#07jan
#29april
साहबजादे इरफ़ान अली ख़ान
🎂जन्म- 07 जनवरी, 1967, टोंक, राजस्थान;
⚰️मृत्यु- 29 अप्रॅल, 2020, मुम्बई, महाराष्ट्र) भारतीय हिन्दी सिनेमा और टेलीविजन के प्रसिद्ध अभिनेता थे
हिन्दी के साथ ही उन्होंने कई अंग्रेज़ी फ़िल्मों में भी अभिनय किया। उनके चाहने वालों की संख्या लाखों में है। इरफ़ान ख़ान के बारे में कहा जाता है कि "वह अपनी आँखों से ही सारा अभिनय कर देते थे।" उन्होंने 'द वॉरियर', 'मकबूल', 'हासिल', 'द नेमसेक', 'रोग' जैसी फ़िल्मों से अपने अभिनय का लोहा मनवाया। 'हासिल' फ़िल्म के लिये उन्हें वर्ष 2004 का फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वे हिन्दी सिनेमा की तीस से ज्यादा फ़िल्मों में अभिनय कर चुके थे। इरफ़ान ख़ान का नाम हॉलीवुड में भी अपनी पहचान रखता है। उन्होंने 'ए माइटी हार्ट', 'स्लमडॉग मिलियनेयर', 'लाइफ ऑफ़ पाई' और 'द अमेजिंग स्पाइडर मैन' आदि फ़िल्मों में अभिनय किया।
वर्ष 2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया। 60वे राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार-2012 में इरफ़ान ख़ान को फ़िल्म 'पान सिंह तोमर' में अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया। 2017 में प्रदर्शित 'हिंदी मीडियम' फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। 2020 में प्रदर्शित 'अंग्रेज़ी मीडियम' उनकी प्रदर्शित अंतिम फ़िल्म रही।
जन्म तथा शिक्षा
इरफ़ान ख़ान का जन्म टोंक, राजस्थान में 7 जनवरी, 1967 को हुआ। यहीं के एक स्कूल से उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की। बाद में स्नातक की डिग्री हासिल की। जब इरफ़ान ख़ान अपनी पोस्ट ग्रेजुएश एम.ए. में कर रहे थे, तब उस समय उन्होंने 'नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा' में दाखिला ले लिया। कहा जाता है कि उन्होंने इस ड्रामा स्कूल में पढ़ाई करने के लिए छात्रवृत्ति हेतु आवेदन किया था और उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया, जिसके बाद इरफ़ान ख़ान ने दिल्ली स्थित अभिनय के इस कॉलेज में प्रवेश ले लिया।
परिवार
इरफ़ान ख़ान का नाता राजस्थान राज्य के एक पठान परिवार से था। उनकी मां का नाम सईदा बेगम है। मां सईदा बेगम का सम्बंध राजस्थान के टोंक हाकिम परिवार से है। वहीं इरफ़ान के पिता का नाम यासीन अली ख़ान था, जो एक कारोबारी थे और जिनका टायर का व्यापार हुआ करता था। इरफ़ान ख़ान दो भाई और एक बहन है। साल 1995 में इरफ़ान ख़ान ने सुतापा सिकदर से प्रेम विवाह किया। उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम- बाबिल और आयन है। कहा जाता है कि इरफ़ान ख़ान की मुलाकात अपनी पत्नी से ड्रामा स्कूल में हुई थी। सुतापा सिकदर भी इरफ़ान की तरह ड्रामा स्कूल की छात्रा थीं और यहां से शुरू हुई इनकी ये दोस्ती प्यार में बदल गई थी।
शुद्ध शाकाहारी
बहुमुखी प्रतिभा के धनी इरफ़ान ख़ान लीक से हटकर चलने वाले लोगों में से एक थे। शायद यही कारण रहा कि वे पठान परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद शुद्ध शाकाहारी थे। इरफ़ान ख़ान ने पठान मुस्लिम परिवार में जन्म होने के बाद भी कभी मीट या मांस नहीं खाया। वह बचपन से ही शाकाहारी थे। यही कारण था कि उनके पिता इरफ़ान को मजाक में कहा करते थे कि- "ये तो पठान परिवार में एक ब्राह्मण पैदा हो गया है।"
इरफ़ान ख़ान के पिता उन्हें शिकार पर भी ले जाया करते थे। जंगल का वातावरण उन्हें काफी रोमांचित भी करता था, लेकिन उन्हें कभी पसंद नहीं आता था, जब मासूम जानवरों का शिकार होता था। इरफ़ान उन जानवरों के साथ खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते थे कि आखिर अब इन जानवरों के परिवारों का क्या होगा। वह खुद भी राइफल चलाना जानते थे, लेकिन कभी शिकार नहीं करते थे। गौरतलब है कि नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में इरफ़ान ख़ान के प्रवेश के कुछ समय बाद ही उनके पिता का निधन हो गया था और घर की तरफ से मिलने वाले पैसे उन्हें मिलना बंद हो गया थे। ड्रामा स्कूल से मिलने वाली फेलोशिप के जरिए उन्होंने अपना कोर्स खत्म किया था। उस मुश्किल दौर में इरफ़ान ख़ान की सहपाठी सुतापा सिकदर ने उनका पूरा साथ दिया। बाद में 23 फ़रवरी, 1995 में दोनों ने विवाह कर लिया था।
कॅरियर
इरफ़ान ख़ान अपनी एक्टिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई चले गए और यहां आकर उन्होंने फ़िल्मों में काम खोजना शुरू कर दिया। उनके कॅरियर के शुरुआती दिन काफी संघर्ष भरे थे। उन्हें फ़िल्मों की जगह टी.वी. सीरियल में छोटे मोटे रोल मिलने लगे और इस तरह से इरफ़ान ख़ान के कॅरियर की शुरुआत बतौर एक जूनियर कलाकार से हुई। वह कई हिंदी धारावाहिकों का हिस्सा रह चुके थे और उनके द्वारा किए गए कुछ धारावाहिकों के नाम इस प्रकार हैं
चाणक्य
भारत एक खोज
सारा जहाँ हमारा
बनेगी अपनी बात
चन्द्रकान्ता
श्रीकान्त
स्टार बेस्टसेलर्स
मानो या ना मानो
फ़िल्मी सफर
साल 1988 में आई फ़िल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में इरफ़ान को एक छोटा सा रोल मिला था, लेकिन इरफ़ान के इस रोल को फ़िल्म से हटा दिया गया। इस फ़िल्म के बाद इरफ़ान ने कई फ़िल्मों में छोटे-मोटे रोल किये, लेकिन साल 2001 में आई ‘द वारियर’ फ़िल्म ने उनकी जिंदगी बदल दी और इस फ़िल्म से उनको पहचान मिली। ये एक ब्रिटिश फ़िल्म थी, जिसका निर्देशन आसिफ कपाड़िया ने किया था। ये फ़िल्म अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में भी प्रदर्शित की गई थी। इस फ़िल्म के बाद 2004 में आई ‘हासिल’ फ़िल्म में इरफ़ान ख़ान को एक नेगेटिव किरदार में देखा गया और इस किरदार को भी उन्होंने बखूबी निभाया था।
‘रोग’ फ़िल्म में मुख्य भूमिका
साल 2005 में इरफ़ान ख़ान को बतौर लीड रोल अपनी पहली फ़िल्म मिली और इस फ़िल्म का नाम ‘रोग’ था। इस फ़िल्म में इरफ़ान ख़ान ने एक पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभाई थी। हालांकि ये फ़िल्म कामयाब फ़िल्म साबित नहीं हुई, लेकिन इरफ़ान ख़ान के अभिनय ने सभी को हैरान कर दिया और हर किसी ने उनके अभिनय की काफी तारीफ की। यह भी कहा गया कि इरफ़ान की आँखेंं भी एक दमदार अभिनय करती हैं। इस फ़िल्म के बाद इरफ़ान ख़ान को कई और फ़िल्मों में कार्य करने का मौका मिला।
2007 में आई मल्टीस्टार फ़िल्म ‘लाइफ इन ए मेट्रो’ का हिस्सा इरफ़ान भी थे और इस फ़िल्म में इरफ़ान द्वारा किए गए अभिनय को फिर से लोगों द्वारा पसंद किया गया। इस फ़िल्म में उनकी जोड़ी कोंकणा सेन के साथ नजर आई थी। इस फ़िल्म के बाद इरफ़ान को 'एसिड फैक्ट्री', 'न्यूयॉर्क', 'पान सिंह तोमर', 'हैदर', 'पीकू', 'तलवार', 'जज्बा', 'हिंदी मीडियम' सहित कई फ़िल्मों में देखा गया और इन फ़िल्मों के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले।
हॉलीवुड सिनेमा में योगदान
इरफ़ान ख़ान का नाम उन भारतीय अभिनेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने भारतीय सिनेमा के साथ-साथ विदेशी सिनेमा यानी हॉलीवुड में भी कार्य किया। इरफ़ान ने बॉलीवुड सहित कई हॉलीवुड फ़िल्मों में भी दमदार प्रदर्शन किया। उनके द्वारा की गई कुछ हॉलीवुड फ़िल्मों के नाम इस प्रकार हैं-
सच अ लॉन्ग जर्नी (1988)
द नेमसेक (2006)
ए माइटी हार्ट (2007)
दार्जीलिंग लिमिटेड (2007)
स्लमडॉग मिलियनेयर (2008)
लाइफ ऑफ पाई (2012)
द अमेजिंग स्पाइडर मैन (2012)
जुरासिक वर्ल्ड (2015)
इन्फर्नो (2016)
इरफ़ान ख़ान ऐसे इंसान थे, जो भीड़ में तो थे ही अकेलापन भी उन्हें बहुत रास आता था। जब सब साथ में चिल्ल कर रहे होते तो वह अकेले कहीं जाकर बैठ जाते। इरफ़ान ख़ान का बचपन भी फ़िल्मी रहा। उनकी ज्यादतर तस्वीरें बचपन की ऐसी ही हैं, जिनमें फ़िल्म के किसी सीन की नकल करते दिखते हैं। कैंसर के इलाज के दौरान भी इरफ़ान हमेशा मुस्कुरात रहते थे। इतना ही नहीं वह बहादुर इंसान भी थे। इरफ़ान वह सब करते थे, जिसमें उनका दिल लगता था। प्रकृति प्रेमी भी थे। इरफ़ान की जिंदगी एक खूबसूरत यात्रा रही है। जब जहां दिल किया, चल दिए जिंदगी की तलाश में। अपने जीवन के अंतिम दिनों में वह थोड़े दार्शनिक अंदाज़के भी हो गए थे। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि यह अंदाज़शुरू से उनके साथ रहा। वह खुद के भीतर खुद को भी तलाशते थे। इरफ़ान अपने इंस्टा पर बचपन की जो भी यादें शेयर करते, उनमें ज्यादातर तस्वीरें इसी तरह किसी फ़िल्म को देखकर दोस्तों के साथ उसे आजमाते हुए दिखते। जिंदादिल इंसान थे इरफ़ान।
मृत्यु
अभिनेता इरफ़ान ख़ान का निधन 29 अप्रॅल, 2020 को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में हुआ। वह काफ़ी लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। साल 2018 में ही उन्होंने दुनिया को अपने कैंसर के बारे में जानकारी दी थी। इरफ़ान ख़ान पेट की समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें कॉलन संक्रमण (Colon infection) हुआ था।