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रविवार, 11 फ़रवरी 2024

पंडित नरिंदर शर्मा

पंडित नरिंदर शर्मा

#28feb
#11feb
🎂जन्म 28 फ़रवरी , 1913 में उत्तर प्रदेश राज्य के खुर्जा नगर के जहाँगीरपुर नामक स्थान पर हुआ।
⚰️–11 फरवरी1989
हिन्दी के लेखक, कवि तथा गीतकार थे। उन्होने हिन्दी फिल्मों (जैसे सत्यम शिवम सुन्दरम) के लिये गीत भी लिखे।
महान कवि, फ़िल्म गीतकार, लेखक, संपादक महाभारत जैसे धारावाहिक के पटकथा लेख़क
पंडित नरेंद्र शर्मा हिन्दी के प्रसिद्ध कवि, लेखक एवं सम्पादक थे उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षाशास्त्र और अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। 1934 में प्रयाग में अभ्युदय पत्रिका का संपादन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी स्वराज्य भवन में हिंदी अधिकारी रहे और फिर बॉम्बे टाकीज़ बम्बई में गीत लिखे। उन्होंने फ़िल्मों में गीत लिखे, आकाशवाणी से भी संबंधित रहे और स्वतंत्र लेखन भी किया। उनके 17 कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक जीवनी और अनेक रचनाएँ पत्र
पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

अल्पायु से ही साहित्यिक रचनायें करते हुए पंडित नरेन्द्र शर्मा ने 21 वर्ष की आयु में पण्डित मदन मोहन मालवीय द्वारा प्रयाग में स्थापित साप्ताहिक" अभ्युदय " से अपनी सम्पादकीय यात्रा आरम्भ की। काशी विद्यापीठ में हिन्दी व अंग्रेज़ी काव्य के प्राध्यापक पद पर रहते हुए 1940 में वे ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रशासन विरोधी गतिविधियों के लिये गिरफ़्तार कर लिये गये और 1943 में मुक्त होने तक वाराणसी , आगरा और देवली में विभिन्न कारागारों में शचीन्द्रनाथ सान्याल,सोहनसिंह जोश, जयप्रकाश नारायण और सम्पूर्णानन्द जैसे ख्यातिनामों के साथ नज़रबन्द रहे और 19 दिन तक अनशन भी किया। जेल से छूटने पर उन्होंने अनेक फ़िल्मों में गीत लिखे और फिर 1953 से आकाशवाणी से जुड़ गये। इस बीच उनका लेखन कार्य निर्बाध चलता रहा। 11 मई , 1947 को मुम्बई में उनका विवाह सुशीलाजी से हुआ और परिवार में तीन पुत्रियों व एक पुत्र का जन्म हुआ।

1931 ई. में पंडित नरेंद्र शर्मा की पहली कविता 'चांद' में छपी। शीघ्र ही जागरूक, अध्ययनशील और भावुक कवि नरेन्द्र ने उदीयमान नए कवियों में अपना प्रमुख स्थान बना लिया। लोकप्रियता में इनका मुकाबला हरिवंशराय बच्चन से ही हो सकता था। 1933 ई. में इनकी
पहली कहानी प्रयाग के 'दैनिक भारत' में प्रकाशित हुई। 1934 ई. में इन्होंने मैथिलीशरण गुप्त की काव्यकृति ' यशोधरा ' की समीक्षा भी लिखी। सन् 1938 ई. में कविवर सुमित्रानंदन पंत ने कुंवर सुरेश सिंह के आर्थिक सहयोग से नए सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक स्पंदनों से युक्त 'रूपाभ' नामक पत्र के संपादन करने का निर्णय लिया। इसके संपादन में सहयोग दिया नरेन्द्र शर्मा ने।
भारतीय संस्कृति के प्रमुख ग्रंथ ' रामायण' और'महाभारत ' इनके प्रिय ग्रंथ थे। महाभारत में रुचि होने के कारण ये 'महाभारत' धारावाहिक के निर्माता बी. आर. चोपड़ा के अंतरंग बन गए। इसलिए जब उन्होंने 'महाभारत' धारावाहिक का निर्माण प्रारंभ किया तो नरेन्द्रजी
उनके परामर्शदाता बने। उनके जीवन की अंतिम रचना भी 'महाभारत' का यह दोहा ही है- "शंखनाद ने कर दिया, समारोह का अंत, अंत यही ले जाएगा, कुरुक्षेत्र पर्यन्त"।

लगभग 55 फ़िल्मों में 650 गीत एवं 'महाभारत' का पटकथा-लेखन और गीत-रचना की।

पंडित नरेंद्र शर्मा उन्नीसवीं सदी के चौथे दशक में ही मुंबई आ गए थे। बॉम्बे टॉकीज की अधिष्ठार्थी देविका रानी ने युसुफ़ ख़ान नाम वाले किसी पठान युवा को अपनी फ़िल्म ‘ज्वार-भाटा’ का नायक बनाने की बात जब सोची तो उन्होंने पंडित नरेश शर्मा से पूछा, ′इस युवक को किस फ़िल्मी नाम के साथ परदे पर उतारा जाए।′ पंडित नरेंद्र शर्मा ने उन्हें शायद ‘वासुदेव’ के साथ ‘दिलीप कुमार’ नाम सुझाया। देविका रानी को दिलीप कुमार नाम जंच गया और इस तरह युसुफ़ मियां दिलीप कुमार के नाम से ‘ज्वार-भाटा’ फ़िल्म के नायक बनकर रुपहले परदे पर आए। चालीस के दशक में उनका गीत ‘नैया को खेवैया के किया हमने हवाले’ ′ज्वारा भाटा′ के साथ ख़ासा लोकप्रिय हुआ था।
फिल्मों के लिए गीत लिखने के बावजूद उनकी रचनाओं की साहित्यिक गरिमा कायम रही। ‘भाभी की चूड़ियां’ फिल्म का गीत ‘ज्योति कलश छलके’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के सभी गीत और शहीदों के लिए लिखा गया उनका ‘समर में हो गए अमर’ गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।
उनके 17 कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक जीवनी और अनेक रचनाएँ पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उनकी प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं-

प्रवासी के गीत, मिट्टी और फूल, अग्निशस्य, प्यासा निर्झर, मुठ्ठी बंद रहस्य (कविता-संग्रह) मनोकामिनी, द्रौपदी, उत्तरजय सुवर्णा (प्रबंध काव्य) आधुनिक कवि, लाल निशान (काव्य-संयचन) ज्वाला-परचूनी (कहानी-संग्रह, 1942 में 'कड़वी-मीठी बात' नाम से प्रकाशित) मोहनदास कर्मचंद गांधी : एक प्रेरक जीवनी, सांस्कृतिक संक्राति और संभावना (भाषण)। लगभग 55 फ़िल्मों में 650 गीत एवं 'महाभारत' का पटकथा-लेखन और गीत-रचना।

11 फ़रवरी , 1989 ई. को हृदय-गति रुक जाने से पंडित नरेन्द्र शर्मा का निधन मुम्बई, महाराष्ट्र में हो गया।

शनिवार, 10 फ़रवरी 2024

रवि टंडन

#17feb
#11feb 
रवि टंडन
अभिनेत्री रवीना टंडन के पिता

🎂जन्म 17 फ़रवरी, 1935
जन्म भूमि आगरा, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 11 फ़रवरी, 2022

मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
संतान पुत्र- राजीव टंडन
पुत्री- रवीना टंडन

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'नजराना', 'मुकद्दर', 'मजबूर', 'खेल खेल में', 'अनहोनी', 'खुद्दार', 'जिंदगी', आदि।
प्रसिद्धि फ़िल्म निर्देशक व प्रोड्यूसर
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी फिल्म ‘लव इन शिमला’ और ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ में फिल्म निर्देशन की बारीकियां सीखने के बाद रवि टंडन ने अपनी पहली फिल्म बतौर निर्देशक ‘अनहोनी’ बनाई।
रवि टंडन (अंग्रेज़ी: Ravi Tandon, जन्म- 17 फ़रवरी, 1935; मृत्यु- 11 फ़रवरी, 2022) जानेमाने भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे। वह हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री रवीना टंडन के पिता थे। संजीव कुमार के करीबी मित्रों में शामिल रहे रवि टंडन ने फिल्म निर्देशक आर. के. नय्यर के सहायक के रूप में काम शुरू किया था। 'इन्क्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन' की ओर से फिल्म निर्देशक रवि टंडन को साल 2020 में 'ब्रज रत्न अवार्ड' से सम्मानित किया गया था।

परिचय
रवि टंडन का जन्म 17 फ़रवरी, 1935 को उत्तर प्रदेश में आगरा शहर के माइथान में एक पंजाबी फैमिली में हुआ था। वह बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे। उन्होंने बॉलीवुड में कई सुपर हिट फिल्में बनाई थीं। उनके कॅरियर में 'नजराना', 'मुकद्दर', 'मजबूर', 'खेल खेल में', 'अनहोनी', 'खुद्दार', 'जिंदगी', आदि फिल्में शामिल हैं। रवि टंडन ने वीना टंडन से शादी की थी, जिससे उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा राजीव जो एक्टर है और एक बेटी रवीना टंडन, जो बॉलीवुड अभिनेत्री हैं। संजीव कुमार के करीबी मित्रों में शामिल रहे रवि टंडन ने फिल्म निर्देशक आर. के. नय्यर के सहायक के रूप में काम शुरू किया था।

फ़िल्म निर्देशन
फिल्म ‘लव इन शिमला’ और ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ में फिल्म निर्देशन की बारीकियां सीखने के बाद रवि टंडन ने अपनी पहली फिल्म बतौर निर्देशक ‘अनहोनी’ बनाई। इस फिल्म में संजीव कुमार के अभिनय की तारीफ अब तक होती है। इसके बाद उन्होंने ऋषि कपूर को लेकर फिल्म ‘खेल खेल में’ बनाई। इसी की रीमेक के तौर पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ी’ बनी।

ब्रज रत्न पुरस्कार
रवीना टंडन, रवि टंडन के साथ
'इन्क्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन' की ओर से फिल्म निर्देशक रवि टंडन को साल 2020 में 'ब्रज रत्न अवार्ड' से सम्मानित किया गया था। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण रवि टंडन आगरा नहीं आ सके थे। फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डाबर के अनुसार, रवि के छोटे भाई रज्जू टंडन ने अवार्ड लिया था। डाबर का कहना था कि ब्रज रत्न अवार्ड मिलने पर रवि टंडन ने कहा था कि मेरे शहर ने मुझे जो अवार्ड दिया है, वह मेरे जीवन के खास अवार्ड में से एक है। मुंबई में रहते हुए भी ब्रज रत्न अवार्ड मुझे मेरे शहर की खुशबू से हमेशा महकाता रहेगा।

सावन की परिक्रमा
फिल्म निर्देशक रवि टंडन के मकान के पास रहने वाले रक्षा मंत्रालय से सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखाधिकारी विष्णु नारायण टंडन को 1950 में माइथान, आगरा की गलियों में खेले जाने वाले क्रिकेट मैचों की याद ताजा थी। उन्होंने बताया था कि काली टोपी, लाल रुमाल में रवि टंडन ने जब अभिनय किया था तो मेरे पास फोन आया था। उस समय ट्रंक काल चलते थे। मैं उस समय काफी खुश हुआ था। घर पास-पास था, इसलिए उनसे भाई जैसा रिश्ता हो गया था। विष्णु नारायण टंडन बताते हैं कि एक बार मेरे बड़े भाई सावन में बल्केश्वर महादेव की परिक्रमाम लगाने गए। रवि टंडन नहीं जा सके। वह खूब रोए। इसके बाद मां के कहने पर मैं उन्हें बसंत टॉकीज पर भल्ला खिलाकर वापस लौटा लाया। मां को बता दिया कि परिक्रमा पूरी हो गई।

पिता की जन्मस्थली देख खुश हुई थी रवीना
रवीना टंडन के साथ रवि टंडन
माइथान में रहने वाले भारतभूषण गप्पी के अनुसार, काफी कम लोगों को यह मालूम है कि रवीना का जन्म मुंबई में हुआ था। चार साल पहले एक कार्यक्रम में आईं रवीना टंडन से जब मैंने पूछा कि माइथान के बारे में कितना जानती हैं। उस पर उन्होंने कहा था कि माइथान मेरे पिता की वो जमीं हैं जहां से उनकी जीवन की सफलता की कहानी शुरू होती है। पापा मुझे माईथान की गलियों के बारे में बताते हैं, तो काफी उत्सुक हो जाती हूं। उन्होंने कहा था कि पिता की जन्मस्थली पर आकर गौरवान्वित महसूस करती हैं।

मृत्यु
फ़िल्म निर्देशक रवि टंडन की मृत्यु 11 फ़रवरी, 2022 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुई। उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित घर पर सुबह अंतिम सांसें लीं। वह बढ़ती उम्र संबधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की जानकरी उनकी बेटी रवीना टंडन ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी थी। पिता का अंतिम संस्कार रवीना ने ही किया।
📽️

1987 नजराना
1986 एक मैं और एक तू
1985 जवाब
राही बदल गए
बांड 303
1984 आन और शान
1982 ख़ुद-दार
1981 वक़्त की दीवार
1979 झूठा कहीं का
1978 चोर हो तो ऐसा
मुकद्दर
1976 जिंदगी
1975 अपने रंग हज़ार
खेल-खेल में
1974 मजबूर

निर्माण
1973 अनहोनी
निर्माता के रूप में
1986 एक मैं और एक तू
1975 अपने रंग हज़ार
1973 अनहोनी

सहायक निदेशक के रूप में
1963 ये रास्ते हैं प्यार के मुख्य

सहायक निदेशक
1960 शिमला में प्यार सहायक
लेखक के रूप में
1973 अनहोनी कहानी

अभिनेता के रूप में
1960 शिमला में प्यार

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...