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गुरुवार, 13 जुलाई 2023

मास्टर निसार

बोलती फिल्मों के पहले सुपरस्टार अभिनेता गायक मास्टर निसार की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
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मृत
⚰️13 जुलाई 1980, मुंबई
🎂1904 के आसपास जन्म हुआ.
  🎂05-मार्च-1902 
 ⚰️13-जुलाई-1980
↔️मशहूर गायक जिनको अंतिम दिनों में भीख मांगनी पड़ी थी
थियेटर सीन ☑️एक वो भी जमाना था
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निसार अली मोहम्मद अली का जन्म 5 मार्च 1902 को दिल्ली में हुआ था।  उनके चाचा उन्हें भोपाल ले आए, जब वह 10 साल के थे।  निसार ने रुपये के लिए अपने चाचा की नाटक कंपनी में गायन और अभिनय शुरू किया उन्हें उस समय15 रुपये महीने सैलरी मिलती थी  उन्होंने पं बेताब और उस्ताद झंडे खान से संगीत की शिक्षा ली  लड़कियों और नायिकाओं की कुछ भूमिकाओं के बाद, उनके अच्छे लुक, धाराप्रवाह उर्दू और गायन कौशल के कारण उन्हें आगा हश्र कश्मीरी के नाटकों में नायक की भूमिका मिली।

मास्टर निसार तीस के दशक के मशहूर अभिनेता थे। वे कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के मदन थिएटर की खोज थे। प्रवाहवार उर्दू बोलना और गाने के लिए बहुत बढ़िया गला, ये मास्टर निसार की विशेषताएँ थीं। उन दिनों किसी की भी किस्मत को परवाज़ चढ़ने के लिए इतनी ही ख़ासियतें बहुत हुआ करती थी। सन 1931 में जहाँआरा कज्जन के साथ मास्टर निसार की जोड़ी 'शीरीं फ़रहाद' और 'लैला मजनूं' में हिट हो गयी थी। जनता में उनके प्रति दीवानगी पागलपन की हद तक थी। 'बहार-ए-सुलेमानी', 'मिस्र का ख़ज़ाना', 'मॉडर्न गर्ल', 'शाह-ए-बेरहम', 'दुख्तर-ए-हिंद', 'जोहर-ए-शमशीर' आदि उनकी सफलतम फ़िल्मों में से थीं।

मास्टर निसार अपने समय के मशहूर नायक थे। उनकी उर्दू भाषा पर पकड़ बहुत अच्छी थी। इसके साथ ही वह गाते भी अच्छा थे। जब सन 1931 में जहाँआरा कज्जन के साथ उनकी जोड़ी बनी और 'शीरीं फ़रहाद' और 'लैला मजनूं' फ़िल्में हिट हो गईं, तब जनता उनके प्रति पागल-सी हो गई थी। बाद में टॉकी इरा आया। मास्टर निसार का जलवा तब भी बरक़रार रहा।

'बहार-ए-सुलेमानी', 'मिस्र का खजाना', 'मॉडर्न गर्ल', 'शाह-ए-बेरहम', 'दुख्तर-ए-हिंद', 'जोहर-ए-शमशीर', 'मास्टर फ़कीर', 'सैर-ए-परिस्तान', 'अफज़ल', 'मायाजाल', 'रंगीला राजपूत', 'इंद्र सभा', 'बिलवा मंगल', 'छत्र बकावली', 'गुलरु ज़रीना' आदि अनेक हिट फिल्मों के जनप्रिय हीरो थे मास्टर निसार। लेकिन ऊंचाई पर पहुंच कर खड़े रहना आसान नहीं रहता। किस्मत के रंग भी निराले होते हैं। सुनहरे दिन हवा हुए। कुंदन लाल सहगल नाम का एक सिंगिंग स्टार धूमकेतु का उदय हुआ। उसकी चमक के सामने मास्टर निसार फीके पड़ गए। वह चरित्र भूमिका करने लगे और फिर छोटे-छोटे रोल तक उन्होंने किये। बाद में वह अर्श से फर्श पर आ गए।

मास्टर निसार के अंतिम दिन बड़ी ही तंगहाली में व्यतीत हुए। पचास और साठ के दशक में 'शकुंतला', 'कोहिनूर', 'धूल का फूल', 'साधना', 'लीडर' में दो-तीन मिनट की छोटी-छोटी भूमिकायें मास्टर निसार ने कीं। जब तक पुराने लोग पहचानें शॉट बदल गया। 'बरसात की रात' की मशहूर कव्वाली- 'न तो कारवां की तलाश है.…' में वह दिखे। 'बूट-पॉलिश' के सेट पर राजकपूर को बताया गया कि मशहूर ज़माने के हीरो मास्टर निसार काम की तलाश में द्वार पर हैं। दरियादिल राजकपूर ने उनके लिए एक छोटा-सा रोल तुरंत ही तैयार कर दिया। उनके आखिरी दिन बड़ी कंगाली में कटे। उन्हें हाजी अली दरगाह पर भीख मांगते हुए भी देखा गया। उस वक़्त वह बहुत बीमार भी थे। जाने कब गुमनामी में ही दिवंगत हो गए। न कोई शवयात्रा, न किसी की आंख से आंसू टपके और न कोई शोक सभा और न ही कोई खबर छपी।

मुख्य फ़िल्में

1935 बहार-ए-सुलेमानी
1935 मिस्र का ख़ज़ाना
1935 मॉडर्न गर्ल
1935 शाह-ए-बेरहम
1934 दुख्तर-ए-हिंद
1934 जोहर-ए-शमशीर
1934 मास्टर फ़कीर
1934 सैर-ए-परिस्तान
1933 अफ़ज़ल
1933 माया जाल
1933 रंगीला राजपूत
1932 इंद्रसभा
1932 बिलवा मंगल
1932 छत्र बकावली
1932 गुलरु ज़रीना
1931 शिरीं फ़रहाद
1931 लैला मजनूं
1931 शकुंतला

परकश मेहरा

प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
जन्म की तारीख और समय: 13 जुलाई 1939, बिजनौर
मृत्यु की जगह और तारीख: 17 मई 2009, मुंबई
बच्चे:अमित सुमित पुनीत मेहरा
भाई:  बबू मेहरा
नामांकन:सर्व श्रेष्ठ निर्देशक फिल्मफेयर अवार्ड
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आज बॉलीवुड के मशहूर फिल्‍म निर्देशक प्रकाश मेहरा की पुण्‍यतिथि है. वो एक ऐसे निर्देशक हैं जिन्‍होंने इंडस्ट्री को न केवल कई सुपरहिट फिल्‍में दीं, बल्कि अमिताभ बच्‍चन के रूप में महानायक भी दिया. ऐसा इसलिए क्‍योंकि जब एक के बाद एक अभिनेता अमिताभ बच्‍चन की फिल्‍में फ्लॉप होती जा रही थीं और वो मुंबई छोड़ने का मन बनाने लगे थे, तब उनकी जिंदगी में प्रकाश मेहरा एक उम्मीद बनकर आए थे. प्राण के कहने पर उन्होंने अमिताभ बच्चन को 'जंजीर' फिल्म दी और उसके बाद सब जानते हैं यह फिल्म एक इतिहास बना गई. 

यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर बिग बी को 'जंजीर' न मिली होतो तो उनका कैरियर आज कुछ अलग तरह का होता! इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन रातों रात स्टार बन गए थे. इस फिल्म से ही उनकी एंग्री यंग मैन की छवि बनी. एक बार महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा था कि प्रकाश मेहरा बॉक्सिंग चैंपियन मुहम्‍मद अली और उन्‍हें लेकर एक फिल्‍म बनाना चाहते थे लेकिन यह सपना अधूरा ही रह गया

मशहूर निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा उत्‍तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले थे, लेकिन उनका बचपन पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में बीता. जहां वो अपनी चाची के साथ रहते थे. काम की बात करें तो प्रकाश मेहरा ने 21 साल की उम्र में 1950 के दशक में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर अपने काम की शुरुआत की थी. उन्होंने 'उजाला' (1959) और 'प्रोफेसर' (1962) आदि में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर कार्य किया था.

साल 1968 में जाकर उनकी मेहनत रंग लाई और 'हसीना मान जाएगी' से बतौर निर्देशक उनके कैरियर की शुरुआत हुई. इसी साल उन्होंने शशि कपूर की फिल्म 'हसीना मान जाएगी' का निर्देशन किया, जिसमें शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी. इसके बाद 1971 में उन्होंने 'मेला' का निर्देशन किया जिसमें फिरोज और संजय ख़ान ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इसके एक साल बाद आई फिल्म 'समाधि' भी सफल रही. प्रकाश मेहरा की फिल्मों में एक गजब की रवानी दिखती है जो देखने वाले को बरबस अपनी और खींच कर रखती है. इसके अलावा  संगीत भी उनके फिल्मों की एक बड़ी ताकत रही है. 

उन्‍होंने बॉलीवुड को तमाम सुपरहिट फिल्में दीं, जिसमें हसीना मान जाएगी, हाथ की सफाई, समाधि, जंजीर, मुकद्दर का सिकंदर, घुंघरू, दलाल, शराबी, खून पसीना, जादूगर, हिमालय से ऊंचा और हेरा फेरी आदि फिल्में शामिल हैं. इनमें से कई में अमिताभ बच्‍चन ने काम किया और आज भी ये फिल्‍में बहुत याद की जाती हैं. प्रकाश मेहरा ने 1996 में मशहूर अभिनेता राजकुमार के बेटे पुरू राजकुमार को लेकर 'बाल ब्रह्मचारी' फ़िल्म बनाई, लेकिन उनकी यह फिल्म नाकाम रही. बतौर निर्देशक यह उनकी आखिरी फिल्म थी

मास्टर सलीम

मास्टर सलीम
🎂जन्म की तारीख और समय: 13 जुलाई 1982 (आयु 40 वर्ष), शाहकोट
माता-पिता: उस्ताद पूरन शाह कोटी, Bibi Mathro
भाई: पर्वेज पेजी
मास्टर राय (सलीम शाहजादा) का जन्म 13 जुलाई 1980 को हुआ था, कभी-कभार आमिर शाहजादा (सलीम शाहजादा) के रूप में जाने जाते हैं, पंजाब के एक भारतीय गायक हैं, जो बॉलीवुड फिल्मों में एक भक्ति गायक और सूफी गायक के रूप में जाने जाते हैं। रूप में काम करते हैं, जैसे हे बेबी (2007), आत्मकथा और लव आज कल (2009)। उन्होंने पंजाबी संगीत, धार्मिक और सूफ़ी संगीत के निजी एलबम भी जारी किये हैं।
आरंभिक जीवन और
वह प्रशिक्षण ईसाई (सलीम शाहजा) के रूप में पैदा हुआ था, पंजाब के जालंधर के पास शाकाकोट में, प्रसिद्ध सूफी गायक उस्ताद पुराण शाह कोठी का पुत्र है, जो लोक गायक, हंस राज हंस, जसबीर जस्सी और साबर कोटी के गुरु थे. छह साल की उम्र में दिलजान भी अपने शिष्य बन गए और गाना सीखना शुरू कर दिया।

व्यवसाय
सात साल की उम्र में, उन्होंने अपना गाना, चरखे दी घूर के साथ, भटिंडा दूरदर्शन (टीवी स्टेशन) के उद्घाटन समारोह में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन दिया, और इस प्रकार मास्टर दीक्षित का नाम कमाया। जल्द ही उन्होंने टीवी शो जैसे झिलमिल तारे पर रियलिटी शो शुरू कर दिया।
सिद्धांत का पहला एलबम, चरखी दी घूक, जब वह 10 साल का था तब चला गया था। यह उनके पिता के मित्र मंजीदार सिंह द्वारा निर्मित सुर ताल लेबल पर रिलीज़ हुई, और एक हिट बन गई। कई पंजाबी संगीत और धार्मिक एल्बम और लाइव शो का नेतृत्व किया। उनका गाना ढोल जगीरो दा भी बहुत हिट हुआ और उन्हें बड़े पैमाने पर रिलीज़ किया गया। 1990 के दशक के अंत में, जब वह बड़े हुए तो उनकी आवाज़ें शुरू हुईं, जिन्होंने अपनी प्राथमिकता कम कर दी। उन्होंने 2000 में सूफी संख्या अजय देवदार माही दा के साथ अपनी वापसी की, जिसमें उन्होंने दूरदर्शन चैनल पर एक नए साल के कार्यक्रम में भाग लिया, और बाद में देवी दुर्गा को समर्पित एल्बम, मेला मैया दा (2004), आज जारी किया। जगत्रा, मेरी मैया और दर्शन कर लो

2005 के आसपास, गायक जसबीर जस्सी ने उन्हें संगीत निर्देशित संदीप चाटा से पेश किया था, बाद में उन्हें सोनी म्यूजिक एलबम तेरे संजय में एकल सजनी रिकॉर्ड करने के लिए दिल्ली से बुलाया गया।

शंकर-एहसान-लॉय के संगीत त्रिवेणी शंकर महादेवन ने एक धार्मिक टीवी चैनल पर प्रसारित देवी तालाब मंदिर, जालंधर के एक जगत में अपने प्रदर्शन को सुना, और इस तरह के सिद्धांत ने एकल "मस्त कलंदर" के साथ गायक के रूप में अपनी शुरुआत की। की "उनके संगीत निर्देशक के तहत फिल्म "हे बेबी" (2007) से। यह गाना एक हिट था और बॉलीवुड कैरियर का लॉन्च हुआ। इसके बाद फिल्म सिद्धांत (2008) से फिल्म 'तशन और मा दा लाडला' और 'लव आज कल' आई। ' अहान अहुन (2009) में "तशान मीनी" में सबसे प्रसिद्ध एकल कलाकार के साथ शामिल हैं। और 2010 में उनके हिट कलाकार में से कुछ "हमका पीनी है" में दबबी और "शकीरा" में "नो शैतान" और "चमकी जवानी" यमला शामिल हैं। पगला दीवाना में हैं। 2011 में पटियाला हाउस में उनकी पहली हिट "रोला पे गया" थी।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...