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शनिवार, 6 जनवरी 2024

ए आर रहमान

#06jan
AR रहमान
अल्लाह रक्खा रहमान लोकप्रिय रूप से ए॰ आर॰ रहमान
जन्म नाम
A. S. Dileep Kumar

🎂जन्म 06 जनवरी, 1967

भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से हिन्दी और तमिल फिल्मों में संगीत दिया है। इनका जन्म 6 जनवरी, 1967 को चेन्नई, तमिलनाडु, भारत में हुआ। जन्मतः उनका नाम ‘अरुणाचलम् शेखर दिलीप कुमार मुदलियार’ रखा गया। धर्मपरिवर्तन के पश्चात उन्होंने अल्लाह रक्खा रहमान नाम धारण किया। ए. आर. रहमान उसीका संक्षिप्त रूप है। रहमान ने अपनी मातृभाषा तमिल के अतिरिक्त हिंदी तथा कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी संगीत दिया है। टाइम्स पत्रिका ने उन्हें मोजार्ट ऑफ मद्रास की उपाधि दी। रहमान गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय व्यक्ति हैं।ए. आर. रहमान ऐसे पहले भारतीय हैं जिन्हें ब्रिटिश भारतीय फिल्म स्लम डॉग मिलेनियर में उनके संगीत के लिए दो ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त हुए है।इसी फिल्म के गीत 'जय हो' के लिए सर्वश्रेष्ठ साउंडट्रैक कंपाइलेशन और सर्वश्रेष्ठ फिल्मी गीत की श्रेणी में दो ग्रैमी पुरस्कार भी मिले।
12मार्च 1995 को चेन्नई में रहमान का सायरा बानो से विवाह संपन्न हुआ। उनके दो बेटीयाँ खदिजा, रहीमा और एक बेटा अमीन हैं। रहमान की पत्नी सायरा बानो की सगी बहन के पति, जिनका नाम भी रहमान है, वे एक दक्षिण भारतीय अभिनेता है। रहमान के भाँजे जी. वी. प्रकाश कुमार भी एक प्रतिथयश संगीतकार हैं । वे रहमान की ज्येष्ठ भगिनि ए. आर. रेहाना के सुपुत्र हैं ।
रहमान को संगीत अपने पिता से विरासत में मिली है। उनके पिता राजगोपाल कुलशेखर (आर. के. शेखर) मलयालम फ़िल्मों में संगीतकार थे। रहमान ने संगीत की शिक्षा मास्टर धनराज से प्राप्त की। मात्र 11 वर्ष की उम्र में अपने बचपन के मित्र शिवमणि के साथ रहमान बैंड रुट्स के लिए की-बोर्ड (सिंथेसाइजर) बजाने का कार्य करते थे। वे इलैयराजा के बैंड के लिए भी काम करते थे। चेन्नई के "नेमेसिस एवेन्यू" बैंड की स्थापना का श्रेय रहमान को ही जाता है। वे की-बोर्ड, पियानो, हारमोनियम और गिटार भी बजा लेते है।

दलजीत दोसांझ

#06jan
दिलजीत दोसांझ
🎂06 जनवरी 1984
दोसांझ कलां , पंजाब , भारत
दिलजीत दोसांझ (जन्म 6 जनवरी 1984) एक भारतीय गायक, गीतकार, अभिनेता, फिल्म निर्माता और टेलीविजन व्यक्तित्व हैं। वह पंजाबी संगीत और उसके बाद पंजाबी और हिंदी सिनेमा में काम करते हैं । दोसांझ ने 2020 में बिलबोर्ड द्वारा सोशल 50 चार्ट में प्रवेश किया । उन्हें कनाडाई एल्बम चार्ट , आधिकारिक चार्ट कंपनी द्वारा यूके एशियाई चार्ट और न्यूजीलैंड हॉट सिंगल्स सहित विभिन्न संगीत चार्ट में दिखाया गया है । उनकी फिल्में, जिनमें जट्ट एंड जूलियट 2 , पंजाब 1984 , सज्जन सिंह रंगरूट और होन्सला राख शामिल हैं , इतिहास में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पंजाबी फिल्मों में से हैं ।

व्यवसाय
गायकगीतकारअभिनेताटेलीविजन व्यक्तित्वनिर्माता
सक्रिय वर्ष
2002-वर्तमान
संगीत कैरियर
शैलियां
जल्दी से आनाआर एंड बीहिप हॉपपॉप रैप
लेबल
वार्नर संगीतसोनी म्यूजिक इंडियास्पीड रिकॉर्ड्स ( टाइम्स म्यूजिक )धर्म सेवामूवीबॉक्स रिकॉर्ड्सफाइनटोन कैसेट्सटी-सीरीज़प्रसिद्ध स्टूडियोज़ी म्यूजिक कंपनी
दिलजीत दोसांझ का जन्म 6 जनवरी 1984 को भारत के पंजाब के जालंधर जिले की फिल्लौर तहसील के दोसांझ कलां गांव में एक सिख [8] परिवार में हुआ था । उनके पिता, बलबीर सिंह, पंजाब रोडवेज के पूर्व कर्मचारी हैं और उनकी माँ, सुखविंदर कौर, एक गृहिणी हैं। उनके दो भाई-बहन हैं, एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई।  उन्होंने अपना प्रारंभिक बचपन दोसांझ कलां में बिताया और फिर लुधियाना , पंजाब चले गए जहां से उन्होंने डी ब्लॉक मॉडल के पास श्री गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल (पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड अब सीबीएसई से संबद्ध) से हाई स्कूल में स्नातक करने सहित अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी की। शहर अरवा ओड लुधियाना. स्कूल में रहते हुए, उन्होंने स्थानीय गुरुद्वारों में कीर्तन (सिख धार्मिक संगीत) प्रस्तुत करके अपने गायन करियर की शुरुआत की । दलजीत सिंह और उनका परिवार फिर लुधियाना चले गए और वर्तमान में वहीं रह रहे हैं।
📽️पंजाबी
2010 मेल करादे रब्बा
2010 पंजाब का शेर
2011 जिने मेरा दिल लुटिया
2012 जट और जूलियट
2013 सादी लव स्टोरी
जट्ट और जूलियट 2
डिस्को सिंह
पंजाब
1984 मान (शिव)
2015 सरदारजी
मुख्तियार चड्ढा
2016 जट अम्बरसरिया
सरदारजी 2 सरदारजी जग्गी
सिंह, सरदारजी अथरा सिंह और सरदारजी सत्कार सिंह

तिहरी भूमिका
2017 सुपर सिंह साजन सैम सुपर सिंह
2018 सज्जन सिंह रंगरूट सज्जन सिंह
2019 शादा चढ़ता
2021 होन्सला राख येंकी सिंह निर्माता भी
2022 बेब भांगड़ा पौंडे ने जग्गी निर्माता भी
2023 जोड़ी सितारा
2024 जट्ट और जूलियट 3
📽️हिंदी

2012 तेरे नाल लव हो गया
2016 उड़ता पंजाब
2017 फिल्लौरी
2018 न्यूयॉर्क में स्वागत है
2018 सूरमा
2019 अर्जुन पटियाला
2019 गुड न्यूज
2020 सूरज पे मंगल भारी
2022 जोगी
📺

2010 आवाज़ पंजाब दी वह स्वयं मेज़बान; रियलिटी शो
2012 पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कार 2012 मेज़बान; टेलीविजन विशेष
2013 पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कार 2013
2014 पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कार 2014
2017–2019 उभरता सितारा न्यायाधीश;
रियलिटी शो

रामेश्वरी

#06jan 

अभिनेत्री रामेश्वरी 

🎂 06 जनवरी 1958

रामेश्वरी का जन्म 06 जनवरी 1958 में आंध्र प्रदेश में हुआ था वही जन्मी और पली-बढ़ीं और उन्होंने अपना बचपन काकीनाडा में बिताया वह दो बहनों में छोटी है वह दिग्गज हिंदी अभिनेत्री राजश्री (वी। शांताराम की बेटी) से काफी मिलती जुलती है

वैसे तो सभी दुल्हन सुंदर होती हैं। आकर्षक और मनमोहक होती हैं। लेकिन दुल्हन का दुल्हन होना तब सार्थक होता है, जब वह अपने पिया के मन यानी उसके दिल-दिमाग को भा जाए। ऐसी ही दुल्हन आई थी 1977 में। हिन्दी सिनेमा के परदे पर। पेश किया था राजश्री प्रोडक्शन ने। फिल्म का नाम था - दुल्हन वही जो पिया मन भाए। और दुल्हन बनी थीं आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा की साँवली-सुंदर-सलोनी तल्लुरी रामेश्वरी। बाद में सिर्फ रामेश्वरी के नाम से वे दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गईं। दुल्हन वही जो पिया मन भाये ने देश के सिनेमाघरों में सिल्वर और गोल्डन जुबिली मनाकर रातों-रात रामेश्वरी को स्टार बना दिया था।

उस दौर में साँवले रंग की लड़की को हीरोइन के काबिल नहीं माना जाता था। गोरा रंग पहली शर्त होती थी। सांवली लड़की को हीरोइन की सहेली के रोल मिला करते थे। जया बच्चन ने रंग के बदले नहीं बल्कि अपनी प्रतिभा के बल पर सफलता पाई थी।

रामेश्वरी ने जब करियर आरंभ किया, तब जया बच्चन शादी कर परिवार में व्यस्त हो गई थी। रामेश्वरी के उदय के कारण यह माना गया कि फिल्म इंडस्ट्री को नई जया मिल गई है। रामेश्वरी ने एकदम सादगी अपनाई। ठीक जया भादुड़ी स्टाइल में उनका स्क्रीन प्रजेंस इतना प्रभावी हो गया था कि दर्शक टकटकी लगाकर देखा करता था।

इसके पहले कि रामेश्वरी उनसे की गई अपेक्षाओं पर खरा उतर पातीं, ना जाने उन्हें किसकी नजर लग गई। फिल्म सुनयना की शूटिंग के दौरान उनकी आँख में चोट लग गई। इससे उनकी एक आँख छोटी हो गई जो रामेश्वरी के करियर में बहुत बड़ी रूकावट बन गई। दुल्हन वही जो पिया मन भाये जैसी फिल्में उन्हें दोबारा नहीं मिल पाई। मजबूर होकर उन्हें सेकण्ड लीड वाले रोल करना पड़े।

रामेश्वरी के फिल्म करियर की एक ट्रेजेडी यह रही कि उन्हें अन्य दक्षिण भारतीय हीरोइन की तरह बम्बइया नामी-गिरामी हीरो नहीं मिल पाए। उस दौर में हर हीरो ग्लैमरस हीरोइन चाहता था और रामेश्वरी के पास सादगी थी। जबकि रामेश्वरी के पहले या बाद में दक्षिण भारत से आई वहीदा रहमान, हेमा मालिनी, जया प्रदा, श्रीदेवी को स्टार वैल्यू के हीरो मिलने से उनकी चमक-दमक दो गुनी हो गई थी।

रामेश्वरी को प्रेमकिशन (दुल्हन वही जो पिया मन भाये), राज किरण (मान-अभिमान, साजन मेरे मैं साजन की, वक्त वक्त की बात) और मुकेश खन्ना (मुझे कसम है) जैसे नायक मिले, जो बॉलीवुड फिल्मों में तीसरी पंक्ति के कलाकार माने जाते हैं।

सुनयना फिल्म में नसीरुद्दीन शाह जैसे नायक का साथ तो मिला, लेकिन नसीर आर्ट फिल्म के हीरो माने जाते थे और कमर्शियल फिल्मों के लिए उन्हें उपयुक्त नहीं माना जाता था। फिल्म अग्निपरीक्षा में अमोल पालेकर, शारदा और आशा फिल्म में जीतेन्द्र, कालका में शत्रुघ्न सिन्हा का साथ मिला,लेकिन रामेश्वरी लीड रोल में नहीं थी।

वक्त वक्त की बात में राकेश रोशन भी उनके साथ थे। उनकी भी संघर्षरत अभिनेता से ज्यादा हैसियत नहीं थी। मेरा रक्षक तथा आदत से मजबूर फिल्मों में मिठुन चक्रवर्ती सहनायक थे, लेकिन इनमें रामेश्वरी के अलावा अन्य हीरोइन भी थी। उस दौर के टॉप एक्टर्स अमिताभ, धर्मेन्द्र, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर का साथ रामेश्वरी को कभी नहीं मिल पाया।

यही हाल फिल्म डायरेक्टर्स का रहा। ए-श्रेणी के निर्देशकों का स्पर्श नही मिलने से भी रामेश्वरी हिन्दी सिनेमा में अपना ऊँचा मकाम नहीं बना सकी। हीरेन नाग, जे. ओमप्रकाश और लेख टंडन के साथ एक या दो फिल्में करने से बात नहीं बन पाई।

फिर दक्षिण की ओर
अपने दशक के हिन्दी फिल्म सफर में रामेश्वरी को यह समझ आ गई थी कि वे उत्तर भारतीय सिनेमा में ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाएगी और सुपरहिट सक्सेस तो उन्हें मिलना भी नहीं है। इसलिए उन्होंने तेलुगु फिल्मों में अपना अभिनय जारी रखा।

तेलुगु फिल्मों के प्रतिष्ठित फिल्मकार के.विश्वनाथ की फिल्म सीतामालक्ष्मी रामेश्वरी के करियर की क्लासिक फिल्म मानी जाती है। फिल्मों के ऑफर्स कम हो गए तो रामेश्वरी ने छोटे परदे की ओर भी कदम बढ़ाए। मितवा फूल के, जब लव हुआ, बाबुल का आँगन छूटे ना जैसे धारावाहिकों में उन्होंने काम किया।

रामेश्वरी का जीवन-वृत्त बहुआयामी रहा है। पुणे फिल्म एंड टीवी इंस्टीट्यूट से 1975 में उसने अभिनय में स्नातक उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है। इंस्टीट्यूट के सहपाठी और पंजाबी फिल्मों के अभिनेता, निर्माता दीपक सेठ से शादी की है। दोनों के दो बेटे हैं- भास्कर प्रताप और सूर्य प्रेम।

अपने पति के साथ मिलकर 1988 में रामेश्वरी ने हिंदी फिल्म हम फरिश्ते नहीं का निर्माण कर अभिनय भी किया है। शेक्सपीयर के नाटक द कॉमेडी ऑफ एरर्स पर 2007 में पंजाबी फिल्म भी बनाई। इन दिनों कभी-कभी रामेश्वरी फिल्मों में दिख जाती है, जैसे बंटी और बबली (2005) और फाल्तू (2011) में।

प्रमुख फिल्में :

दुल्हन वहीं जो पिया मन भाये (1977), मेरा रक्षक (1978), सुनयना (1979), आशा (1980), मान अभिमान (1980), शारदा (1981), अग्नि परीक्षा (1981), आदत से मजबूर (1981), कालका (1983), मान मर्यादा (1984)

मंगलवार, 4 जुलाई 2023

पंडित भारत व्यास

🎂जन्म 06जनवरी 1918
⚰️पं. भरत व्यास का निधन 4 जुलाई 1982
दौलत के झूठे नशे में जो चूर (फ़िल्म: ऊँची हवेली)
आ लौट के आजा मीत (फ़िल्म: रानी रूपमती)
निर्बल से लडाई बलवान की (फ़िल्म: तूफ़ान और दिया)
ऐ मलिक तेरे बंदे हम (फ़िल्म: दो आंखें बारह हाथ)
सांझ हो गई प्रभु (फ़िल्म: जय चित्तौड़)
मैने पीना सीख लिया (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
तेरे सुर और मेरे गीत (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
दिल का खिलौना हाय टूट गया (फ़िल्म: गूंज उठी शहनाई)
हाँ दीवाना हूं मैं (फ़िल्म: सारंगा)
सारंगा तेरी याद में (फ़िल्म: सारंगा)
तू छुपी है कहाँ (फ़िल्म: नवरंग)
आधा है चन्द्रमा (फ़िल्म: नवरंग)
तुम मेरे मैं तेरी (फ़िल्म: नवरंग)
आज मधुउत्सव डोले (फ़िल्म: स्त्री)
ओ निर्दय प्रीतम (फ़िल्म: स्त्री)
रैन भये सो जा रे पंची (फ़िल्म: राम राज्य)
ज्योत से ज्योत जगाते चलो (फ़िल्म: संत ज्ञानेश्वर)
तुम गगन के चन्द्रमा हो (फ़िल्म: सती सावित्री)
जीवन डोर तुम्ही संग बाँधी (फ़िल्म: सती सावित्री)
मन की गहराई
4 जुलाई 1982 को मुंबई में उनका निधन हो गया। उनके छोटे भाई अभिनेता बृजमोहन व्यास (1920-2013) थे।

सोमवार, 5 जून 2023

आमिर रज़ा हुसैन

आमिर रज़ा हुसैन
🎂जन्म की तारीख और समय: 6 जनवरी 1957, लखनऊ
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 3 जून 2023
पत्नी: विराट तलवार (विवा. 1993)
बच्चे: ग़ुलाम अली अब्बास, कनीज़ सुकैना
माता-पिता: मुमताज़ हुसैन, कनीज़ महिदा
एक भारतीय थिएटर अभिनेता और निर्देशक थे, जो महाकाव्य रामायण पर आधारित कारगिल युद्ध और द लेजेंड ऑफ़ राम पर आधारित द फिफ्टी डे वॉर जैसे बड़े बाहरी मंच प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते थे।

लखनऊ में मुमताज हुसैन और कनीज़ मेहिदा के अवधी कुलीन परिवार में जन्मे हुसैन इकलौते बच्चे थे। परिवार दिल्ली में एसपी मार्ग चला गया जब वह अभी भी काफी छोटा था और उसने वहां गार्डन स्कूल में पढ़ाई की।

उन्हें 1968 में दस साल की उम्र में एक बोर्डिंग स्कूल मेयो कॉलेज भेजा गया था , और अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वे सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली में इतिहास का अध्ययन करने चले गए । उन्होंने जॉय माइकल, बैरी जॉन और मार्कस मर्च जैसे निर्देशकों के साथ काम करते हुए विभिन्न कॉलेज नाटकों में अभिनय किया ।

↔️वह अंग्रेजी फिल्म किम (1984) में भी दिखाई दिए, जिसमें पीटर ओ'टोल ने अभिनय किया और रुडयार्ड किपलिंग के उपन्यास किम पर आधारित थी । इन वर्षों में उन्होंने सारे जहाँ से अच्छा , 1947 लाइव , और 1999 जैसे बाहरी स्थानों पर कई नाटकों का मंचन किया था। सत्यमेव जयते ने पृष्ठभूमि के रूप में हौज खास स्मारक का उपयोग किया । 1998 में, उन्होंने और उनकी मंडली ने दिल्ली पर्यटन के साथ चांदनी चौक में ऐतिहासिक लाल किले और फतेहपुरी मस्जिद के बीच चौदहवीं का चांद उत्सव का आयोजन किया ।, पुरानी दिल्ली ।

महाकाव्य रामायण पर आधारित द लेजेंड ऑफ राम का पहली बार 1994 में मंचन किया गया था, और बाद में 2004 में चार महीने की अवधि के लिए तीन एकड़ में फैले 19 आउटडोर सेट, 35 पात्रों और 100 सदस्यीय दल के साथ बड़े पैमाने पर किया गया था। नाटक का अंतिम शो 1 मई 2004 को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के समक्ष प्रदर्शित किया गया था। 2007 में, उन्होंने वन इन टू टू में अभिनय और निर्देशन किया , जो पीटर सीज़न द्वारा लिखित एक हास्य नाटक था और जिसका मंचन भारत के पांच शहरों में किया गया था, जिसमें शामिल हैं मुंबई।

2010 में, उन्होंने अपने प्रोडक्शन मूव ओवर को पुनर्जीवित किया, जिसका पहली बार 1997 में "वेलकमथिएटर" के बैनर तले राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की आधिकारिक विदाई में मंचन किया गया था । यह दिल्ली , मुंबई , कोलकाता और भारत के कई अन्य शहरों में प्रदर्शित किया गया था।

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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*

*आमिर रज़ा हुसैन एक बार भाजपा के सदस्य । वह जुलाई 2013 तक दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष थे, उन्होंने नरेंद्र मोदी की आलोचना के बाद इस्तीफा दे दिया*

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2014 खूबसूरत राजा शेखर सिंह राठौर हिंदी फिल्म


भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...