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सोमवार, 11 सितंबर 2023

14 अगस्त

15 अगस्‍त 1947 को भारत आजाद हुआ था। कहना उचित नही अंग्रेज खुद भारत छोड़ गए थे इसके एक दिन पहले की रात 14 अगस्त की उस आधी रात को हिन्‍दुस्‍तान में जो हुआ उसने देश के इतिहास और भूगोल को बदल कर रख दिया। हम अंग्रेजों की 250 वर्षो की गुलामी से आजाद तो हो गए, लेकिन जाते-जाते वह हमें बंटवारे का दर्द दे गए। 14 अगस्त की रात हिन्‍दुस्‍तान के 2 टुकड़े हुए थे जिससे लाखों लोग बेघर हो गए। एक तरफ भारत तो दूसरी तरफ पाकिस्तान बना। बंटवारे के दौरान चारों तरफ हिंसा फैली हुई थी। लोग जिनके साथ उठते-बैठते थे, वे अपनों के ही दुश्मन बन बैठे।

रविवार, 13 अगस्त 2023

शम्मी कपूर

शम्मी कपूर – शम्मी कपूर हिंदी सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता थे। उन्होंने फिल्मी दुनिया में लगभग 1950 से 1970 के दशक तक काम किया। हिंदी फिल्मो के जरिए लोगों का सबसे ज्यादा मनोरंजन करने वाले महान अभिनेता का नाम शामिल है।
शम्मी कपूर 
🎂जन्म 21 अक्तूबर 1931 को बॉम्बे (मुंबई)
⚰️14 अगस्त 2011 को उनकी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।
🎂जन्म 21 अक्तूबर 1931 को बॉम्बे (मुंबई) में पृथ्वीराज कपूर और रामशरनी कपूर (मेहरा) के घर में हुआ। उनके जन्म के समय उनका नाम शमशेर राज कपूर रखा गया था।
मुंबई में जन्म होने के बावजूद भी उनका बचपन ज्यादातर पेशावर के कपूर हवेली और कलकत्ता में ही गुजरा में हुआ। यू की इन जगहों पर उनके अनोखे नए थिएटर स्टूडियोज में फिल्मो का काम किया गया था।
कोलकाता में ही उन्होंने मोंटेसरी और किंडरगार्टन की पूरी पढ़ाई की। बाद में फिर से बॉम्बे वापस आ गए और बाद में उन्होंने सेंट जोसेफ कान्वेंट और डॉन बोस्को स्कूल में पूरी तरह से पढ़ाई की। उन्होंने ह्यूजेस रोड के न्यू इरा स्कूल के बारे में पूरी जानकारी दी।

1955 में जब रंगीन राते फिल्म की शूटिंग की जा रही थी तब उनका साक्षात्कार गीता बाली से हुई थी। उस फ़िल्म में शम्मी कपूर मुख्य भूमिका में थीं गीता और बाली ने उस फ़िल्म में बहुत ही छोटा सा किरदार निभाया था।

उसके चार महीने बाद ही उन्होंने मुंबई के नेपियन सी रोड के बाणगंगा मंदिर में शादी कर ली। लेकिन शादी के कुछ साल बाद यानी 1965 में गीता बाली गूर्जी की उन्हें स्मालपॉक्स की बीमारी हो गई थी।

बाद में 27 जनवरी 1969 को शम्मी कपूर की गुजरात के भावनगर के शाही परिवार से नीली देवी से शादी हुई।

शम्मी कपूर का करियर – शम्मी कपूर का करियर
कपूर ने बहुत ही कम समय बाद रामनारायण रुइया कॉलेज में पढ़ाई शुरू की और बहुत जल्द ही अपनी थियेट्रिकल कंपनी पृथ्वी थिएटर में काम करना शुरू कर दिया।

1948 में उन्होंने फिल्म जगत में एक जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करना शुरू किया था। उस वक्त उनका तन्खा 50 अन्य महिना था। अगले चार साल तक उन्होंने पृथ्वी थिएटर में काम किया और उस वक्त 1952 में अपने हर महीने की तन्खा 300 रुपये थी।

शम्मी कपूर ने लेकिन नासिर हुसैन की तुमसा नहीं देखी (1957) और दिल देके देखो (1959) जैसी फिल्म से अपनी फिल्म जगत में एक रौबीले और स्टाइलिश अभिनेता के रूप में पहचान बनाई।

शम्मी कपूर अपने अभिनय के कारण वो देश के युवा दिलों की नजर बन गए थे और इसी वजह से उनकी बहुत सारी फिल्में हिट हो गई थीं।

1970 के दौर में शम्मी कपूर सहायक अभिनेता के रूप में असफल हो गये। उनके किरदार, जमीर, हीरो, हुकूमत और चमत्कार जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी हमें उनकी याद दिलाते हैं।

1974 में शम्मी कपूर ने जगत का पहला कदम रखा और मनोरंजन (1974) और बंडल बाज़ (1976) जैसी फ़िल्मों का निर्देशन किया। उन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत कुछ दिखाया नहीं, लेकिन उन दोनों फिल्मों ने बहुत सारे लोगों से पैसा इकट्ठा किया। शम्मी कपूर आखिरी बार इम्तियाज अली द्वारा निर्देशित फिल्म रॉकस्टार फिल्म में नजर आए थे। उस फिल्म में शम्मी कपूर के परपोते स्टार कपूर नजर आये थे।

शम्मी कपूर इंटरनेट इंटरनेट कंपनी ऑफ इंडिया के संस्थापक और अध्यक्ष थे। एथिकल हैकर एसोसिएशन जैसे इंटरनेट के संघ के निर्माण में उन्होंने बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने पूरे कपूर परिवार की एक वेबसाइट भी बनाई थी।

शम्मी कपूर की मौत – शम्मी कपूर की मौत
2011 वो गुर्दा की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें 7 अगस्त 2011 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ⚰️14 अगस्त 2011 को उनकी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।

शम्मी कपूर को मिला पुरस्कार - शम्मी कपूर पुरस्कार
1968- ब्रह्मचारी फ़िल्म के लिए फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
1982- विधाता फ़िल्म के लिए फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
1995- फ़िल्मफेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड
1998 - भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए कला पुरस्कार विशेष पुरस्कार
1999- लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए जी साइन अवार्ड
2001- आनंदलोक पुरस्कार लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
2001- स्टार स्क्रीन लाइफटाइम अवार्ड
2002- आईआईएफए द्वारा भारतीय सिनेमा में अमूल्य योगदान पुरस्कार
2005- लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड
लिविंग लीजेंड अवार्ड, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) द्वारा

2008- पुणे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारतीय सिनेमा को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार मिला

मनीष बहल

मनीष बहल
14 अगस्त 1961 
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
पेशा
अभिनेता
सक्रिय वर्ष
1982
जीवनसाथी
एकता सोहिनी
बच्चे
प्रनूतन बहल और कृषा बहल
अभिभावक)
नूतन (मां)
रजनीश बहल (पिता)
रिश्तेदार
मुखर्जी-समर्थ परिवार देखें
मोहनीश बहल ने पद्मिनी कोल्हापुरे और सह-अभिनीत संजय दत्त के साथ सहायक भूमिका में फिल्म बेकरार से शुरुआत की , लेकिन फिल्म आलोचनात्मक और व्यावसायिक रूप से असफल रही। उनकी अगली रिलीज़ तेरी बाहों में थी, जो जैकी श्रॉफ की पत्नी आयशा दत्त के साथ द ब्लू लैगून की रीमेक थी , जो असफल रही। प्रमुख भूमिका में उनकी एकमात्र व्यावसायिक सफलता पुराना मंदिर थी , हालांकि इसे बी ग्रेड फिल्म माना गया था।  1999 की फ़िल्म हम साथ-साथ हैं वह फ़िल्म मानी जाती है जिसने बहल के करियर को बदल दिया। उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है, और दो के लिए नामांकित हुए हैंफ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार .
बहल का जन्म मुंबई , महाराष्ट्र , भारत में हुआ था । वह अभिनेत्री नूतन और लेफ्टिनेंट कमांडर के बेटे हैं । रजनीश बहल, और मुखर्जी-समर्थ परिवार के एक प्रमुख सदस्य हैं । उनका विवाह आरती बहल ( एकता सोहिनी के नाम से जाना जाता है ) से हुआ है और उनके दो बच्चे हैं: प्रनूतन बहल और कृशा बहल 

↔️जानवर आदित्य ओबेरॉय 
जालसाज़ सुखदेव 
2000 कहो ना...प्यार है इंस्पेक्टर दिलीप कदम 
अस्तित्व मल्हार कामत द्विभाषी फ़िल्म ( हिन्दी और मराठी )
कहीं प्यार ना हो जाये विनोद जयसिंह 
2001 एक रिश्ता: प्यार का बंधन राजेश पुरोहित 
क्यो की रजत दीवान 
2002 हां मैंने भी प्यार किया रोहित कश्यप 
2003 एलओसी: कारगिल रामकृष्णन विश्वनाथन 
2005 वाह! लाइफ हो तो ऐसी! सुनील वर्मा 
2006 शादी करके फंस गया यार करण/पुलिस कांस्टेबल हरविंदर सिंह हरवी
विवाह डॉ. राशिद खान 
2007 जिंदगी में कभी कभी संजीव अरोड़ा (राजीव के बड़े भाई)
2010 चांस पे डांस राजीव शर्मा 
इसी लाइफ में...! रविमोहन 
2011 बल अतुल कालसेकर 
देसी लड़के विक्रांत मेहरा 
2013 कृष 3 काल के पिता 
2014 जय हो अशोक प्रधान 
2019 पानीपत बालाजी बाजीराव

निधि चौहान

सुनिधि चौहान 

🎂जन्म निधी चौहान १४ अगस्त १९८३ एक भारतीय पार्श्वगायिका है जो हिन्दी गीतों को गाने के लिए लोकप्रिय है। उन्होंने मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, बंगाली, असमिया और गुजराती फ़िल्मों में भी २००० से अधिक गीत गाए हैं।
निधी चौहान
जन्म
14 अगस्त 1983 (आयु 39)
नई दिल्ली, भारत
मूलस्थान
भारतीय
विधायें
पार्श्वगायिका, इंडीपॉप
पेशा
गायिका

चौहान ने गायन की शुरुआत चार वर्ष की आयु से कीऔर एक स्थानीय टीवी मेज़बान ने उनकी इस प्रतिभा को देखा। उन्हें प्रसिद्धी टेलिविज़न गायन प्रतियोगिता मेरी आवाज़ सुनो से मिली जिसमे के बाद उन्होंने पार्श्वगायन क्षेत्र में शस्त्र फ़िल्म से पदार्पण किया।

उन्हें लोकप्रियता राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म मस्त से मिली जिसमे उन्होंने "रुकी रुकी सी ज़िंदगी" गीत गाया जो एक हीट गीत साबित हुआ। उन्हें कुल चौदह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों का नामांकन और तीन में जित हासिल हुई। उन्होंने दो स्टार स्क्रीन पुरस्कार, दो आइफा पुरस्कार और एक ज़ी सिने पुरस्कार जीते हैं।

सुनिधि ने 18 वर्ष की उम्र में बॉबी खान से शादी की। उनके इस निर्णय से उनका परिवार नाराज़ हुआ था। हालांकि, एक साल बाद उन्होंने तलाक ले लिया। सुनिधि ने अप्रैल 2012 में, उनके लंबे समय से मित्र रहे संगीतकार हितेश सोनिक से विवाह कर लिया।
चर्चित गीत
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"रुकी रुकी"
"भूमरो"
"मेहबूब मेरे"
"धूम मचाले"
"कैसी पहेली"
"दीदार दे"
"बीड़ी जलइले"
"सोनिए"
"आजा नचले"
"डांस पे चांस"
"चोर बाजारी"
"शीला की जवानी"
"कमली"
"फट्टे तक नचना"
"बनी तेरी राधा"
"हट जा ताऊ"
"मसखरी"

जोनी लिवर

जॉनी लीवर
पूरा नाम जॉन प्रकाश राव
प्रसिद्ध नाम जॉनी लीवर
🎂जन्म 14 अगस्त, 1957
जन्म भूमि प्रकाशम, आंध्र प्रदेश
अभिभावक प्रकाश राव जनमूला
पति/पत्नी सुजाता
संतान बेटी-जैमी लीवर, बेटा-जेस लीवर
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनय
मुख्य फ़िल्में 'बाज़ीगर', 'बादशाह', 'करन अर्जुन', 'राजा हिन्दुस्तानी', 'तेज़ाब' , 'काला बाज़ार', 'किशन कन्हैया', 'चमत्कार' आदि।
पुरस्कार-उपाधि स्टार स्क्रीन अवार्ड (1997), फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवार्ड (1998, 1999), जी सिने अवार्ड (2002)
प्रसिद्धि हास्य अभिनेता
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी एक स्टेज शो में सुनील दत्त की नज़र जॉनी लीवर पर पड़ी और उन्होंने जॉनी लीवर को फ़िल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में पहला ब्रेक दिया।
जॉनी लीवर (अंग्रेज़ी: Johnny Lever, पूरा नाम- जॉन प्रकाश राव; जन्म- 14 अगस्त, 1957, प्रकाशम, आंध्र प्रदेश) भारतीय हास्य अभिनेता हैं। उन्हें फ़िल्म अभिनेताओं की मिमिक्री करने में महारत हासिल है। वह हिंदी सिनेमा में अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। जॉनी लीवर भारत के पहले स्टैंड कॉमेडियन हैं। उन्हें अब तक 13 बार फ़िल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जॉनी लीवर बॉलीवुड में अब तक साढ़े तीन सौ से अधिक फ़िल्मों में काम कर चुके हैं। उनकी पहली सफल फ़िल्म बाज़ीगर थी। इसके बाद उन्होंने बहुत सी फ़िल्मों सहायक हास्य कलाकार के रूप में अभिनय किया।
परिचय
जॉन लीवर का जन्म आंध्र प्रदेश के प्रकाशम ज़िले में सन 14 अगस्त 1956 को हुआ था। उनके पिता प्रकाश राव जनमूला हिंदुस्तान लीवर फ़ैक्ट्री में काम करते थे। जॉनी लीवर का बचपन मुंबई के धारावी इलाके में बीता। वह अपने घर में तीन बहनों और दो भाईयों में सबसे बड़े हैं। जॉनी लीवर का जन्म एक बेहद ही ग़रीब परिवार में हुआ था। घर में बड़े होने के कारण घर की स्थिति को समझते हुए वह भी अपने पिता के साथ हिन्दुस्तान लीवर फ़ैक्ट्री में काम करने लगे। इसी दौरान उन्हें अपनी कॉमेडी प्रतिभा को निखारने का मौका मिला। वह ख़ाली समय में अपने को-वर्कर्स को अपनी कॉमेडी से हँसाते थे। जिस कारण से उनका नाम जॉनी लीवर पड़ गया। जिसके बाद उन्होंने अपना यह नाम जारी रखा।

शिक्षा
जॉनी लीवर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आंध्र एजुकेशन सोसाइटी हाईस्कूल से की। उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने कारण जॉनी सिर्फ़ सातवीं तक शिक्षा ग्रहण कर सके। उसके बाद घर के जीवन-यापन के लिए उन्होंने काम करना शुरू कर दिया।

वैवाहिक स्थिति
जॉनी लीवर की विवाह सुजाता से हुई है। उनके एक बेटा और एक बेटी है। बेटी जैमी जोकि एक स्टैंड-अप कॉमेडियन है। बेटे का नाम जेस है।

फ़िल्मी कॅरियर
जॉनी लीवर को फ़िल्म अभिनेताओं की मिमिक्री करने में महारत हासिल थी। उनकी इसी खासियत ने उन्हें स्टेज शो करने का मौका दिया। ऐसे ही एक स्टेज शो में सुनील दत्त की नज़र उन पर पड़ी। उन्होंने जॉनी लीवर को फ़िल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में पहला ब्रेक दिया और आज यह सिलसिला 350 से अधिक फ़िल्मों तक पहुंच गया है। ‘दर्द का रिश्ता’ के बाद वह ‘जलवा’ में नसीरुद्दीन शाह के साथ देखे गए, लेकिन उनकी पहली बड़ी सफलता ‘बाजीगर’ के साथ शुरू हुई। उसके बाद वह लगभग एक सहायक अभिनेता के रूप में हर फ़िल्म में हास्य अभिनेता की भूमिका में देखे गए। उनकी पहली फीचर फ़िल्म कभी तमिल ‘अनब्रिक्कु अल्लाविल्लाई’ है।

जॉनी लिवर सिर्फ़ बड़े पर्दे पर ही नहीं बल्कि छोटे पर्दे पर भी अपने कॉमेडी के जलवे दिखा चुके हैं। वह सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हैं। इसके अलावा वह मिमिक्री आर्टिस्ट एसोसिएशन मुंबई के भी अध्यक्ष हैं।

प्रसिद्ध फ़िल्में
बाज़ीगर, बादशाह, तेज़ाब , काला बाज़ार, किशन कन्हैया, चमत्कार, इंसानियत का देवता, रूप की रानी चोरों का राजा, मस्ती, कानून, अंजाम, मै खिलाड़ी तू अनाड़ी, डर, इंडियन, सपूत, बारूद, कुछ कुछ होता है, सिर्फ तुम, बादशाह, हैलो ब्रदर, क्रोध, करन अर्जुन, 36 चाइना टाउन, अजनबी, यस बॉस, नायक: द रियल हीरो, फिर हेरा फेरी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, फर्ज, आशिक, चुपके-चुपके, राजा हिन्दुस्तानी, कोई ... मिल गया, दिलवाले।

मिमिक्री कलाकार
जॉनी लीवर के अनुसार वह एक मिम्मक्री आर्टिस्ट थे, इसलिए उन्हें सभी डायरेक्टर अपनी फ़िल्मों में लेते थे और अपनी फ़िल्मों में कभी ओम प्रकाश की मिमिक्री करवाते तो कभी किशोर कुमार की। उन्हें कैरेक्टर करने का मौका नहीं मिलता था लेकिन फ़िल्म 'बाज़ीग़र' में कैरेक्टर करने का मौका मिला। तब लोगों ने कहा की यह लड़का तो अभिनय जानता है।" उन्होंने आगे कहा, "12 साल तक उन्हें मिमिक्री कलाकार ही समझा जाता था। लोगों को 12 साल लग गए उन्हें अभिनेता समझने में।"

पुरस्कार एवं सम्मान
1997 : सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के लिए स्टार स्क्रीन अवार्ड (फ़िल्म 'राजा हिंदुस्तानी')।
1998 : फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवार्ड (फ़िल्म 'दीवाना मस्ताना')।
1999 : फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवार्ड (फ़िल्म 'दूल्हे राजा')।
2002 : सर्वश्रेष्ठ जी सिने अवार्ड (फ़िल्म 'लव के लिए कुछ भी करेगा')।

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