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गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

शौकत आज़मी

शौक़ीन कैफ़ी - वफ़ा
शौकत कैफ़ी 

🎂21 अक्टूबर 1926 
⚰️22 नवंबर 2019,  

शौकत आज़मी के नाम से भी जानी जाती हैं , एक भारतीय थिएटर और फिल्म अभिनेत्री हैं। उनके पति अरबी कवि और फिल्म लेखक कैफ़ी आज़मी थे। यह दंपत्ति इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (आईपीटीए) और प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन (एआईडब्ल्यूए) के प्रमुख कलाकार थे, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांस्कृतिक मंच थे ।

जीवनी

शौकत कैफ़ी का जन्म हैदराबाद राज्य में उत्तर प्रदेश प्रवासियों के एक शिया मुस्लिम परिवार में हुआ था । वह भारत के औरंगाबाद में पली बढ़ीं । छोटी उम्र में ही उन्हें उर्दू शायर कैफ़ी आज़मी से प्यार हो गया और उन्होंने शादी कर ली । उनके दो बच्चे थे. उनके बेटे, बाबा आज़मी , एक कैमरामैन और अब फिल्म निर्देशक हैं। उन्होंने मशहूर अभिनेत्री उषा किरण की बेटी तन्वी आजमी से शादी की है । शौकत और कैफ़ी की बेटी, शबाना आज़मी (जन्म 1950), भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक हैं। उन्होंने मशहूर शायर और फिल्म गीतकार जावेद अख्तर से शादी की है ।

शादी के बाद मुंबई में बस गईं शौकत और कैफी ने जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव झेले। कैफ़ी कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिबद्ध सदस्य थे, इस हद तक कि, उनके अनुरोध पर, उनकी मृत्यु के बाद उनके पार्टी सदस्यता कार्ड को उनके साथ दफनाया गया था।

उन्होंने इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (आईपीटीए) और प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन (पीडब्ल्यूए) के लिए कड़ी मेहनत की और उनकी शादी के बाद कई वर्षों तक उनकी आय पार्टी से मिलने वाले अल्प वजीफे से होती थी। कई वर्षों तक, दंपति अपने दो बच्चों के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा उपलब्ध कराए गए कम्यून आवास में रहते थे , जो तीन अन्य परिवारों के साथ साझा किए गए अपार्टमेंट में एक शयनकक्ष था। चूंकि बाकी सभी परिवार भी कम्युनिस्ट थे और थिएटर या सिनेमा से जुड़े थे, इसलिए शौकत को भी थिएटर के कीड़े ने काट लिया। अभिनय के लिए पैसा उनके लिए एक और प्रोत्साहन था, और जब उनके दो बच्चे स्कूल जाने लगे तो दंपति के लिए पैसे की कमी हो गई।

1950 के दशक के मध्य में, कैफ़ी ने एक लेखक और गीतकार के रूप में मुंबई फिल्म उद्योग में काम की तलाश शुरू की। उन्होंने काफ़ी समय तक संघर्ष किया और उन फ़िल्मों के लिए यादगार गीत लिखे जो फ्लॉप रहीं। इसके बाद कैफ़ी को एक गीतकार के रूप में सफलता मिली और परिवार की किस्मत चमक गई। कुछ ही वर्षों में, वे मुंबई के पॉश इलाके जुहू में एक अपार्टमेंट खरीदने में सक्षम हो गए । उनके पति के फिल्म उद्योग से जुड़ाव ने शौकत को फिल्मों में भूमिकाएँ निभाने में भी मदद की।

वह लगभग एक दर्जन फिल्मों में दिखाई दीं, जिनमें ( गरम हवा और उमराव जान ) जैसी प्रमुख प्रस्तुतियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ थीं । थिएटर में, वह एक दर्जन नाटकों में दिखाई दीं। यह सब वह अपने घरेलू कर्तव्यों के साथ-साथ सफलतापूर्वक कर सकती थी।

2002 में कैफ़ी आज़मी के निधन के बाद, शौकत आज़मी ने एक आत्मकथा, कैफ़ी और मैं लिखी , जिसे एक उर्दू नाटक कैफ़ी और मैं में रूपांतरित किया गया , जिसमें शबाना ने उनकी माँ की भूमिका निभाई। इसका प्रीमियर 2006 में कैफ़ी आज़मी की चौथी बरसी पर मुंबई में हुआ था ।

📽️फिल्मोग्राफी📽️
वर्ष पतली परत भूमिका
2002 साथिया बुआ
1988 सलाम बॉम्बे! वेश्यालय मालिक
1986 मांडली ( अंजुमन ) 
1984 लोरी 
1982 बाजार हाजन बी
1982 रास्ता प्यार के शायमा की माँ
1981 उमराव जान खानम जान
1977 धूपछाँव पंडित की पत्नी
1974 फ़सलाह पार्वती एस. चंद्रा
1974 चिलचिलाती हवाएँ ( गर्म हवाएँ ) जमीला, ईसाई मिर्ज़ा की पत्नी
1974 जुर्म और सज़ा राजेश की माँ
1974 वो मैं नहीं 
1973 स्वीकर -सुशीला, नौकरानी
1973 नैना शशि कपूर की चाची
1970 हीर रांझा 
1964 Haqeeqat 
1964 कोहरा

सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

नरींदर चंचल

नरेंद्र चंचल
प्रसिद्धि भजन गायक मातेश्वरी भगत
🎂जन्म 16 अक्टूबर, 1940
जन्म भूमि अमृतसर, पंजाब
⚰️मृत्यु 22 जनवरी, 2021
मृत्यु स्थान दिल्ली

अभिभावक माता- कैलाशवती
पिता- चेतराम खरबंदा

पति/पत्नी नम्रता चंचल
संतान दो बेटे, एक बेटी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र गायकी
मुख्य फ़िल्में बॉबी, बेनाम, रोटी कपड़ा और मकान, आशा तथा अवतार आदि।
प्रसिद्धि भजन गायक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी राजेश खन्ना और शबाना आज़मी अभिनीत फिल्म 'अवतार' में महेंद्र कपूर और आशा भोंसले के साथ नरेंद्र चंचल का गाया गीत 'चलो बुलाया आया है माता ने बुलाया है' माता की बेहद प्रसिद्ध भेंटों में शु्मार है। मुख्य रूप से उन्हें माता के भजन गायक के रूप में जाना जाता था। नरेंद्र चंचल ने बहुत-से भजन और हिंदी फिल्म में गीत गाए थे। उनके गीत के बिना हर दुर्गा पूजा अधूरी होती थी। पूरे उत्तर भारत में उनका बड़ा नाम था। नरेंद्र चंचल की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर शोमैन राज कपूर की फिल्मों के लिए भी गाने गाए। फ़िल्म 'बेनाम' आदि में।
चंचल अपनी माता की वजह से नरेंद्र चंचल की भजनों में रुचि बढ़ी थी। उन्होंने बचपन से ही अपनी मां को माता रानी के भजन गाते सुना था। नरेंद्र चंचल अपनी पहली गुरु अपनी मां को माना करते थे। इसके बाद उन्होंने प्रेम त्रिखा से संगीत सीखा। फिर वह भजन गाने लगे। नरेंद्र चंचल ने 'मिडनाइट सिंगर' नामक एक बायोग्राफी भी जारी की, जो उनके जीवन, संघर्षों और कठिनाइयों को बताती है।

नरेंद्र चंचल ने सालों साल के संघर्ष के बाद 1973 में फिल्म 'बॉबी' के लिए बॉलीवुड गीत 'बेशर्क मंदिर मस्जिद' गाया और फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक अवार्ड अपने नाम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने 'रोटी कपडा और मकान' जैसी बड़ी फ़िल्म के लिए भी गाने गए। उन्होंने भक्ति गीतों की दुनिया में अपनी एक अनोखी पहचान बनाई। नरेंद्र चंचल ने अमेरिकी राज्य जॉर्जिया की नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी।
🌹लोकप्रियता🌹
नरेंद्र चंचल पिछले कई दशकों से कीर्तन और जगरातों की दुनिया में सक्रिय थे। उन्होंने राज कपूर की फिल्म 'बॉबी' में 'बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो' गाना गाया। ये गाना आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इस गाने से उन्हें पहचान मिली।
नरेंद्र चंचल ने 1974 में 'बेनाम' फिल्म में 'मैं बेनाम हो गया' गीत गाया। 1974 में ही उन्होंने 'रोटी कपड़ा और मकान' में 'बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई' गाने को आवाज दी।

फिल्म 'आशा' (1980) में नरेंद्र चंचल ने 'तूने मुझे बुलाया' गीत गाया, जो काफी हिट हुआ था। इसके बाद 1983 में फिल्म 'अवतार' के लिए उन्होंने भजन 'चलो बुलावा आया है' गाया। ये शबाना आज़मी और राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था। यह गाना भी बेहद लोकप्रिय हुआ। इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। इसके अलावा उन्होंने 1985 में फिल्म 'काला सूरज' के लिए 'दो घूंट पिला दे' और 1994 में फिल्म 'अनजाने' के लिए 'हुए हैं कुछ ऐसे वो हमसे पराए' गीत गाया।

कोरोना पर भजन 

मार्च 2020 में नरेंद्र चंचल का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें वे मां दुर्गा का एक भजन गाते दिखे थे। इसमें उन्होंने कोरोना का भी जिक्र किया था। नरेंद्र चंचल द्वारा जगराते में गाया गया उनका वीडियो लोगों के बीच काफी पॉपुलर हुआ। इसमें उन्होंने गाया कि "डेंगू भी आया और स्वाइन फ्लू भी आया, चिकन गोनिया ने शोर मचाया, कित्थे आया कोरोना?"

मृत्यु
भजन सम्राट नरेंद्र चंचल का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में 22 जनवरी, 2021 को निधन हुआ। वह 80 साल के थे। नरेंद्र चंचल पिछले तीन महीने से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक़, शुक्रवार के दिन दोपहर करीब 12.30 पर उन्होंने अंतिम सांस ली। गायक नरेंद्र चंचल के ब्रेन में क्लोटिंग थी।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दु:ख जताया। उन्होंने लिखा- "लोकप्रिय भजन गायक नरेंद्र चंचल जी के निधन के समाचार से अत्यंत दु:ख हुआ है। उन्होंने भजन गायन की दुनिया में अपनी ओजपूर्ण आवाज से विशिष्ट पहचान बनाई। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम् शांति"।

मेने अपने कनाडा प्रवास के दौरान नरेंद्र चंचल के निधन पर शोक व्यक्त किया। और लिखा- "ये जानकर बहुत दु:ख हुआ कि प्रतिष्ठित और सबसे ज्यादा प्यारे नरेंद्र चंचल हमें छोड़कर चले गए। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना। उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना"।

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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...