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मंगलवार, 4 जुलाई 2023

पंडित भारत व्यास

🎂जन्म 06जनवरी 1918
⚰️पं. भरत व्यास का निधन 4 जुलाई 1982
दौलत के झूठे नशे में जो चूर (फ़िल्म: ऊँची हवेली)
आ लौट के आजा मीत (फ़िल्म: रानी रूपमती)
निर्बल से लडाई बलवान की (फ़िल्म: तूफ़ान और दिया)
ऐ मलिक तेरे बंदे हम (फ़िल्म: दो आंखें बारह हाथ)
सांझ हो गई प्रभु (फ़िल्म: जय चित्तौड़)
मैने पीना सीख लिया (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
तेरे सुर और मेरे गीत (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
दिल का खिलौना हाय टूट गया (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
हाँ दीवाना हूं मैं (फ़िल्म: सारंगा)
सारंगा तेरी याद में (फ़िल्म: सारंगा)
तू छुपी है कहाँ (फ़िल्म: नवरंग)
आधा है चन्द्रमा (फ़िल्म: नवरंग)
तुम मेरे मैं तेरी (फ़िल्म: नवरंग)
आज मधुउत्सव डोले (फ़िल्म: स्त्री)
ओ निर्दय प्रीतम (फ़िल्म: स्त्री)
रैन भये सो जा रे पंची (फ़िल्म: राम राज्य)
ज्योत से ज्योत जगाते चलो (फ़िल्म: संत ज्ञानेश्वर)
तुम गगन के चन्द्रमा हो (फ़िल्म: सती सावित्री)
जीवन डोर तुम्ही संग बाँधी (फ़िल्म: सती सावित्री)
मन की गहराई
4 जुलाई 1982 को मुंबई में उनका निधन हो गया। उनके छोटे भाई अभिनेता बृजमोहन व्यास (1920-2013) थे।

रामलाल

⚰️4 जुलाई 2007 में रामलाल का निधन हो गया लगभग भुला दिये गये संगीतकार बांसुरी वादक,शहनाई वादक रामलाल की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
रामलाल बांसुरी और शहनाई वादन के कारण फिल्म संगीतकार बनने से पहले ही प्रसिद्ध हो गए थे। झांसी की रानी, मुगले आजम, नवरंग जैसी कई फिल्मों में शहनाई-बांसुरी बजाने वाले रामलाल ने ही रानी रूपमती के प्रसिद्ध गीत, ‘आ लौट के आ जा मेरे मीत’ में शहनाई वादन किया था। रामलाल सन 1944 में बंबई आकर पृथ्वी थिएटर्स में संगीतकार राम गांगुली के सहायक रहे। आग के कई गीतों में रामलाल की बजाई बांसुरी गूंजी थी। ‘जिंदा हूं इस तरह’ में उन्होंने पहली बार किसी फिल्मी गीत के लिए बांसुरी बजाई। व्ही. शांताराम ने उन्हें 200 रुपये महीने के पारिश्रमिक पर अपने यहां नियुक्त कर लिया। रामलाल ने शांताराम की सभी फिल्मों में बांसुरी और शहनाई वादन किया। शिवराम, वसंत देसाई, नौशाद, सी. रामचंद्र, आर.सी. बोराल, गुलाम मोहम्मद जैसे कितने संगीतकारों के साथ उन्होंने वादन किया। गूंज उठी शहनाई में बिस्मिल्ला खां से कहीं अधिक उनकी शहनाई बजी थी।

फिल्मों में संगीत देने का सिलसिला उन्होंने संतोषी की राज कपूर, वैजयंतीमाला अभिनीत तांगावाला (1950) से शुरू किया पर यह फिल्म रिलीज नहीं हुई। संगीत-समीक्षक योगेश यादव के अनुसार एक कान में हीरा दूसरे में पन्ना पहनने के कारण रामलाल अपने नाम के साथ-साथ ‘हीरा-पन्ना’ भी लगाते थे। नकाबपोश (1956) और शकीला-महीपाल अभिनीत हुस्नबानो (1956) में संगीतकार के रूप में उनका नाम आया। दरअसल, अप्रदर्शित तांगावाला के गीतों को ही रामलाल ने हुस्नबानो में फिर इस्तेमाल किया था। लता के गाए ‘प्यार करने का आया बहाना’ को लोकप्रियता मिली थी। यह फिल्म कानपुर में 28 हफ्ते चली थी। पर सुधा मल्होत्रा के ‘हम तुम्हारे हैं तलबगार तुम्हें क्या मालूम’, आशा के ‘या नबी सलाम अलैका’ या ‘मुझसे नजरें मिलाना संभाल के’ जैसे गीत असर पैदा करने में विफल रहे। इसी प्रकार धूमी खान के साथ संगीतबद्ध नकाबपोश (1956) के अरबी ऑर्केस्ट्रेशन वाले ‘ओ रे दिलवाले’ (आशा) और हसरत जयपुरी लिखित ‘ऐ रात तेरे साथी हैं चांद और तारे’ (आशा) को खास सफलता नहीं मिली। रामलाल हीरा-पन्ना की संगीतबद्ध बाबूभाई मिस्त्री निर्देशित नागलोक (1957) के ‘जो सबको नचाए’ (लता, साथी), ‘ये अबला करे पुकार’ (लता), ‘चंद्रनाथ नाथ भोले’ (आशा, रफी, साथी), ‘चाहे विधाता बैर निकाले’ (आशा), ‘घर आग सती के लागी’ (आशा) जैसे धार्मिक गीतों को तात्कालिक लोकप्रियता ही मिल पाई। बाबू भाई मिस्त्री की ही माया मच्छेंद्र (1960) में पुन: रामलाल हीरा-पन्ना को संगीतकार लिया गया था। इस फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल उनके सहायक थे! फिल्म में महेंद्र कपूर के गाए ‘यह वह धरती है जहां भगवान मिले’ में चारों धामों के वर्णन, लता के गाए उतार-चढ़ाव वाले गीत, ‘आया रे आया रे मेरे मन का चांद’, ‘जब से नैना ये लड़े हैं’, ‘रुन झुन पायल झनके’ (रफी के साथ), ‘जादू नगरी से नहीं जाना हो रसिया’ (उषा मंगेशकर के साथ) गीत लोकप्रिय नहीं हो सके थे। रामलाल एक ही टेक में गीत रेकॉर्ड करा लेते थे। ‘जब से नैना ये लड़े’ ऐसा ही गीत है।

रामलाल की यादगार फिल्मों में रहीं, व्ही. शांताराम की सेहरा (1963) और गीत गाया पत्थरों ने (1964)। यह रामलाल की अंदरूनी संगीत-प्रतिभा का ही कमाल था कि विफलताओं के बावजूद व्ही. शांताराम ने अपनी फिल्म के लिए उन्हें चुना। सेहरा के सभी गीतों के शब्द धुनों के बाद लिखे गए। सेहरा (1963) के ‘पंख होते तो उड़ आती रे’ (लता) से रामलाल अमर हो गए। राग भूपाली के ऊंचे सुरों के इस गीत की गिनती लता के सर्वश्रेष्ठ गीतों में होती है। गीत का प्रारंभ ही आलाप के अद्भुत नियंत्रण से होता है। पूरे गीत में समय-समय पर आलाप और इंटरल्यूड्स में जलतरंग का बेहतरीन उपयोग रामलाल ने किया था। एक ओर भूपाली के बेजोड़ आलाप रूप सुर थे तो दूसरी ओर राग देस में सुरों का उतार-चढ़ाव और हवाईयन (हवाई द्वीप) गिटार के साथ ‘तकदीर का फसाना जाकर किसे सुनाएं’ (लता, रफी) शिद्दत से मन-मस्तिष्क में फैल जाता है। वहीं तीसरी ओर मारू विहाग बड़ी नाजुक-सी रूमानियत के साथ ‘तुम तो प्यार हो सजना’ (लता, रफी) में सदाबहार हो गई है। यदि एक तरफ हेमंत कुमार के स्वर में ‘न घर तेरा न घर मेरा’ की पंक्तियां गहराती चलती हैं तो दूसरी ओर ‘हम हैं नशे में’ (आशा, साथी) के साथ आशा का खुमार मदहोश करता जाता है। शोखी भरे सुरों के साथ ‘जा जा जा रे तुझे हम जान गए’ में लता और रफी के साथ हम सभी झूम उठते हैं। सेहरा इस दशक की बेहतरीन संगीतमय उपलब्धि थी।
सेहरा की सफलता से प्रभावित होकर गीत गाया पत्थरों ने (1964) में शांताराम पुन: रामलाल को लेकर आए और रामलाल ने अपना सिक्का जमा दिया। फिल्म के शीर्षक गीत को राग दुर्गा में कंपोज कर उन्होंने प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका किशोरी अमोणकर से गवाया। इसी गीत को आशा, महेंद्र के स्वरों में भी कंपोज किया। गीत के दोनों वर्जन लोकप्रिय हुए। गूंजते सुरों का प्रभाव पैदा करते, ‘तेरे खयालों में हम’ (आशा) के बोल मेघ मल्हार में भी रामलाल ने बड़ी कुशलता से संवारे थे। इस गीत के अंतरे में भैरव का स्पर्श डालकर रामलाल ने इसे सुंदर रचना बना दिया। फिल्म की विशिष्ट उपलब्धि थी सी.एच. आत्मा से गवाए दो गीत, ‘मंडवे तले गरीब के’ और ‘एक पल को मिला है।’ खमाज आधारित ‘रात नौजवां झूमता समां’ (आशा), ‘जाने वाले ओ मेरे प्यार’ (आशा) और लंबा गीत ‘आइए पधारिए’ (आशा, महेंद्र, साथी) और इस जैसे अन्य कर्णप्रिय गीतों के साथ गीत गाया पत्थरों ने का संगीत सराहा गया और लोकप्रिय भी रहा। विडंबना है कि इसके बावजूद किसी अन्य निर्माता ने रामलाल को संगीतकार के रूप में मौका नहीं दिया। रामलाल ने कन्नड़ फिल्मों में रामलाल ‘सेहरा’ नाम से बलुआ प्रपन्नय मजोड़ी, दाहा और डोमरा कृष्णा में संगीत दिया और एस. जानकी, येसुदास और एस.पी. बाला सुब्रह्मण्यम से गीत गवाए थे। रामलाल को महाराष्ट्र सरकार से सात सौ रुपये मासिक पेंशन मिलती थी। कोलाबा जैसे धनाढ्य इलाके में रहने वाले रामलाल को अंतिम समय खोली में गुजारना पड़ा।

⚰️4 जुलाई 2007 में रामलाल का निधन हो गया

कोदुरी मार्कटामणि कीरवानी, एम एम क्रेम

प्रसिद्ध संगीतकार गायक के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

कोदुरी मार्कटामणि कीरवानी जिन्‍हें एम एम क्रेम के नाम से जाना जाता है। एक भारतीय म्‍यूजिक कम्‍पोज़र और प्‍लेबैक सिंगर हैं। जिन्‍होंने अब तक कई तेलगू तमिल कन्‍नड़ मलयालम और हिंदी फिल्‍मों में काम किया है।
उनका जन्‍म 4 जुलाई 1961 को आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में हुआ था।

करियर:

केरावनी ने पहली बार 1987 में प्रसिद्ध संगीतकार के चक्रवर्ती के साथ एक सहायक संगीत निर्देशक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने 1980 के दशक के अंत में कलेगोर्गरी अब्बाई और भरतमालो अर्जुनुडु जैसी फिल्मों में सहायता की। इस समय के दौरान, उन्होंने एक वर्ष के लिए अनुभवी गीतकार वेटुरी से मार्गदर्शन भी लिया। हालांकि, यह राम गोपाल वर्मा की ब्लॉकबस्टर फिल्म क्षनाशनम (1991) थी जिसने केरावनी को एक अच्‍छे संगीत निर्देशक के रूप में स्थापित किया। इस फिल्म के सभी गाने चार्टबस्टर बन गए और केरावनी को पूरे दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योगों से प्रस्‍ताव आने लगे।

उनकी पहली प्रमुख हिंदी फिल्म क्रिमिनल थी। उन्हें तेलुगु फिल्म उद्योग में अन्नमय्या जैसी हिट फिल्‍म मे उनके पार्श्व गायन के लिए जाना जाता है, उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए संगीत की रचना की है जैसे कि रात की सुबह नहीं (1996), सुर - द मेलोडी ऑफ लाइफ, ज़ख्म, साया, जिस्म, क्रिमिनल, रोग और पहेली। मलयालम में, उन्होंने नीलगिरी (1991), सूर्या मनसम (1992) और देवारागम (1996) जैसी फिल्मों के काम किया है।

पुरस्‍कार:

1997 में, उन्हें तेलुगु फिल्म अन्नामय्या में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिये राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया उन्होंने 8 फिल्मफेयर पुरस्कार, ग्यारह राज्य नंदी पुरस्कार और एक तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार जीता

जोगिंद्र शैली

जोगिंदर शैली एक भारतीय 
जोगिंदर शैली
जोगिंदर शैली के अन्य नाम: जोगिंदर सिंह
अभिनेता हिंदी    

जोगिंदर शैली हिंदी अभिनेता

🎂जन्मतिथि: 04-07-1949

⚰️मृत्यु तिथि: 15-06-2009

» लेखक» निदेशक» अभिनेता

जोगिंदर शैली एक भारतीय निर्देशक, लेखक, गायक, निर्माता और अभिनेता थे। वह एक गीतकार और वितरक भी थे। उन्होंने रंगा कुश और बिंदिया और बंदूक नामक दो ब्लॉकबस्टर हिंदी फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया। जोगिंदर का जन्म 4 जुलाई 1949 को पंजाब के खानेवाल में हुआ था। उन्होंने अपने काम की नकल करने के लिए फिल्म शोले के निर्माताओं के खिलाफ साहित्यिक चोरी का मुकदमा जीता। रंगा कुश का किरदार फिल्म शोले में गब्बर सिंह के किरदार से मिलता जुलता था।

उन्होंने बहुत सारी फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया। उनकी ज्यादातर फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर कोई पहचान नहीं मिली. यहां तक ​​कि उन्हें सबसे खराब निर्देशकों की सूची में भी रखा गया था. जोगिंदर ने कई खराब कलाकारों वाली फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया। उनकी अधिकांश फिल्में खराब तरीके से बनाई और निर्देशित की गईं, जिनमें असमान कलाकार, अजीब संवाद और खराब कथानक तत्व शामिल थे। जब उन्होंने फिल्म बिंदिया और बंदूक का निर्देशन और निर्माण किया तो उन्हें सफलता मिली। बिंदिया और बंदूक और रंगा कुश की सफलता के बाद जोगिंदर ने फिल्म बिंदिया और बंदूक का सीक्वल बनाने का फैसला किया।

यह फिल्म जेपी दत्ता की एलओसी पर रिलीज हुई थी। फिल्म बुरी तरह असफल रही और बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफलता नहीं कमा पाई, हालांकि उन्होंने फिल्म में मैं हूं बॉटल बैंड शराब नाम का एक हिट गाना दिया। उसके बाद, जोगिंदर कभी बड़े पर्दे पर नहीं लौटे और छोटे बजट की फिल्मों और पंजाबी टीवी धारावाहिकों का निर्माण और अभिनय किया। उनकी फिल्म, रंगा कुश को बार-बार संसद भवन में प्रदर्शित किया गया। जोगिंदर एक प्रशिक्षित पायलट भी थे। अभिनेता बनने से पहले वह इंदिरा गांधी के साथ काम करते थे। जोगिंदर ने कई फिल्मों में काम किया है।

उनके उल्लेखनीय कार्यों में खूनी तांत्रिक, मेरी जंग का एलान, गंगा और रंगा, कौन करे कुर्बानी, द रिवेंज: गीता मेरा नाम, जागो हुआ सवेरा और कई अन्य फिल्में शामिल हैं। जोगिंदर किडनी और लीवर की समस्याओं से पीड़ित थे और 15 जून 2009 को उनकी मृत्यु हो गई। उनके दो बेटे, एक बेटी और एक पत्नी जीवित हैं।
जोगिंदर शैली एक शानदार निर्देशक थे जिन्हें बी और सी ग्रेड फिल्मों का राजा कहा जाता था। एक कर्णधार होने के अलावा, उन्होंने एक अभिनेता, निर्माता, लेखक और वितरक के रूप में भी काम किया। व्यावसायिक रूप से सफल फिल्म निर्माता को मुख्य रूप से बिंदिया और बंदूक, बिंदिया और बंदूक पार्ट II और रंगा खुश के लिए जाना जाता है। 4 जुलाई 1949 को शैली का जन्म खानेवाल, पंजाब (वर्तमान में पाकिस्तान) में हुआ था। उनके अपने शब्दों में, उन्होंने फिल्म उद्योग में कदम रखने से पहले इंदिरा गांधी के लिए पायलट के रूप में काम किया था। उन्होंने 1960 की फिल्म हम हिंदुस्तानी और हीर रांझा, पूरब और पश्चिम, बचपन, हंगामा, वफ़ा आदि जैसी अन्य फिल्मों से एक अभिनेता के रूप में शुरुआत की। शेली को बड़ा ब्रेक फिल्म बिंदिया और बंदूक से मिला, जहां उन्होंने डाकू रंगा का किरदार निभाया। फिल्म और उनका किरदार दोनों सुपर-हिट थे, जिसमें बच्चे रंगा की पागल हंसी और आंखें घुमाने की नकल करते थे। उपरोक्त फिल्म में दो शब्दों के संवाद के कारण जोगिंदर ने रंगा खुश नामक एक और फिल्म का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने रंगा की भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने बिंदिया और बंदूक का सीक्वल बिंदिया और बंदूक पार्ट II निर्देशित किया। फिल्म ने अपने हिट गाने 'मैं हूं बॉटल बैंड' से ध्यान खींचा। जोगिंदर ने पंडित और पठान, फौजी, प्यासा शैतान, कसम दुर्गा की जैसी अन्य फिल्मों की पटकथा, निर्देशन और अभिनय किया। उन्होंने सन ऑफ ड्रैकुला, भोजपुरी फिल्म हम तो हो गई नी तोहार, जंगल और मेरी गंगा की सौगंध जैसी फिल्मों में काम किया। प्यासा शैतान, कसम दुर्गा की। उन्होंने सन ऑफ ड्रैकुला, भोजपुरी फिल्म हम तो हो गई नी तोहार, जंगल और मेरी गंगा की सौगंध जैसी फिल्मों में काम किया। प्यासा शैतान, कसम दुर्गा की। उन्होंने सन ऑफ ड्रैकुला, भोजपुरी फिल्म हम तो हो गई नी तोहार, जंगल और मेरी गंगा की सौगंध जैसी फिल्मों में काम किया।

अन्य अभिनय क्रेडिट में डुप्लिकेट शोले, जीने नहीं दूंगी, कौन करेगा इंसाफ, मेमसाब नंबर 1, महारानी, ​​एक लुटेरा, बिंदिया मांगे बंदूक, जंगल टार्ज़न आदि शामिल हैं। उन्होंने भाई ठाकुर में लाखन सिंह, मेरी जंग का एलान में ठाकुर दिलावर सिंह और द रिवेंज: गीता मेरा नाम में शैतान सिंह की भूमिका निभाई। 2000 की फिल्म मीता दे बिंदिया उठा दे बंदूक में उन्होंने डाकू जग्गावर का किरदार निभाया था। उन्होंने गंगा और रंगा में रंगा, इंसानियत के देवता में तिलकधारी और पुलिस और मुजरिम में जग्गा की भूमिका निभाई। उनके निर्देशन में बिंदिया और बंदूक पार्ट II, बिंदिया मांगे बंदूक, ये हैं बस्ती बदमाशों की, हिंद की बेटी, गंगा और रंगा और आदमखोर शामिल हैं।

उन्होंने वो फिर नहीं आए, तीन एक्के, श्यामला, यारी जिंदाबाद आदि जैसी अन्य फिल्मों का भी निर्देशन किया। शैली ने टेलीविजन श्रृंखलाओं में अभिनय किया।हातिम ताई, ज़िम्बो,मिर्ज़ा ग़ालिब: द प्लेफुल म्यूज़, और फिर वही आवाज़ दो। जोगिंदर शैली 15 जून 2009 को जुहू, मुंबई में लीवर और किडनी की बीमारी के कारण इस दुनिया को छोड़कर चले गए। बहुमुखी अभिनेता के रूप में उनकी बेटी और दो बेटे जीवित हैं।

वीना त्रिपाठी

🎂जन्म की तारीख और समय: 4 जुलाई 1979  नई दिल्ली
पति: हेमंत टिकू (विवा. 2013)
दल: भारतीय जनता पार्टी
शिक्षा: हिंदू कॉलेज–दिल्ली विश्वविद्यालय (एचसी–डीयू)

वाणी त्रिपाठी पूर्व हिंदी अभिनेत्री और अब भाजपा की राष्ट्रीय सचिव हैं। वह वर्तमान में गोवा में आयोजित होने वाले भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के जूरी पैनल में हैं। इससे पहले वह साढ़े तीन महीने तक IFFI की संचालन समिति में काम कर चुकी थीं. फिलहाल उन्होंने गोवा में हो रहे IFFI के इंडियन पैनोरमा सेक्शन में तीसरी संस्कृत फीचर फिल्म 'प्रियमानसम' की स्क्रीनिंग को हरी झंडी दे दी थी, जिस पर विवाद खड़ा हो गया था. पिछले साल, आईएफएफआई की संचालन समिति के सदस्य के रूप में, उन्होंने घोषणा की थी कि फिल्म महोत्सव ब्रिटिश फिल्म निर्माता रिचर्ड एटनबरो को विशेष श्रद्धांजलि देगा, जो अपनी अकादमी-पुरस्कार विजेता फिल्म 'गांधी' के लिए जाने जाते हैं। वाणी अब सीबीएफसी बोर्ड सदस्य (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) भी हैं। इस साल की शुरुआत में गोविंद निहलानी के भाई पंकज निहलानी ने... सीबीएफसी के अध्यक्ष बने. वाणी अब भाजपा के वफादार हैं और उनके पास सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग हैं। इससे पहले इस एक्ट्रेस ने हिंदी फिल्म 'दुश्मन' से डेब्यू किया था, जिसमें मुख्य कलाकार काजोल थीं।

बाद में, वह शाहरुख खान की दो फिल्मों जैसे "चलते चलते" और ""। जिसके बाद, उन्हें कुछ और फिल्मों जैसे 'दिल से पूछ किधर जाना है' (2006) आदि में देखा गया। फिल्मों में अभिनय के बल पर, उन्हें भाजपा में शामिल होने का मौका मिला और बाद में उन्होंने 2013 में कश्मीरी बिजनेसमैन हेमंत टिकू से शादी कर ली। यह अभिनेत्री कुछ सालों तक ही फिल्मों में सक्रिय रही और उन्होंने जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया।महेश भट्ट, तनुजा चंद्रन, औरकुन्दन शाह

फिल्मे
2006 दिल से पूछ...किधर जाना है आलिया हिंदी 
2004 इंतेक़म: बिल्कुल सही गेम वाणी ट्रैपथी हिंदी 
2003 चलते चलते हिंदी
2000 फिर भी दिल है हिंदुस्तानी छोटा हिंदी 
1998 दुश्मन सुननदा त्रिपाठी हिंदी 
1997 नेल प्रोफोंडो पेसे स्ट्रानियरो प्रोस्टिटुटा इंडियाना हिंदी

प्रतिभा सिन्हा

🎂जन्म04 जुलाई 1969
कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
पेशा
फिल्म अभिनेत्री
कार्यकाल
1992 - 2000
प्रतिभा सिन्हा एक भारतीय अभिनेत्री हैं। उनका मूल स्थान नेपाल है. वह अभिनेत्री माला सिन्हा की बेटी है जो1992 से बॉलीवुड फिल्मों में काम कर रही हैं। वह एक स्टार किड थीं। प्रतिभा की बेटी हैं, जो अपने समय की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री थीं। उनके पिता नेपाल में एक नेपाली अभिनेता और व्यवसायी थे। उनकी पहली फिल्म 1992 में आई मेहबूब मेरी मेहबूब थीसुजॉय मुखर्जी, जो एक स्टार किड भी थे।

इसके बाद उन्होंने तूचोर मैं सिपाही, एक था राजा, पोकिरी राजा, दिल है बेताब, कल की आवाज जैसी फिल्में कीं। फिल्म में उनका अभिनय 'राजा हिंदुस्तानी' साल 1996 में आया गाना 'परदेसी परदेसी' आज भी याद किया जाता है। उन्होंने 13 फिल्मों में अभिनय किया और फिल्म उद्योग में बड़ा करियर नहीं बना सकीं। कथित तौर पर वह संगीतकार से प्यार करती थीनदीम सैफीजिसका उसकी माँ ने विरोध किया क्योंकि वह एक शादीशुदा आदमी था।
इनकी मशहूर फिल्मे
ले चल अपने संग (2000)
ज़ंजीर (1998)
कोई किसी से कम नहीं (1997)
दीवाना मस्ताना (1997) 
गुडगुडी (1997)
राजा हिंदुस्तानी (1996)
तू चोर मैं सिपाही (1996)
एक था राजा (1996)
पोकिरी राजा (1994) (तेलुगु)
दिल है बेताब (1993)
कल की आवाज़ (1992)
मेहबूब मेरे मेहबूब (1992)
मिलिट्री राज (1998)

ऐश्वर्या निगम हिंदी अभिनेता

🎂जन्मतिथि: 04-07-1989

ऐश्वर्या निगम हिंदी अभिनेता

🎂जन्मतिथि: 04-07-1989

 पार्श्व गायक गायक अन्य कौशल


ऐश्वर्या निगम एक भारतीय गायिका हैं। उनका जन्म 4 जुलाई 1989 को हुआ था। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के लिए कई गाने गाए हैं। उन्हें फिल्म 'मुन्नी बदनाम हुई' के गाने के लिए जाना जाता है।दबंग'. इस गाने के लिए उन्हें कई अवॉर्ड मिले.


सिंगिंग रियलिटी शो जीतने के बाद वह मशहूर हो गए'सारेगामापा'. उनका जन्म स्थान बिहार का मुजफ्फरपुर है। उनकी मां मुखर्जी सेमिनरी में लेक्चरर थीं और उनके पिता पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर थे। उन्होंने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा प्रतिष्ठित स्कूल मुजफ्फरपुर सन शाइन प्रेप हाई स्कूल से प्राप्त की। उनका बचपन मुजफ्फरपुर के न्यू कॉलोनी शेरपुर में गुजरा।


निगम ने संगीत प्रतियोगिता 'सा रे गा मा पा' और 'नाम की एक अन्य प्रतियोगिता' में भाग लिया।एक मैं और एक तू'2006 में ज़ी टीवी के लिए। 24 जून 2006 को निगम औरउज्जयिनी मुखर्जीसंगीत प्रतियोगिता के चैंपियन बने। निगम गायन प्रतियोगिता 'जो जीता वही सुपरस्टार' के विजेता भी बने, जो स्टार प्लस पर एक शो है। निगम 'आईपीएल रॉकस्टार' के शीर्ष तीन फाइनलिस्टों में से एक थे।सोनू निगमउनके लिए एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं और इसलिए वह अपने नाम के साथ निगम भी लगाते हैं।


उन्होंने सीज़न 1 और 2 के लिए टीवी ड्रामा सीरीज़ 'कितनी मोहब्बत है' का शीर्षक ट्रैक गाया। उन्होंने कई प्रसिद्ध निर्देशकों के साथ काम किया, जैसेअनु मलिक,ललित पंडित, और शमीर टंडन। उन्होंने विभिन्न फिल्मों के लिए कई गाने गाए हैं, जिनमें फिल्म का "मारा रे सिक्सर मारा रे फोर" भी शामिल हैफेरारी की सवारी. निगम के हिट गानों में से एक फिल्म 'तेरे मोहल्ले' है।Besharam'. उन्होंने भारतीय फिल्मों जैसे कैलापोर, गैंग ऑफ घोस्ट्स और अन्य में कई पार्श्व गीत गाए हैं।

सोमवार, 5 जून 2023

सुलोचना लाटकर


सुलोचना लाटकर
जन्म 20जुलाई 1928
मृत्यु 04जुलाई
 जन्म 20 जुलाई 1928 में हुआ। सुलोचना लाटकर ने 250  हिंदी और 50 से ज्यादा मराठी फिल्मो में काम किया। उन्होंने 1932 में फिल्म माधुरी के माध्यम से एक बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। वह उस फिल्म में अभिनय करने के समय सिर्फ 4 साल की थीं।  उसके बाद से उन्होंने काफी ज्यादा परिश्रम किया और आखिरकार वर्ष 1946 में हिंदी फिल्म कीमत  के माध्यम से उन्होंने  अपने अभिनय की शुरुआत की।
एक छोटी उम्र से फिल्मो में काम करने के बात सुलोचना लाटकर ने काफी नाम कमाया जिसकी बदौलत उन्हें कई फिल्मो में काम करने का मौका मिला। एक दशक से अधिक समय तक मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाने के बाद, उन्होंने उस दौर के सुपरस्टार जैसे सुनीत दत्त और देव आनंद की माँ की भूमिका निभानी शुरू कर दी। जिसमे में भी सुलोचना लाटकर को काफी ज्यादा कमियाबी मिलने लगी । 
सुलोचना ने लगभग 7 दशकों के अपने करियर में, उन्होंने 250 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है और वह एक प्रसिद्ध मराठी फिल्म अभिनेत्री भी थीं और उन्होंने 50 से अधिक मराठी फिल्मों में उन्होंने काम किया और अपनी एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया। अभिनेता राजेश खन्ना के साथ उन्होंने कई कामियाब फिल्मो में काम किया। उन्होंने बॉलीवुड की कुछ प्रसिद्ध फिल्मों जैसे मेरे जीवन साथी, कटी पतंग, प्रवेश और त्याग  जैसी कई अन्य फिल्मों में कई अहम भूमिकाएँ निभाई।

सुलोचना लाटकर की फिल्मो की अगर बात करे तो खून भरी मांग, आशा, कटी पतंग , जोहनी मेरा नाम, आदमी, देवर, कहानी किस्मत की, अब दिल्ली दूर नहीं, दिल देके देखो, बंदिनी, नयी रौशनी, आदमी, जोहर महमूद इन गोवा आदि फ़िल्मो में उन्होंने काम किया। सुलोचना काफी कामयाब रही। 

सुलोचना की निजी जिंदगी की अगर बात करे तो उनकी शादी 14 साल की उम्र में ही हो गयी थी सुलोचना की एक बेटी  है जिसका नाम कंचन है, कंचन ने मशहुर मराठी एक्टर  काशीनाथ घानेकर से शादी की। सुलोचना को 1999 में पद्मा श्री, और 2004 में फिल्म टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। 



भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...