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सोमवार, 28 अगस्त 2023

माइकल जेक्सन

माइकल जोसेफ जैक्सन, लोकप्रिय अमरीकी पॉप गायक थे, जिन्हें किंग ऑफ पॉप भी कहा जाता है। माइकल, जैक्सन दंपति की सातवीं संतान थे, जिन्होंने मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में ही व्यवसायिक रूप से गायकी आरंभ कर दी थी। उस समय वे जैक्सन-५ समूह के सदस्य हुआ करते थे। 
🎂जन्म की तारीख और समय: 29 अगस्त 1958, गैरी, इंडियाना, संयुक्त राज्य अमेरिका
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 25 जून 2009, होलम्बी हिल्स, लॉस एंजिल्स, कैलीफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका
बच्चे: पेरिस-माइकल कैथरीन जैक्सन, प्रिंस माइकल जैक्सन II, ज़्यादा
पत्नी: डेबी रोव (विवा. 1996–2000), ज़्यादा
माता-पिता: जो जैक्सन, कैथरीन जैक्सन
लंबाई: 1.75 मी
माइकल जोसेफ जैक्सन (29 अगस्त, 1958 - 25 जून, 2009) एक अमेरिकी गायक, गीतकार, नर्तक और परोपकारी व्यक्ति थे। " पॉप के राजा " के रूप में जाने जाने वाले, उन्हें 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक हस्तियों में से एक माना जाता है । अपने चार दशक के करियर के दौरान, संगीत, नृत्य और फैशन में उनके योगदान के साथ-साथ उनके प्रचारित निजी जीवन ने उन्हें लोकप्रिय संस्कृति में एक वैश्विक शख्सियत बना दिया। जैक्सन ने कई संगीत शैलियों के कलाकारों को प्रभावित किया। मंच और वीडियो प्रदर्शन के माध्यम से, उन्होंने जटिल स्ट्रीट डांस मूव्स जैसे मूनवॉक , जिसे उन्होंने नाम दिया, और साथ ही रोबोट को लोकप्रिय बनाया ।
🌹जैक्सन परिवार की आठवीं संतान , जैक्सन ने 1964 में अपने बड़े भाइयों जैकी , टीटो , जर्मेन और मार्लोन के साथ जैक्सन 5 (जिसे बाद में जैकसन के नाम से जाना गया) के सदस्य के रूप में सार्वजनिक शुरुआत की। जैक्सन ने अपने एकल करियर की शुरुआत 1971 में मोटाउन रिकॉर्ड्स में रहते हुए की थी । वह अपने 1979 के एल्बम ऑफ द वॉल से एकल स्टार बन गए । उनके संगीत वीडियो , जिनमें " बीट इट ", " बिली जीन " और उनके 1982 एल्बम थ्रिलर के " थ्रिलर " शामिल हैं, को नस्लीय बाधाओं को तोड़ने का श्रेय दिया जाता है।और माध्यम को एक कला रूप और प्रचार उपकरण में बदलना। उन्होंने एमटीवी की सफलता को आगे बढ़ाने में मदद की और बैड (1987), डेंजरस (1991), हिस्ट्री: पास्ट, प्रेजेंट एंड फ्यूचर, बुक I (1995), और इनविंसिबल (2001) एल्बमों के लिए वीडियो के साथ नवाचार करना जारी रखा। थ्रिलर अब तक का सबसे अधिक बिकने वाला एल्बम बन गया , जबकि बैड पांच यूएस बिलबोर्ड हॉट 100 नंबर-एक एकल का निर्माण करने वाला पहला एल्बम था । [nb 1]

1980 के दशक के उत्तरार्ध से, जैक्सन अपनी बदलती उपस्थिति , रिश्तों , व्यवहार और जीवनशैली के कारण विवादों और अटकलों का विषय बन गया । 1993 में उन पर एक पारिवारिक मित्र के बच्चे का यौन शोषण करने का आरोप लगा । मुकदमा सिविल कोर्ट से बाहर सुलझाया गया; सबूतों के अभाव के कारण जैक्सन को दोषी नहीं ठहराया गया। 2005 में, उन पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें बाल यौन शोषण के आरोपों और कई अन्य आरोपों से बरी कर दिया गया। एफबीआई को किसी भी मामले में जैक्सन द्वारा आपराधिक आचरण का कोई सबूत नहीं मिला । 2009 में, जब वह वापसी संगीत कार्यक्रमों की एक श्रृंखला, दिस इज़ इट की तैयारी कर रहे थे, प्रोपोफोल की अधिक मात्रा के कारण जैक्सन की मृत्यु हो गई ।उनके निजी चिकित्सक, कॉनराड मरे द्वारा प्रशासित किया गया , जिन्हें 2011 में जैक्सन की मौत में शामिल होने के लिए अनैच्छिक हत्या का दोषी ठहराया गया था। उनकी मृत्यु पर दुनिया भर में प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं, जिससे इंटरनेट ट्रैफ़िक में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और उनके संगीत की बिक्री में भी वृद्धि हुई। लॉस एंजिल्स के स्टेपल्स सेंटर में आयोजित जैक्सन के लिए टेलीविजन पर प्रसारित स्मारक सेवा को वैश्विक स्तर पर अनुमानित 2.5 बिलियन से अधिक लोगों ने देखा।

दुनिया भर में 400 मिलियन से अधिक रिकॉर्ड की अनुमानित बिक्री के साथ, जैक्सन सभी समय के सबसे अधिक बिकने वाले संगीत कलाकारों में से एक है । [एनबी 2] उनके पास 13 बिलबोर्ड हॉट 100 नंबर-वन सिंगल्स थे ( हॉट 100 युग में किसी भी कलाकार का तीसरा सबसे बड़ा ) और पांच अलग-अलग दशकों में बिलबोर्ड हॉट 100 पर टॉप-टेन सिंगल में जगह बनाने वाले पहले कलाकार थे। उनके सम्मानों में 15 ग्रैमी पुरस्कार , छह ब्रिट पुरस्कार , एक गोल्डन ग्लोब पुरस्कार और 39 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स शामिल हैं, जिनमें "सभी समय का सबसे सफल मनोरंजनकर्ता" भी शामिल है। जैक्सन के प्रेरणों में रॉक एंड रोल हॉल ऑफ फ़ेम शामिल है (दो बार), वोकल ग्रुप हॉल ऑफ़ फ़ेम , सॉन्ग राइटर्स हॉल ऑफ़ फ़ेम , डांस हॉल ऑफ़ फ़ेम (उन्हें इसमें शामिल होने वाला एकमात्र रिकॉर्डिंग कलाकार बनाया गया) और रिदम एंड ब्लूज़ म्यूज़िक हॉल ऑफ़ फ़ेम ।

शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

मदन मोहन

महान संगीतकार मदन मोहन की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
🎂जन्म 25 जून 1924 बगदाद, इराक
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 14 जुलाई 1975
मदन मोहन  हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध 1950, 1960, और 1970 के दशक के बॉलीवुड फ़िल्म संगीत निर्देशक थे।इनका पूरा नाम मदन मोहन कोहली था। उन्हें विशेष रूप से फ़िल्म उद्योग में गज़लों के लिए याद किया जाता है।
मदन मोहन का 🎂जन्म 25 जून 1924 बगदाद, इराक में हुआ था। जहाँ उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल इराकी पुलिस के साथ एक एकाउंटेंट जनरल के रूप में काम कर रहे थे, मध्य पूर्व में जन्मे मदन मोहन ने अपने जीवन के पहले पाँच साल यहाँ क्यू बिताए। उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल फ़िल्म व्यवसाय से जुड़े थे और बाम्बे टाकीज और फ़िल्मीस्तान जैसे बड़े फ़िल्म स्टूडियो में साझीदार थे।
घर में फ़िल्मी माहौल होने के कारण मदन मोहन भी फ़िल्मों में काम कर बड़ा नाम करना चाहते थे लेकिन अपने पिता के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने का फैसला ले लिया और देहरादून में नौकरी शुरू कर दी। कुछ दिनों बाद उनका तबादला दिल्ली में हो गया। लेकिन कुछ समय के बाद उनका मन सेना की नौकरी में नहीं लगा और वह नौकरी छोड़ लखनऊ आ गये।
लखनऊ में मदन मोहन आकाशवाणी के लिये काम करने लगे। आकाशवाणी में उनकी मुलाकात संगीत जगत से जुडे उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ाँ, उस्ताद अली अकबर ख़ाँ , बेगम अख़्तर और तलत महमूद जैसी जानी मानी हस्तियों से हुई। इन हस्तियों से मुलाकात के बाद मदन मोहन काफ़ी प्रभावित हुये और उनका रुझान संगीत की ओर हो गया। अपने सपनों को नया रूप देने के लिये मदन मोहन लखनऊ से मुंबई आ गये
मुंबई आने के बाद मदन मोहन की मुलाकात एस.डी. बर्मन , श्याम सुंदर और सी. रामचंद्र जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों से हुई और वह उनके सहायक के तौर पर काम करने लगे। बतौर संगीतकार वर्ष 1950 में प्रदर्शित फ़िल्म आँखें के ज़रिये मदन मोहन फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए। फ़िल्म आँखें के बाद लता मंगेशकर मदन मोहन की चहेती पार्श्वगायिका बन गयी और वह अपनी हर फ़िल्म के लिये लता मंगेश्कर से हीं गाने की गुज़ारिश किया करते थे। लता मंगेश्कर भी मदन मोहन के संगीत निर्देशन से काफ़ी प्रभावित थीं और उन्हें गज़लों का शहजादा कहकर संबोधित किया करती थी।
मदन मोहन के पसंदीदा गीतकार के तौर पर राजा मेंहदी अली खान, राजेन्द्र कृष्ण और कैफी आजमी का नाम सबसे पहले आता है। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने गीतकार राजेन्द्र किशन के लिये मदन मोहन की धुनों पर कई गीत गाये। जिनमें 'यूं हसरतों के दाग़'..अदालत (1958),हम प्यार में जलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ'.. जेलर (1958), 'सपने में सजन से दो बातें एक याद रहीं एक भूल गयी'..गेटवे ऑफ इंडिया (1957), 'मैं तो तुम संग नैन मिला के'..मनमौजी,'ना तुम बेवफा हो'.. एक कली मुस्काई, 'वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी'..संजोग(1961) जैसे सुपरहिट गीत इन तीनों फनकारों की जोड़ी की बेहतरीन मिसाल है।
पचास_का_दशक
पचास के दशक में मदन मोहन के संगीत निर्देशन में राजेन्द्र कृष्ण के रचित रूमानी गीत काफ़ी लोकप्रिय हुये। उनके रचित कुछ रूमानी गीतों में 'कौन आया मेरे मन के द्वारे पायल की झंकार लिये'.. देख कबीरा रोया (1957), 'मेरा करार लेजा मुझे बेकरार कर जा'.(आशियाना)1952,'ए दिल मुझे बता दे'..भाई-भाई 1956 जैसे गीत
शामिल हैं।
साठ_का_दशक
मदन मोहन के संगीत निर्देशन में राजा मेंहदी अली खान रचित गीतों में 'आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे'..अनपढ़ (1962), 'लग जा गले'..(वो कौन थी) 1964, 'नैनो में बदरा छाये'.., 'मेरा साया साथ होगा'.. मेरा साया(1966) जैसे गीत श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है
सत्तर_का_दशक
मदन मोहन ने अपने संगीत निर्देशन से कैफी आजमी रचित जिन गीतों को अमर बना दिया उनमें 'कर चले हम फिदा जानो तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'... हकीकत (1965),मेरी आवाज़ सुनो..प्यार का राज सुनो'..नौनिहाल (1967), 'ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नही'.. हीर रांझा (1970),'सिमटी सी शर्मायी सी तुम किस दुनिया से आई हो'...परवाना (1972), 'तुम जो मिल गये हो ऐसा लगता है कि जहां मिल गया'.. हंसते जख्म (1973) जैसे गीत शामिल है।

महान संगीतकार ओ.पी. नैयर जिनके निर्देशन में लता मंगेश्कर ने कई सुपरहिट गाने गाये अक्सर कहा करते थे। ..मैं नहीं समझता कि लता मंगेश्कर, मदन मोहन के लिये बनी हुयी है या मदन मोहन लता मंगेशकर के लिये लेकिन अब तक न तो मदन मोहन जैसा संगीतकार हुआ और न लता जैसी पार्श्वगायिका.. मदन मोहन के संगीत निर्देशन में आशा भोंसले ने फ़िल्म 'मेरा साया' के लिये
'झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में'.. गाना गाया जिसे सुनकर श्रोता आज भी झूम उठते हैं। मदन मोहन से आशा भोंसले को अक्सर यह शिकायत रहती थी कि- आप अपनी हर फ़िल्मों के लिये लता दीदी को हीं क्यो लिया करते है,इस पर मदन मोहन कहा करते थे जब तक लता ज़िंदा है मेरी फ़िल्मों के गाने वही गायेगी। आंखों को नम कर देने वाला ऐसा संगीत वर्ष 1965 में प्रदर्शित फ़िल्म हकीकत में मोहम्मद रफी की आवाज़ में मदन मोहन के संगीत से सज़ा यह गीत 'कर चले हम फिदा जानों तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'...आज भी श्रोताओं में देशभक्ति के जज्बे को बुलंद कर देता है। आंखों को नम कर देने वाला ऐसा संगीत मदन मोहन ही दे सकते थे।

वर्ष 1970 में प्रदर्शित फ़िल्म दस्तक के लिये मदन मोहन सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किये गये। मदन मोहन ने अपने ढ़ाई दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 100 फ़िल्मों के लिये संगीत दिया।

अपनी मधुर संगीत लहरियों से श्रोताओं के दिल में ख़ास जगह बना लेने वाले मदन मोहन 14 जुलाई 1975 को इस दुनिया से जुदा हो गए। उनकी मौत के बाद वर्ष 1975 में हीं मदन मोहन की मौसम और लैला मजनू जैसी फ़िल्में प्रदर्शित हुयी जिनके संगीत का जादू आज भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करता है।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...