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सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

लच्छू महाराज

लच्छू महाराज
🎂जन्म- 16 अक्टूबर, 1944, बनारस 
⚰️मृत्यु- 27 जुलाई, 2016
 भारत के जानेमाने तबला वादक थे।
अभिभावक वासुदेव महाराज
पति/पत्नी टीना (फ़्राँसीसी महिला)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय शास्त्रीय संगीत
प्रसिद्धि तबला वादक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सन 1972 में भारत सरकार की ओर से लच्छू महाराज ने 27 देशों का दौरा किया था। 1972 में ही केंद्र सरकार की ओर से उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित करने का प्रस्ताव किया गया था, किंतु उन्‍होंने 'पद्मश्री' लेने से मना कर दि‍या।
लच्छू महाराज 
 जन्म- 16 अक्टूबर, 1944, बनारस मृत्यु- 27 जुलाई, 2016) भारत के जानेमाने तबला वादक थे। उन्होंने बनारस घराने की तबला बजाने की परम्परा को आगे बढ़ाया था। उनके कई शिष्य देश-विदेश में तबला बजा रहे हैं। लच्छू महाराज बेहद सादगी पसंद व्यक्ति थे, यही कारण था कि उन्होंने कभी कोई सम्मान ग्रहण नहीं किया।

लच्छू महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नगरी बनारस में 16 अक्टूबर, सन 1944 में हुआ और वे वहीं पले-बढ़े। इनके पिता का नाम वासुदेव महाराज था। लच्छू महाराज बारह भाई-बहनों में चौथे थे।
एक फ़्राँसीसी महिला टीना से लच्छू महाराज ने विवाह किया था। उनकी एक पुत्री है, जो स्विट्जरलैण्ड में है।
पूरी दुनिया में अपनी पेशेवर प्रस्तुति के अलावा लच्छू जी ने कई बॉलीवुड फ़िल्मों के लिए भी तबला बजाया।
लच्छू महाराज के वादन की विशेषता थी कि उनके पिता वासुदेव महाराज ने विभिन्न घरानों के तबला वादकों की देखभाल करते हुए उनके घरानों की शेष वंदिशों को संग्रहित कर लच्छू महाराज को प्रदान किया।
लच्छू महाराज ने अपने विकट अभ्यास के ज़रिये स्वतंत्र तबला वादक एवं संगत दोनों में ख्याति प्राप्त की। आप गायन, वादन एवं नृत्य तीनों की संगत में निपुण थे।
लच्छू महाराज एक स्वाभिमानी एवं पारंपरिक कलाकार थे, जिन्होंने छोटे मोटे स्वार्थों के लिए कोई भी गलत समझौते नहीं किये।
हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता गोविन्दा लच्छू महाराज के भांजे हैं। उन्होंने बचपन में ही लच्छू महाराज को अपना गुरु मान लिया था। गोविन्दा ने तबला बजाना लच्छू महाराज से ही सीखा। लच्छू महाराज जब कभी भी मुम्बई जाते तो गोविन्दा के घर पर ही रुकते थे।
सन 1972 में भारत सरकार की ओर से लच्छू महाराज ने 27 देशों का दौरा किया था। 1972 में ही केंद्र सरकार की ओर से उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित करने का प्रस्ताव किया गया था, किंतु उन्‍होंने 'पद्मश्री' लेने से मना कर दि‍या। वे कहते थे- "श्रोताओं की वाह और तालि‍यों की गड़गड़ाहट ही कलाकार का पुरस्‍कार होता है।"
लच्छू महाराज का निधन 27 जुलाई, 2016 को हुआ था। उनकी अंतिम संस्कार बनारस के मणिकर्णिका घाट पर किया गया।
फ़िल्मी सितारे गोविन्दा ने लच्छू महाराज के निधन पर लिखा कि- "पंडित लच्छू महाराज का निधन भारतीय शास्त्री संगीत की दुनिया के लिए बहुत बडी क्षति है। वह लब्ध प्रतिष्ठित तबला वादक थे।" कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उन्हें तबला के सिरमौरों में एक बताया और उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी लच्छू महाराज के निधन पर दु:ख प्रकट किया। प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी ने भी लच्छू महाराज के निधन पर शोक जताया और कहा कि ऐसे कलाकार हमेशा पैदा नहीं होते।

गुरुवार, 27 जुलाई 2023

राहुल बोस

फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक एवं अभिनेता राहुल बोस के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
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  ꧁फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक 

एवं अभिनेता राहुल बोस 

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🎂जन्म27 जुलाई 1967 भारत
व्यवसायों
  • अभिनेता
  • निदेशक
  • पटकथा लेखक
  • सामाजिक कार्यकर्ता
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राहुल बोस एक भारतीय फिल्‍म अभिनेता, फिल्‍म निर्माता, फिल्‍म निर्देशक, पटकथा लेखक, सोशल ऐक्टिविस्‍ट और रग्बी प्‍लेयर हैं। जो हिंदी और बंगाली समेत भारत की अन्‍य भाषाओं की फिल्‍मों भी नजर आते हैं।

राहुल बोस का जन्‍म 27 जुलाई 1967 को कर्नाटक के बैंगलोर को हुआ था। बोस ने मात्र 6 साल की उम्र में अपना लीड रोल स्‍कूल के एक नाटक 'टॉम द पाइपर्स सन' में प्‍ले किया था। बोस एक अच्‍छे क्रिकेट प्‍लेयर भी हैं। उन्‍होंने भारत के मशहूर क्रिकेटर मन्‍सूर अली खान पटौदी से क्रिकेट की कोचिंग ली थी। 

राहुल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कैनन स्‍कूल से पूरी की है। इसके बाद उन्‍होंने मुंबई के ही सिंडेन्‍हम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्‍स से कॉलेज की पढ़ाई की है।

राहुल बोस ने कई भारतीय फिल्‍मों में अभिनय किया है साथ ही वह फिल्‍म निर्देशन, और पटकथा लेखन का भी काम करते हैं। बोस अब तक 100 से भी ज्‍यादा फिल्‍मों में काम कर चुके हैं।

पार्श्वगायिका शास्त्रीय संगीत गायिका के एस चित्रा

पार्श्वगायिका शास्त्रीय संगीत गायिका के एस चित्रा के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
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🎂जन्म : 27 जुलाई 1963
पति: विजय शंकर
बच्चे: नंदना
इनाम: पद्म भूषण, पद्म श्री, ज़्यादा
माता-पिता: कृष्णन नायर, Santhakumari
भाई: के॰ एस॰ बीना, के॰ एस॰ महेश
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कृष्णन नायर शान्तिकुमारी चित्रा (प्रचलित नाम- के. एस. चित्रा या चित्रा,भारत की प्रसिद्ध गायिका हैं। दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्मों की इस पार्श्वगायिका ने अपनी मधुर आवाज से लाखों लोगों का दिल जीता है। के. एस. चित्रा ने तमिल, तेलगू, मलयालम, हिंदी, बंगाली और उड़िया जैसी भाषाओं में 25,000 से अधिक गाने गाए हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों के पार्श्व गायन के इतिहास में वह पहली महिला गायक हैं, जिन्हें दक्षिण भारत की चार राज्यों की सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका के लिए सम्मानित किया गया। के. एस. चित्रा को वर्ष 2021 में 'पद्म भूषण' से भी सम्मानित किया गया है।

#परिचय

के. एस. चित्रा का जन्म केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम में 27 जुलाई, 1963 को हुआ था। उन्होंने अपने दिवंगत पिता कृष्णन नायर, जो कि एक प्रसिद्ध गायक और संगीतकार थे, के मार्गदर्शन में संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। के. एस. चित्रा ने संगीत में स्नातक किया और बाद में केरल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के. ओमानकुट्टी की देखरेख में संगीत में परास्नातक किया।

#फ़िल्मी_शुरुआत

मलयालम फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक एम. जी. राधाकृष्णन ने के. एस. चित्रा को उनकी फिल्म ‘अत्ताहसम’ और बाद में ‘स्नेहापुरमम मीरा’ और ‘नंजन एकानानु’ में मौका दिया। प्रसिद्ध तमिल संगीतकार इलैयाराजा ने उनको तमिल फिल्म उद्योग में फिल्म ‘नेथन अनंत कुयिल’ के माध्यम से परिचित करवाया। हिंदी फिल्म संगीत में के. एस. चित्रा ने फिल्म ‘लव’, ‘प्यार तूने क्या किया’, ‘विरासत’, ‘अक्स’, ‘अशोका’ और ‘रंगीला’ आदि जैसी फिल्मों में अपनी गायिकी से संगीत प्रेमियों के दिलों को जीता है। सारंगी (गिटार) वादक उस्ताद सुल्तान ख़ान के सहयोग से उनकी एल्बम ‘पिया बसंती’ काफी लोकप्रिय हुई थी। के. एस. चित्रा ने प्रसिद्ध ग़्ज़ल गायक गुलज़ार और भूपिंदर के साथ अपनी अगली एल्बम ‘सनसेट पॉइंट’ में गायन किया था।

के. एस. चित्रा को सलिल चौधरी, अनु मलिक, नदीम-श्रवण और ए. आर. रहमान जैसे प्रसिद्ध संगीत निर्देशकों के साथ काम करने का गौरव प्राप्त हुआ है।

#पुरस्कार_व_सम्मान

पद्म भूषण, 2021
के. एस. चित्रा को तमिल फिल्म ‘सिंधु भैरवी’ (1986), मलयालम फिल्म ‘नखक्षथंगल’ (1987), मलयालम फिल्म ‘वैशाली’ (1989), तमिल फिल्म ‘मिनसारा कनवू’ (1996) और हिंदी फिल्म ‘विरासत’ (1997) के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका की श्रेणी में पाँच बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2018 में के. एस. चित्रा क्रेग कफ़लिन, महासभा, न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका के अध्यक्ष द्वारा सम्मानित की गई थीं।
2019 में सुल्तान बिन मुहम्मद अल-कासिमी द्वारा सम्मानित की गई, जो शारजाह के अमीर शासक थे।
के. एस. चित्रा एकमात्र दक्षिण भारतीय महिला गायिका हैं, जिन्होंने 2001 में लंदन के प्रतिष्ठित कॉन्सर्ट हॉल रॉयल अल्बर्ट हॉल में अपना पहला संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

आमजद खान

महान अभिनेता अमज़द खान की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
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🎂जन्म: 12 नवंबर 1940, 
⚰️मृत्यु: 27 जुलाई 1992, 
बच्चे: सीमाब खान, आहलम खान ,शादाब खान
पत्नी:  शीला खान(विवा. 1972–1992)
भाई: इम्तियाज खान, इनायत खान
माता-पिता: जयंत quamran sultan
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अमजद ख़ान  हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उनके द्वारा 'शोले' फ़िल्म में अभिनीत किरदार 'गब्बर सिंह' भारतीय सिनेमा के यादगार खलनायकों में से एक है। अपने कॅरियर में अमजद ख़ान ने 'शोले', 'परवरिश', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लावारिस', 'हीरालाल-पन्नालाल', 'सीतापुर की गीता', 'हिम्मतवाला' और 'कालिया' जैसी करीब 130 फ़िल्मों में काम किया। पर्दे पर एक-से-एक ख़तरनाक और अत्याचारी भूमिकाएँ निभाने वाले अमजद ख़ान वास्तविक जीवन में एक सभ्य, सुसंस्कृत एवं गरीबों की सहायता करने वाले नेकदिल इंसान थे। 'शोले' के गब्बर सिंह की भूमिका उनसे पहले अभिनेता डैनी को दी गयी थी, परन्तु समयाभाव के कारण जब उन्होंने इनकार कर दिया तो यह भूमिका अमजद ख़ान को मिल गयी। अमजद ख़ान ने डाकू गब्बर सिंह के चरित्र को फ़िल्मी पर्दे पर इस प्रकार जीवन्त कर दिया कि उसे अमर ही बना दिया।

अमजद ख़ान का जन्म 12 नवम्बर, सन 1940 को फ़िल्मों के जाने माने अभिनेता जिक्रिया ख़ान के पठानी परिवार में आन्ध्र प्रदेश के हैदराबाद शहर में हुआ था। अमजद ख़ान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जयंत फ़िल्म इंडस्ट्री में खलनायक रह चुके थे। अमजद ख़ान ने बतौर कलाकार अपने अभिनय जीवन की शुरूआत वर्ष 1957 में प्रदर्शित फ़िल्म 'अब दिल्ली दूर नहीं' से की थी। इस फ़िल्म में अमजद ख़ान ने बाल कलाकार की भूमिका निभायी। वर्ष 1965 में अपनी होम प्रोडक्शन में बनने वाली फ़िल्म 'पत्थर के सनम' के जरिये अमजद ख़ान बतौर अभिनेता अपने कॅरियर की शुरुआत करने वाले थे, लेकिन किसी कारण से फ़िल्म का निर्माण नहीं हो सका। सत्तर के दशक में अमजद ख़ान ने मुंबई से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बतौर अभिनेता काम करने के लिये फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख किया।

बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म 'शोले' के किरदार गब्बर सिंह ने अमजद ख़ान को फ़िल्म इंडस्ट्री में सशक्त पहचान दिलायी, लेकिन फ़िल्म के निर्माण के समय गब्बर सिंह की भूमिका के लिये पहले डैनी का नाम प्रस्तावित था। फ़िल्म शोले के निर्माण के समय गब्बर सिंह वाली भूमिका डैनी को दी गयी थी, लेकिन उन्होंने उस समय फ़िल्म 'धर्मात्मा' में काम करने की वजह से शोले में काम करने से इन्कार कर दिया। 'शोले' के कहानीकार सलीम ख़ान की सिफारिश पर रमेश सिप्पी ने अमजद ख़ान को गब्बर सिंह का किरदार निभाने का अवसर दिया। जब सलीम ख़ान ने अमजद ख़ान से फ़िल्म 'शोले' में गब्बर सिंह का किरदार निभाने को कहा तो पहले तो अमजद ख़ान घबरा से गये, लेकिन बाद में उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और चंबल के डाकुओं पर बनी किताब 'अभिशप्त चंबल' का बारीकी से अध्ययन करना शुरू किया। बाद में जब फ़िल्म 'शोले' प्रदर्शित हुई तो अमजद ख़ान का निभाया किरदार गब्बर सिंह दर्शकों में इस कदर लोकप्रिय हुआ कि लोग गाहे-बगाहे उनकी आवाज़ और चालढाल की नकल करने लगे।

अपने 16 साल के फ़िल्मी कॅरियर में अमजद ख़ान ने लगभग 130 फ़िल्मों में काम किया। उनकी प्रमुख फ़िल्में 'आखिरी गोली', 'हम किसी से कम नहीं', 'चक्कर पे चक्कर', 'लावारिस', 'गंगा की सौगंध', 'बेसर्म', 'अपना खून', 'देश परदेश', 'कसमे वादे', 'क़ानून की पुकार', 'मुक्कद्दर का सिकंदर', 'राम कसम', 'सरकारी मेहमान', 'आत्माराम', 'दो शिकारी', 'सुहाग', 'द ग्रेट गैम्बलर', 'इंकार', 'यारी दुश्मनी', 'बरसात की एक रात', 'खून का रिश्ता', 'जीवा', 'हिम्मतवाला', 'सरदार', 'उत्सव' आदि है, जिसमें उन्होंने शानदार अभिनय किया। अमजद जी अपने काम के प्रति बेहद गम्भीर व ईमानदार थे। परदे पर वे जितने खूंखार और खतरनाक इंसानों के पात्र निभाते थे, उतने ही वे वास्तविक जीवन और निजी जीवन में एक भले हँसने-हँसाने और कोमल दिल वाले इंसान थे। फ़िल्म 'शोले' की सफलता के बाद अमजद ख़ान ने बहुत-सी हिंदी फ़िल्मों में खलनायक की भूमिका की। 70 से 80 और फिर 90 के दशक में उनकी लोकप्रियता बरक़रार रही। उन्होंने डाकू के अलावा अपराधियों के आका, चोरों के सरदार और हत्यारों के पात्र निभाए।

यह बात कम लोगों को पता है कि अमजद ख़ान उस कल्पना अय्यर को प्यार करते थे, जिसने तमाम फ़िल्मों में बेबस-बेगुनाह नायिकाओं पर बेपनाह जुल्म ढाए। भारी डील-डौल वाले गोरे-चिट्टे अमजद और दुबली-पतली इकहरे बदन की सांवली कल्पना अय्यर में देखने-सुनने में खासा अंतर था, लेकिन दोनों में एक गुण समान था। दरअसल, दोनों रुपहले पर्दे पर भोले-भाले निर्दोष पात्रों पर बड़े जुल्म ढाते थे। ये दोनों लोगों की वाहवाही नहीं, हमेशा उनकी हाय बटोरते थे। अमजद ख़ान की प्रेमिका कल्पना मॉडल थीं और एक मॉडल की मंजिल फ़िल्में ही होती हैं। इसलिए कल्पना ने मशहूर कॉमेडियन आई.एस. जौहर की फ़िल्म 'द किस' में काम करके अपनी अभिनय-यात्रा आरंभ की

पर्दे पर खलनायकी के तेवर दिख़ाने वाले अमजद निजी जीवन में बेहद दरियादिल और शांति प्रिय इंसान थे। अमिताभ बच्चन ने एक साक्षात्कार में बताया था कि अमजद बहुत दयालु इंसान थे। हमेशा दूसरों की मदद को तैयार रहते थे। यदि फ़िल्म निर्माता के पास पैसे की कमी देखते, तो उसकी मदद कर देते या फिर अपना पारिश्रमिक नहीं लेते थे। उन्हें नए-नए चुटकुले बनाकर सुनाने का बेहद शौक था। अमिताभ को वे अक्सर फोन कर लतीफे सुनाया करते थे।

एक कार दुर्घटना में अमजद बुरी तरह घायल हो गए। एक फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले में लोकेशन पर जा रहे थे। ऐसे समय में अमिताभ बच्चन ने उनकी बहुत मदद की। अमजद ख़ान तेजी से ठीक होने लगे। लेकिन डॉक्टरों की बताई दवा के सेवन से उनका वजन और मोटापा इतनी तेजी से बढ़ा कि वे चलने-फिरने और अभिनय करने में कठिनाई महसूस करने लगे। वैसे अमजद मोटापे की वजह खुद को मानते थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि- "फ़िल्म ‘शोले’ की रिलीज के पहले उन्होंने अल्लाह से कहा था कि यदि फ़िल्म सु‍परहिट होती है तो वे फ़िल्मों में काम करना छोड़ देंगे।" फ़िल्म सुपरहिट हुई, लेकिन अमजद ने अपना वादा नहीं निभाते हुए काम करना जारी रखा। ऊपर वाले ने मोटापे के रूप में उन्हें सजा दे दी। इसके अलावा वे चाय के भी शौकीन थे। एक घंटे में दस कप तक वे पी जाते थे। इससे भी वे बीमारियों का शिकार बने। मोटापे के कारण उनके हाथ से कई फ़िल्में फिसलती गई। 27 जुलाई, 1992 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दहाड़ता गब्बर हमेशा के लिए सो गया। अमजद ने हिन्दी सिनेमा के खलनायक की इमेज के लिए इतनी लंबी लकीर खींच दी थी कि आज तक उससे बड़ी लकीर कोई नहीं बना पाया है

डिम्पल कपाड़िया और राखी अभिनीत फ़िल्म 'रुदाली' अमजद ख़ान की आखिरी फ़िल्म थी। इस फ़िल्म में उन्होंने एक मरने की हालात में पहुंचे एक ठाकुर की भूमिका निभाई थी, जिसकी जान निकलते-निकलते नहीं निकलती। ठाकुर यह जानता है कि उसकी मौत पर उसके परिवार के लोग नहीं रोएंगे। इसलिए वह मातम मनाने और रोने के लिए रुपये लेकर रोने वाली रुदाली को बुलाता है। यह अलग बात है कि रुदाली के ठाकुर की मौत पर रोने वाला कोई नहीं था, लेकिन जब अमजद ख़ान की मौत हुई, तो मात्र फ़िल्म इंडस्ट्री ही नहीं, समूचा संसार रोया था, क्योंकि उनकी चर्चित फ़िल्म 'शोले' देश ही नहीं, विदेश में भी सराही गई थी। जिस तरह आज हॉलीवुड की फ़िल्मों की नकल हिंदी फ़िल्मों में हो रही है, 'शोले' के इस गब्बर की नकल तब हॉलीवुड की कई बड़ी फ़िल्मों में देखी गई। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि गब्बर रूपी अमजद ख़ान जरूर मर गया, मगर अमजद रूपी गब्बर न तो मरा है और न ही वह कभी मरेगा। वह तो एक किंवदंती की तरह अमर है।

बुधवार, 26 जुलाई 2023

अभिनेता विनय पाठक

विनय पाठक 
🎂जन्म 27 जुलाई 1968
 एक भारतीय थिएटर और फिल्म अभिनेता हैं । उन्होंने खोसला का घोसला , भेजा फ्राई , आइलैंड सिटी और जॉनी गद्दार सहित कई फिल्मों में अभिनय किया है और जिस्म , रब ने बना दी जोड़ी और माई नेम इज खान जैसी फिल्मों में सहायक भूमिका निभाई है ।
🎂27 जुलाई 1968 (उम्र 54)
बिहिया , बिहार , भारत
व्यवसाय
अभिनेता , टेलीविजन प्रस्तोता , फिल्म निर्माता , थिएटर अभिनेता
सक्रिय वर्ष
1996-वर्तमान
जीवनसाथी
सोनिका सहाय ​( एम.  2006 )
बच्चे
2
पाठक का बचपन धनबाद में बीता क्योंकि उनके पिता पुलिस विभाग में तैनात थे। उन्होंने 1982 तक बोर्डिंग स्कूल विकास विद्यालय , रांची में पढ़ाई की । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद वह उच्च अध्ययन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए।शायद उनके बीएफए कार्यक्रम स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय में उनके गुरुओं में प्रमुख फ़ार्ले रिचमंड थे, जिन्होंने उनसे 1995 में भारत और हिंदी थिएटर और फिल्म में लौटने का आग्रह किया था
स्टोनी ब्रुक में स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क में अध्ययन के दौरान पाठक को कई अभिनय भूमिकाएँ मिलीं, विशेष रूप से कॉमेडी फ़िल्मों खोसला का घोसला और भेजा फ्राई में ।  1999 में, उन्होंने टेलीविजन श्रृंखला हिप हिप हुर्रे में विन्नी की भूमिका निभाई । उन्होंने फिल्म दसविदानिया का भी निर्माण किया , जिसमें एक आम आदमी के मरने से पहले विदाई लेने की कहानी बताई गई थी। 

अपने अच्छे दोस्त रणवीर शौरी के साथ उन्होंने OYE शो की एंकरिंग की । दोनों ने मिलकर टॉक शो रणवीर विनय और कौन? की मेजबानी की। ., [6] साथ ही हाउस अरेस्ट , दुनिया गोल हैं और क्रिकेट क्रेज़ी । उन्होंने गैग-आधारित शो द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो का हिस्सा बनने के लिए अपने दोस्तों रणवीर, सुरेश मेनन और गौरव गेरा के साथ मिलकर काम किया ।

पाठक ने टीवी के लिए बनी फिल्म मर्डर अनवील्ड (2005) में इंस्पेक्टर गुरपाल बदाश की एक छोटी भूमिका निभाई, जिसमें कनाडा में सिख समुदाय को दिखाया गया था।

पाठक ने जॉनी गद्दार , आजा नचले , खोया खोया चांद और रब ने बना दी जोड़ी फिल्मों में अभिनय किया ।

प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस द्वारा निर्मित उनकी अगली फिल्म रात गई बात गई दिसंबर 2009 में भारत में रिलीज़ हुई थी

कृति सेनन

कृति सेनन 
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कृति सेनन 

🎂जन्म 27 जुलाई 1990
 एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में दिखाई देती हैं।
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कृति सेनन (जन्म 27 जुलाई 1990) एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में दिखाई देती हैं।
उन्होंने जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, जिसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए एक मॉडल के रूप में काम किया।
मनोवैज्ञानिक थ्रिलर 1: नेनोक्कडाइन (2014) के साथ तेलुगु सिनेमा में अपनी शुरुआत करने के बाद, सैनन ने सब्बीर खान की एक्शन कॉमेडी हीरोपंती (2014) में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला डेब्यू का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता, जो उनकी पहली बॉलीवुड रिलीज़ थी।
सैनन ने तब से व्यावसायिक रूप से सफल एक्शन कॉमेडी दिलवाले (2015) में अभिनय किया है, जो उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली रिलीज, रोमांटिक कॉमेडी बरेली की बर्फी (2017) और लुका छुपी (2019), और कॉमेडी हाउसफुल 4 (2019) में है।
उन्होंने कपड़ों की अपनी लाइन भी लॉन्च की है और कई ब्रांडों और उत्पादों का प्रचार करती हैं।
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सेनन का जन्म नई दिल्ली में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल सेनन और दिल्ली विश्वविद्यालय में भौतिकी की प्रोफेसर गीता सेनन के घर हुआ था । उनका परिवार पंजाबी हिंदू है ।उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम में पढ़ाई की और बाद में जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी , नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की । अभिनेत्री बनने से पहले उन्होंने कुछ समय के लिए एक मॉडल के रूप में काम किया। उनकी छोटी बहन नुपुर भी एक अभिनेत्री हैं। 
सैनन का करियर व्यावसायिक रूप से सफल रोमांटिक कॉमेडी बरेली की बर्फी (2017) और लुका छुपी (2019) में अभिनय के साथ आगे बढ़ा , और उनकी सबसे ज्यादा कमाई वाली रिलीज़ सामूहिक कॉमेडी दिलवाले (2015) और हाउसफुल 4 (2019) के साथ आईं। मिमी (2021) में एक सरोगेट मां की मुख्य भूमिका निभाने के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। इस सफलता के बाद बच्चन पांडे (2022) और आदिपुरुष (2023) जैसी व्यावसायिक रूप से असफल फिल्मों की एक श्रृंखला आई , हालांकि कॉमेडी हॉरर फिल्म भेड़िया (2022) को खूब सराहा गया।

सैनन फोर्ब्स इंडिया की 2019 की सेलिब्रिटी 100 सूची में दिखाई दीं। उन्होंने कपड़ों की अपनी लाइन और एक फिटनेस कंपनी लॉन्च की है, और कई ब्रांडों और उत्पादों के राजदूत के रूप में भी काम करती हैं।

रोमेश शर्मा


......रोमेश शर्मा.......
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अभिनेता, फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता, टेलीविज़न अभिनेता
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रोमेश शर्मा

फ़िल्म निर्देशक, निर्माता और अभिनेता

जन्मतिथि: 27-जुलाई -1947

जन्म स्थान: गुरदासपुर, पंजाब, भारत

व्यवसाय: अभिनेता, फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता, टेलीविज़न अभिनेता
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रोमेश ब्रिज शर्मा (जन्म 27 जुलाई 1947), जिन्हें व्यापक रूप से रोमेश शर्मा के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय फिल्म निर्माता, अभिनेता और निर्देशक हैं।
अपने बैनर रोमेश फिल्म्स के तहत, वह 30 वर्षों से अधिक समय से फिल्मों और टेलीविजन शो के निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
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2005 दिल जो भी कहे बतौर लेखक निर्देशक अभिनेता आशिम नाम से पात्र
2002 शरारत 
1994 सुहाग 
1991 हम 
1986 मेरा धर्म 
1983 लाल चुनरिया 
1980 द बर्निंग ट्रेन 
1979 काला पत्थर 
1977 यही है ज़िन्दगी 
1975 सुनहरा संसार 
1974 परिणय

शनिवार, 22 जुलाई 2023

शिव कुमार बटालवी

शिव कुमार बटालवी
अन्य नाम बिरह का सुल्तान (उपनाम)
🎂जन्म 23 जुलाई, 1936
जन्म भूमि बड़ा पिंड लोहतियाँ, सियालकोट (अविभाजित भारत
⚰️मृत्यु 6 मई, 1973
मृत्यु स्थान पंजाब
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र कवि, लेखक, नाटककार
मुख्य रचनाएँ 'पीड़ां दा परागा', 'लाजवंती', 'आटे दीयां चिड़ियां', 'मैनूं विदा करो', 'दरदमन्दां दीआं आहीं', 'लूणां', 'मैं ते मैं' 'आरती' और 'बिरह दा सुल्तान' आदि।
प्रसिद्धि पंजाबी कवि व शायर
नागरिकता भारतीय
शिव कुमार बटालवी 
🎂जन्म- 23 जुलाई, 1936; ⚰️मृत्यु- 6 मई, 1973)
 पंजाबी भाषा के एक विख्यात कवि थे, जो उन रोमांटिक कविताओं के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं, जिनमें भावनाओं का उभार, करुणा, जुदाई और प्रेमी के दर्द का बखूबी चित्रण है। शिव कुमार बटालवी ऐसे शायर और कवि थे जो एक छोटी-सी जिंदगी में इतना नाम बना गये कि आज भारत में हर नौजवां के सीने में धड़कते हैं। उनके गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर की प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने उन्हें बिरह का सुल्तान नाम दे दिया। शिव कुमार बटालवी यानी पंजाब का वह शायर, जिसके गीत हिंदी में न आकर भी वह बहुत लोकप्रिय हो गया। उसने जो गीत अपनी गुम हुई महबूबा के लिए बतौर इश्तहार लिखा था, वो जब फ़िल्मों तक पहुंचा तो मानो हर कोई उसकी महबूबा को ढूंढ़ते हुए गा रहा था- "इक कुड़ी जिहदा नाम मोहब्बत गुम है"।
शिव कुमार का जन्म 23 जुलाई 1936 को गांव बड़ा पिंड लोहटिया, शकरगढ़ तहसील (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) राजस्व विभाग के ग्राम तहसीलदार पंडित कृष्ण गोपाल और गृहिणी शांति देवी के घर में हुआ। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार गुरदासपुर जिले के बटाला चला आया, जहां उनके पिता ने पटवारी के रूप में अपना काम जारी रखा और बाल शिव ने प्राथमिक शिक्षा पाई।

1953 में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक किया और बटाला के बैरिंग यूनियन क्रिश्चियन कॉलेज में एफ एससी कार्यक्रम में नामांकित हुए। अपनी डिग्री पूरी करने से पहले उन्होंने कादियाँ के एस एन कॉलेज के कला विभाग में दाखिला लिया, जो उनके व्यक्तित्व से ज्यादा मेल खाता था, हालांकि दूसरे साल में उन्होंने उसे भी छोड़ दिया। उसके बाद वह हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ के एक स्कूल में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लेने के लिए दाखिल हुए, पर फिर उन्होंने इसे भी बीच में ही छोड़ दिया।  इसके बाद उन्होंने नाभा के सरकारी रिपुदमन कालेज में अध्ययन किया। उन्हें विख्यात पंजाबी लेखक गुरबख्श सिंह प्रीतलड़ी की बेटी से प्यार हो गया, जिन्होंने दोनों के बीच जाति भेद होने के कारण एक ब्रिटिश नागरिक से शादी कर ली। वह प्यार में दुर्भाग्यशाली रहे और प्यार की यह पीड़ा उनकी कविता में तीव्रता से परिलक्षित होती है।

बाद की जिंदगी में उनके पिता को कादियां में पटवारी की नौकरी मिली और इसी अवधि के दौरान उन्होंने अपना सबसे अच्छा साहित्यिक अवदान दिया। 1960 में उनकी कविताओं का पहला संकलन पीड़ां दा परागा (दु:खों का दुपट्टा) प्रकाशित हुआ, जो काफी सफल रहा। 1965 में अपनी महत्वपूर्ण कृति महाकाव्य नाटिका लूणा (1965) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले वे सबसे कम उम्र के साहित्यकार बन गये। काव्य पाठ और अपनी कविता को गाने की वजह से लोगों में वे और उनका काम काफी प्रसिद्ध हुआ।

5 फ़रवरी 1967 को उनका विवाह गुरदासपुर जिले के किरी मांग्याल की ब्राह्मण कन्या अरुणा से हुआ और बाद में दंपती को दो बच्चे मेहरबां (1968) और पूजा (1969) हुए। 1968 में चंडीगढ़ चले गये, जहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जन संपर्क अधिकरी बने। बाद के वर्षों में वे खराब स्वास्थ्य से त्रस्त रहे, हालांकि उन्होंने बेहतर लेखन जारी रखा।
उनके लेखन में उनकी चर्चित मौत की इच्छा हमेशा से स्पष्ट रही है।और 7 मई 1973 में 36 साल की उम्र में शराब की दुसाध्य लत के कारण हुए लीवर सिरोसिस के परिणामस्वरूप पठानकोट के किरी मांग्याल में अपने ससुर के घर पर उनका निधन हो गया।

सोमवार, 12 जून 2023

दिशा पटानी

वास्तविक नाम दिशा पटानी
उपनाम ज्ञात नहीं
व्यवसाय अभिनेत्री, मॉडल
शारीरिक संरचना
लम्बाई (लगभग) से० मी०- 170
मी०- 1.70
फीट इन्च- 5' 7”
वजन/भार (लगभग) 50 कि० ग्रा०
शारीरिक संरचना (लगभग) 34-25-34
आँखों का रंग काला
बालों का रंग काला
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि एक स्रोत के मुताबिक: 13 जून 1992
एक अन्य स्रोत के मुताबिक: 27 जुलाई 1995
आयु (2017 के अनुसार) एक स्रोत के मुताबिक: 25 वर्ष
एक अन्य स्रोत के मुताबिक: 22 वर्ष
जन्मस्थान बरेली, उत्तर प्रदेश, भारत
राशि मिथुन
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर टनकपुर, उत्तराखंड, भारत
स्कूल/विद्यालय ज्ञात नहीं
महाविद्यालय/विश्वविद्यालय ज्ञात नहीं
शैक्षिक योग्यता ज्ञात नहीं
डेब्यू तेलुगू फिल्म अभिनेत्री : लोफर (2015)
परिवार पिता : जगदीश सिंह पटानी (डीएसपी)
माता : ज्ञात नहीं
भाई : सूर्यांश पटानी (छोटा)
बहन : खुशबू पटानी (बड़ी)
हिन्दू
शौक/अभिरुचि किताबें पढ़ना, जिमनास्टिक और नृत्य करना
विवाद अपनी आयु और जन्म तिथि को लेकर दिशा पटानी विवादों में रही हैं, क्योंकि वर्ष 2012 में, एक वीडियो में उनके द्वारा दिए गए साक्षात्कार (Interview) के दौरान उन्होंने अपनी जन्म तिथि 13 जून 1992 बताई, लेकिन वर्ष 2016 में उन्होंने अपनी जन्म तिथि 27 जुलाई 1995 बताई थी।
पसंदीदा चीजें
पसंदीदा भोजन चाइनीज़ खाना, Donuts, Gummy Bears, Chocolate Elixirs, Freak Shakes, Banana Pancakes with Chocolate Hazelnut Whipped Cream
पसंदीदा अभिनेता रणबीर कपूर, जिम कैरी, लियोनार्डो डीकैप्रियो, अल्लू अर्जुन, अक्षय कुमार
पसंदीदा अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, माधुरी दीक्षित और कैटरीना कैफ
पसंदीदा फिल्म बर्फ़ी (2012)
पसंदीदा किताबें Only Love Is Real by Brian Weiss, Many lives, Many Masters by Brian Weiss
पसंदीदा रंग सफ़ेद, गुलाबी
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति अविवाहित

दिशा पटानी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ
क्या दिशा पटानी धूम्रपान करती हैं ? ज्ञात नहीं
क्या दिशा पटानी शराब पीती हैं ? ज्ञात नहीं
वर्ष 2013 मिस इंदौर प्रतियोगिता में दिशा उपविजेता थीं।
उन्होंने बॉलीवुड की पहली फिल्म “धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी” में बेहतरीन भूमिका अदा की थी।
वह करण जौहर की फिल्म “No Sex Please” में काम करने वाली थी, परन्तु किसी कारणवश वह फिल्म नहीं बन पाई।
वह टाइगर श्रॉफ के साथ फिल्म “बाघी : ए रिबेल फॉर लव” में कार्य करना चाहती थीं, परन्तु उनकी तुलना में श्रद्धा कपूर एक ज्यादा प्रख्यात अभिनेत्री थीं, इसलिए यह किरदार श्रद्धा कपूर की झोली में चला गया।
नोएडा में बी. टेक की पढ़ाई के दौरान उन्हें मॉडलिंग का ऑफर मिला, जिसके कारण उन्हें अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़कर, मुंबई जाना पड़ा।
फिल्मजगत में आने से पहले वह Indian ad world की एक लोकप्रिय चेहरा थीं।
वर्ष 2016 में, उन्होंने जैकी चैन के साथ “कुंग फू योगा” नामक फिल्म बनाई। 
उनका सपना एक एयर फोर्स पायलट बनने का था।
वह प्रियंका चोपड़ा को अपने रोल मॉडल के रूप में मानती हैं।
वह एक जानवर प्रेमी भी हैं।
नोरा फतेही उनकी सबसे अच्छी मित्र हैं।
वह एक शानदार नर्तक और फिटनेस ट्रेनर भी हैं।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...