15फरवरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
15फरवरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

दलीप धवन

#15feb 

दिलीप धवन
जन्म
1955
⚰️मृत15 फरवरी 2000 
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
पेशा
अभिनेता
 एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेता थे

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में दिलीप कुमार अभिनीत फिल्म संघर्ष (1968) से की, धवन ने 50 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया

उन्होंने 1978 में अरविंद देसाई की अजीब दास्तान फिल्म में नायक के रूप में काम किया। उन्हें 1980 के दशक की शुरुआत में लोकप्रिय टोपाज शेविंग ब्लेड के विज्ञापन में भी देखा गया था

टेलीविजन धारावाहिक नुक्कड़ में "गुरु" के रूप में अपनी भूमिका के लिए जाने जाने वाले धवन ने जनम, दीवार और तेरे मेरे सपने जैसे धारावाहिकों में भी काम किया।  वह एक जाने-माने फिल्म अभिनेता थे जिन्हें ज्यादातर सहायक भूमिकाओं (और कुछ प्रमुख भूमिकाएँ) के लिए जाना जाता था 
उनकी कुछ प्रमुख फिल्में है
एक बार कहो(1989) अल्बर्ट पिंटो को गुसा क्यूं अता है (1980), सज़ाये मौत (1981, साहेब (1985)  , डाक बंगला (1987), हीरो हीरालाल (1988), स्वर्ग (1990), इज्जतदार (1990), हिना (1991), मदहोश (1994), यश (1996), विराट (1997), हम साथ-साथ हैं: वी स्टैंड यूनाइटेड (1999) और राजा को रानी से प्यार हो गया (2000)

वे 1982 में फिल्म साथ साथ के निर्माता भी थे।

वह चरित्र अभिनेता कृष्ण धवन के बेटे थे 15 फरवरी 2000 को दिल का दौरा पड़ने से 45 साल की उम्र में मुंबई में उनका निधन हो गया।
📽️
1968 संघर्ष
1976 मंकी हिल पर हत्या
1978 अरविन्द देसाई की अजीब दास्तां
1980 अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है
1980 एक बार कहो
1981 सज़ाए मौत
1982 आगमन 
1982मेरी कहानी
1983 बड़े दिलवाला 
1983गुलाब करो
1984 प्रतिभा
1985 साहेब 
1985ख़ून और सज़ा
1987 डाक बंगला 
1988 हीरो हीरालाल
1989 शिव 
1989दूसरा कानून
1990 छोत्तुरप्रतिशोध 
1990स्वर्ग 
1990इज्जतदार
1991 मेंहदी
1992 गीत मिलन के गाते रहेंगे 
1992तहलका
1993 हम हैं कमाल के
1994 मदहोश 
1994चौराहा
1996 औरत औरत औरत 
1996यश
1997 विरासत 
1998 बदमाश
1999 कभी पास कभी फेल 
1999हम साथ साथ हैं 
1999रस्मों की ज़ंजीर
2000 राजा को रानी से प्यार हो गया
📺
नुक्कड़
नया नुक्कड़
पुकार
लोग क्या कहें गे

बुधवार, 27 दिसंबर 2023

मिर्जा गालिब


मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान
🎂: 27 दिसंबर 1797, आगरा
⚰️मृत्यु : 15 फ़रवरी 1869, गली कासिम जन, दिल्ली
दफ़नाने की जगह: Mazar-e-Ghalib
पत्नी: उमराव बेगम (विवा. 1810–1869)
माता-पिता: मिर्ज़ा अब्दुल्ला बेग ख़ां, इज्जत-उत-निसा बेगम
उल्लेखनीय काम: दीवान-ए-ग़ालिब

मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान, जो अपने तख़ल्लुस ग़ालिब से जाने जाते हैं, उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के एक महान शायर थे। इनको उर्दू भाषा का सर्वकालिक महान शायर माना जाता है और फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी जबान में लोकप्रिय करवाने का श्रेय भी इनको दिया जाता है। यद्दपि इससे पहले के वर्षो में मीर तक़ी "मीर" भी इसी वजह से जाने जाता है। ग़ालिब के लिखे पत्र, जो उस समय प्रकाशित नहीं हुए थे, को भी उर्दू लेखन का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है। ग़ालिब को भारत और पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाना जाता है। उन्हे दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला का ख़िताब मिला।
ग़ालिब का जन्म आगरा में एक सैनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था। उन्होने अपने पिता और चाचा को बचपन में ही खो दिया था, ग़ालिब का जीवनयापन मूलत: अपने चाचा के मरणोपरांत मिलने वाले पेंशन से होता था (वो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में सैन्य अधिकारी थे)। ग़ालिब की पृष्ठभूमि एक तुर्क परिवार से थी और इनके दादा मध्य एशिया के समरक़न्द से सन् 1750 के आसपास भारत आए थे। उनके दादा मिर्ज़ा क़ोबान बेग ख़ान अहमद शाह के शासन काल में समरकंद से भारत आये। उन्होने दिल्ली, लाहौर व जयपुर में काम किया और अन्ततः आगरा में बस गये। उनके दो पुत्र व तीन पुत्रियां थी। मिर्ज़ा अब्दुल्ला बेग ख़ान व मिर्ज़ा नसरुल्ला बेग ख़ान उनके दो पुत्र थे।

मिर्ज़ा अब्दुल्ला बेग (ग़ालिब के पिता) ने इज़्ज़त-उत-निसा बेगम से निकाह किया और अपने ससुर के घर में रहने लगे। उन्होने पहले लखनऊ के नवाब और बाद में हैदराबाद के निज़ाम के यहाँ काम किया। 1802 में अलवर में एक युद्ध में उनकी मृत्यु के समय ग़ालिब मात्र 5 वर्ष के थे।

जब ग़ालिब छोटे थे तो एक नव-मुस्लिम-वर्तित ईरान से दिल्ली आए थे और उनके सान्निध्य में रहकर ग़ालिब ने फ़ारसी सीखी।

ग़ालिब की प्रारम्भिक शिक्षा के बारे में स्पष्टतः कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन ग़ालिब के अनुसार उन्होने 11 वर्ष की अवस्था से ही उर्दू एवं फ़ारसी में गद्य तथा पद्य लिखना आरम्भ कर दिया था। उन्होने अधिकतर फारसी और उर्दू में पारम्परिक भक्ति और सौन्दर्य रस पर रचनाये लिखी जो गजल में लिखी हुई है। उन्होंने फारसी और उर्दू दोनो में पारंपरिक गीत काव्य की रहस्यमय-रोमांटिक शैली में सबसे व्यापक रूप से लिखा और यह गजल के रूप में जाना जाता है।

वैवाहिक जीवन

13 वर्ष की आयु में उनका विवाह नवाब ईलाही बख्श की बेटी उमराव बेगम से हो गया था। विवाह के बाद वह दिल्ली आ गये थे जहाँ उनकी तमाम उम्र बीती। अपने पेंशन के सिलसिले में उन्हें कोलकाता कि लम्बी यात्रा भी करनी पड़ी थी, जिसका ज़िक्र उनकी ग़ज़लों में जगह–जगह पर मिलता है।

1850१८५० में शहंशाह बहादुर शाह ज़फ़र द्वितीय ने मिर्ज़ा ग़ालिब को दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला के ख़िताब से नवाज़ा। बाद में उन्हे मिर्ज़ा नोशा का ख़िताब भी मिला। वे शहंशाह के दरबार में एक महत्वपूर्ण दरबारी थे। उन्हे बहादुर शाह द्वितीय के पुत्र मिर्ज़ा फ़ख़रु का शिक्षक भी नियुक्त किया गया। वे एक समय में मुग़ल दरबार के शाही इतिहासविद भी थे।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...