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बुधवार, 28 फ़रवरी 2024

पंडित नरिन्दर शर्मा

indo-canadian mudar:
#28feb
#11feb 
🎂जन्म 28 फ़रवरी , 1913 में उत्तर प्रदेश राज्य के खुर्जा नगर के जहाँगीरपुर नामक स्थान पर हुआ।
⚰️–11 फरवरी1989 
हिन्दी के लेखक, कवि तथा गीतकार थे। उन्होने हिन्दी फिल्मों (जैसे सत्यम शिवम सुन्दरम) के लिये गीत भी लिखे।
महान कवि, फ़िल्म गीतकार, लेखक, संपादक महाभारत जैसे धारावाहिक के पटकथा लेख़क 
पंडित नरेंद्र शर्मा हिन्दी के प्रसिद्ध कवि, लेखक एवं सम्पादक थे उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षाशास्त्र और अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। 1934 में प्रयाग में अभ्युदय पत्रिका का संपादन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी स्वराज्य भवन में हिंदी अधिकारी रहे और फिर बॉम्बे टाकीज़ बम्बई में गीत लिखे। उन्होंने फ़िल्मों में गीत लिखे, आकाशवाणी से भी संबंधित रहे और स्वतंत्र लेखन भी किया। उनके 17 कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक जीवनी और अनेक रचनाएँ पत्र
पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

अल्पायु से ही साहित्यिक रचनायें करते हुए पंडित नरेन्द्र शर्मा ने 21 वर्ष की आयु में पण्डित मदन मोहन मालवीय द्वारा प्रयाग में स्थापित साप्ताहिक" अभ्युदय " से अपनी सम्पादकीय यात्रा आरम्भ की। काशी विद्यापीठ में हिन्दी व अंग्रेज़ी काव्य के प्राध्यापक पद पर रहते हुए 1940 में वे ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रशासन विरोधी गतिविधियों के लिये गिरफ़्तार कर लिये गये और 1943 में मुक्त होने तक वाराणसी , आगरा और देवली में विभिन्न कारागारों में शचीन्द्रनाथ सान्याल,सोहनसिंह जोश, जयप्रकाश नारायण और सम्पूर्णानन्द जैसे ख्यातिनामों के साथ नज़रबन्द रहे और 19 दिन तक अनशन भी किया। जेल से छूटने पर उन्होंने अनेक फ़िल्मों में गीत लिखे और फिर 1953 से आकाशवाणी से जुड़ गये। इस बीच उनका लेखन कार्य निर्बाध चलता रहा। 11 मई , 1947 को मुम्बई में उनका विवाह सुशीलाजी से हुआ और परिवार में तीन पुत्रियों व एक पुत्र का जन्म हुआ।

1931 ई. में पंडित नरेंद्र शर्मा की पहली कविता 'चांद' में छपी। शीघ्र ही जागरूक, अध्ययनशील और भावुक कवि नरेन्द्र ने उदीयमान नए कवियों में अपना प्रमुख स्थान बना लिया। लोकप्रियता में इनका मुकाबला हरिवंशराय बच्चन से ही हो सकता था। 1933 ई. में इनकी
पहली कहानी प्रयाग के 'दैनिक भारत' में प्रकाशित हुई। 1934 ई. में इन्होंने मैथिलीशरण गुप्त की काव्यकृति ' यशोधरा ' की समीक्षा भी लिखी। सन् 1938 ई. में कविवर सुमित्रानंदन पंत ने कुंवर सुरेश सिंह के आर्थिक सहयोग से नए सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक स्पंदनों से युक्त 'रूपाभ' नामक पत्र के संपादन करने का निर्णय लिया। इसके संपादन में सहयोग दिया नरेन्द्र शर्मा ने।
भारतीय संस्कृति के प्रमुख ग्रंथ ' रामायण' और'महाभारत ' इनके प्रिय ग्रंथ थे। महाभारत में रुचि होने के कारण ये 'महाभारत' धारावाहिक के निर्माता बी. आर. चोपड़ा के अंतरंग बन गए। इसलिए जब उन्होंने 'महाभारत' धारावाहिक का निर्माण प्रारंभ किया तो नरेन्द्रजी
उनके परामर्शदाता बने। उनके जीवन की अंतिम रचना भी 'महाभारत' का यह दोहा ही है- "शंखनाद ने कर दिया, समारोह का अंत, अंत यही ले जाएगा, कुरुक्षेत्र पर्यन्त"।

लगभग 55 फ़िल्मों में 650 गीत एवं 'महाभारत' का पटकथा-लेखन और गीत-रचना की।

पंडित नरेंद्र शर्मा उन्नीसवीं सदी के चौथे दशक में ही मुंबई आ गए थे। बॉम्बे टॉकीज की अधिष्ठार्थी देविका रानी ने युसुफ़ ख़ान नाम वाले किसी पठान युवा को अपनी फ़िल्म ‘ज्वार-भाटा’ का नायक बनाने की बात जब सोची तो उन्होंने पंडित नरेश शर्मा से पूछा, ′इस युवक को किस फ़िल्मी नाम के साथ परदे पर उतारा जाए।′ पंडित नरेंद्र शर्मा ने उन्हें शायद ‘वासुदेव’ के साथ ‘दिलीप कुमार’ नाम सुझाया। देविका रानी को दिलीप कुमार नाम जंच गया और इस तरह युसुफ़ मियां दिलीप कुमार के नाम से ‘ज्वार-भाटा’ फ़िल्म के नायक बनकर रुपहले परदे पर आए। चालीस के दशक में उनका गीत ‘नैया को खेवैया के किया हमने हवाले’ ′ज्वारा भाटा′ के साथ ख़ासा लोकप्रिय हुआ था।
फिल्मों के लिए गीत लिखने के बावजूद उनकी रचनाओं की साहित्यिक गरिमा कायम रही। ‘भाभी की चूड़ियां’ फिल्म का गीत ‘ज्योति कलश छलके’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के सभी गीत और शहीदों के लिए लिखा गया उनका ‘समर में हो गए अमर’ गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।
उनके 17 कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक जीवनी और अनेक रचनाएँ पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उनकी प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं-

प्रवासी के गीत, मिट्टी और फूल, अग्निशस्य, प्यासा निर्झर, मुठ्ठी बंद रहस्य (कविता-संग्रह) मनोकामिनी, द्रौपदी, उत्तरजय सुवर्णा (प्रबंध काव्य) आधुनिक कवि, लाल निशान (काव्य-संयचन) ज्वाला-परचूनी (कहानी-संग्रह, 1942 में 'कड़वी-मीठी बात' नाम से प्रकाशित) मोहनदास कर्मचंद गांधी : एक प्रेरक जीवनी, सांस्कृतिक संक्राति और संभावना (भाषण)। लगभग 55 फ़िल्मों में 650 गीत एवं 'महाभारत' का पटकथा-लेखन और गीत-रचना।

11 फ़रवरी , 1989 ई. को हृदय-गति रुक जाने से पंडित नरेन्द्र शर्मा का निधन मुम्बई, महाराष्ट्र में हो गया।

रविवार, 11 फ़रवरी 2024

शर्लिन चोपड़ा

#11feb 
शर्लिन चोपड़ा

🎂: 11 फ़रवरी 1984  हैदराबाद
माता-पिता: जॉर्ज अमिताभ चोपड़ा, सुसन चोप्रा
भाई: शेरोन चोप्रा, अमिताभ चोपड़ा

जन्म 1983 या 1984
हैदराबाद , भारत
व्यवसायों
निर्माता नमूना ,अभिनेत्री ,गायक
ऊंचाई
5 फीट 8 इंच (1.73 मीटर) 
सौंदर्य प्रतियोगिता का शीर्षक धारक,शीर्षक
मिस आंध्रा 

प्रमुख प्रतियोगिताएं
मिस आंध्रा ब्यूटी पेजेंट
बिग बॉस 3
चोपड़ा का जन्म हैदराबाद , भारत में एक पंजाबी ईसाई पिता, सागर चोपड़ा (मृत्यु 2005), जो पेशे से एक डॉक्टर थे और एक फ़ारसी मुस्लिम माँ, सुज़ैन ( नी आमिर), जो एक फार्मासिस्ट से ब्यूटीशियन बनीं, के घर हुआ था। उनकी एक बहन एमसी के रूप में काम करती है और एक छोटा भाई तकनीशियन इंजीनियर के रूप में न्यूजीलैंड में बस गया है। उसके माता-पिता ने मेडिकल छात्र दौरे पर ईरान में पहला संपर्क किया। घर पर, उनका परिवार हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू बोलता था और एक समय वे मेथोडिस्ट चर्च के सक्रिय सदस्य थे, जहां सुश्री चोपड़ा इतनी धार्मिक थीं कि वे तुरंत मण्डली की उपस्थिति में भजन 119 का शब्दशः पाठ करती थीं।

उसने स्टेनली गर्ल्स हाई स्कूल में दाखिला लिया , जहाँ वह एक अध्ययनशील छात्रा थी, उसका कोई दोस्त नहीं था और वह एक गीक के रूप में सामने आई थी। वह अपने स्कूल से टॉपर बनकर निकलीं। बाद में, उन्हें सेंट एन्स कॉलेज फॉर विमेन, सिकंदराबाद में प्रवेश मिल गया। 1999 में उन्हें "मिस आंध्रा" का ताज पहनाया गया, जिससे अंततः शोबिज के प्रति उनकी रुचि बढ़ी। चोपड़ा के अनुसार, लंबे समय तक काम के संघर्ष के कारण उद्योग में उनका यौन शोषण हुआ, अंततः वह भारत में "मी टू" आंदोलन की मजबूत आवाज़ों में से एक बन गईं।
चोपड़ा के शुरुआती अभिनय करियर में ज्यादातर बॉलीवुड फिल्मों में विभिन्न सहायक भूमिकाएँ शामिल थीं । वह टाइम पास , रेड स्वस्तिक और गेम जैसी फिल्मों में नजर आईं । उन्होंने अपनी तेलुगु फिल्म की शुरुआत रिचर्ड ऋषि के साथ ए फिल्म बाय अरविंद से की ।  चोपड़ा बिग बॉस के प्रतियोगी भी थे ।उन्हें 27वें दिन शो से बाहर कर दिया गया था।2013 से, उन्होंने रूपेश पॉल द्वारा निर्देशित कामसूत्र 3डी में मुख्य नायिका के रूप में काम किया, और वह ट्रेलर में भी दिखाई दीं, जो 66वें कान्स इंटरनेशनल में जारी किया गया था। चलचित्र उत्सव ।एक दिन की शूटिंग के बाद, सुश्री शर्लिन चोपड़ा कामसूत्र 3डी से बाहर चली गईं।
📽️
2005 
धींगा मुश्ती 
दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर  
2006 जवानी दीवानी: 
2006शरारती लड़का
2007 खेल
2007 रकीब
2007 लाल स्वास्तिक
2009 दिल बोले हड़िप्पा!
2014 कामसूत्र 3डी
2016 वजह तुम हो
2017 माया
2018 चमेली

टीना मुनीम

#11feb 
प्रसिद्ध अभिनेत्री टीना मुनीम
टीना का जन्म 
🎂11 फरवरी 1955 को गुजराती परिवार में हुआ था। 
पति: अनिल अंबानी (विवा. 1991)
बच्चे: जय अनमोल अंबानी, जय अंशुल अंबानी
माता-पिता: नंदकुमार चुनिलाल मुनीम, मीनाक्षी मुनीम
भाई: भावना मुनीम, नयन मुनीम

उनका बचपन से ही फिल्मी दुनिया की ओर ध्यान था। छोटी उम्र में ही उन्होंने बॉलीवुड में जाने का सपना पाल लिया था। जिसे टीना ने महज 21 साल की उम्र में ही पूरा कर लिया था। उन्होंने 1978 में फिल्म देश- परदेश के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में देव आनंद ने उनके साथ हीरो का रॉल अदा किया था।

टीना को अपने दिनों की सुपरस्टार के रुप में देखा जाता है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में कई बड़े मुकाम हांसिल किए थे।  टीना ने लूटमार, मनपसंद, रॉकी, सौतन, कर्ज जैसी कई हिट फिल्मों में अभिनय किया। इसके साथ 'मन पसंद' , 'बातों बातों में' 'बड़े दिलवाला' , 'इजाजत' में काम किया

फिल्मी कैरियर शुरुआत के पहले टीना को 1975 में 'फेमिना टीन प्रिंसेस' के क्राउन से नवाजा गया था  

टीना मुनील ने 1991 में अनिल अंबानी की लव स्टोरी किसी कहानी से कम नहीं है। अनिल अंबानी की पहली मुलाकात टीना मुनीम से एक शादी में हुई। जब अंबानी ने टीना को पहली बार देखा था। जिसके बाद वे टीना के प्यार में पागल हो गए थे। हालांकि अंबानी परिवार टीना के साथ शादी कराने को लेकर बिल्कुल भी तैयार नहीं था।क्योंकि उन्हें टीना का एक्ट्रेस होना पसंद नहीं था। जिसके बाद दोनों अलग हो गए। 

इसके बाद साल 1989 में अमेरिका में भूकंप भयानक भूकंप आया। जिसके बाद अनिल ने टीना का नंबर खोजकर उन्हें कॉल करके उनका हाल-चाल पूछा। जिसके बाद से दोनों के बीच दोबारा से बातचीत शुरु हो गई। मामला शादी तक पहुंचने लगा। जिसके बाद आखिरकार अनिल की जिद के आगे परिवार को हार माननी पड़ी और साल 1991 में दोनों की शादी करवा दी गई। टीना ने शादी के बाद बॉवीवुड को अलविदा कह दिया। हालांकि इससे पहले उन्होंने 35 सफल फिल्मों में अभिनय करके अपनी खास पहचान बनाई।
📽️
1991 जिगरवाला 
1987 मुकद्दर का फैसला 
1986 समय की धारा 
1986 भगवान दादा
1985 अलग अलग 
1985 बेवफ़ाई 
1983 सौतन 
1983 बड़े दिल वाला
1983 पु्कार 
1983 वान्टेड 
1982 दीदार-ए-यार 
1982 सुराग 
1982 ये वादा रहा 
1982 राजपूत 
1981 रॉकी
1985 युद्ध 
1985 आखिर क्यों?
आखिर क्यों
निर्देशक जे ओम प्रकाश
अभिनेता राजेश खन्ना,राकेश रोशन,स्मिता पाटिल,असरानी,सुजीत कुमार
प्रदर्शन तिथि1985
देशभारत
भाषाहिन्दी
1981 हरजाई 
1981 खुदा कसम 
1980 कर्ज़ 
1980 मन पसन्द 
1980 लूटमार
1980 आप के दीवाने 
1979 बातों बातों में 
1978 देस परदेस (पहली फिल्म थी)
निर्देशक,देव आनन्द
लेखक देव आनंद,सूरज ,सनिम
निर्माता देव आनंद,अमित खन्ना,
नवकेतन,
नवकेतन इंटरनैशनल फिल्म्स
अभिनेता,अजीत,टॉम एल्टर,देव आनन्द,बिन्दू,बीरबल,प्रेम चोपड़ा,ए के हंगल,गजानन जागीरदार,जानकी दास,भरत कपूर,अमज़द ख़ान,सुजीत कुमार,श्रीराम लागू,महमूद,राज मेहरा,इन्द्रानी मुखर्जी,टीना मुनीम,पेंटल,प्राण,कीथ स्टीवेन्सन,सुधीर,
छायाकार फाली मिस्त्री,
डी के प्रभाकर
संगीतकार राजेश रोशन
अमित खन्ना (गीत)
प्रदर्शन तिथि29 जून 1978
देश भारत
भाषा हिन्दी

मंगलवार, 16 जनवरी 2024

कमाल अमरोही

#17jan 
#11feb 
सैयद आमिर हैदर कमाल अमरोही
प्रसिद्ध नाम कमाल अमरोही
जन्म 17 जनवरी, 1918
जन्म भूमि अमरोहा, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 11 फरवरी, 1993
पति/पत्नी तीन (बानो, महमूदी, मीना कुमारी)
संतान शानदार, ताज़दार और रुख़सार
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक
मुख्य फ़िल्में 'महल', 'पाकीज़ा' और 'रज़िया सुल्तान' आदि।
पुरस्कार-उपाधि फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार: मुग़ल-ए-आजम
विशेष योगदान कमाल अमरोही ने 1953 में 'कमाल पिक्चर्स' और 1958 में कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना की।
नागरिकता भारतीय
महल, पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान जैसी भव्य कलात्मक फ़िल्मों को परदे पर काव्य की रचना करने वाले निर्माता-निर्देशक थे। कमाल अमरोही ने बेहतरीन गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक तथा निर्माता एवं निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उसे एक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। पाकीज़ा उनकी ज़िंदगी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अपने फ़िल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह 'अंतिम मुग़ल' नाम से फ़िल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।
कमाल अमरोही का मूल नाम 'सैयद आमिर हैदर' था। 17 जनवरी 1918 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा के ज़मींदार परिवार में जन्मे कमाल अमरोही के मुम्बई तक पहुँचने और फिर सफलता का इतिहास रचने की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी की भाँति है। बचपन में अपनी शरारतों से वह पूरे गाँव को परेशान करते थे। एक बार अपनी अम्मी के डाँटने पर उन्होंने वादा किया कि वह एक दिन मशहूर होंगे और उनके पल्लू को चाँदी के सिक्कों से भर देंगे। उनकी शरारतों से तंग होकर एक दिन उनके बड़े भाई ने उन्हें गुस्से में थप्पड़ रसीद कर दिया तो कमाल अमरोही नाराज़गी में घर से भागकर लाहौर पहुँच गए।

कमाल अमरोही के लिए लाहौर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। वहाँ उन्होंने 'प्राच्य भाषाओं' में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर एक उर्दू समाचार पत्र में मात्र 18 वर्ष की आयु में ही नियमित रूप से स्तम्भ लिखने लगे। उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अख़बार के सम्पादक ने उनका वेतन बढाकर 300 रुपए मासिक कर दिया, जो उस समय क़ाफी बड़ी रकम थी।

कलकत्ता में

अख़बार में कुछ समय तक काम करने के बाद वह कलकत्ता चले गए और फिर वहाँ से मुम्बई आ गए। लाहौर में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध गायक, अभिनेता कुन्दनलाल सहगल से हुई थी, जो उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें फ़िल्मों में काम करने के लिए 'मिनर्वा मूवीटोन' के मालिक निर्माता-निर्देशक सोहराब मोदी के पास ले गये। इसी समय उनकी एक लघु कथा ‘सपनों का महल’ से निर्माता-निर्देशक और कहानीकार 'ख़्वाजा अहमद अब्बास' प्रभावित हुए।

वैवाहिक जीवन

कमाल अमरोही ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली बीवी का नाम 'बानो' था, जो नर्गिस की माँ जद्दनबाई की नौकरानी थी। बानो की अस्थमा से मौत होने के बाद उन्होंने 'महमूदी' से निकाह किया। कमाल अमरोही ने तीसरी शादी अभिनेत्री मीना कुमारी से की जो उनसे उम्र में लगभग पंद्रह साल छोटी थीं। दोनों की मुलाकात एक फ़िल्म के सेट पर हुई थी और उनके बीच प्यार हो गया। उस समय कमाल अमरोही 34 साल के थे जबकि मीना कुमारी की उम्र 19 साल थी। 1952 में दोनों ने विवाह कर लिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और उनका अलगाव हो गया। मीना कुमारी के प्रति कमाल अमरोही का प्रेम शायद आखिर तक बरकरार रहा तभी तो उन्हें मौत के बाद क़ब्रिस्तान में मीना कुमारी की क़ब्र के बगल में दफनाया गया।

सवांद और गीतकार

कमाल अमरोही को पता चला कि सोहराब मोदी को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फ़िल्म ‘पुकार’ (1939) सुपर हिट रही। 'नसीम बानो' और 'चंद्रमोहन' अभिनीत इस फ़िल्म के लिए उन्होंने चार गीत लिखे-

धोया महोबे घाट हे हो धोबिया रे..,
दिल में तू आँखों में तू मेनका..,
गीत सुनो वाह गीत सैयां..,
काहे को मोहे छेड़े रे बेईमनवा..
इसके बाद तो फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का उनका सिलसिला चल पड़ा और उन्होंने जेलर (1938), मैं हारी (1940), भरोसा (1940), मज़ाक (1943), फूल (1945), शाहजहां (1946), महल (1949), दायरा (1953), दिल अपना और प्रीत पराई (1960), मुग़ले आजम (1960), पाकीज़ा (1971), शंकर हुसैन (1977) और रज़िया सुल्तान (1983), भरोसा (1940) जैसी फ़िल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखने का काम किया।

कमाल अमरोही ने बेहद चुनिंदा फ़िल्मों के लिए काम किया लेकिन जो भी काम किया पूरी तबीयत और जुनून के साथ किया। उनके काम पर उनके व्यक्तित्व की छाप रहती थी। यही वजह है कि फ़िल्में बनाने की उनकी रफ़्तार काफ़ी धीमी रहती थी और उन्हें इसके लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता था।

पाकीज़ा (फ़िल्म)
पाकीज़ा कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट थी जिस पर उन्होंने 1958 में काम करना शुरू किया था। उस समय यह ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी। कुछ समय बाद जब भारत में सिनेमास्कोप का प्रचलन शुरू हो गया तो उन्होंने 1961 में इसे सिनेमास्कोप रूप में बनाना शुरू किया लेकिन कमाल अमरोही का अपनी तीसरी पत्नी मीना कुमारी से अलगाव हो जाने के कारण फ़िल्म का निर्माण 1961-69 तक बंद रहा। बाद में किसी तरह उन्होंने मीना कुमारी को फ़िल्म में काम करने के लिए राज़ी कर लिया और आखिरकार 1971 में जाकर यह फ़िल्म पूरी हुई तथा फरवरी 1972 को रिलीज हुई।

बेहतरीन संवाद, गीत-संगीत, दृश्यांकन और अभिनय से सजी इस फ़िल्म ने रिकार्डतोड़ कामयाबी हासिल की और आज यह फ़िल्म इतिहास की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। उन्होंने इस फ़िल्म के लिए एक गीत मौसम है आशिकाना.. भी लिखा था। जो बेहद मकबूल हुआ था। इस फ़िल्म के बाद कमाल अमरोही का फ़िल्मों से कुछ समय तक नाता टूटा रहा। 1983 में उन्होंने फिर फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख़ किया और रज़िया सुल्तान फ़िल्म से अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया।

निधन
अपने कमाल से दर्शकों को बांध देने वाली यह अजीम शख़्सियत 11 फरवरी 1993 को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।
📽️
1. 1938 जेलर कहानी
2. 1939 पुकार लेखन
3. 1940 मैं हारी संवाद
4. 1940 भरोसा 
5. 1943 मज़ाक संवाद
6. 1945 फूल संवाद
7. 1946 शाहजहाँ 
8. 1949 महल निर्देशन
9. 1953 दायरा लेखन, निर्देशन
10. 1960 मुग़ले आजम संवाद
11. 1972 पाकीज़ा लेखन, निर्देशन
12. 1977 शंकर हुसैन संवाद
13. 1979 मजनूं निर्देशन
14. 1983 रज़िया सुल्तान लेखन, निर्देशन

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...