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शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

ओ.पी.दत्ता

#09feb 
ओ.पी.दत्ता 

🎂1922 

⚰️ 09 फरवरी 2012
ज्योति प्रकाश दत्ता जे.पी ,दत्ता के पिता थे
जो खुद भी एक भारतीय फिल्म निर्माता और लेखक थे उनका जन्म गुजराँवाला, अविभाजित भारत में एक पंजाबी ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए था उन्होंने 1948 में फिल्म 'प्यार की जीत' से अपने कैरियर की शुरुआत की, जिसमें अभिनेत्री-गायिका सुरैया ने अभिनय किया।  फिल्म ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलायी उन्होंने 1959 तक नौ फिल्मों का निर्देशन किया, जिसके बाद वे फिल्मों के लिए संवाद, पटकथा और कहानियां लिखने लगे उन्होंने अपने निर्देशक बेटे, जे.पी. दत्ता के लिए विशेष रूप से बॉर्डर और एलओसी कारगिल जैसी अधिकांश फिल्में लिखीं 2001 में, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार और फिल्म रिफ्यूजी के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता  2006 में, उन्होंने फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड जीता

ओ.पी. ने 1950 के दशक की शुरुआत में, 'अनोखी' नाम से कराची में स्वतंत्रता के बाद एक फिल्म भी बनाई और उस शहर में एक स्टूडियो बनाने में मदद की उन्होंने फिल्म 'मस्ताना' (महमूद विनोद खन्ना), 'जीत' ( रणधीर कपूर बबीता), 'चिराग' (सुनील दत्त, आशा पारेख) और दो रास्ते( राजेश खन्ना, मुमताज) जैसी फिल्मों  के लिए पटकथा  संवाद लिखे  राज खोसला के साथ मतभेदों के कारण उनको इन फिल्मों का  क्रेडिट नहीं दिया गया

ओपी दत्ता भारतीय फिल्मों के निर्माता और निर्देशक जे.पी. दत्ता के पिता और पूर्व अभिनेत्री बिंदिया गोस्वामी के ससुर थे।

09 फरवरी 2012 को मुम्बई में निमोनिया से 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

अमृता सिंह

#09feb

अभिनेत्री अमृता सिंह 
: 🎂09 फ़रवरी 1958, हदाली, पाकिस्तान
पति: सैफ़ अली ख़ान (विवा. 1991–2004)
सैफ अली खान से तलाक के बाद अमृता सिंह ने भी दोबारा शादी करके घर नहीं बसाया. अमृता अकेले ही दोनों बच्चों सारा अली खान और इब्राहिम अली खान संग रहती हैं. एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह ने गोल्फर ज्योति सिंह से शादी की थी. लेकिन दोनों की शादी कुछ सालों में ही टूट गई थी.
बच्चे: सारा अली खान, इब्राहीम अली खान
माता-पिता: रुखसाना सुल्ताना, शविंदर सिंह

अमृता सिंह एक भारतीय अभिनेत्री हैं।
 वह अपने समय की लीडिंग अभिनेत्रीयोँ में से एक हुआ करती थीं। अमृता सिंह अभिनेता सैफ-अली खान की पहली पत्नी हैं।

अमृता का जन्म 9 फ़रवरी 1958 को एक सिख परिवार में हुआ था।  इनकी  पिता का नाम सरदार सविंदर सिंह था, जबकि उनकी माँ का नाम रुख्शाना सुलतान। अमृता सिंह भारतीय लेखक खुशवंत सिंह की भतीजी हैं।

उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की है।  वह हिंदी अंग्रेजी और पंजाबी भाषा में निपुण हैं।

अमृता सिंह की शादी उनसे 12 साल छोटे सैफ अली खान से हुई थी। इन्होने शादी के बाद अपना धर्म भी परिवर्तित कर लिया था, और फिल्मीं दुनिया से दूरी भी बना ली थी।  लेकिन उनकी यह शादी सिर्फ 13 साल तक ही चल सकी, साल 2004 में दोनों का तलाक हो गया।  सैफ अली खान पटौदी ऑफ नवाब से भी जाने जाते हैं।  इनके दो बच्चे है।  सारा अली खान,इब्राहिम अली खान। 

अमृता ने अपनी फिल्मीं करियर की शुरुआत फिल्म बेताब से 1983 में की थी।  इस फिल्म में वह सनी देओल के साथ नजर आयीं थी।  उसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया।  जिनमे फिल्म मर्द शामिल हैं, इस फिल्म में उनके अपोजिट मेगास्टार अमिताभ बच्चन नज़र आये थे। उन्होंने सकारत्मक किरदार के अलावा फिल्म राजू बन गया जेंटलमैन, आइना जैसी फिल्मों में नकारात्म्क किरदार भी निभाये हैं। अपने फ़िल्मी करियर  में उन्होंने फिल्म फेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड भी जीता था। अभिनेता सैफ अली खान से शादी होने के बाद अमृता अपने फ़िल्मी करियर से ब्रेक लेकर अपना परिवार संभालने लगी।

अमृता ने साल 2002 में फिल्म 23 मार्च 1931-शहीद फिल्म से वापसी की।  उन्होंने इस फिल्म में भगत सिंह की माँ का किरदार निभाया था , उसके बाद दस कहानियाँ, शूट आउट ऐट लोखंडवाला जैसी फिल्मों में नजर अायीं।  2014 में वह धर्म प्रोडक्शंस की फिल्म 2 स्टेट्स में नजर आयीं।  यह फिल्म चेतन भगत किनोवेल पर आधारित थीं।  अमृता ने इस फिल्म में अर्जुन कपूर की पंजाबन माँ का किरदार निभाया था।  जिसे दर्शकों और आलोचकों द्वारा खूब सराहा गया। 

प्रसिद्ध फ़िल्में

मर्द,बेताब, सूर्यवंशी, राजू बन गया जेंटलमैन ,अकेला  सपना,आग का दरिया  ,सच्चाई की ताकत , काला धंधा गोरे लोग ,कल की आवाज़,2 स्टेट्स,दस कहानियाँ, शूट आउट ऐट लोखंडवाला,23 मार्च 1931-शहीद,तूफ़ान,सीआईडी ,अग्नि,मुलजिम,चरणों की सौंगंध।
📽️
2007 दस कहानियाँ 
2007 शूट आउट एट लोखंडवाला 
2005 कलयुग 
2002 23 मार्च 1931:शहीद
1993 आइना 
1993 रंग 
1992 सूर्यवंशी 
1992 राजू बन गया जेंटलमैन 
1992 दिल आशना है 
1992 कल की आवाज़ 
1991 धर्म संकट
1991 अकेला
1991 प्यार का साया 
1991 पाप की आँधी 
1991 साधु संत 
1991 रुपये दस करोड़ 
1990 मौत के फरिश्ते 
1990 वीरू दादा 
1990 क्रोध 
1990 आग का दरिया
1990 सीआईडी 
1989 जादूगर 
1989 तूफान
1989 बटवारा 
1989 सच्चाई की ताकत
1989 हथियार 
1989 गलियों का बादशाह
1989 इलाका 
1988 वारिस 
1988 शुक्रिया
1988 कब्ज़ा 
1988 अग्नि
1988 तमाचा 
1988 खून बहा गंगा में 
1988 चरणों की सौगन्ध 
1988 मुलज़िम
1987 ठिकाना 
1987 नाम-ओ-निशान 
1987 खुदगर्ज़ 
1986 मेरा धर्म 
1986 कर्मदाता 
1986 चमेली की शादी
1986 नाम 
1986 काला धंधा गोरे लोग
1985 मर्द
1984 दुनिया 
1984 सनी 
1983 बेताब

मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

नादिरा

अभिनेत्री नादिरा
फ्लोरेंस ईजेकील
       #09feb
       #05dic 
🎂5 दिसंबर 1932
बगदाद , इराक साम्राज्य (वर्तमान इराक )
⚰️मृत
09 फ़रवरी 2006 (आयु 73 वर्ष)
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
राष्ट्रीयता
भारतीय
पेशा
अभिनेत्री
सक्रिय वर्ष
1952-2001
पुरस्कार
1976 में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार
नादिरा का जन्म 5 दिसंबर 1932 को बगदाद , इराक में एक बगदादी यहूदी परिवार में हुआ था। जब वह शिशु थीं, तो उनका परिवार व्यवसाय के अवसरों की तलाश में बगदाद से बंबई चला गया। उसके दो भाई थे, जिनमें से एक संयुक्त राज्य अमेरिका में और दूसरा इज़राइल में रहता है । 
सिनेमा में नादिरा की पहली उपस्थिति 1943 की हिंदी भाषा की फिल्म मौज में थी जब वह 10 या 11 वर्ष की थीं। 

उन्हें सफलता फिल्म निर्देशक मेहबूब खान की पत्नी सरदार अख्तर से मिली, जिन्होंने उन्हें फिल्म आन (1952) में लिया। फिल्म में राजपूत राजकुमारी के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें सिनेमाई प्रसिद्धि दिलाई। 1955 में, उन्होंने श्री 420 में माया नाम की एक अमीर सोशलाइट की भूमिका निभाई । उन्होंने दिल अपना और प्रीत पराई (1960), पाकीज़ा (1972), हंसते ज़ख्म (1973) और अमर अकबर एंथोनी (1977) जैसी कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं । उन्हें अक्सर एक प्रलोभिका या खलनायिका के रूप में प्रस्तुत किया जाता था, ऐसी भूमिकाएँ जो पवित्र अग्रणी महिला पात्रों के लिए एक बाधा के रूप में उपयोग की जाती थीं, जिन्हें उस समय हिंदी फिल्म उद्योग द्वारा पसंद किया जाता था । 

1975 की फ़िल्म जूली में अपनी भूमिका के लिए नादिरा ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता । 1980 और 1990 के दशक के दौरान, उन्होंने ज्यादातर सहायक किरदार निभाए। एक पश्चिमी महिला के रूप में उनकी छवि के कारण , उन्होंने अक्सर ईसाई या एंग्लो-भारतीय महिलाओं की भूमिकाएँ निभाईं। उनकी आखिरी भूमिका फिल्म जोश (2000) में थी।

वह अपने करियर के दौरान सबसे अधिक भुगतान पाने वाली अभिनेत्रियों में से एक थीं, और रोल्स-रॉयस खरीदने वाली पहली भारतीय अभिनेत्रियों में से एक थीं । 
अपने बाद के वर्षों में, नादिरा भारत के मुंबई में अकेली रहती थीं , क्योंकि उनके कई रिश्तेदार इज़राइल चले गए थे । अपनी मृत्यु से पहले पिछले तीन वर्षों में, वह केवल एक नौकरानी के साथ अपने कॉन्डोमिनियम में रह रही थी। 24 जनवरी 2006 को, उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और उन्हें अर्ध-बेहोशी की हालत में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया । उसे कई मौजूदा स्वास्थ्य समस्याएं थीं, जिनमें ट्यूबरकुलर मेनिनजाइटिस , अल्कोहलिक लिवर डिसऑर्डर और पक्षाघात शामिल हैं । 

लंबी बीमारी के बाद 9 फरवरी 2006 को 73 वर्ष की आयु में तारदेव, मुंबई के भाटिया अस्पताल में उनका निधन हो गया।  उनके दो भाई बचे थे। 
📽️
2001 ज़ोहरा महल 
2000 जोश 
1999 कॉटन मैरी 
1997 तमन्ना 
1992 धर्म-पिता 
1992 महबूबा 
1991 झूठी शान 
1991 हसन दा चोर 
1991 लैला 
1988 मौला बख्श 
1985 सागर 
1984 किम (टीवी धारावाहिक) कुल्लू की विधवा 
1982 रास्ते प्यार के 
1982 अशांति
1981 दहशत 
1981 आस पास 
1980 चाल बाज़
1980 स्वयंवर
1979 दुनिया मेरी जेब में 
1979 बिन फेरे हम तेरे 
1979 मगरूर 
1978 नौकरी
1978 नौकरी 
1977 आप की खातिर 
1977 आशिक हूं बहारों का
1977 अमर अकबर एंथोनी बिना श्रेय वाला कैमियो 
1977 डार्लिंग डार्लिंग 
1977 पापी
1976 भंवर 
1975 धर्मात्मा 
1975 जूली
1975 कहते हैं मुझको राजा 
1975 मेरे सरताज 
1974 फ़सलाह 
1974 इश्क इश्क इश्क 
1974 वो मैं नहीं 
1973 एक नारी दो रूप 
1973 हंसते ज़ख़्म 
1973 प्यार का रिश्ता 
1972 एक नजर
1972 राजा जानी 
1971 कहीं आर कहीं पार 
1972 अनोखा दान 
1972 पाकीज़ा 
1970 बॉम्बे टॉकी
1970 चेतना 
1970 एक नन्हीं मुन्नी लड़की थी 
1970 इश्क़ पर ज़ोर नहीं
1970 सफ़र
1969 गुरु 
1969 इन्साफ का मंदिर 
1969 जहां प्यार मिले 
1969 तलाश
1968 कहीं दिन कहीं रात 
1968 सपनों का सौदागर
1963 मेरी सूरत तेरी आंखें 
1965 छोटी छोटी बातें 
1965 दुर्घटना 
1960 दिल अपना और प्रीत पराई 
1960 काला बाजार 
1958 पुलिस 
1956 प्रिय कोरिन्ना 
1956 पॉकेट मार 
1956 समुंदरी डाकू 
1956 सिपहसालार 
1956 श्री 420 
1955 रफ़्तार 
1954 डाक बाबू 
1954 वारिस 
1953 नगमा 
1952 आन  राजश्री 
1943 मौज '

शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

राजीव कपूर

अभिनेता राज कपूर के सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

राजीव कपूर 
🎂जन्म- 25 अगस्त, 1962; 
⚰️मृत्यु- 09 फ़रवरी, 2021
हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता थे। वह अपने समय के ख्यातिप्राप्त फ़िल्म अभिनेता राज कपूर के सबसे छोटे पुत्र थे। राजीव कपूर ने 1983 में रिलीज हुई फिल्म 'एक जान हैं हम' से डेब्यू किया था, लेकिन उन्हें पहचान 1985 में रिलीज हुई 'राम तेरी गंगा मैली' फ़िल्म से मिली। वह 'नाग नागिन' और 'अंगारे' जैसी फ़िल्मों में भी बतौर अभिनेता नजर आए थे। इसके अलावा उन्होंने अक्षय खन्ना और ऐश्वर्या राय स्टारर 'आ अब लौट चलें' को प्रोड्यूस किया था। 1986 में रिलीज हुई ऋषि कपूर और माधुरी दीक्षित की 'प्रेम ग्रंथ' में राजीव कपूर डायरेक्टर थे।

राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त, 1962 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता राजकपूर थे। राजकपूर के सबसे बड़े पुत्र अभिनेता रणधीर कपूर हैं। इनसे छोटे ऋषि कपूर थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा को असंख्य कामयाब फ़िल्में दी थीं और सबसे छोटे राजीव कपूर थे।

राजीव कपूर ने 2001 में आर्किटेक्ट आरती सभरवाल से विवाह किया था। हालांकि, दो साल बाद ही उनका तलाक हो गया। उनकी कोई संतान नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, तलाक के बाद आरती ने अपना बिजनेस कनाडा शिफ्ट कर लिया।

राजीव कपूर ने 'आसमान', 'लवर बॉय', 'जबरदस्त' और 'हम तो चले परदेस' जैसी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन बतौर एक्टर उनका कॅरियर चल नहीं सका
रणधीर कपूर, राज कपूर, राजीव कपूर और ऋषि कपूर

और फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रहीं। सन 1985 में आई फ़िल्म 'राम तेरी गंगा मैली' भारतीय सिने इतिहास की सुपर हिट फ़िल्मों में से एक रही। इस फ़िल्म में राजीव कपूर मुख्य भूमिका में थे और अभिनेत्री मंदाकिनी थीं। इस फ़िल्म की अपार सफलता ने राजीव कपूर को रातों-रात प्रसिद्धि दिला दी। राजीव कपूर ने बतौर डायरेक्टर 1996 में 'प्रेम ग्रंथ' फिल्म बनाई जबकि बतौर प्रोड्यूसर उन्होंने 1999 में 'आ अब लौट चलें' बनाई थी।

राजीव कपूर को फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से पहचान मिली थी, हालांकि फिल्मों में वे ज्यादा समय तक नहीं चले। उन्होंने अपने 10 साल के फिल्मी कॅर‍ियर में केवल 13 फिल्में कीं, जिनमें 12 फ‍िल्में फ्लॉप साबित हुईं। इनमें 'राम तेरी गंगा मैली' ही उनकी एकमात्र हिट फ़िल्म थी जिसकी सफलता का श्रेय फिल्म की एक्ट्रेस मंदाक‍िनी को दिया गया।

ऋषि कपूर ने अपनी किताब 'खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में कहा था कि वो दु:खी महसूस करते हैं क्योंकि राजीव कपूर कभी भी अपनी असली क्षमता का एहसास नहीं कर पाए। ऋषि कपूर अपने छोटे भाई राजीव कपूर से काफी करीब थे। उन्होंने अपने भाई राजीव कपूर से जुड़ी कई बातें एक ऑटोबायोग्राफी में कही थीं। ऋषि कपूर को अपने भाई राजीव कपूर के लिए ये लगता था कि वो सिनेमा के बहुत टैलेंटड लोगों में से एक हैं, लेकिन उन्हें अपनी वास्तविक क्षमता का कभी एहसास नहीं हो सका।

रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर दिग्गज अभिनेता-फिल्म निर्माता राज कपूर के तीन बेटे और अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के पोते थे। राज कपूर के बच्चों में बेटियां रितु नंदा और रीमा जैन शामिल हैं। अप्रॅल 2020 में ऋषि कपूर का निधन हो गया। ऋषि कपूर ने अपनी बुक 'खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में राजीव कपूर के बारे में बहुत तारीफ की थी। "मैं चिम्पू (राजीव कपूर) के बारे में बहुत चिंता करता हूं और दु:खी महसूस करता हूं कि वो कभी भी अपनी वास्तविक क्षमता का एहसास नहीं कर पाया। वो हम में से सबसे टैलेंटड इंसान है। राजीव कपूर पियानो को बिना सीखे ही शानदार तरीके से बजाता है"।

मृत्यु

58 साल के राजीव कपूर का निधन मंगलवार के दिन (9 फ़रवरी, 2021) को हार्ट अटैक से हुआ। दिल का दौरा पड़ने पर बड़े भाई रणधीर कपूर उन्हें अस्पताल लेकर गये। चेम्बूर इलाके के इनलेक्स अस्पताल में भर्ती करने से पहले ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। कपूर परिवार के लिए पिछले कुछ साल काफ़ी मुश्किल गुज़रे हैं। 2018 में राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का निधन हुआ। 2020 में परिवार को दोहरा झटका लगा। जनवरी में राज कपूर की बड़ी बेटी रितु नंदा दुनिया छोड़कर चली गयीं। फिर अप्रॅल में ऋषि कपूर का देहांत हो गया। उन्हें गये एक साल भी पूरा नहीं हुआ कि राजीव कपूर चल बसे। कपूर परिवार में अब सबसे बड़े सदस्य रणधीर कपूर हैं। राजीव कपूर के अंतिम संस्कार के दौरान रणधीर काफ़ी इमोशनल नज़र आए।

शनिवार, 12 अगस्त 2023

महेश आनंद

महेश आनंद
🎂जन्म13 अगस्त 1961
भारत
⚰️मृत09 फरवरी 2019 (आयु 57 वर्ष)
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
अन्य नामों
मीशी
माशी आनंद
व्यवसायों
अभिनेतानर्तकीयुद्ध कलाकार
महेश आनंद (13 अगस्त 1961 - 9 फरवरी 2019) एक भारतीय अभिनेता, नर्तक और मार्शल आर्टिस्ट थे, जिन्होंने हिंदी , तमिल , तेलुगु और मलयालम फिल्मों में काम किया।  उन्हें हिंदी फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है । वह कराटे में ब्लैक बेल्ट थे और अभिनय शुरू करने से पहले एक मॉडल और प्रशिक्षित डांसर थे। उनकी पहली फिल्म करिश्मा 1984 थी जबकि उनकी आखिरी ऑन-स्क्रीन उपस्थिति 2019 की कॉमेडी-ड्रामा रंगीला राजा में थी । करिश्मा में अभिनय करने से पहले उन्होंने इसके शुरुआती सीक्वेंस के लिए प्रदर्शन किया थासनम तेरी कसम 1982 सिल्हूट में अपने नृत्य के साथ।
📽️
1982 सनम तेरी कसम शीर्षक नर्तक 
1984 करिश्मा देव 
1985 भवानी जंक्शन कुंदन 
1986 सस्ती दुल्हन महेंगा दूल्हा शंकर (मुख्य भूमिका) 
1987 इन्साफ माइकल फर्नांडीस 
1988 शहंशाह स्थानीय गुंडा 
सोने पे सुहागा रॉबर्ट 
गंगा जमुना सरस्वती शक्त 
कब्ज़ा 
1989 हथियार अफजल 
इलाका सामी का बेटा 
महादेव 
मजबूर संग्राम 
सिक्का जॉर्ज 
मुजरिम राजा 
तूफान डाकू जालिम सिंह 
शहजादे ठाकुर 
आग का गोला महेश 
1990 पत्थर के इंसान 
Khatarnaak महेश 
मजबूर संग्राम 
घर हो तो ऐसा सड़क किनारे उपद्रवी गुंडा 
स्वर्ग गुरु 
जंगल प्रेम 
जुर्म दुर्जन 
थानेदार मंगल 
1991 ख़िलाफ कुँवर भानुप्रताप चौहान 
Pratikar नागराज 
त्रिनेत्र फ्रेंको 
इन्द्रजीत महेश सदाचारी 
कसम कलि की 
अकायला रंजीत 
नर्तकी बृजभूषण का गुर्गा 
1992 लंबू दादा भूषण 
मुस्कुराहाट केसी 
निश्चय जोसेफ लोबो 
ज़ुल्म की हुकुमत 
विश्वात्मा -राजनाथ 
1993 वक़्त हमारा है कर्नल चिकारा गैंग में मेजर 
गुमराह टाइगर ( हांगकांग में रिंग में विपक्षी सेनानी ) 
खेल अफ़ज़ल खान 
महोदय जिमी का गुर्गा 
तहकीकात विक्रम 
1994 पथरीला रास्ता मुन्ना 
खुद्दार बाबूजान 
अंदाज़ छोटे 
क्रांतिवीर वैसीराम 
बेताज बादशाह [4] राम स्वामी 
1995 कुली नंबर 1 गजेन्द्र का पुत्र 
जवाब बैंक लुटेरों का नेता 
1996 मुक़द्दमा बलबीरा 
विश्वासघाट बाबू सेठ 
विजेता जॉर्ज 
ज़ोरदार सियार 
हम हैं प्रेमी 
शोहरत 
1997 लहू के दो रंग टीनू शिकारी 
1998 ज़ुल्म-ओ-सितम बंजारा 
1999 आया तूफान कर्नल गद्दाफ़ी 
लाल बादशाह नारायण सिंह 
2000 बागी छोटे 
कुरूक्षेत्र अन्ना पिल्लई 
2003 एक और एक ग्यारह कैप्टन महेश 
2005 सुसुख वकील खलील शेख
219 रंगीला राजा
⚰️09 फरवरी 2019 को, उनकी नौकरानी ने कई बार उनके आवास की घंटी बजाने के बाद भी उनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं ली। इसके बाद उसने तुरंत अपनी बहन को सूचित किया जो वर्सोवा पुलिस के साथ वहां आई । आनंद को सोफे पर बैठा हुआ मृत पाया गया और उसके बगल में एक मेज पर शराब की एक बोतल और खाने की प्लेट पड़ी हुई मिली।

शनिवार, 22 जुलाई 2023

एल सुब्रह्मण्यम

लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम
🎂जन्म 23 जुलाई, 1947
जन्म भूमि चेन्नई, तमिलनाडु
⚰️9 फ़रवरी, 1995
अभिभावक माता- सीतालक्ष्मी
पिता- वी. लक्ष्मीनारायण

पति/पत्नी विजी सुब्रमण्यम, कविता कृष्णमूर्ति
संतान दो पुत्री- गिंगेर शंकर, बिंदु
दो पुत्र- नारायण, अम्बी

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शास्त्रीय वाद्य वादक
शिक्षा एम.बी.बी.एस. (मद्रास मेडिकल कॉलेज)
पश्चिमी संगीत में स्नातकोत्तर (कैलिफ़ोर्निया इंस्टीच्यूशन ऑफ आर्ट्स)

पुरस्कार-उपाधि विश्व कला भारती’ पुरस्कार (2004), पद्म भूषण (2001), पद्म श्री (1988), लोटस फेस्टिवल’ पुरस्कार (1988), राष्ट्रपति पुरस्कार (1963) आदि।
प्रसिद्धि वायलिन वादक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी एल. सुब्रमण्यम ने बर्नार्डो बेर्तोलुकि की फिल्मों ‘लिटिल बुद्धा’ और ‘कॉटन मैरी ऑफ मर्चेंट-आइवरी’ के निर्माण में एकल वायलिन वादक के रूप में भी अपनी प्रस्तुति दी।
❤️परिचय
बचपन में ही एल. सुब्रमण्यम ने शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में विशेष योग्यता हासिल कर ली थी। ये एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें ‘वायलिन चक्रवर्ती’ (यानि वायलिन सम्राट) के नाम से बचपन में जाना जाता था। ये केवल वायलिन संगीत के पेशे से बंधे नहीं रहे, अपितु इन्होंने सैकड़ों धुनों को बनाया, सुसज्जित किया और पुराने धुनों में सुधार भी किया। ये कर्नाटक संगीत के साथ-साथ पश्चिमी शास्त्रीय संगीत, जाज, फ्यूज़न, ऑर्केस्ट्रा और विश्व संगीत के भी जानकर हैं। इन्हें न केवल भारत अपितु विश्व के कई देशों में सम्मानित किया जा चुका है। इन्होंने संसार के कई प्रतिष्ठित संगीतकारों के अनुरोध पर उनके साथ अनेकों अंतर्राष्ट्रीय संगीत कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति भी दी है। एल. सुब्रमण्यम ने 150 से अधिक रिकॉर्डिंग की हैं और साथ ही यहूदी मेनुहिन, स्टीफन ग्राप्पेल्ली एवं रगइएरो रिक्की आदि जैसे कई बड़े संगीतकारों के साथ भी काम किया है। इन्हें अपने संगीत के धुनों को आर्केस्ट्रा के साथ संयोजन (मिक्सिंग) के लिए विशेष प्रसिद्ध मिली है।

जन्म
एल. सुब्रमण्यम का जन्म 23 जुलाई, 1947 को चेन्नई, तमिलनाडु में प्रतिष्ठित संगीतकार परिवार में हुआ था। इनका सम्बन्ध एक दक्षिण भारतीय तमिल परिवार से है। इन्होंने मात्र छ: वर्ष की अल्पायु में ही संगीत के अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम का रंगमंच पर प्रदर्शन किया था। संगीत बचपन से ही इनके रग-रग में भरा हुआ था, जो इनकी मां सीतालक्ष्मी और पिता वी. लक्ष्मीनारायण से वरदान के रूप में मिला था क्योंकि वे दोनों भी प्रसिद्ध संगीतकार थे।

शिक्षा
एल. सुब्रमण्यम का बचपन जाफना (श्रीलंका) में व्यतीत हुआ। प्रतिष्ठित संगीतकार परिवार से होने की वजह से इन्होंने बचपन में ही अपने कदम इस दिशा में आगे बढ़ाना प्रारम्भ कर दिया था। इन्होंने संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा अपने माता-पिता से ही प्राप्त की थी, जिन्होंने इन्हें संगीत के मूल बारीकियों का ज्ञान दिया था।

संगीत के अलावा एल. सुब्रमण्यम ने कॉलेज के दिनों में चिकित्सा विज्ञान का भी अध्ययन किया था। इन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की डिग्री प्राप्त की थी। इनका डॉक्टर के रूप में कार्यकाल अल्प समय का ही रहा और कुछ दिनों बाद इन्होंने संगीत का अध्ययन फिर से आरम्भ कर दिया। इस दौरान इन्होंने पश्चिमी संगीत में स्नातकोत्तर की शिक्षा कैलिफ़ोर्निया इंस्टीच्यूशन ऑफ आर्ट्स से प्राप्त की। इस दौरान इन्हें अनेक समकालीन प्रतिष्ठित संगीतकारों के साथ रियाज करने का सुनहरा अवसर मिला। हालांकि इन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में अपना अध्ययन करके डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की थी, फिर भी इन्होंने एक वायलिन वादक के रूप में संगीत को अपने पेशे के रूप में अपनाया। इनके चाहने वाले प्रेम से इन्हें ‘मणि’ कहकर पुकारते हैं।

पारिवारिक जीवन
एल. सुब्रमण्यम का पहला विवाह विजी सुब्रमण्यम के साथ वर्ष 1976 में हुआ था, परंतु दुर्भाग्यवश 9 फ़रवरी, 1995 को उनकी मृत्यु हो गयी। इसके बाद वर्ष 1999 में इन्होंने अपना दूसरा विवाह लोकप्रिय भारतीय पार्श्वगायिका कविता कृष्णमूर्ति के साथ किया। पहली शादी से इन्हें चार बच्चे हुए, जिन्होंने अपने पिता सुब्रमण्यम के संगीत शिक्षा का अनुकरण किया और कई संगीत के कार्यक्रमों में अपने प्रस्तुत भी देते रहे हैं। इनकी बड़ी बेटी गिंगेर शंकर इस समय लॉस एंजिल्स में संगीत कंपोजर के रूप में कार्य कर रही हैं। इनकी दूसरी बेटी बिंदु (सीता) एक प्रसिद्ध गायिका और गीतकार हैं। इनके बड़े बेटे नारायण एक सर्जन (डॉक्टर) हैं जो गायक भी हैं। जबकि इनके छोटे बेटे अम्बी एक वायलिन वादक हैं जिन्हें बहुत ही प्रसिद्धि मिली है।
2007 में, सुब्रमण्यम फाउंडेशन, जो सुब्रमण्यम और उनकी पत्नी द्वारा संचालित एक चैरिटी है, ने भारत के बैंगलोर में सुब्रमण्यम एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (SAPA) नामक एक संगीत विद्यालय की स्थापना की
↔️संगीतकार

सुरभि (1988) (संगीतकार, संगीत संयोजक, संगीतकार: वायलिन वादक)
सलाम बॉम्बे! (1988) (संगीतकार, संगीत संयोजक, संगीतकार: वायलिन वादक)
मिसिसिपी मसाला (1991) (संगीतकार, संगीतकार: वायलिन, वायलिन सिंथेसाइज़र, परकशन)
जयते (1997) (संगीतकार)
ई स्नेहथीराथु (2004) (संगीतकार)
बनज़: ए लव स्टोरी (2012) (संगीतकार: वायलिन)
गौर हरि दास्तान (2013) (संगीतकार)
हे राम (2000) (संगीतकार, पूरा होने से पहले परियोजना छोड़ दी) 
↔️एकल कलाकार

लिटिल बुद्धा (1993) (वायलिन वादक)
कामसूत्र: ए टेल ऑफ़ लव (1996) (वायलिन वादक)
कॉटन मैरी (1999) (वायलिन वादक)
↔️अतिरिक्त साउंडट्रैक
पीस वन डे (2004) (संगीतकार, कलाकार: "जिप्सी ट्रेल")
बराका (1992) (कलाकार: "वांडरिंग सेंट")
राग मोहनम (2012) (कलाकार: "समर्पणम")
↔️सुब्रमण्यम पर

एल. सुब्रमण्यम: वायलिन फ्रॉम द हार्ट (1999)। जीन हेनरी म्युनियर द्वारा निर्देशित।

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...