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बुधवार, 7 फ़रवरी 2024

जसबीर (गुरदासपुरिया)

#07feb 
जसबीर सिंह बांस

🎂जन्म07 फरवरी 1970
गुरदासपुर,पंजाब, भारत
व्यवसाय
गायक, अभिनेता, संगीतकार
बैंस का जन्म दलिया मिर्जनपुर गाँव, गुरदासपुर, पंजाब, भारत में सिख माता-पिता क्रमश: अजीत सिंह और माँ प्रकाश कौर के यहाँ हुआ था। उनकी दो बड़ी बहनों के साथ उनका पालन-पोषण हुआ। वह एक पहली पीढ़ी के संगीतकार है जिन्होंने "साधा बुगडू बुलो" जैसे संगीत नाटकों में भाग लिया, और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में प्रदर्शन दिया।
उन्होंने 1980 के दशक के अंत में पासपोर्ट और ज़ख्मी सहित पंजाबी फिल्मों के लिए रिकॉर्डिंग शुरू की। उन्होंने बल्ले बाल बिरो बल्ले जैसे रीमिक्स एल्बम के लिए भी गाया। उनकी पहली एल्बम रिलीज़ 1993 की लो-प्रोफाइल चन्ना वे तेरी चन्नानी थी। वह चरणजीत आहूजा के साथ "चन्ना वे तेरी चन्नी" के संगीत वीडियो में दिखाई दिए थें। जस्सी - बैक विद ए बैंग उनका नवीनतम एल्बम है, जिसमें "मेहंदी" और शीर्षक गीत "बैंग" शामिल हैं। यह दुनिया भर में 16 जुलाई 2010 को जारी किया गया था। जस्सी ने इसके बाद हिट एल्बमों की एक कड़ी के साथ दिल ले गई (1998), कुड़ी कुड़ी (1999), निशानी प्यार दी (2001), जस्ट जस्सी (2002), मुखड़ा चन्न वर्गा (2004) और अख मस्तानी (2007) में काम किया।

उनके दूसरे एल्बम का शीर्षक गीत दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी एक व्यावसायिक सफलता थी। उनके तीसरे एल्बम से कुड़ी कुड़ी और निशानी प्यार दी से छन्नो दा ने भी बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।

उन्होंने कई देशों में प्रदर्शन किया और एनडीटीवी इमेजिन के धूम मचा दे में दिखाई दिए हैं। उन्होंने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंजाबी गायक नोबी सिंह के साथ अगस्त 2021 में देश को समर्पित एक देशभक्ति सिंगल ट्रैक आज़ादी - द इंडिपेंडेंस रिलीज़ किया।
उनकी 2011 में मुख्य भूमिका में पहली फिल्म खुशियां रिलीज हुई थी। उन्हें एनके शर्मा और कुछ अन्य लोगों ने प्रशिक्षित किया था। वह हीर रांझा सहित कुछ पंजाबी फिल्मों में भी दिखाई दे चुके है।

सोमवार, 5 फ़रवरी 2024

सुजीत कुमार

#07feb
#05feb 
सुजीत कुमार 

🎂जन्म- 07 फ़रवरी, 1934, बनारस; 
⚰️मृत्यु- 05 फ़रवरी, 2010, मुम्बई) 

भोजपुरी और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। हिन्दी की अधिकांश फ़िल्मों में उन्होंने खलनायक का चरित्र निभाया था। अभिनेता सुजीत कुमार भोजपुरी फ़िल्मों के पहले सुपरस्टार माने जाते हैं। जब 60-70 के दशक में भोजपुरी फ़िल्मों की नैया डूबने वाली थी, उस वक्त भोजपुरी फ़िल्मों में सुजीत ने संजीवनी फूंकने का काम किया और बस तब से उनका जादू ऐसा चला कि वे भॉलीवुड के पहले सुपरस्टार बन गये थे।

परिचय
सुजीत कुमार एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुजीत कुमार ने शायद कभी सोचा भी नहीं था कि वे भोजपुरी सिनेमा के बेजोड़ अभिनेता बन जायेंगे। अपने समय के प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना के साथ उन्होंने काफ़ी फ़िल्मों में सहायक अभिनेता की भूमिका निभाई थी। सुजीत कुमार के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है।

फ़िल्मी शुरुआत

यदि सुजीत कुमार के फिल्मी कॅरियर के शुरुआती दौर की बात की जाए तो सुजीत को फ़िल्मों में जाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। बात उस वक्त की है, जब सुजीत लॉ की पढ़ाई कर रहे थे और उन्होंने एक नाटक में हिस्सा लिया था। सौभाग्य की बात ये रही कि उस नाटक प्रतियोगिता में जज थे फणि मजुमदार साहब, जो कि जाने माने निर्माता रहे हैं। फणि जी ने उन्हें नाटक का श्रेष्ठ अभिनेता करार दिया और कहा कि- 
"तुम फ़िल्मों में कोशिश क्यों नहीं करते?" 
इस एक वाक्य ने सुजीत कुमार का रुझान फ़िल्मों की तरफ कर दिया। पहली फिल्म ‘दूर गगन की छांव में’ किशोर कुमार ने सुजीत को अवसर दिया। लेकिन सफलता पाने के लिए सुनीत कुमार को ‘अराधना’ का इंतजार करना पड़ा। सुजीत कुमार राजेश खन्ना के ऑन-स्क्रीन साथी थे। 'हाथी मेरा साथी', 'अमर प्रेम', 'महबूबा', 'रोटी' जैसी फ़िल्मों में दोनों के साथ को खूब सराहा गया। राजेश खन्ना के अलावा सुजीत कुमार अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र जैसे चोटी के अभिनेताओं के साथ भी अनेक बार नज़र आए। अमिताभ की 'द ग्रेट गैम्बलर', 'अदालत' एवं धर्मेन्द्र की 'जुगनु', 'धर्मवीर', 'चरस', 'ड्रीम गर्ल' और 'आँखेंं' जैसी फ़िल्मों में उन्हें काफ़ी पसंद किया गया।

भोजपुरी के प्रथम सुपरस्टार
हिन्दी फ़िल्मों में भले ही सुजीत कुमार जम चुके थे, लेकिन उनकी आत्मा तो भोजपुरी में बसती थी। अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति अपने उत्तरदायित्व को पूरा करने के लिए उन्होंने भोजपुरी फ़िल्मों का भी रुख किया। भोजपुरी की पहली फिल्म "गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो" में अभिनेत्री कुमकुम की जिद की वजह से उनकी जगह असीम कुमार को हीरो बनाया गया था; लेकिन सुजीत कुमार ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया और भोजपुरी की फ़िल्मी धारा को मजबूती देने में लगे रहे। 1977 में भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म "दंगल" के वे हीरो थे। फ़िल्म ‘दंगल’ ने भोजपुरी सिनेमा की डूबती हुई कश्ती का बेड़ा पार लगाया। फ़िल्म की बॉक्स ऑफ़िस पर सफ़लता ने भोजपुरी को नया जीवन दिया। सुजीत कुमार के अभिनय का जलवा भोजपुरी फ़िल्मों में कुछ इस कदर बिखरा कि उन्हें भोजपुरी फ़िल्मों का पहला सुपरस्टार ही कहा जाने लगा। उनकी फिल्में भारत में ही नहीं अपितु मॉरीशस , गुयाना, फ़िजी, सूरीनाम आदि देशों में भी काफ़ी लोकप्रिय रहीं। 'दंगल' के बाद उन्होंने 'लोहा सिंह', 'पान खाए सैयां हमार', 'गंगा कहे पुकार के' और 'सजनवा बैरी भइले हमार' जैसी दर्जनों कामयाब फ़िल्मों में काम किया। 1983 में उन्होंने 'पान खाए सैयां हमार' का निर्माण और निर्देशन किया, जिसमें अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी मेहमान कलाकार की भूमिका में थी। इस तरह भोजपुरी फ़िल्मों में स्टार संस्कृति लाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। 90 के दशक तक आते-आते भोजपुरी सिनेमा भेड़चाल का शिकार हो चुका था। हताश होकर सुजीत कुमार ने इस तरह की फ़िल्मों से किनारा कर लिया।

फ़िल्मी सफर

सुजीत कुमार ने 'लागी नहीं छूटे राम', 'विदेशिया', 'दंगल', 'गंगा कहे पुकार के', 'गंगा जइसन भौजी हमार', 'सजनवा बैरी भइले हमार', 'हमार भौजी', 'माई के लाल', 'संपूर्ण तीर्थयात्रा' जैसी कई चर्चित एवं लोकप्रिय भोजपुरी फ़िल्मों में काम किया। हिन्दी फ़िल्मों में सुजीत कुमार का जिक्र आते ही लोगों के मन में 'आराधना' का बेहद लोकप्रिय गीत "मेरे सपनों की रानी" के दृश्य याद आ जाते हैं। उस गाने में राजेश खन्ना ट्रेन में बैठी शर्मिला टैगोर को लुभाने के लिए कार में बैठे गाना गाते हैं और उस कार को सुजीत कुमार चला रहे होते हैं। बतौर चरित्र अभिनेता सुजीत कुमार हिन्दी फ़िल्मों में भी काफ़ी सफल रहे और राजेश खन्ना की कई फ़िल्मों में उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया। राजेश खन्ना की फिल्म 'आराधना' में उनके अभिनय को आज भी लोग याद करते हैं। इस फिल्म में उन्होंने नायक के मित्र की भूमिका निभाई थी। विदेशिया से शुरू सफर के बाद उन्होंने 'कोहरा', 'आँखें', 'आराधना', 'इत्तफाक', 'मन की आँखें', 'आन मिलो सजना', 'हाथी मेरे साथी', 'अमर प्रेम', 'शरारत' जैसी फ़िल्मों में काम किया। इसके बाद के दौर में उन्होंने 'रोटी', 'धरम वीर', 'देश-परदेश', 'दि ग्रेट गैंबलर', 'राम बलराम', 'इंसाफ का तराजू', 'आखिर क्यों' आदि फ़िल्मों में काम किया।

यारों के यार

सुजीत कुमार को फ़िल्मी जगत में 'यारों का यार' कहा जाता था। जितेन्द्र, राकेश रोशन, रणधीर कपूर, राजेश खन्ना और सावन कुमार टॉक जैसी हस्तियों से उनके बड़े करीबी सम्बन्ध थे। लेकिन इन संबंधों को उन्होंने कभी अपने लिए सीधी नहीं बनाया। बतौर अभिनेता सुजीत कुमार को उपलब्धि जो भी रही हो, लेकिन भोजपुरी फ़िल्मों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने में उनके योगदान की जितनी सराहना की जाए कम है।

फ़िल्म निर्माण

भोजपुरी सिनेमा के पहले सुपरस्टार सुजीत कुमार ने कई फ़िल्मों के निर्माता के तौर पर भी काम किया, जिसमें 'खेल' (अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित), 'चैंपियन' (सनी देओल, मनीषा कोईराला) और 'ऐतबार' (अमिताभ बच्चन, जॉन अब्राहम, बिपाशा बसु) फ़िल्मों के नाम शामिल हैं।

निधन

सुजीत कुमार की मृत्यु 05 फ़रवरी, 2010 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुई। मृत्यु के समय उनकी आयु 75 वर्ष थी। वे काफ़ी लम्बे समय से कैंसर से जूझ रहे थे।
📽️
1985 आखिर क्यों? 
1984 यादगार 
1984 कैदी
1979 खानदान 
1978 देस परदेस
1977 कलाबाज़ 
1976 महबुबा 
1971 अमर प्रेम 
1970 गीत
1970 आन मिलो सजना 
1969 ग़ुस्ताखी माफ़
1969 आराधना 
1968 आंखे

मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

परवीन कुमार सोबती (भीम)

प्रवीण कुमार सोबती
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      #07feb 
🎂जन्म 06 दिसंबर, 1947
जन्म भूमि पंजाब
⚰️मृत्यु07 फ़रवरी, 2022
मृत्यु स्थान नई दिल्ली

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र एथलेटिक्स, अभिनय
मुख्य फ़िल्में 'करिश्मा कुदरत का', 'युद्ध', 'जबरदस्त', 'सिंहासन', 'खुदगर्ज', 'लोहा', 'मोहब्बत के दुश्मन', 'इलाका' आदि।
पुरस्कार-उपाधि अर्जुन पुरस्कार, 1967
प्रसिद्धि टीवी धारावाहिक 'महाभारत' के भीम
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता प्रवीण कुमार की आखिरी फिल्म साल 2013 में रिलीज हुई थी। फिल्म का नाम 'महाभारत और बर्बर' था।
भारतीय फ़िल्म तथा छोटे परदे के अभिनेता थे। उन्हें बी. आर. चोपड़ा के मशहूर टीवी सीरियल ‘महाभारत’ में भीम का किरदार निभाने के कारण ख्याति मिली। प्रवीण कुमार ने अपने कॅरियर में एक्टिंग के अलावा खेल में भी हिस्सा लिया था। वह एक एथलीट भी थे। उन्होंने दो बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने देश के लिए कई गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल किए। खेल के प्रति उनके योगदान के लिए साल 1967 में उन्हें 'अर्जुन पुरस्कार' से नवाजा गया था।

परिचय
प्रवीण कुमार अपनी विशाल कदकाठी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों में विलेन की भूमिका भी निभाई। साढ़े 6 फीट लंबे अभिनेता और खिलाड़ी प्रवीण कुमार पंजाब के रहने वाले थे। एक्टिंग में आने से पहले वह एक हैमर और डिस्कस थ्रो एथलीट थे। वह एशियाई खेलों में चार मेडल (2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य) जीत चुके थे। उन्होंने दो ओलंपिक खेलों (1968 मैक्सिको खेलों और 1972 म्यूनिख खेलों) में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह अर्जुन अवार्डी भी रहे। खेल के कारण ही प्रवीण कुमार को 'सीमा सुरक्षा बल' में डिप्टी कमांडेंट की नौकरी मिली थी।

अभिनय शुरुआत
ट्रैक और फील्ड स्पोर्ट्स में सफल कॅरियर के बाद, प्रवीण कुमार ने 70 के दशक के अंत में मनोरंज की दुनिया में कदम रखा। टाइम्स ऑफ इंडिया के को दिए एक इंटरव्यू में प्रवीण कुमार ने अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म साइन करने को याद करते हुए बताया था कि- वह एक टूर्नामेंट के लिए कश्मीर में थे। उनकी पहली भूमिका रविकांत नागाइच के निर्देशन में बनी थी जिसमें उनका कोई डायलॉग नहीं था।

बाद में प्रवीण कुमार ने साल 1981 में फिल्म 'रक्षा' में अहम भूमिका निभाई। बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन की 'शहंशाह' में 'मुख्तार सिंह' के रूप में उनकी सबसे यादगार उपस्थिति थी। प्रवीण कुमार की फिल्मोग्राफी में 'करिश्मा कुदरत का', 'युद्ध', 'जबरदस्त', 'सिंहासन', 'खुदगर्ज', 'लोहा', 'मोहब्बत के दुश्मन', 'इलाका' और अन्य जैसे कई फिल्मों का हिस्सा रहे। 80 के दशक के आखिरी वक्त में उन्हें बी. आर. चोपड़ा की 'महाभारत' में भीम की भूमिका निभाने के लिए साइन किया गया। दर्शकों के जेहन में यह किरदार काफी अहम रहा।

राजनीति

50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता प्रवीण कुमार की आखिरी फिल्म साल 2013 में रिलीज हुई थी। फिल्म का नाम 'महाभारत और बर्बर' था। प्रवीण कुमार सोबती ने यहां भीम का किरदार निभाया था। इसके बाद अभिनय छोड़ प्रवीण कुमार ने राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी के टिकट पर दिल्ली के वजीरपुर से चुनाव लड़ा था। लेकिन जीत न सके। कुछ समय बाद उन्होंने आप को छोड़कर भाजपा को जॉइन कर लिया।

मृत्यु
प्रवीण कुमार का निधन 7 फ़रवरी, 2022 को हुआ। भीम की भूमिका निभाने वाले अभिनेता प्रवीण कुमार सोबती ने 74 वर्ष की आयु में आखिरी सांस ली। जानकारी के मुताबिक वह लंबे समय से बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे।

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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...