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बुधवार, 21 फ़रवरी 2024

नूतन

#21feb
#04jun
नूतन
पूरा नाम नूतन समर्थ बहल
प्रसिद्ध नाम नूतन

🎂जन्म 04 जून, 1936
जन्म भूमि बम्बई (अब मुम्बई)
⚰️मृत्यु 21 फ़रवरी, 1991
मृत्यु स्थान भारत

अभिभावक श्री कुमारसेन समर्थ और श्रीमती शोभना समर्थ
कर्म भूमि भारत
मुख्य फ़िल्में सुजाता, बंदिनी, मैं तुलसी तेरे आंगन की, सीमा, सरस्वती चंद्र, मिलन आदि।
पुरस्कार-उपाधि पद्म श्री, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्मफेयर पुरस्कार (पाँच बार)
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी फ़िल्म 'कर्मा' में नूतन ने अभिनय सम्राट दिलीप कुमार के साथ काम किया। इस फ़िल्म में नूतन पर फ़िल्माया यह गाना दिल दिया है जाँ भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए.. श्रोताओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हुआ।
नूतन  सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। भारतीय सिनेमा जगत में नूतन को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने फ़िल्मों में अभिनेत्रियों के महज शोपीस के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की परंपरागत विचार धारा को बदलकर उन्हें अलग पहचान दिलाई। सुजाता, बंदिनी, मैं तुलसी तेरे आंगन की, सीमा, सरस्वती चंद्र, और मिलन जैसी कई फ़िल्मों में अपने उत्कृष्ट अभिनय से नूतन ने यह साबित किया कि नायिकाओं में भी अभिनय क्षमता है और अपने अभिनय की बदौलत वे दर्शकों को सिनेमा हॉल तक लाने में सक्षम हैं।

इनकी माता का नाम श्रीमती शोभना समर्थ और पिता का नाम श्री कुमारसेन समर्थ था। घर में फ़िल्मी माहौल रहने के कारण नूतन अक्सर अपनी माँ के साथ शूटिंग देखने जाया करती थी। इस वजह से उनका भी रुझान फ़िल्मों की ओर हो गया और वह भी अभिनेत्री बनने के ख्वाब देखने लगी।

सिने कैरियर की शुरूआत
नूतन ने बतौर बाल कलाकार फ़िल्म 'नल दमयंती' से अपने सिने कैरियर की शुरूआत की। इस बीच नूतन ने अखिल भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जिसमें वह प्रथम चुनी गई लेकिन बॉलीवुड के किसी निर्माता का ध्यान उनकी ओर नहीं गया। बाद में अपनी माँ और उनके मित्र मोतीलाल की सिफारिश की वजह से नूतन को वर्ष 1950 में प्रदर्शित फ़िल्म 'हमारी बेटी' में अभिनय करने का मौका मिला। इस फ़िल्म का निर्देशन उनकी माँ शोभना समर्थ ने किया। इसके बाद नूतन ने 'हमलोग', 'शीशम', 'नगीना' और 'शवाब' जैसी कुछ फ़िल्मों में अभिनय किया लेकिन इन फ़िल्मों से वह कुछ ख़ास पहचान नहीं बना सकी।

'सीमा' से मिली पहचान
वर्ष 1955 में प्रदर्शित फ़िल्म 'सीमा' से नूतन ने विद्रोहिणी नायिका के सशक्त किरदार को रूपहले पर्दे पर साकार किया। इस फ़िल्म में नूतन ने सुधार गृह में बंद कैदी की भूमिका निभायी जो चोरी के झूठे इल्जाम में जेल में अपने दिन काट रही थी। फ़िल्म 'सीमा' में बलराज साहनी सुधार गृह के अधिकारी की भूमिका में थे। बलराज साहनी जैसे दिग्गज कलाकार की उपस्थित में भी नूतन ने अपने सशक्त अभिनय से उन्हें कड़ी टक्कर दी। इसके साथ ही फ़िल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये नूतन को अपने सिने कैरियर का सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म अभिनेत्री का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

बहुआयामी प्रतिभा
नूतन ने देवानंद के साथ 'पेइंग गेस्ट' और 'तेरे घर के सामने' में नूतन ने हल्के-फुल्के रोल कर अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया। वर्ष 1958 में प्रदर्शित फ़िल्म सोने की चिडि़या के हिट होने के बाद फ़िल्म इंडस्ट्री में नूतन के नाम के डंके बजने लगे और बाद में एक के बाद एक कठिन भूमिकाओं को निभाकर वह फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गई। वर्ष 1958 में प्रदर्शित फ़िल्म 'दिल्ली का ठग' में नूतन ने स्विमिंग कॉस्टयूम पहनकर उस समय के समाज को चौंका दिया। फ़िल्म बारिश में नूतन काफ़ी बोल्ड दृश्य दिए जिसके लिए उनकी काफ़ी आलोचना भी हुई लेकिन बाद में विमल राय की फ़िल्म 'सुजाता' एवं 'बंदिनी' में नूतन ने अत्यंत मर्मस्पर्शी अभिनय कर अपनी बोल्ड अभिनेत्री की छवि को बदल दिया। सुजाता, बंदिनी और दिल ने फिर याद किया जैसी फ़िल्मों की कामयाबी के बाद नूतन ट्रेजडी क्वीन कही जाने लगी। अब उनपर यह आरोप लगने लगा कि वह केवल दर्द भरे अभिनय कर सकती हैं लेकिन छलिया और सूरत जैसी फ़िल्मों में अपने कॉमिक अभिनय कर नूतन ने अपने आलोचकों का मुंह एक बार फिर से बंद कर दिया। वर्ष 1965 से 1969 तक नूतन ने दक्षिण भारत के निर्माताओं की फ़िल्मों के लिए काम किया। इसमें ज्यादातर सामाजिक और पारिवारिक फ़िल्में थी। इनमें गौरी, मेहरबान, खानदान, मिलन और भाई बहन जैसी सुपरहिट फ़िल्में शामिल है।

फ़िल्म 'सुजाता' और 'बंदिनी'
विमल राय की फ़िल्म 'सुजाता' एवं 'बंदिनी' नूतन की यादगार फ़िल्में रही। वर्ष 1959 में प्रदर्शित फ़िल्म सुजाता नूतन के सिने कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। फ़िल्म में नूतन ने अछूत कन्या के किरदार को रूपहले पर्दे पर साकार किया1 इसके साथ ही फ़िल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये वह अपने सिने कैरियर में दूसरी बार फ़िल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गई। वर्ष 1963 में प्रदर्शित फ़िल्म 'बंदिनी 'भारतीय सिनेमा जगत् में अपनी संपूर्णता के लिए सदा याद की जाएगी। फ़िल्म में नूतन के अभिनय को देखकर ऐसा लगा कि केवल उनका चेहरा ही नहीं बल्कि हाथ पैर की उंगलियां भी अभिनय कर सकती है। इस फ़िल्म में अपने जीवंत अभिनय के लिये नूतन को एक बार फिर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्म फेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इस फ़िल्म से जुड़ा एक रोचक पहलू यह भी है फ़िल्म के निर्माण के पहले फ़िल्म अभिनेता अशोक कुमार की निर्माता विमल राय से अनबन हो गई थी और वह किसी भी कीमत पर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे लेकिन वह नूतन ही थी जो हर कीमत में अशोक कुमार को अपना नायक बनाना चाहती थी। नूतन के जोर देने पर अशोक कुमार ने फ़िल्म 'बंदिनी' में काम करना स्वीकार किया था।

नूतन और उनके नायक
नूतन ने अपने सिने कैरियर में उस दौर के सभी दिग्गज और नवोदित अभिनेताओं के साथ अभिनय किया। राजकपूर के साथ फ़िल्म 'अनाड़ी' में भोला-भाला प्यार हो या फिर अशोक कुमार के साथ फ़िल्म 'बंदिनी' में संजीदा अभिनय या फिर पेइंग गेस्ट में देवानंद के साथ छैल छबीला रोमांस हो नूतन हर अभिनेता के साथ उसी के रंग में रंग जाती थी। वर्ष 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म 'सरस्वती चंद्र' की अपार सफलता के बाद नूतन फ़िल्म इंडस्ट्री की नंबर वन नायिका के रूप मे स्थापित हो गई। वर्ष 1973 में फ़िल्म 'सौदागार' में अमिताभ बच्चन जैसे नवोदित अभिनेता के साथ काम करके नूतन ने एक बार फिर से अपना अविस्मरणीय अभिनय किया। अस्सी के दशक में नूतन ने चरित्र भूमिकाएँ निभानी शुरू कर दी और कई फ़िल्मों में माँ के किरदार को रुपहले पर्दे पर साकार किया। इन फ़िल्मों में 'मेरी जंग', 'नाम' और 'कर्मा' जैसी ख़ास तौर पर उल्लेखनीय है। फ़िल्म 'मेरी जंग' के लिए अपने सशक्त अभिनय के लिए नूतन सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित की गई। फ़िल्म 'कर्मा' में नूतन ने अभिनय सम्राट दिलीप कुमार के साथ काम किया। इस फ़िल्म में नूतन पर फ़िल्माया यह गाना दिल दिया है जाँ भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए.. श्रोताओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हुआ।

सम्मान और पुरस्कार
नूतन की प्रतिभा केवल अभिनय तक ही नहीं सीमित थी वह गीत और ग़ज़ल लिखने में भी काफ़ी दिलचस्पी लिया करती थीं। हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में बतौर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री सर्वाधिक फ़िल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त करने का कीर्तिमान नूतन के नाम दर्ज है। नूतन को अपने सिने कैरियर में पांच बार (सुजाता, बंदिनी, मैं तुलसी तेरे आंगन की, सीमा, मिलन) फ़िल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नूतन को वर्ष 1974 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
नूतन पहली मिस इंडिया थी जिन्होंने फिल्मों में काम किया. ब्लैक एंड वाइट के दौर में नूतन ने ब्लैक बिकिनी पहनकर तहलका मचाया था.
निधन
लगभग चार दशक तक अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों के बीच ख़ास पहचान बनाने वाली यह महान् अभिनेत्री 21 फ़रवरी, 1991 को इस दुनिया से अलविदा कह गई।

विजय परकाश

21feb 
विजय प्रकाश 

🎂जन्म 21 फरवरी 1976

विजय प्रकाश की शादी 2001 में महथी प्रकाश से हुई और उनकी एक बेटी है जिसका नाम काव्या प्रकाश है।
 
विजय प्रकाश एक भारतीय पार्श्व गायक और कर्नाटक के संगीत निर्देशक भी हैं । उन्होंने हिंदी , मलयालम और मराठी भाषा की फिल्मों के अलावा मुख्य रूप से कन्नड़ , तमिल और तेलुगु भाषा की फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी है।उन्होंने जाकिर हुसैन के साथ भी शो किए हैं । प्रकाश ने फिल्म ब्यूटीफुल मानसुगलु के गीत "नम्मूरल्ली चालिगलाडल्ली" के लिए वर्ष 2016 के लिए कर्नाटक सरकार का 'सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक' का पुरस्कार जीता।

वह " जय हो " गीत के लिए श्रेय प्राप्त चार कलाकारों में से एक हैं , जिसने 2008 में सर्वश्रेष्ठ मूल गीत के लिए अकादमी पुरस्कार जीता था ।विशेष रूप से, उन्होंने उस हिस्से को "जय हो" शब्दों के साथ गाया, जो गीत के कई मोड़ों पर एक विस्तारित उच्च स्वर लेता है।इस गीत ने "मोशन पिक्चर, टेलीविज़न या अन्य विज़ुअल मीडिया के लिए लिखा गया सर्वश्रेष्ठ गीत" श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार भी जीता।उन्होंने कन्नड़ फिल्म उलिदावरु कंदांते के गीत गतिया इलिदु और किरिक पार्टी के बेलागेडु गाने के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ कन्नड़ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता है ।वह ज़ी कन्नड़ और ज़ी तमिल पर कन्नड़ और तमिल रियलिटी शो सा रे गा मा पा के जजों में से एक हैं। 
उनका जन्म भारत के मैसूर में कर्नाटक कलाकार लोपामुद्रा और स्वर्गीय एल. रामसेषा के घर हुआ था और वह खुद कर्नाटक संगीत में प्रशिक्षित हैं। टीउन्हें बेल्लारी एम.राघवेंद्र द्वारा कर्नाटक शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण दिया गया था।
लगभग बीस वर्षों से संगीत साधना में कार्यरत विजय प्रकाश पेशे से संगीत प्रशिक्षक हैं। संगीत के क्षेत्र में दर्जनों संस्थाओं से सम्मानित विजय एक कुशल गायक के साथ संगीत निर्देशक भी हैं । संकल्प संस्था से जुड़कर इन्होंने कई नाटकों में संगीत दिया है। इनके इस सफलता पर साहित्यकारों और कलाकारों में हर्ष है।

दीपल शाह

#21feb 
दीपल शॉह 
🎂जन्म 21 फ़रवरी 1986
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत

भारतीय
व्यवसाय अभिनेत्री, गायिका, मॉडल,

शॉ ने सेंट जेवियर्स कॉलेज में दाखिला लिया , जहां उन्होंने मनोविज्ञान में बीए किया।
🌹फ़िल्मी करियर

दिसंबर 2005 में, उन्होंने मनीष गुप्ता द्वारा निर्देशित अपने दूसरे उद्यम, कर्मा, कन्फेशन्स और होली पर फिल्मांकन पूरा किया। अंतरराष्ट्रीय, अंग्रेजी भाषा की फिल्म में सुष्मिता सेन , रणदीप हुडा और नाओमी कैंपबेल ने अभिनय किया है और यह 2009 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को आलोचकों से जबरदस्त नकारात्मक समीक्षा मिली।

दीपल शॉ को 2005 में फिल्म 'कलयुग' में उनके किरदार 'एनी', 2009 में फिल्म 'रनवे' में 'मेल्विना', 2008 में फिल्म 'ए वेडनसडे' में 'नैना रॉय', फिल्म 'सुमन' के किरदार के लिए जाना जाता है। 2011 में 'साहेब बीवी और गैंगस्टर'। हाल ही में 2021 में, उन्होंने फिल्म ' मर्डर एट तीसरी मंजिल 302 ' में अभिनय किया।
💽D🤤
2002 बेबी डॉल सीडी सारेगामा एचएमवी
2003 बेबी डॉल अध्याय 2 सीडी सारेगामा एचएमवी
2003 बेबी डॉल अध्याय 2 वीसीडी सारेगामा एचएमवी
2003 बेबी डॉल पूरी तरह भरी हुई सीडी सारेगामा एचएमवी
2004 बेबी डॉल पूरी तरह भरी हुई वीसीडी सारेगामा एचएमवी
2004 बेबी डॉल को प्यार हो गया सीडी सारेगामा एचएमवी
2004 बेबी डॉल को प्यार हो गया वीसीडी सारेगामा एचएमवी
2004 बेबी डॉल हॉट वाले सीडी सारेगामा एचएमवी
2004 बेबी डॉल हॉट वाले वीसीडी सारेगामा एचएमवी
2004 बेबी डॉल - 27 हॉट वीडियो वीसीडी सारेगामा एचएमवी
2005 बेबी मेगा मिक्स सीडी सारेगामा एचएमवी

अमित राज

#21feb 
अमित राज
🎂21 फरवरी 1979 

शैलियां
भारतीय फ़िल्म संगीत
व्यवसाय
संगीत निर्देशक, संगीतकार, संगीत संयोजक, प्रोग्रामर, कंडक्टर, गीत लेखक, पार्श्व गायक, निर्माता
अमितराज सावंत एक मराठी संगीत निर्देशक हैं। वह मुंबई के एक संगीत निर्देशक-संगीतकार और गायक हैं। दुनियादारी के बाद मराठी फिल्म इंडस्ट्री में उनके करियर का ग्राफ ऊंचा उठा । 2014 में उन्होंने फिल्म 72 माइल्स - एक प्रवास के लिए संगीत अनुभाग में सभी 3 श्रेणियों के लिए IMFFA (अंतर्राष्ट्रीय मराठी फिल्म महोत्सव पुरस्कार) जीता।
🎤💽
📽️
2012 विजय एसो 
2013 दुनियादारी 
2013 72 मील 
2013 आसा मी आशी टी 
2013 वंशवेल 
2014 प्यार वाली लव स्टोरी 
2015 सहपाठियों 
2015 मितवा 
2015 वेलकम जिंदगी 
2015 तू हाय रे 
2015 दागड़ी चाल 
2016 दोस्त 
2016 गुरु 
2016 बंद नायलॉन चे 
2016 पॉशटर गर्ल 
2016 वृन्दावन 
2016 लाल इश्क 
2016 1234 
2017 बगतोस काय मुजरा कर 
2017 फुगे 
2017 देवा 
2018 फरजंद 
2018 दल 
2019 हिरकानी 
2021 झिम्मा 
2022 दागाडी चॉल 2 
2023 झिम्मा 2

दीप्ती श्रीकांत

#21feb 
दीप्ति श्रीकांत 
🎂21फरवरी1986

पुणे के सदाशिवपेठ की रहने वाली हैं और एक मराठी अभिनेत्री हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल से की और फिर नूतन मराठी विद्यालय से उच्च माध्यमिक की पढ़ाई की। स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने एमएमसीसी कॉलेज पुणे से वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने सॉफ्टवेयर ग्राफिक डिजाइनिंग का कोर्स भी किया है। उन्हें बचपन से ही अभिनय में रुचि थी और अपने स्कूल के दिनों में वह बच्चों के एकांकी नाटकों में अभिनय करती थीं। वह महाराष्ट्र सांस्कृतिक केंद्र का हिस्सा थीं और उन्होंने पुरूषोत्तम और सुमन शील्ड प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान कई इंटर स्कूल और इंटर कॉलेज प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया।

उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी फिल्म 'पाक पाक पकाक' में एक छोटी सी भूमिका से की थी। फिर उन्हें ईटीवी मराठी धारावाहिक 'पंखंची सावली' में एक महत्वपूर्ण भूमिका दी गई, जिसे काफी सराहा गया और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अवगाछी संसार, चार दिवस ससुचे जैसे कई मराठी टीवी धारावाहिकों में काम किया , सता जन्मच्या गति और अंतरपात। इस समय तक, उनके पास पर्याप्त नाम और प्रसिद्धि थी और हिंदी टीवी धारावाहिकों की ओर रुख करना बस समय की बात थी। उन्होंने ज़ी टीवी पर परिवार, कलर्स पर भाग्यविधाता, सब टीवी पर डोंट वरी चाचू और स्टार प्लस पर बड़े अच्छे लगते हैं जैसे हिंदी टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया। इन सभी धारावाहिकों में उनके अभिनय को दर्शकों ने बहुत पसंद किया और अब वह हिंदी टीवी धारावाहिकों में एक बेहद प्रतिभाशाली कलाकार मानी जाती हैं। उन्होंने हिंदी फिल्म "समर-एक संघर्ष" में भी अभिनय किया है।

उनका विवाह अमोघ वामन देसाई से हुआ, जो एक वास्तुकार और इंटीरियर डिजाइनर हैं और मुंबई में रहते हैं।
दीप्ति श्रीकांत अब कोई अलोकप्रिय नाम नहीं रहीं। वह एक अभिनेत्री हैं और मुख्य रूप से केवल मराठी टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में देखी जाती हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण पुणे में हुआ और उनकी जन्म तिथि 21 फरवरी 1986 है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल और जूनियर कॉलेज से नूतन मराठी विद्यालय से की और बाद में एमएमसीसी कॉलेज से बी कॉम में दाखिला लिया और उसके बाद एक कोर्स किया। सॉफ्टवेयर ग्राफिक डिजाइनिंग. हालाँकि वह एक गुजराती हैं लेकिन उन्हें मराठी धारावाहिकों और फिल्मों में काम करने का आनंद मिलता है। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और इसके बाद कई थिएटर नाटक भी किए।

दीप्ति श्रीकांत फिल्मोग्राफी:

📽️फ़िल्में:
1. पक पाक पक
2. समर एक संघर्ष

📺टीवी सीरियल:
1. पंखंची सावली
2. अवघाची संसार
3. चार दिवस सासुचे
4. सता जन्मच्या गति
5. अंतरपात
6. परिवार - हिंदी
7. भाग्यविधाता - हिंदी
8. चिंता मत करो चाची - हिंदी
9. माला सासु हवि
10. बड़े अच्छे लगते हैं - हिंदी
11. झुंज मराठमोली

रविवार, 4 जून 2023

सुलभा देशपांडे

अभिनेत्री सुलभा देशपांडे के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

🎂 जन्म-21 फरवरी 1937; 
⚰️मृत्यु- 4 जून, 2016

भारतीय अभिनेत्री थीं। विजय तेंदुलकर जैसे प्रख्यात नाट्य लेखकों द्वारा लिखे नाटकों में अभियन करने वाली सुलभा देशपांडे ने कई मराठी और हिन्दी फिल्मों तथा टीवी सीरियलों में काम किया था। उन्होंने मराठी और हिंदी रंगमंच के अलावा मराठी और हिंदी की कई फिल्मों में काम किया। इनमें 'तमन्ना', 'विरासत', 'याराना', 'खून भरी मांग' और 'इंग्लिश विंग्लिश' जैसी कई सफल फिल्मों के नाम शामिल हैं।
सुलभा देशपांडे का जन्म 21 फरवरी सन 1937 में मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ था।
हिन्दी सिनेमा में उन्होंने 'भूमिका' (1977), अरविन्द देसाई की 'अजीब दास्तान' (1978)', 'गमन' (1978) में यादगार भूमिकाएं निभाई।
हाल के दिनों में वे गौरी शिन्दे निर्देशित फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' में नजर आई थीं।
विजय तेंदुलकर, विजया मेहता और सत्यदेव दुबे के साथ प्रतिष्ठित मराठी थिएटर ग्रुप 'रंगायन' से भी सुलभा देशपांडे जुड़ी रहीं।
उन्होंने अपने पति अरविन्द देशपांडे के साथ 1971 में थिएटर ग्रुप 'आविष्कार' का गठन किया था। उनके पति का 1987 में देहांत हो चुका था।
थिएटर ग्रुप 'आविष्कार' ख़ास तौर से छोटे बच्चों के लिए संगीतमय नाटक बनाने और उन्हें सिखाने का काम करतीं थीं।
उन्हें वर्ष 1987 में हिंदी-मराठी थियेटर में अभिनय के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

नूतन

नूतन बहल (नूतन समर्थ के रूप में

🎂जन्म; 4 जून 1936 -

⚰️ 21 फरवरी 1991

जिन्हें नूतन के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री थीं।

जीवनसाथी
रजनीश बहल (1959-1991) (नूतन की मृत्यु तक)
पुरस्कार
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री
1956 सीमा
1960 सुजाता
1964 बंदिनी
1968 मिलन
1979 मैं तुलसी तेरे आँगन की
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री
1986 मेरी जंग(1959-1991
लगभग चार दशकों के करियर में, वह 70 से अधिक हिंदी फिल्मों में दिखाई दीं, जिनमें कई भूमिकाएँ थीं।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक मानी जाने वाली नूतन को अपरंपरागत भूमिकाओं को निभाने के लिए जाना जाता था और उनके प्रदर्शन को अक्सर प्रशंसा और प्रशंसा मिली।
नूतन के पास फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार की पांच जीत का रिकॉर्ड है, जो कि 30 से अधिक वर्षों तक केवल उनके पास था, जब तक कि 2011 में उनकी भतीजी काजोल ने इसका मिलान नहीं किया।

सन् 74में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
1974 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। फिल्म निर्माता कुमारसेन समर्थ और फिल्म अभिनेत्री शोभना समर्थ की बेटी, नूतन ने अपने करियर की शुरुआत 14 साल की उम्र में 1950 में अपनी मां द्वारा निर्देशित फिल्म हमारी बेटी से की थी।
बाद में उन्होंने नगीना और हमलोग (दोनों 1951) जैसी फिल्मों में अभिनय किया। सीमा (1955) में उनकी भूमिका ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
उन्होंने 1960 के दशक से 1970 के दशक के अंत तक प्रमुख भूमिकाएँ निभाना जारी रखा और सुजाता (1959), बंदिनी (1963), मिलन (1967) और मैं तुलसी तेरे आंगन की (1978) में अपनी भूमिकाओं के लिए चार अन्य अवसरों पर पुरस्कार जीता। .
इस अवधि की उनकी कुछ अन्य फिल्मों में अनाड़ी (1959), छलिया (1960), तेरे घर के सामने (1963), सरस्वतीचंद्र (1968), अनुराग (1972) और सौदागर (1973) शामिल हैं।
1980 के दशक में, नूतन ने चरित्र भूमिकाएँ निभानी शुरू कीं और अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले तक काम करना जारी रखा।
उन्होंने साजन की सहेली (1981), मेरी जंग (1985) और नाम (1986) जैसी फिल्मों में ज्यादातर मातृ भूमिकाएं निभाईं।
मेरी जंग में उनके प्रदर्शन ने उन्हें इस बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री श्रेणी में छठा और आखिरी फिल्मफेयर पुरस्कार अर्जित किया। नूतन की शादी नौसेना के लेफ्टिनेंट-कमांडर रजनीश बहल से 1959 से 1991 में स्तन कैंसर से उनकी मृत्यु तक हुई थी।
उनका बेटा मोहनीश बहल था, जो एक फिल्म और टेलीविजन अभिनेता है।

नोट:____  अमिताभ बच्चन दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट थे। एक दिन नूतन अपने पति रजनीश बहल के साथ सड़क क्रॉस कर रही थी। अमिताभ जी स्कूटर पर थे। उन्होंने नूतन को देखा और गिरते-गिरते बचे। उन्होंने इस बात का खुलासा खुद एक इंटरव्यू में किया है। उन्होंने कहा ‘नूतन अपने काम के प्रति बहुत संजीदा थीं। ‘सौदागर’ के सेट पर वे सुबह 6 बजे के शॉट के लिए सबसे पहले मेकअप लगाकर रेडी रहती थीं। उनके बातचीत करने का तरीका बेहद शानदार था। वह सिंगिंग भी करती थीं, एक बार जब मैं और नूतन दिल्ली में एक फंक्शन के दौरान मिले तब वे वहां परफॉर्म कर रही थीं। स्टेज पर जाने से पहले उन्होंने मुझसे कहा कि मैं भी उनके साथ स्टेज पर ऑडियंस के सामने चलूं, जो मेरे लिए गर्व की बात थी।’

फिल्म की हीरोइन थी फिर भी थिएटर में नहीं हुई एंट्री
‘नगीना’ फिल्म में नूतन सिर्फ 15 साल की थी, उसमें डरावने सीन थे। जो बच्चों को देखने मना था। वो फिल्म की प्रीमियर पर पहुंची। मगर उन्हें अंदर घुसने नहीं दिया गया। वॉचमैन ने थिएटर के गेट पर ही नूतन को रोक दिया।

राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर दोनों ही नूतन पर थे मरते
राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर दोनों नूतन के दीवाने थे। राजेंद्र कुमार ने तो उनकी मां से उनका हाथ भी माँगा था। मगर उन्होंने साफ इंकार कर दिया था। वहीं शम्मी कपूर भी उनपर फ़िदा थे। 



भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...