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मंगलवार, 2 जनवरी 2024

गुविंद मुनिस

#02jan
#05may 
गोविंद मूनिस
पटकथा संवाद लेखक निर्देशक

🎂जन्मः02 जनवरी, 1929
जन्मस्थानःउन्नाव, उत्तर प्रदेश, भारत
⚰️05 मई 2010


गोविंद मूनिस एक अनुभवी फिल्म लेखक और निर्देशक थे, जो हिंदी और भोजपुरी फिल्म उद्योग में अपने काम के लिए लोकप्रिय थे। वह चलती का नाम गाड़ी (1958), दोस्ती (1964) और रात और दिन (1967) जैसी फिल्मों के लिए संवाद लेखक के रूप में अपने काम के लिए प्रसिद्ध हुए । इसके बाद उन्होंने नदिया के पार (1982), बाबुल (1986) और बंधन बाहों का (1988) से खुद को एक सफल निर्देशक के रूप में स्थापित किया। लेखक-निर्देशक को दोस्ती के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था । दिग्गज निर्देशक लगभग छह दशकों तक फिल्म उद्योग से जुड़े रहे। लंबी बीमारी से पीड़ित होने के बाद 5 मई 2010 को उनका निधन हो गया।

प्रारंभिक जीवन

गोविंद का जन्म उत्तर प्रदेश के पासाखेड़ा गांव में पंडित के घर हुआ था। श्रीराम द्विवेदी. उन्होंने अपनी शिक्षा कानपुर में पूरी की।

फ़िल्मी करियर

एक लेखक के रूप में गोविंद को पहली बार सफलता का स्वाद 1947 में प्रिंट प्रकाशन दैनिक वीरभार में उनकी लघु कहानी प्रकाशित होने के बाद मिला। उन्होंने कई लघु कथाएँ लिखकर और बंगाली प्रकाशनों से अनुवाद करके इसे आगे बढ़ाया, जो प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और प्रकाशनों में प्रकाशित हुईं। 1952 में उनकी मुलाकात बंगाली निर्देशक ऋत्विक घटक से हुई और उन्होंने उनकी पहली फिल्म बेडेनी में उनकी सहायता की, लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म पूरी नहीं हो सकी। 1977 में, गोविंद ने फिर से ऋत्विक घटक के साथ उनकी फिल्म
नागरिक के लिए गीतकार के रूप में काम किया । फिल्म की कहानी रामू के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कोलकाता में नौकरी की तलाश में है।
1953 में, गोविंद ने अपना आधार मुंबई
स्थानांतरित कर लिया जहां उन्होंने दिवंगत फिल्म निर्देशक सत्येन बोस की सहायता की ।गीतकार ने सत्येन के साथ उनके द्वारा निर्देशित लगभग सभी फिल्मों में सहयोग किया। 1958 में उन्होंने चलती का नाम गाड़ी में संवाद लेखक के रूप में काम किया। वह 1964 की फिल्म दोस्ती के लिए संवाद और पटकथा लेखक थे, और बाद में उन्हें संवाद लेखक के रूप में
सहायता करने के लिए आसरा (1966) के लिए सत्येन के साथ मिला। इसके बाद गोविंद ने नरगिस और प्रदीप कुमार अभिनीत फिल्म रात और दिन के लिए संवाद लिखे । फिल्म में अपने अभिनय के लिए नरगिस को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
इसी तरह 1969 में, गोविंद ने आंसू बन गए फूल (1969) के लिए गीतकार और जीवन मृत्यु (1971) के लिए संवाद लेखक के रूप में निर्देशक सत्येन की सहायता की।


निर्देशक के रूप में

गोविंद ने फिल्मों के लिए संवाद लिखने के
अलावा फिल्मों का निर्देशन भी किया है।
1954 में, गोविंद ने जागृति के लिए सहायक निर्देशक के रूप में काम किया, जो एक अमीर बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे कुछ मूल्यों को सीखने के लिए उसके दादा द्वारा बोर्डिंग स्कूल में भेजा जाता है। 1982 में, गोविंद ने नदिया के पार का निर्देशन किया, जिसमें सचिन,साधना सिंह, इंदर ठाकुर, मिताली, सविता बजाज, शीला डेविड ने अभिनय किया । लीला मिश्रा और सोनी राठौड़. इस फिल्म को बाद में हम आपके हैं कौन.. नाम से बनाया गया!


राजश्री प्रोडक्शंस द्वारा, जो भारतीय सिनेमा के

इतिहास में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी। 1986 में, उन्होंने 'रिमझिम गीतों की' नामक एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्देशन किया, जिसमें माधुरी दीक्षित , धर्मेंद्र और मिथुन चक्रवर्ती ने अभिनय किया था । उन्होंने बाबुल (1986) पर भी काम किया, जिसकी कहानी दो प्रेमियों नंदिनी और अशोक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी करने में असमर्थ हैं क्योंकि अशोक के पिता ने उनकी शादी कहीं और तय कर दी है। दो साल बाद, गोविंद ने बंधन बाहों का (1988) का निर्देशन किया, जिसमें ब्रह्मचारी, रीता कात्याल और राज किरण ने अभिनय किया ।

टेलीविजन करियर

गोविंद मूनिस टेलीविजन इंडस्ट्री से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली डॉन नामक टेलीविजन श्रृंखला के लिए पटकथा लिखकर अपने टेलीविजन करियर की शुरुआत की। उन्होंने ज़ी टीवी के शो दो अकेले और स्टार टीवी की रामलीला के लिए पटकथा भी लिखी

शनिवार, 12 अगस्त 2023

गुलशन कुमार

गुलशन कुमार दुआ
🎂जन्म 5 मई, 1956; 
⚰️ मृत्यु- 12 अगस्त, 1997
जन्म भूमि दिल्ली
मृत्यु 12 अगस्त, 1997
मृत्यु स्थान मुंबई, महाराष्ट्र
संतान पुत्र- भूषण कुमार, पुत्री- तुलसी कुमार, खुशाली कुमार
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा व भक्ति संगीत
विद्यालय देशबंधु कॉलेज, दिल्ली विश्‍वविद्यालय
प्रसिद्धि निर्माता-निर्देशक, टी-सीरीज़ के संस्थापक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी निजी जिंदगी के अलावा गुलशन कुमार दान-पुण्य के लिए भी काफी चर्चा में रहते थे। उन्होंने वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो आज भी वहां आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों को नि: शुल्क भोजन उपलब्ध करवाता है।
गुलशन कुमार दुआ (अंग्रेज़ी: Gulshan Kumar Dua, जन्म- 5 मई, 1956; मृत्यु- 12 अगस्त, 1997) प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक और व्यवसायी थे। वह 'टी-सीरीज़' के संस्थापक थे। गुलशन कुमार का नाम फिल्मी दुनिया की उन हस्तियों में शुमार हैं जिन्होंने काफी कम समय में ही शोहरत की उन बुलंदियों को हासिल कर लिया था, जहां पहुंचना हर किसी का सपना होता है। संघर्षपूर्ण जीवन बिताने के बाद अपने संगीत और उसके प्रति लगन से उन्होंने एक खास मुकाम हासिल किया। गुलशन कुमार के बेटे भूषण कुमार बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म निर्माता हैं और अब टी-सीरीज़ उनके द्वारा ही संचालित है। यह कहा जा सकता है कि गुलशन कुमार ने पूरे भारत में भक्ति की लहर ला दी। उन्होंने टी-सीरीज़ कैसेट्स के माध्यम से अधिकांश देवी-देवताओं के भजन व गीत जनता के बीच ला दिये। इनमें से अधिकांश गीत बेहद ही सफल रहे हैं।

परिचय
गुलशन कुमार का जन्म 5 मई, 1956 को दिल्ली के एक पंजाबी अरोड़ा परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम गुलशन दुआ था। उनके पिता दिल्ली के दरियागंज बाजार में फलों के जूस की दुकान चलाते थे। जहां गुलशन कुमार भी अपने पिता का काम में हाथ बटाते थे। वहां से शुरू हुई उनकी यात्रा एक अलग मुकाम तक पहुंची। गुलशन कुमार के संघर्ष की कहानी जीरो से हीरो बनने तक की है। उन्होंने धीरे-धीरे इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा और मशहूर होते चले गए।

टी-सीरीज़ की स्थापना
गुलशन कुमार ने सोनू निगम सहित कई गायकों को ब्रेक देकर उनके कॅरियर में अहम योगदान दिया था। गुलशन कुमार ने 'सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड' नाम की एक कंपनी बनायी जो भारत में सबसे बड़ी संगीत कंपनी बन गई। उन्होंने इसी संगीत कंपनी के तहत 'टी-सीरीज' की स्थापना की। 'टी-सीरीज' आज हिंदी सिनेमा की संगीत और फिल्म निर्माण की बड़ी कंपनियों में से एक है।

नये गायकों को मौका
गुलशन कुमार बेहतरीन फिल्म निर्माता के साथ ही एक शानदार गायक भी थे। उन्होंने ढेर सारे भक्ति गाने गाए जिन्हें लोग आज भी खूब पसंद करते हैं। गुलशन कुमार की आवाज में भक्ति संगीत 'मैं बालक तू माता शेरा वालिये' को लोगों ने हमेशा पसंद किया है। इतना ही नहीं गुलशन कुमार ने कई गायकों के कॅरियर को भी बनाया। उन्होंने सोनू निगम, अनुराधा पौडवाल और कुमार सानू जैसे सदाबहार गायक लॉन्च किए। गुलशन कुमार ने टी सीरीज के जरिए संगीत को लोगों के घर-घर पहुंचाने का काम किया

वैष्णो देवी भंडारा
निजी जिंदगी के अलावा गुलशन कुमार दान-पुण्य के लिए भी काफी चर्चा में रहते थे। उन्होंने वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो आज भी वहां आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों को नि: शुल्क भोजन उपलब्ध करवाता है।

हत्या
दरियादिली से भरपूर गुलशन कुमार की मौत काफी दर्दनाक थी। मुंबई के अंडरवर्ल्ड के लोगों ने उनसे फिरौती थी, लेकिन गुलशन कुमार ने उनकी मांग के आगे झुकने से मना कर दिया। जिसकी वजह से 12 अगस्त, 1997 को मुंबई में एक मंदिर के बाहर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गयी।

गुलशन कुमार वैष्णो देवी के भक्त थे। वैष्णो देवी में उनकी गहरी आस्था थी। उन्होंने वैष्णों देवी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काफी सारे काम करवाए। इसके अलावा वो हर रोज पश्चिमी मुंबई के अंधेरी इलाके में जीतनगर के जीतेश्वर महादेव मंदिर जाया करते थे। 12 अगस्त, 1997 को सुबह करीब आठ बजे गुलशन कुमार पूजा करने मंदिर पहुंचे थे। करीब साढ़े दस बजे का वक्त रहा होगा। गुलशन कुमार मंदिर में पूजा करके बाहर निकल रहे थे। तभी उन्हें अपनी पीठ पर बंदूक की नाल महसूस हुई। उन्होंने सामने एक शख्स को हाथ में बंदूक लिए देखा। इसके पहले की गुलशन कुमार कुछ कह पाते उसके पहले ही उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

बंदूक से उन पर 16 राउंड फायरिंग की गई। उनकी गर्दन और पीठ में 16 गोलियां लगी थीं। बचने के लिए वो आसपास के घरों के दरवाजे पीटते रहे। लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। उस वक्त गुलशन कुमार के साथ सिर्फ उनका ड्राइवर था। ड्राइवर ने अपने मालिक को बचाने के लिए हत्यारों पर कलश फेंकना शुरू कर दिया। लेकिन हत्यारे नहीं रुके वो गोलियां बरसाते रहे। उन्होंने ड्राइवर के पैर पर भी गोली चलाई, जिससे वो वहीं जख्मी हो गया। गुलशन कुमार को सुरक्षा उपलब्ध करवाई गई थी लेकिन उन्हें मुंबई पुलिस के बजाए यू.पी. पुलिस ने सुरक्षा मुहैया करवाई थी। जिस दिन गुलशन कुमार की हत्या हुई, उस रोज उनका बॉडीगार्ड बीमार था। इसलिए वो उनके साथ नहीं था। मारिया ने अपनी किताब में लिखा है कि क्राइम ब्रांच ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करवाई थी, लेकिन जब यूपी पुलिस ने उन्हें कमांडो सिक्योरिटी उपलब्ध करवाई तो मुंबई क्राइम ब्रांच ने अपनी सुरक्षा वापस ले ली। गुलशन कुमार की हत्या में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और अबू सलेम का नाम लिया जाता है। कहा जाता है कि दाऊद इब्राहिम ने गुलशन कुमार से 10 करोड़ की फिरौती मांगी थी। गुलशन ने ये रकम देने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि पैसे उसे (दाऊद) देने के बजाए वो उन पैसों से वैष्णो देवी में भंडारा करवाना पसंद करेंगे। इसी के बाद उनकी हत्या कर दी गई।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...