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शनिवार, 1 जुलाई 2023

अरबार अली

अबरार अल्वी,  जो एक सिने दिग्दर्शक, पटकथा लेखक,संवाद लेखक थे उनका जन्म 1जुलाई 1927
अबरार जी का इन्तकाल बंबई मे 18 नवंबर 2009मे हो गया...आज उनके जयंती पर शत शत नमन🙏🙏🙏🙏🙏🌺🎂💐
अबरार मुल शब्द अरबी से अबरार का मतलब, पवित्रता,सुंदरता,ईश्वर से डरनेवाला,ऐसे नाम के एक  फिल्म से जुडे हूए व्यक्तिमत्व के धनी,अबरार अल्वी,  जो एक सिने दिग्दर्शक, पटकथा लेखक,संवाद लेखक थे उनका जन्म 1जुलाई 1927मे अयोध्या मे हुआ उनका बचपन  उनके पिता के करियर की वजह से अकोला,खामगाव,होशांगाबाद,जबलपूर,और नागपूर मे बिता,बाद वो माॅरिस कालेज मे पढकर उन्होंने इंग्लिश मे डिग्री हासिल की ऊनका रुझान जादातर काॅलेज के अन्य प्रतियोगीता मे जादा रहता था खास कर डिबेटस मे वो बढचढकर हिस्सा लेते थे।इस वजह वहां उन्होने लेखक के रुप मे रेडिओ मे नौकरी भी कर ली,साथ मे एल एल बी मे स्नातक बन गये थे कुछ नाटक कथा लिखने बाद वो बंबई चले गये साल 1951मे वहां इन्डियन पिपल असोसिएशन थियटर से जुड गये ,पर उनका अभी कुछ तय नहीं हुआ के आगे अब क्या करना है,ऐसे ही चार माह गुजर गये.तब उनके चचरे भाई इर्शाद हसन,उन्हे जसवंत भी कहते थे वो गुरूदत्त की फिल्म  1953की बाज मे वो असिस्टंट डायरेक्टर के रुप मे काम कर रहे थे वो अबरार को साथ ले गये थे एक सिन मे गुरूदत्त जी को संवाद कहते हुए दिक्कत आ रही थी तो अबरार जी ने उनकी मदद की,फिर गुरूदत्त जी इतने प्रभावित हुए अबरार जी से की उन्होंने उनकी अगली फिल्म साहब,बिबी गुलाम के लिए संवाद लेखक का काम दे दिया वहां  अबरार जी का करियर शुरू हो गया इतना दोस्ताना हो गया इन दोनों मे के गुरूदत्त जी के जिवन के सभी पहलू उन्हे पता थे*
उन्होंने गुरूदत्त की लगभग सभी फिल्म की  पटकथा लिखी प्यासा,कागज के फुल,मिस्टर एन्ड मिसेस55, चौदहवी का चान्द,बहारे फिर भी आऐगी,गुड्डू,प्रोफेसर, प्रिन्स,शिकार,आर-पार आदी फिल्मे जो उन्होंने लेखक के रुप मे अपने नाम दर्ज की उन्हे साहाब बिबी और गुलाम को 1963मे सर्वोत्तम दिग्दर्शक का पुरस्कार मिला था,इसी फिल्म को दुसरा राष्ट्रीय सर्वोत्कृष्ट हिन्दी फिल्म का पुरस्कार भी इसी साल मिला था।
उन्होंने गुरूदत्त पर एक किताब भी लिखी थी नाम था गुरूदत्त के साथ एक दशक,
अबरार जी का इन्तकाल बंबई मे 18 नवंबर 2009मे हो गया...आज उनके जयंती पर शत शत नमन🙏🙏🙏🙏🙏🌺🎂💐

गायक इरफान अली

  • मोहम्मद इरफान अली; एक भारतीय पार्श्वगायक है।. 
  • 🎂जन्म की तारीख और समय: 1 जुलाई 1984 (आयु 39 वर्ष), हैदराबाद
  • माता-पिता: नूर जहाँ
  • राष्ट्रीयता: भारतीय
  • नामांकन: गिल्ड पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक, ज़्यादा
  • शिक्षा: ऑल सन्त हाई स्कूल
  • मोहम्मद इरफ़ान की शुरूआती पढ़ाई आल सेंटस हाईस्कूल हैदराबाद से हुई है। मोहम्मद इरफ़ान को बचपन से ही संगीत का शौक था, जब इनके गुरु को यह बात ज्ञात हुई तो उन्होंने इरफान को संगीत में शिक्षित किया। इरफ़ान अपने स्कूल के दिनों से ही संगीत से जुड़ी हर गतिविधि में हिस्सा लिया करते थे। वह जो जीता वही सुपरस्टार सीजन 2 के विजेता भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह अमूल स्टार वॉइस ऑफ़ इंडिया और सा रे गा मा पा में भी बतौर प्रतियोगी नजर आ चुके है।  
  • इरफ़ान के करियर की शुरुआत एक कॉन्सर्ट के दौरान हुई, दरअसल वह एक कंसर्ट में अपनी पर्फॉर्मन्स दे रहे थे, वहीं पर तमिल निर्देशक बालासुब्रमणियम भी उपस्थित थे, जब उन्होंने इरफ़ान का गाना सुना तो वह मंत्रमुग्ध हो गए, और उन्होंने इरफ़ान को ए. आर रहमान से परिचित करवाया। उसके बाद 2010 में उन्होंने मणि रत्नम की फिल्म रावन में 'बहने दे' से अपने संगीत करियर की हिंदी सिनमा में शुरुआत की। इसी साल उन्होंने दो और गाने गाये सलाम जिंदगी, रहमत जरा, जिसके लिए उन्हें बेस्ट मेल सिंगर डेब्यू के अवार्ड से नवाजा गया।  

  • उसके बाद इरफ़ान ने महेश भट्ट निर्देशित फिल्म मर्डर 2 के लिए अर्जित सिंह संग 'फिर मोहब्बत' डुएट गाना गाया। यह गाना 2011 का सबसे हिट सांग साबित हुआ था। इसके साथ ही यह गाना युवा वर्ग की पहली पसंद भी था। इसके बाद इरफ़ान ने हिंदी सिनेमा के कई टॉप संगीतकारों के साथ काम किया। साल 2014 इरफ़ान के लिये बेहद सफल रहा, उन्होंने इस साल कई हिट फिल्मों में अपनी आवाज दी।
  • प्रसिद्ध गाने
  • बहने दे-रावन
  • रहमत जरा-लम्हा
  • फिर मोहब्बत- मर्डर 2
  • बारिश-यारियां
  • दिल धड़कने दो (टाइटल ट्रैक)- दिल धड़कने दो
  • दर्द दिलों के- द एक्सपोज
  • मुस्कुराने-सिटीलाइट्स
  • बंजारा-एक विलेन
  • तू ही तू-किक
  • गाये जा-ब्रदर्स
  • मेरे पास-फैंटम
  • बहने दे-रावन
  • रहमत जरा-लम्हा
  • फिर मोहब्बत- मर्डर 2
  • बारिश-यारियां
  • दिल धड़कने दो (टाइटल ट्रैक)- दिल धड़कने दो
  • दर्द दिलों के- द एक्सपोज
  • मुस्कुराने-सिटीलाइट्स
  • बंजारा-एक विलेन
  • तू ही तू-किक
  • गाये जा-ब्रदर्स
  • मेरे पास-फैंटम

हरी प्रसाद चौरसिया

हरिप्रसाद चौरसिया या पंडित हरिप्रसाद चौरसिया (जन्म: १ जुलाई १९३८इलाहाबाद) प्रसिद्ध बांसुरी वादक हैं। उन्हे भारत सरकार ने १९९२ में पद्म भूषण तथा सन् २००० में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी का जन्म 1 जुलाई, 1938 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। इनके पिता पहलवान थे। उनकी माता का निधन उस समय जब वह पांच साल के ही थे। हरिप्रसाद चौरसिया का बचपन गंगा किनारे बनारस में बीता। उनकी शुरुआत तबला वादक के रूप में हुई। अपने पिता की मर्जी के बिना ही पंडित हरिप्रसाद जी ने संगीत सीखना शुरु कर दिया था। वह अपने पिता के साथ अखाड़े में तो जाते थे लेकिन कभी भी उनका लगाव कुश्ती की तरफ नहीं रहा।

↔️संगीत की शिक्षा

अपने पड़ोसी पंडित राजाराम से उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखीं। इसके बाद बांसुरी सीखने के लिए वे  वाराणसी के पंडित भोलानाथ प्रसाना के पास गए। संगीत सीखने के बाद उन्होंने काफ़ी समय ऑल इंडिया रेडियो के साथ भी काम किया।संगीत में  उत्कृष्टता हासिल करने की खोज उन्हें बाबा अलाउद्दीन ख़ाँ की सुयोग्य पुत्री और शिष्या अन्नापूर्णा देवीकी शरण में ले गयी, जो उस समय एकांतवास कर रही थीं और सार्वजनिक रूप से वादन और गायन नहीं करती थीं। अन्नपूर्णा देवी की शागिर्दी में उनकी प्रतिभा में और निखार आया और उनके संगीत को जादुई स्पर्श मिला।
↔️पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने बांसुरी के जरिए शास्त्रीय संगीत को तो लोकप्रिय बनाने का काम किया ही, संतूर वादक पंडित शिवशंकर शर्मा के साथ मिलकर ‘शिव-हरि’ नाम से कुछ हिन्दी फ़िल्मों में मधुर संगीत भी दिया। इस जोड़ी की फ़िल्में हैं- चांदनी, डर, लम्हे, सिलसिला, फासले, विजय और साहिबान। पंडित चौरसिया ने एक तेलुगु फ़िल्म ‘सिरीवेनेला’ में भी संगीत दिया। जिसमें नायक की भूमिका उनके जीवन से प्रेरित थी। इस फ़िल्म में नायक की भूमिका 'सर्वदमन बनर्जी' ने निभायी थी और बांसुरी वादन उन्होंने ही किया था। इसके अलावा पंडित जी ने बालीवुड के प्रसिद्ध संगीतकारों सचिन देव बर्मन और राहुल देव बर्मन की भी कुछ फ़िल्मों में बांसुरी वादन किया।
↔️पंडित हरिप्रसाद चौरसिया को कई अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। लेकिन उसके बाद उन्हें दिल का दौर पड़ने लगा✓|इन्हें फ्रांसीसी सरकार का ‘नाइट ऑफ दि आर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स’ पुरस्कार और ब्रिटेन के शाही परिवार की तरफ से भी उन्हें सम्मान मिला है। इसके अतिरिक्त कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं -

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार- 1984
कोणार्क सम्मान- 1992
पद्म भूषण- 1992
पद्म विभूषण- 2000
हाफ़िज़ अली ख़ान पुरस्कार- 2000

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...