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शनिवार, 6 जनवरी 2024

भरत व्यास

#06jan 

#04july

भरत व्यास हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे। 


🎂06 जनवरी 1918

⚰️04 जुलाई 1982 को मुंबई में उनका निधन हो गया।


 जाति से पुष्करना ब्राह्मण थे। मूल रूप से चुरू (राजस्थान का एक जिला) के थे। बचपन से ही इनमे कवि प्रतिभा दिखने लगी थी। उन्होंने 17_18वर्ष की उम्र तक लेखन शुरू कर दिया था। चुरू से मैट्रिक करने के बाद वे कलकत्ता चले गए। उनका लिखा पहला गीत था — आओ वीरो हिलमिल गाए वंदे मातरम। उनके द्वारा "रामू चन्ना " नामक नाटक भी लिखा गया। 1942 के बाद वे बम्बई आ गए उन्होंने कुछ फ़िल्मों में भी भूमिका निभाई लेकिन प्रसिद्धि गीत लेखन से मिली।


हिंदी फिल्मों में उनका पहला ब्रेक फ़िल्म "दुहाई" के लिए था, जो 1943 में रिलीज़ हुई थी, और संगीत निर्देशन का श्रेय संयुक्त रूप से पन्नालाल घोष, रफ़ीक गज़नवी और शांति कुमार को दिया गया था। गीत नूरजहाँ और शांता आप्टे द्वारा गाए गए थे। व्यास नाटकों और रिकॉर्ड के लिए राजस्थानी गीत लिखते थे। यह भी उल्लेख है कि उन्होंने बंबई (अब मुंबई) में फिल्मों में आने से पहले कलकत्ता (अब कोलकाता) में पढ़ाई पूरी की। उन्हें फिल्म निर्देशन में भी दिलचस्पी थी और वास्तव में उन्होंने करियर की शुरुआत में ही एक फिल्म का निर्देशन किया था। उन्होंने 1940 के दशक में कुछ शुरुआती फिल्मों में अभिनय और गीत भी गाए। मुंबई आने के बाद, उनकी काव्य रचनाएँ लोकप्रिय हुईं।


उनकी मृत्यु 1982 मे हुई थी। उनके लिखे कुछ प्रमुख गीतों की फिल्मों के नाम हैं:— सारंगा, संत ज्ञानेश्वर, तूफ़ान और दिया, रानी रूपमती, गूंज उठी शहनाई, दो आँखे बारह हाथ, नवरंग, बूँद जो बन गई मोती, पूर्णिमा, आदि-आदि फ़िल्मों के यादगार/अमर गीत रचे थे।

दौलत के झूठे नशे में जो चूर (फ़िल्म: ऊँची हवेली)

आ लौट के आजा मीत (फ़िल्म: रानी रूपमती)

निर्बल से लडाई बलवान की (फ़िल्म: तूफ़ान और दिया)

ऐ मलिक तेरे बंदे हम (फ़िल्म: दो आंखें बारह हाथ)

सांझ हो गई प्रभु (फ़िल्म: जय चित्तौड़)

मैने पीना सीख लिया (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)

तेरे सुर और मेरे गीत (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)

कह दो कोई न करे यहाँ प्यार (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)

दिल का खिलौना हाय टूट गया (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)

हाँ दीवाना हूं मैं (फ़िल्म: सारंगा)

सारंगा तेरी याद में (फ़िल्म: सारंगा)

तू छुपी है कहाँ (फ़िल्म: नवरंग)

आधा है चन्द्रमा (फ़िल्म: नवरंग)

तुम मेरे मैं तेरी (फ़िल्म: नवरंग)

आज मधुउत्सव डोले (फ़िल्म: स्त्री)

ओ निर्दय प्रीतम (फ़िल्म: स्त्री)

रैन भये सो जा रे पंची (फ़िल्म: राम राज्य)

ज्योत से ज्योत जगाते चलो (फ़िल्म: संत ज्ञानेश्वर)

तुम गगन के चन्द्रमा हो (फ़िल्म: सती सावित्री)

जीवन डोर तुम्ही संग बाँधी (फ़िल्म: सती सावित्री)

मन की गहराई

4 जुलाई 1982 को मुंबई में उनका निधन हो गया। उनके छोटे भाई अभिनेता बृजमोहन व्यास (1920-2013) थे।


जिन फिल्मों के लिए उन्होंने गीत रचे:


मन की जीत' (1944; इस फ़िल्म के लिए दो गीत रचे; संगीत: एस.के. पाल ने दिया था।)

गुलामी (1945; फ़िल्म में व्यास ने पांच गाने लिखे, बाकी जोश मलीहाबादी ने; संगीत: एस.के. पाल ने दिया था।)

पृथ्वीराज संयुक्ता (1946; पृथ्वीराज कपूर मुख्य भूमिका में थे, और भरत व्यास ने फिल्म के लिए अभिनय किया और गाया; संगीत: एस.के. पाल ने दिया था।)

मीराबाई (1947)

चंद्रलेखा (1948; गीत बहुत लोकप्रिय थे, व्यास ने खुद एक गीत गाया ( संगीत: एस. राजेश्वर राव ने दिया था।) इस फ़िल्म में व्यास ने केवल दो गीत लिखे थे।

अंजना (1948)

रंगीला राजस्थान (1949; भरत व्यास ने इस फ़िल्म का निर्देशन किया था।)

सावन आया रे (1949)

बिजली (1950)

आंखें (1950)

हमारा घर (1950)

राज मुकुट (1950)

श्री गणेश जन्म (1951)

नखरे (1951)

भोला शंकर (1951)

तमाशा (1952)

अपनी इज़्ज़त (1952)

नौलखा हार (1953)

धर्मपत्नी  (1953)

परिणीता (1953)

श्री चैतन्य महाप्रभु (1954)

जगदुरु शंकराचार्य (1955)

अंधेर नगरी चौपट राजा (1955)

ऊँची हवेली (1955)

तूफ़ान और दिया (1956)

द्वारिकाधीश (1956)

दो आँखें बारह हाथ (1957)

जनम जनम के फेरे (1957)

सम्राट चन्द्रगुप्त (1958)

सहारा (1958)

सुवर्णा सुंदरी (1958)

कवि कालिदास (1959)

सम्राट पृथ्वीराज चौहान (1959)

बेदर्द ज़माना क्या जाने (1959)

फैशनेबल पत्नी (1959)

गूंज उठी शहनाई (1959)

नवरंग (1959; गीत बहुत लोकप्रिय थे, व्यास ने खुद एक गीत गाया था।)

रानी रूपमती (1959)

चंद्रमुखी (1960)

अंगुलिमाल (1960)

हम हिंदुस्तानी (1960)

सम्पूर्ण रामायण (1961)

स्त्री (1961)

सारंगा (1961)

पिया मिलन की आस (1961)

जय चित्तौड़ (1961)

प्यार की प्यास (1961)

कण कण में भगवान (1963)

सती सावित्री (1964)

दाल में काला (1964)

चा चा चा (1964)

भारत मिलाप (1965)

पूर्णिमा (1965)

महाभारत (1965)

गोपाल-कृष्ण (1965)

राम राज्य (1967)

बून्द जो बन गई मोती (1967)

सती सुलोचना (1969)

लव कुश (1974)

तू ही राम तू ही कृष्णा (1976)

कर्म (1977)

दो चेहरे (1977)

मान अपमान (1979)

मुकद्दर (वर्ष ज्ञात नहीं/Year not known)

जन्माष्टमी (वर्ष ज्ञात नहीं/Year not known)

मौसी (वर्ष ज्ञात नहीं/Year not known)


मंगलवार, 4 जुलाई 2023

नसीम बानो

🎂जन्म 4 जुलाई, 1916 ई

⚰️18 जून, 2002
ट्रेजेडी किंग दिलीप साहब की सासू माँ, अभिनेत्री सायरा बानो की माँ, ब्यूटी क्वीन नसीम बानो के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धाजंलि

नसीम बानो भारतीय सिनेमा' में चालीस के दशक की हिन्दी फ़िल्मों की प्रमुख अभिनेत्री थीं। भारतीय सिने जगत् में अपनी दिलकश अदाओं से दर्शकों को दीवाना बनाने वाली इस अभिनेत्री को उसकी ख़ूबसूरती के लिए "ब्यूटी क्वीन" कहा जाता था। हिन्दी सिनेमा की एक और प्रसिद्ध अभिनेत्री सायरा बानो, नसीम बानो की ही पुत्री हैं।

नसीम बानो का जन्म 4 जुलाई, 1916 ई. को हुआ था। इनकी परवरिश शाही ढंग से हुई थी। वह स्कूल पढ़ने के लिए पालकी से जाती थीं। नसीम बानो सुन्दरता की मिसाल थीं। उनकी सुंदरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें किसी की नज़र न लग जाए, इसलिये उन्हें पर्दे में रखा जाता था।

नसीम बानो ने अहसान मियाँ नामक एक अमीर व्यक्ति से प्रेम विवाह किया था। अहसान मियाँ ने नसीम बानो की खातिर कुछ फ़िल्मों का निर्माण भी किया था। बाद के समय में नसीम बानो और अहसान मियाँ का दाम्पत्य रिश्ता टूट गया। भारत का विभाजन होने और पाकिस्तान बन जाने के बाद अहसान मियाँ कराची जाकर बस गये। पति से अलग होने के बाद नसीम बानो मुंबई में ही बनी रहीं। बाद में वे अपनी बेटी सायरा बानो और बेटे सुल्तान को लेकर लंदन में जा बसीं।

सिनेमा जगत् में नसीब बानो का प्रवेश संयोगवश हुआ था। एक बार नसीम बानो अपनी स्कूल की छुटियों के दौरान अपनी माँ के साथ फ़िल्म 'सिल्वर किंग' की शूटिंग देखने गयीं। फ़िल्म की शूटिंग देखकर नसीम बानो मंत्रमुग्ध हो गयीं और उन्होंने निश्चय किया कि वह अभिनेत्री के रूप में अपना सिने कॅरियर बनायेंगी। इधर स्टूडियों में नसीम बानो की सुंदरता को देख कई फ़िल्मकारों ने नसीम बानो के सामने फ़िल्म अभिनेत्री बनने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उनकी माँ ने यह कहकर सभी प्रस्ताव ठुकरा दिये कि नसीम अभी बच्ची है। नसीम की माँ उन्हें अभिनेत्री नहीं बल्कि डॉक्टर बनाना चाहती थीं। इसी दौरान फ़िल्म निर्माता सोहराब मोदी ने अपनी फ़िल्म ‘हेमलेट' के लिये बतौर अभिनेत्री नसीम बानो को काम करने के लिए प्रस्ताव दिया और इस बार भी नसीम बानो की माँ ने इंकार कर दिया, लेकिन इस बार नसीम अपनी जिद पर अड़ गयी कि उन्हें अभिनेत्री बनना ही है। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी बात मनवाने के लिये भूख हड़ताल भी कर दी

सन् 1935 में नसीम को फ़िल्मों में ब्रेक दिया मशहूर फ़िल्मकार सोहराब मोदी ने और 'खून का खून' फ़िल्म का निर्माण किया। इसके बाद नसीम 1941 तक सोहराब मोदी की ही फ़िल्मों में व्यस्त रहीं और इस दौरान उनकी 'खान बहादुर' (1937), ' डाइवोर्स ' तथा 'मीठा जहर' (1938), 'पुकार' (1939) और 'मैं हारी' (1940) में प्रदर्शित हुई। मुग़ल सम्राट जहाँगीर के एक इंसाफ को आधार बनाकर बनाई गई 'पुकार' सुपरहिट रही। इसमें जहाँगीर का किरदार अभिनेता चंद्रमोहन ने निभाया, जबकि नसीम बानो जहाँगीर के बेगम की भूमिका में थीं। जब फ़िल्म प्रदर्शित हुई तो उस दौर में मुंबई के सिनेमाघरों में फ़िल्म देखने वालों की भारी भीड़ जुटी। उस फ़िल्म की सफलता के बाद नसीम बानो फ़िल्म उद्योग में स्टार के रूप में स्थापित हो गईं और इंडस्ट्री की सबसे व्यस्त अभिनेत्री बन गईं।

अपनी इस सफलता के बाद 1942 में उनकी पृथ्वीराज कपूर के साथ फ़िल्म 'उजाला' आई। इसे भी दर्शकों ने पसंद किया। 'उजाला' का निर्माण 'ताजमहल पिक्चर' के बैनर तले हुआ था। फ़िल्मीस्तान कंपनी ने जब फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा तो अभिनेत्री के रूप में कंपनी की पहली पिक्चर में नसीम बानो को साइन किया। 'चल-चल रे नौजवान' नामक इस सफल फ़िल्म में नसीम के साथ नायक का किरदार निभाया 'दादा मुनि' उर्फ अशोक कुमार ने। इस फ़िल्म ने भी अच्छा कारोबार किया और नसीम बानो और व्यस्त कलाकार बन गईं। उन्होंने फ़िल्मकार महबूब खान की कई फ़िल्मों में भी अभिनय किया। उसके बाद अपनी बेटी सायरा बानो का दौर शुरू हो जाने से उन्होंने खुद को हिन्दी सिनेमा की मुख्यधारा से अलग कर लिया। यह संयोग ही है कि सायरा उनसे भी ज्यादा मशहूर अभिनेत्री हुईं

नसीम बानो का 18 जून, 2002 को मंगलवार रात में निधन हो गया। दिवंगत अभिनेत्री के शोक संतप्त परिवार में उनकी अभिनेत्री पुत्री सायरा बानो ही हैं।

नीना गुप्ता

🎂जन्म 4 जुलाई1959🎂

नीना गुप्ता (जन्म: 4 जुलाई 1959) हिंदी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री टीवी कलाकार और फिल्म डायरेक्टर  तथा प्रोड्यूसर हैं।उन्हें वर्ष 1990 में फ़िल्म "वो छोकरी' के लिये बेस्ट सपोर्टिंग अभिनेत्री का फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार मिला। वे अस्सी के दशक में प्रसिद्ध क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ अपने प्रेम संबंधों के कारण काफ़ी चर्चा में रहीं; और 1989 में उन्होंने विवियन से बिना विवाह किये बेटी मसाबा को जन्म दिया।

*फ़िल्म अभिनेत्री निर्मात्री,निर्देशिका नीना गुप्ता के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं*

नीना गुप्ता हिंदी सिनेमा जगत  की एक सफल अभिनेत्री, टीवी कलाकार और फिल्म निर्देशक और निर्माता है।
नीना गुप्ता का जन्म 4 जून 1959 दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम आर एन गुप्ता है। नीना गुप्ता ने अपनी आरम्भिक पढ़ाई सनावर लौरेंस स्कूल में शिक्षा ग्रहण की।  

नीना गुप्ता  वेस्ट इण्डीज के प्रसिद्द क्रिकेट खिलाडी विवियन रिचर्ड्स से सम्बन्ध थे, जिससे उन्हें एक बेटी भी है, जिसका नाम है मसाबा गुप्ता। वर्तमान में मसाबा गुप्ता जानी-मानी फैशन डिजायनर है। एक लम्बे अन्तराल के बाद नीना ने वर्ष2008 मे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी कर ली।

नीना गुप्ता को टीवी की दुनिया में  सबसे बड़ा ब्रेक वर्ष 1985 में टीवी शो "खानदान" से मिला था, जिसके बाद उन्होंने यात्रा(1986) गुलजार मिर्जा साहिब ग़ालिब(1987), टीवी मिनी सीरिज आदि की।  इसके अलावा उन्होंने दर्द (1994 डीडी मेट्रो), गुमराह (1 995 डीडी मेट्रो), सांस (स्टार प्लस), सात फेरे:सलोनी का सफार (2005),चिट्ठी(2003), मेरी बिवी का जवाब नहीं (2004), और कितनी मोहब्बत है (2009) में काम किया।  इसकेअलावा वह जस्सी जैसा कोई नहीं में भी नजर आयीं, इस शो में उनके किरदार को लोगो द्वारा काफी पसंद किया गया था। 

नीना ने अपने हिंदी फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1982 में फिल्म 'ये नजदीकियां' से की थी, इसके बाद वह कई अन्य हिंदी फिल्मों में नजर आयीं , जिनमे साथ-साथ ,जाने भी दो यारों, मंडी, त्रिकाल आदि शामिल हैं। इसके अलावा वह हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गाने "चोली के पीछे क्या है"  के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीफिल्म्स लाजवंती और बाज़ार सीताराम (1993) निर्मित की हैं, जिसमे उन्हेंबेस्ट फर्स्ट गैर फीचर फिल्म के लिए 1993 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

नीना गुप्ता ने कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काम किया है, जिनमे से गांधी(1982) हैं, इसमें उन्होंने महात्मा गांधी की भतीजी का किरदार निभाया था, इसके अलावा वह मर्चेंट आइवरी फिल्म द डीसीवर (1988), मिर्जा गालिब (1989) इन कस्टडी (1993), और कॉटन मैरी (1999) भी शामिल है।

🎂जन्म 4 जुलाई 1959
वर्ष।            फ़िल्म

वर्ष।         फ़िल्म

2018      बधाई हो 
2018           मुल्क 
2005          नज़र 
2004      मेरी बीवी का जवाब नहीं
1997      उफ़ ! ये मोहब्बत
1995       दुश्मनी 
1994       वो छोकरी 
1994         जज़बात 
1993      सूरज का सातवाँ घोड़ा 
1993        इन कस्टडी 
1993         अंत 
1993        खलनायक
1992         कल की आवाज़ 
1992          अंगार 
1992         बलवान 
1992      ज़ुल्म की अदालत 
1992        य़लगार 
1991         आधि मिमांसा 
1990           दृष्टि 
1990।        स्वर्ग 
1989        डैडी 
1989         बटवारा 
1988            रिहाई 
1988        भारत एक खोज 
1985          त्रिकाल 
1984           उत्सव 
1984।           लैला 
1983           जाने भी दो यारों
1983            मंडी 
1982।           साथ साथ 
1982।          ये नज़दीकियाँ 
1981         आदत से मजबूर

गायिका श्रद्धा पंडित

श्रद्धा पंडित हिंदी अभिनेत्री
🎂जन्मतिथि: 04-07-1982
»🎤 पार्श्व गायिका

जन्म नाम
श्रद्धा पंडित
के रूप में भी जाना जाता है
सपा
जन्म
4 जुलाई 1982 (उम्र 40)
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
मूल
भारतीय
शैलियां
भारतीय शास्त्रीय संगीत , पार्श्व गायक , पॉप और बॉलीवुड
व्यवसाय
गायक, गीतकार
उपकरण
गायक
सक्रिय वर्ष
1996-वर्तमान

श्रद्धा मुंबई में पली बढ़ीं और प्रचलित वाद्ययंत्रवादियों, गायकों, संगीत रचनाकारों और कलाकारों के एक बड़े परिवार से हैं। उन्होंने अपने दादा, संगीत आचार्य पूर्व श्री से हिंदुस्तानी पारंपरिक मेलोडी का अध्ययन किया है
पंडित प्रताप नारायण. श्रद्धा ने कई उत्पादक संगीत संगीतकारों के लिए गाया हैअमित त्रिवेदी, सलीम-सुलेमान, एआर रहमान, बादशाह, और कई अन्य। उनकी सर्वकालिक सफलताएँ हैं "जिगर दा टुकड़ा", "ऐ शिवानी", "रंग दीनी", "रब राखा", "मनचंद्रे नू", और "बैंड बाजा बारात"। उनकी नवीनतम हिट आज रात का सीन और पानी वाला डांस हैं। श्रद्धा ने 2008 में सोनी म्यूजिक से तेरी हीर नामक एक रिकॉर्ड भी प्रकाशित किया है, जहां उन्होंने गीत लिखे और सभी ट्रैक खुद लिखे। उनके दो भाई-बहनों का बॉलीवुड व्यवसाय में समृद्ध व्यवसाय है, जहां उनकी बहन,श्वेता पंडितएक प्रसिद्ध पार्श्व गायक और उनके भाई भी हैंयश पंडितएक फिल्म और टीवी स्टार हैं.

बॉलीवुड गीत निर्माण में श्रद्धा की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म खामोशी के गीत "मौसम के सरगम" से हुई, जिससे उन्हें वर्ष 1998 में तुरंत प्रसिद्धि मिली और उनकी समृद्ध यात्रा आज तक जारी है। एक पार्श्व एकल कलाकार का जीवन ऐसा ही होता है! यदि आपको कोई ऐसी धुन नहीं मिलती जो आपको विशिष्ट बनाती है, तो आप पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता। कोई नहीं देखता कि आप कौन हैं और आप कितने विविध तरीकों से गुनगुना सकते हैं। ख़ुशी है कि उन्हें सलीम-सुलेमान के साथ काम करने का मौका मिला और उन्होंने उनके साथ लगभग 80-100 प्रस्तुतियाँ की हैं। विचार यह था कि प्रदर्शन में राग को बहुत भारतीय और आधुनिक बनाया जाए। सलीम-सुलेमान ने केवल 15 मिनट में गाना तैयार किया। आम तौर पर, आइटम गानों के साथ, यह माना जाता है कि आप खुद को एक निश्चित रूपरेखा के भीतर रखते हैं, दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए सामान्य हथकंडे अपनाते हैं, आदि।

लेकिन अइयो जी के साथ, वह अपनी आवाज़ को नियंत्रित करने, हरकतें करने और बनारस घराने का प्रतीक बनने में सक्षम थीं। गायिका को उम्मीद है कि यह धुन उन रचनाकारों के लिए एक चेतावनी होगी, जिन्हें लगता है कि वह केवल एक विशिष्ट तरीके से ही इसका जाप कर सकती हैं। जब वह बहुत छोटी थीं, तब उन्होंने उस्ताद ज़ाकिर हुसैन द्वारा लिखित साज़ के लिए गाना गाया था। यहीं पर सलीम ने उनकी प्रतिभा को देखा। भाइयों ने उसकी क्षमता पर भरोसा किया था और एन्कोडिंग और संगीत निर्माण के क्रम को भी समझाया था। उन्होंने कुछ साल पहले उसके एल्बम को भी आकार दिया था। चूंकि उनकी परवरिश पूरी तरह से शास्त्रीय रही है, लेकिन किसी तरह उन्हें तब तक नजरअंदाज किया जाता रहा जब तक कि सलीम-सुलेमान और एआर रहमान ने उनके काम को पहचान नहीं ली।

वीणा ताजौर सुलतान

वीणा ताजौर सुलतान
🎂जन्म04 जुलाई 1926
क़्वेटा, बलूचिस्तान, ब्रितानी भारत
(अभी पाकिस्तान)
मौत
⚰️14 नवम्बर 2004 (उम्र 78)
मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
राष्ट्रीयता
भारतीय
पेशा
अभिनेत्री
कार्यकाल
1939–1983
संबंधी
इफ्तेखार (भाई)

वीणा के नाम से मशहूर ताजौर सुल्ताना एक खूबसूरत भारतीय अभिनेत्री हैं जिन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग में काम किया है। 4 जुलाई, 1926 को क्वेटा, बलूचिस्तान (अब पाकिस्तान में) में जन्मी, उन्होंने 16 साल की उम्र में अपनी शुरुआत की। उनकी पहली फिल्म का नाम 'गरीब' था, जिसे वर्ष 1942 में मेहबूब खान प्रोडक्शन के तहत निर्मित किया गया था। बाद में उन्होंने 'नजमा,' 'फूल,' 'हुमायूं' सहित कई फिल्मों में अभिनय किया। ये सभी फ़िल्में विभाजन से पहले रिलीज़ हुईं और इस तरह वह विभाजन-पूर्व हिंदी और उर्दू फ़िल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध हो गईं।

विभाजन से पहले उनकी आखिरी फिल्म साल 1946 में 'राजपूतानी' थी, जिसके बाद उन्होंने भारत में ही रहने का फैसला किया। बाद में उन्होंने 'चलती का नाम गाड़ी', 'कागज के फूल', 'पाकीज़ा' आदि फिल्मों में प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। वीना ने फिल्म 'ताजमहल' में अपनी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। साल 1963. फिल्म 'के बादरजिया सुल्तानरजिया सुल्तान भारतीय इतिहास की शैली से संबंधित हैं>>और पढ़ें...रजिया सुल्तान'वर्ष 1983 में, उन्होंने फिल्म उद्योग से संन्यास ले लिया और दो दशकों से अधिक समय तक सुर्खियों से दूर एक शांत जीवन व्यतीत किया। वीना की लंबी बीमारी से पीड़ित होने के बाद 2004 में मुंबई, भारत में मृत्यु हो गई।

आर्यन वेद

आर्यन वैद का

🎂 जन्म 4 जुलाई 1976 

को हुआ था। वह एक भारतीय पुरुष मॉडल हैं जिन्होंने वर्ष 2000 में ग्रेविएरा मिस्टर इंडिया डिस्प्ले इवेंट जीता था। उन्होंने मिस्टर इंटरनेशनल अवार्ड 2000 भी जीता था। वैद एक योग्य पाक विशेषज्ञ और एक जीवन शैली पत्रकार हैं हिंदुस्तान टाइम्स के साथ. वह रंगमंच से पूरी तरह जुड़े हुए हैं और उन्होंने मुंबई के पृथ्वी थिएटर में कुछ रोड नाटक किए हैं। इन्हीं नाटकों में से एक के दौरान उन्हें टीवी धारावाहिकों में भूमिका की पेशकश की गई थी। उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। अपने करियर की शुरुआत कम बजट की फिल्म "मार्केट" से की जो काफी सफल रही और उन्हें काफी नाम और शोहरत मिली।

इस प्रकार उनके पास कम बजट की फिल्मों की व्यवस्था थी जिन्होंने सिनेमाई दुनिया में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। यह उनकी मेहनत और किस्मत का ही नतीजा था कि उन्हें सुपरहिट फिल्म अपने में रोल मिला। इस तथ्य के बावजूद कि फिल्म सामान्य रूप से चली, आर्यन ने अपने अभिनय और निर्माण के लिए अच्छे ऑडिट बनाए। हालाँकि जब ऐसा लगने लगा कि वह बेतहाशा सफल हो जाएगा, तो वह अमेरिका चला गया। वह एक गृहिणी थीबड़े साहबसोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के लिए एंडेमोल इंडिया द्वारा निर्मित।

2008 में आर्यन वैद ने फोटोग्राफी की शिक्षिका और प्रसिद्ध योग और स्वास्थ्य शिक्षिका एलेक्जेंड्रा कोपले से शादी की। आर्यन ने देश द्रोही (2008) जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया है।सही या गलत(2009), किसमें कितना है दम (2009), वीर (2010) और भी बहुत कुछ। उन्होंने "वेलकम - बाजी मेहमान-नवाज़ी की" में भी भाग लिया है जो एक प्रसिद्ध भारतीय टीवी धारावाहिक है। आर्यन फिलहाल ज़ी टीवी के नए शो "रब से सोना इश्क" में लंदन में एक टैक्सी ड्राइवर हैरी की भूमिका निभा रहे हैं।

तोषी साबरी

तोशी साबरी
🎂04_07_1984
 एक भारतीय गायक और संगीतकार हैं, जो अपने विभिन्न संगीत निर्देशन कार्यों और 'अमूल स्टार वॉयस ऑफ इंडिया' (2007) नामक एक लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं। वह पंजाब में जन्मे राजस्थान के लड़के हैं जिनकी वंशावली एक संगीत परिवार (घराना) से है।

उनके पिता और भाई कुशल संगीतकार रहे हैं और उन्होंने भारत के शास्त्रीय संगीत के साथ जुड़ाव का एक लंबा इतिहास साझा किया है। एक प्रसिद्ध गायक बनने के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया, वे मुंबई आ गए और अपना संघर्ष शुरू किया।

कम शैक्षिक योग्यता के कारण, उन्हें एक सभ्य जीवन स्तर पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। उन्हें जहां भी गाने का मौका मिला, उन्होंने गाया। एक गायक के रूप में वह अपनी क्षमताओं को लेकर काफी आश्वस्त थे और आखिरकार उन्हें म्यूजिक रियलिटी शो 'अमूल स्टार वॉयस ऑफ इंडिया' में शामिल होने का मौका मिला। यह शो उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ क्योंकि वह रातोंरात स्टार बन गए, वह सभी प्रतियोगियों में चौथे स्थान पर रहे।

वह लगातार कुछ शो जैसे 'उस्तादों के उस्ताद' और 'जो जीता वही सुपर स्टार' में दिखाई दिए, जिसमें दर्शकों द्वारा उनकी गायन क्षमताओं की सराहना की गई। इस दौरान उन्होंने फिल्मों के लिए गायन में एक छलांग लगाई। उनका एक गाना 'माही'राज़- द मिस्ट्री कंटीन्यूज़' (2009) नामक फिल्म में।

इस गाने को उन्होंने अपने भाई-बहन और सह-प्रतियोगी के साथ मिलकर तैयार किया थाशारिब साबरी. उनका संघर्ष का दौर अब खत्म होता नजर आ रहा है क्योंकि 'माही' के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 'जश्न' (2009), 'जैसी कई फिल्मों के लिए संगीत तैयार करने में व्यस्त हो गए।भूत' (2011), 'यमला पगला दीवाना' (2013) और हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया' (2014)। उन्होंने दोनों फिल्मों में कुछ गाने बनाये।

प्रसिद्ध गीत 'मैं तेनु समझावां की' का हालिया रूपांतरण, जिसे 'ने गाया था'राहत फ़तेह अली खान' की रचना उनके द्वारा की गई थी। उन्होंने अब तक 15 से अधिक फिल्मों में गाना गाया है और लगभग 12 फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया है। तोशी ने हाल ही में स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले रियलिटी सिंगिंग शो 'म्यूजिक का महा मुकाबला' में हिस्सा लिया था। इस स्तर के जोश और प्रतिभा के साथ वह मनोरंजन की दुनिया में अच्छी पहचान बनाते दिख रहे हैं

रविवार, 18 जून 2023

नसीब बानो


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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
🎂जन्मरोशन आरा बेगम
4 जुलाई 1916
दिल्लीब्रिटिश इंडिया
⚰️मृत्यु18 जून 2002 (उम्र 85)
मुम्बईमहाराष्ट्र्भारत
व्यवसायअभिनेत्री
कार्यकाल1935–1957
जीवनसाथीएहसान-उल-हक
बच्चेसायरा बानो (बेटी)
सुल्तान अहमद (बेटा)
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ट्रेजेडी किंग दिलीप साहब की सासू माँ अभिनेत्री सायरा बानो की माँ ब्यूटी क्वीन नसीम बानो की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धाजंलि

नसीम बानो भारतीय सिनेमा' में चालीस के दशक की हिन्दी फ़िल्मों की प्रमुख अभिनेत्री थीं। भारतीय सिने जगत् में अपनी दिलकश अदाओं से दर्शकों को दीवाना बनाने वाली इस अभिनेत्री को उसकी ख़ूबसूरती के लिए "ब्यूटी क्वीन" कहा जाता था। हिन्दी सिनेमा की एक और प्रसिद्ध अभिनेत्री सायरा बानो, नसीम बानो की ही पुत्री हैं।

नसीम बानो का जन्म 4 जुलाई, 1916 ई. को हुआ था। इनकी परवरिश शाही ढंग से हुई थी। वह स्कूल पढ़ने के लिए पालकी से जाती थीं। नसीम बानो सुन्दरता की मिसाल थीं। उनकी सुंदरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें किसी की नज़र न लग जाए, इसलिये उन्हें पर्दे में रखा जाता था।

नसीम बानो ने अहसान मियाँ नामक एक अमीर व्यक्ति से प्रेम विवाह किया था। अहसान मियाँ ने नसीम बानो की खातिर कुछ फ़िल्मों का निर्माण भी किया था। बाद के समय में नसीम बानो और अहसान मियाँ का दाम्पत्य रिश्ता टूट गया। भारत का विभाजन होने और पाकिस्तान बन जाने के बाद अहसान मियाँ कराची जाकर बस गये। पति से अलग होने के बाद नसीम बानो मुंबई में ही बनी रहीं। बाद में वे अपनी बेटी सायरा बानो और बेटे सुल्तान को लेकर लंदन में जा बसीं।

सिनेमा जगत् में नसीब बानो का प्रवेश संयोगवश हुआ था। एक बार नसीम बानो अपनी स्कूल की छुटियों के दौरान अपनी माँ के साथ फ़िल्म 'सिल्वर किंग' की शूटिंग देखने गयीं। फ़िल्म की शूटिंग देखकर नसीम बानो मंत्रमुग्ध हो गयीं और उन्होंने निश्चय किया कि वह अभिनेत्री के रूप में अपना सिने कॅरियर बनायेंगी। इधर स्टूडियों में नसीम बानो की सुंदरता को देख कई फ़िल्मकारों ने नसीम बानो के सामने फ़िल्म अभिनेत्री बनने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उनकी माँ ने यह कहकर सभी प्रस्ताव ठुकरा दिये कि नसीम अभी बच्ची है। नसीम की माँ उन्हें अभिनेत्री नहीं बल्कि डॉक्टर बनाना चाहती थीं। इसी दौरान फ़िल्म निर्माता सोहराब मोदी ने अपनी फ़िल्म ‘हेमलेट' के लिये बतौर अभिनेत्री नसीम बानो को काम करने के लिए प्रस्ताव दिया और इस बार भी नसीम बानो की माँ ने इंकार कर दिया, लेकिन इस बार नसीम अपनी जिद पर अड़ गयी कि उन्हें अभिनेत्री बनना ही है। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी बात मनवाने के लिये भूख हड़ताल भी कर दी

सन् 1935 में नसीम को फ़िल्मों में ब्रेक दिया मशहूर फ़िल्मकार सोहराब मोदी ने और 'खून का खून' फ़िल्म का निर्माण किया। इसके बाद नसीम 1941 तक सोहराब मोदी की ही फ़िल्मों में व्यस्त रहीं और इस दौरान उनकी 'खान बहादुर' (1937), ' डाइवोर्स ' तथा 'मीठा जहर' (1938), 'पुकार' (1939) और 'मैं हारी' (1940) में प्रदर्शित हुई। मुग़ल सम्राट जहाँगीर के एक इंसाफ को आधार बनाकर बनाई गई 'पुकार' सुपरहिट रही। इसमें जहाँगीर का किरदार अभिनेता चंद्रमोहन ने निभाया, जबकि नसीम बानो जहाँगीर के बेगम की भूमिका में थीं। जब फ़िल्म प्रदर्शित हुई तो उस दौर में मुंबई के सिनेमाघरों में फ़िल्म देखने वालों की भारी भीड़ जुटी। उस फ़िल्म की सफलता के बाद नसीम बानो फ़िल्म उद्योग में स्टार के रूप में स्थापित हो गईं और इंडस्ट्री की सबसे व्यस्त अभिनेत्री बन गईं।

अपनी इस सफलता के बाद 1942 में उनकी पृथ्वीराज कपूर के साथ फ़िल्म 'उजाला' आई। इसे भी दर्शकों ने पसंद किया। 'उजाला' का निर्माण 'ताजमहल पिक्चर' के बैनर तले हुआ था। फ़िल्मीस्तान कंपनी ने जब फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा तो अभिनेत्री के रूप में कंपनी की पहली पिक्चर में नसीम बानो को साइन किया। 'चल-चल रे नौजवान' नामक इस सफल फ़िल्म में नसीम के साथ नायक का किरदार निभाया 'दादा मुनि' उर्फ अशोक कुमार ने। इस फ़िल्म ने भी अच्छा कारोबार किया और नसीम बानो और व्यस्त कलाकार बन गईं। उन्होंने फ़िल्मकार महबूब खान की कई फ़िल्मों में भी अभिनय किया। उसके बाद अपनी बेटी सायरा बानो का दौर शुरू हो जाने से उन्होंने खुद को हिन्दी सिनेमा की मुख्यधारा से अलग कर लिया। यह संयोग ही है कि सायरा उनसे भी ज्यादा मशहूर अभिनेत्री हुईं

नसीम बानो का 18 जून, 2002 को मंगलवार रात में निधन हो गया। दिवंगत अभिनेत्री के शोक संतप्त परिवार में उनकी अभिनेत्री पुत्री सायरा बानो ही हैं।

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