कर्मचारी/(1961)
रामू दादा // (1961)
अर्धांगिनी / बब्लू के पिता/ (1959)
हरिया // (1958)
देख कबीरा रोया // (1957)
भाभी / अब्दुल माजिद का बेटा/ (1957)
अब दिल्ली दूर नहीं / राम भरोसे/ (1957)
कथ पुतली // (1957)
जलदीप // (1956)
सीमा / बांके लाल/ (1955)
पहली झलक / पान की दुकान का मालिक/ (1955)
मिस्टर एंड मिसेज '55 / डॉक्टर/ (1955)
पतिता / भीकू चाचा/ (1953)
दाग / हीरा/ (1952)
सुनहरे दिन / गीत "हम मस्त दिलों को लेकर" में कैमियो उपस्थिति/(1949)

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...