19फरवरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
19फरवरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 18 फ़रवरी 2024

सोनू वालिया

#19feb
सोनू वालिया. 

🎂19 फरवरी 1964 

दिल्ली में रहने वाली पंजाबी फैमिली में हुआ था.यह वही सोनू वालिया थीं, जिन्होंने 1985 में मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया था.
अभिनेत्री सोनू वालिया 53 साल की हो गई हैं। उनका जन्म 19 फरवरी, 1964 को दिल्ली की पंजाबी फैमिली में हुआ था। मॉडलिंग से अपना करियर शुरू करने वाली सोनू ने 30 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। लाइमलाइट से दूर गुमनामी की जिंदगी जी रहीं सोनू वालिया ने फेसबुक पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिसमें वे बिल्कुल अलग अवतार में दिख रही हैं। जीता मिस इंडिया का खिताब...

सोनू ने साइकोलॉजी में डिग्री हासिल की, साथ ही वो जर्नलिज्म की भी स्टूडेंट रहीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में कदम रखा। यहां उन्हें जल्द सफलता भी मिलना शुरू गई। ऐसे में उन्होंने ज्यादा कामयाब बनने के लिए मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 1985 में वो मिस इंडिया का खिताब जीतने में कामयाब रहीं। कम्पीटिशन जीतने पर उन्हें एक्ट्रेस जूही चावला ने क्राउन पहनाया, जो उसने पहले मिस इंडिया थीं।
 
क्राउन ने खोला बॉलीवुड का रास्ता
मॉडलिंग में सफल और मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद सोनू के लिए बॉलीवुड का रास्ता भी खुल गया। उन्होंने 1988 में 'खून भरी मांग' में काम किया। इस फिल्म से उन्हें काफी सुर्खियां मिली। इतना ही नहीं, इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी मिला। इसके बाद उन्होंने 'आरक्षण', 'अपना देश पराए लोग', 'तूफान', 'खेल', 'स्वर्ग जैसा घर', 'तहलका', 'दिल आशना है' जैसी कई फिल्मों में काम किया। हालांकि, वो लीड एक्ट्रेस के तौर पर सफल नहीं रहीं। फिल्मों के साथ उन्होंने छोटे पर्दे पर भी काम किया।
 
बी-ग्रेड फिल्मों में भी काम किया
सोनू को जब सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने बी ग्रेड फिल्मों में भी काम करना शुरू कर दिया। हालांकि, बाद में उनके काम की काफी आलोचन हुई। ऐसे में सोनू ने इंडस्ट्री को छोड़ शादी करने का मन बना लिया। उन्होंने NRI सूर्य प्रकाश से शादी कर अपना घर बसा लिया। सूर्य प्रकाश के निधन के बाद उन्होंने दूसरी शादी NRI फिल्म प्रोड्यूसर प्रताप सिंह से की। अब वो यूएस में रहती हैं, हालांकि कभी-कभी उनका भारत आना भी होता है। 

📽️
शार्ट
खून भरी मांग
आकर्षण
अपना देश
पराए लोग
महादेव
तूफान
लिपिक
महा-संग्राम
तेजा
हातिम ताई
अग्निकाल
नंबरी आदमी
खेल
हक
सरबंस दानी
गुरु गोबिंद
सिंह
कसम
सूर्यकांत
जय माँ
शेरावाली

पंकज मलिक

#10may
#19feb 

पंकज कुमार मलिक

🎂जन्म 10 मई, 1905
जन्म भूमि कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता)
⚰️मृत्यु 19 फ़रवरी, 1978
मृत्यु स्थान पश्चिम बंगाल

अभिभावक पिता- मनीमोहन मलिक, माता- मनमोहिनी
कर्म भूमि पश्चिम बंगाल
कर्म-क्षेत्र संगीतकार, गायक और अभिनेता

मुख्य फ़िल्में 'यांत्रिक', 'मंजूर', 'मेरी बहन', 'नर्तकी', 'जिन्दगी', 'डाक्टर', 'धरती माता', 'देवदास', 'यहूदी की लड़की'।
शिक्षा 'भारतीय शास्त्रीय संगीत'
विद्यालय 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज', कलकत्ता विश्वविद्यालय
पुरस्कार-उपाधि 'पद्मश्री' (1970) और 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' (1972)
विशेष योगदान पंकज मलिक को नितिन बोस और आर. सी. बोराल के साथ भारतीय सिनेमा में पार्श्वगायन की शुरुआत करने का श्रेय प्राप्त है।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी रवीन्द्र संगीत को सफलतापूर्वक फ़िल्मों में लाने वाले पंकज मलिक पहले संगीतकार थे, उन्होंने फ़िल्म 'मुक्ति' में रवीन्द्र संगीत का प्रयोग किया था, जिससे टैगोर के गीत आम जनता के सामने पहली बार सिनेमा के रूप में आए।
 बांग्ला संगीत और फ़िल्मों में सफलता के साथ-साथ हिन्दी फ़िल्मों में भी अपनी कामयाबी का परचम लहराने वाले शास्त्रीय संगीत के विशेषज्ञ थे। उनका पूरा नाम 'पंकज कुमार मलिक' था। वे ऐसे संगीतकार व गायक थे, जिनकी आवाज़ के जादू ने आज भी उनके लाखों प्रशंसकों को बांध रखा है। बहुमखी प्रतिभा के धनी पंकज मलिक को संगीत और गायन के अलावा अभिनय में भी कुशलता हासिल थी। वह जब भी परदे पर अवतरित हुए कामयाब रहे। उनकी ऐसी हिन्दी फ़िल्मों में 'डाक्टर', 'आंधी', और 'नर्तकी' आदि विशेष चर्चित हैं। जाति प्रथा की समस्या के ख़िलाफ़ संदेश देने वाली फ़िल्म 'डाक्टर' में पंकज मलिक ने कई गाने खुद गाए थे, जो काफ़ी हिट हुए। पंकज मलिक की अपनी विशिष्ट गायन शैली थी, जिसकी बदौलत उन्होंने हज़ारों लोगों को अपना प्रशंसक बनाया। उन्हें हिन्दी फ़िल्मों के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से भी नवाजा गया।

उनके पिता का नाम मनीमोहन मलिक और माता का नाम मनमोहिनी था। उनके पिता पारम्परिक बंगाली संगीत में विशेष रुचि रखते थे। पंकज मलिक ने दुर्गादास बन्धोपाध्याय के संरक्षण में 'भारतीय शास्त्रीय संगीत' की अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पाई थी। कम उम्र में ही उन्होंने ख्याल, ध्रुपद, टप्पा और अन्य शास्त्रीय संगीत का ज्ञान हासिल कर लिया था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज' में अध्ययन किया। शिक्षा समाप्त करने के बाद ही उनके जीवन में एक अहम मोड़ आया। उनका सम्पर्क दीनेन्द्रनाथ टैगोर से हुआ, जो रवीन्द्रनाथ टैगोर के भतीजे थे। उन्होंने दीनेन्द्रनाथ टैगोर से रवीन्द्र संगीत सीखा। बांग्ला भाषियों में रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं को लोकप्रिय बनाने में मलिक के गाए गीतों का बड़ा योगदान माना जाता है।

फ़िल्मी सफर की शुरुआत
पंकज मलिक आकाशवाणी से जुड़ने वाले शुरुआती कलाकारों में थे। पंकज मलिक का फ़िल्मी सफर मूक फ़िल्मों के दौर में ही शुरू हो गया था, किंतु उन्हें सही पहचान 1930 के दशक में बोलती फ़िल्मों की शुरूआत के साथ मिली। हिन्दी और बांग्ला दोनों भाषाओं को मिलाकर उन्होंने एक सौ से अधिक फ़िल्मों में संगीत दिया और कई में अभिनय भी किया। उनकी उल्लेखनीय संगीत रचनाओं में 'महिषासुरमर्दिनी' भी शामिल है। आकाशवाणी के लिए बनाए गए बांग्ला और संस्कृत मिश्रित इस कार्यक्रम में हेमंत कुमार सहित उस दौर के सभी प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज़ दी। इस कार्यक्रम को आज भी प्रतिवर्ष चैत्र मास के नवरात्र से ठीक पहले महालय के अवसर पर आकाशवाणी द्वारा प्रसारित किया जाता है और लोग इसे बेहद रुचि से सुनते हैं।

सफलता

पंकज मलिक के संगीत निर्देशन वाली शुरूआती हिन्दी फ़िल्मों में से एक 'धरती माता' काफ़ी चर्चित हुई। ग्रामीण भारत के जीवन पर आधारित इस फ़िल्म में किसानों की समस्याएँ और उन्हें मुसीबतों से जूझने का रास्ता दिखाने का प्रयास किया गया था। पंकज मलिक ने इस फ़िल्म में बेहतरीन संगीत दिया और उनकी धुनों के कारण पूरी फ़िल्म में ग्रामीण परिवेश जीवंत होता दिखाई दिया। 'धरती माता' फ़िल्म में के. एल. सहगल ने आदर्शवादी युवक की भूमिका निभायी थी। इस फ़िल्म के गीत 'प्रभु मोहे बुला गांव में दुनिया रंगरंगीली बाबा दुनिया रंगरंगीली' आदि बेहद कामयाब रहे। 'धरती माता' के बाद पंकज मलिक की कई फ़िल्में प्रदर्शित हुईं, जिन्हें समीक्षकों के अलावा दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया। ऐसी फ़िल्मों में 'दुश्मन', 'काशीनाथ', 'ज़िंदगी', 'नर्तकी' और 'मेरी बहन' आदि शामिल हैं। 'नर्तकी' संगीत की दृष्टि से एक अहम फ़िल्म थी। देवकी बोस निर्देशित इस फ़िल्म में पंकज मलिक ने एक कवि की भूमिका निभायी और कई गीत भी गाए थे। इन गानों में 'ये कौन आया सबेरे सबेरे कौन तुझे समझाए मूरख' विशेष तौर पर याद किए जाते हैं।

अमर संगीत

न्यू थियेटर्स की फ़िल्म 'यात्रिक' पंकज मलिक को विशेष रूप से प्रिय थी। इसमें उन्होंने अमर संगीत दिया है। कैलाश, केदारनाथ, और बद्रीनाथ की यात्रा पर आधारित इस फ़िल्म में पंकज मलिक ने संस्कृति की कई मशहूर रचनाओं को अपना स्वर दिया और अपने विशेष संगीत को फ़िल्म का एक ख़ूबसूरत पक्ष बना दिया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1940 के दशक की शुरुआत में न्यू थियेटर्स से जुड़े अधिकतर बड़े नामों ने 'बंबई' (वर्तमान मुम्बई) की राह पकड़ ली, किंतु पंकज मलिक को अधिक रकम का प्रस्ताव आकर्षित नहीं कर पाया और उन्होंने बंबई जाने से साफ़ इंकार कर दिया।

पुरस्कार
भारत सरकार ने संगीत के क्षेत्र में पंकज मलिक के विशेष योगदान को देखते हुए उन्हें 'पद्मश्री' (1970) से सम्मानित किया था। फ़िल्म जगत् के सर्वोच्च 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' (1972) से नवाजे गए पंकज मलिक को दर्जनों पुरस्कार मिले। इसके साथ ही उन्हें लोगों का भरपूर प्यार भी मिला।

निधन
न्यू थियेटर्स से अपार प्रेम करने वाले पंकज मलिक इसके बंद होने तक इससे जुड़े रहे। 'जलजला' और 'कस्तूरी' उनकी आखिरी फ़िल्मों में थी, जिनका संगीत निर्देशन उन्होंने विशेष अनुरोध करने पर ही स्वीकर किया था। इसके बाद वह फ़िल्मों से अलग हो गए और संगीत की शिक्षा के क्षेत्र में विशेष तौर पर सक्रिय रहे और अंतत 19 फ़रवरी, 1978 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। पंकज मलिक को अपने जीवन काल में वह सब मिला, जिसकी हसरत किसी कलाकार को होती है।
📽️
1955 रायकमल
1954 चित्रांगदा
1952 यात्रिक
1952 महाप्रस्थानेर पाथेय
1952 ज़लज़ला
1950 रूपकथा
1949 मंजूर
1948 प्रतिबाद
1947 रामेर सुमति
1945 दुइ पुरुष
1944 मेरी बहन
1943 काशीनाथ
1943 दीक्षुल
1942 मीनाक्षी
1940 चिकित्सक
1940 नर्तकी
1940 जिंदगी
1939 बड़ी दीदी
1939 दुश्मन
1939 कपाल कुंडला
1938 अभागिन
1938 अभिज्ञान
1938 देशेर माटी
1938 धरती माता
1938 जीबन मारन
1937 बड़ी बहन
1937 दीदी
1937 मुक्ति
1936 देवदास
1936 गृहदाह
1936 आरसी बोराल के साथ करोड़पति उर्फ ​​करोड़पति
1936 माया
1936 मंज़िल
1933 यहुदी की लड़की
1931 चेशर मेये

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...