शनिवार, 10 फ़रवरी 2024

रवि टंडन

#17feb
#11feb 
रवि टंडन
अभिनेत्री रवीना टंडन के पिता

🎂जन्म 17 फ़रवरी, 1935
जन्म भूमि आगरा, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 11 फ़रवरी, 2022

मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
संतान पुत्र- राजीव टंडन
पुत्री- रवीना टंडन

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'नजराना', 'मुकद्दर', 'मजबूर', 'खेल खेल में', 'अनहोनी', 'खुद्दार', 'जिंदगी', आदि।
प्रसिद्धि फ़िल्म निर्देशक व प्रोड्यूसर
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी फिल्म ‘लव इन शिमला’ और ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ में फिल्म निर्देशन की बारीकियां सीखने के बाद रवि टंडन ने अपनी पहली फिल्म बतौर निर्देशक ‘अनहोनी’ बनाई।
रवि टंडन (अंग्रेज़ी: Ravi Tandon, जन्म- 17 फ़रवरी, 1935; मृत्यु- 11 फ़रवरी, 2022) जानेमाने भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे। वह हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री रवीना टंडन के पिता थे। संजीव कुमार के करीबी मित्रों में शामिल रहे रवि टंडन ने फिल्म निर्देशक आर. के. नय्यर के सहायक के रूप में काम शुरू किया था। 'इन्क्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन' की ओर से फिल्म निर्देशक रवि टंडन को साल 2020 में 'ब्रज रत्न अवार्ड' से सम्मानित किया गया था।

परिचय
रवि टंडन का जन्म 17 फ़रवरी, 1935 को उत्तर प्रदेश में आगरा शहर के माइथान में एक पंजाबी फैमिली में हुआ था। वह बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे। उन्होंने बॉलीवुड में कई सुपर हिट फिल्में बनाई थीं। उनके कॅरियर में 'नजराना', 'मुकद्दर', 'मजबूर', 'खेल खेल में', 'अनहोनी', 'खुद्दार', 'जिंदगी', आदि फिल्में शामिल हैं। रवि टंडन ने वीना टंडन से शादी की थी, जिससे उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा राजीव जो एक्टर है और एक बेटी रवीना टंडन, जो बॉलीवुड अभिनेत्री हैं। संजीव कुमार के करीबी मित्रों में शामिल रहे रवि टंडन ने फिल्म निर्देशक आर. के. नय्यर के सहायक के रूप में काम शुरू किया था।

फ़िल्म निर्देशन
फिल्म ‘लव इन शिमला’ और ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ में फिल्म निर्देशन की बारीकियां सीखने के बाद रवि टंडन ने अपनी पहली फिल्म बतौर निर्देशक ‘अनहोनी’ बनाई। इस फिल्म में संजीव कुमार के अभिनय की तारीफ अब तक होती है। इसके बाद उन्होंने ऋषि कपूर को लेकर फिल्म ‘खेल खेल में’ बनाई। इसी की रीमेक के तौर पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ी’ बनी।

ब्रज रत्न पुरस्कार
रवीना टंडन, रवि टंडन के साथ
'इन्क्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन' की ओर से फिल्म निर्देशक रवि टंडन को साल 2020 में 'ब्रज रत्न अवार्ड' से सम्मानित किया गया था। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण रवि टंडन आगरा नहीं आ सके थे। फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डाबर के अनुसार, रवि के छोटे भाई रज्जू टंडन ने अवार्ड लिया था। डाबर का कहना था कि ब्रज रत्न अवार्ड मिलने पर रवि टंडन ने कहा था कि मेरे शहर ने मुझे जो अवार्ड दिया है, वह मेरे जीवन के खास अवार्ड में से एक है। मुंबई में रहते हुए भी ब्रज रत्न अवार्ड मुझे मेरे शहर की खुशबू से हमेशा महकाता रहेगा।

सावन की परिक्रमा
फिल्म निर्देशक रवि टंडन के मकान के पास रहने वाले रक्षा मंत्रालय से सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखाधिकारी विष्णु नारायण टंडन को 1950 में माइथान, आगरा की गलियों में खेले जाने वाले क्रिकेट मैचों की याद ताजा थी। उन्होंने बताया था कि काली टोपी, लाल रुमाल में रवि टंडन ने जब अभिनय किया था तो मेरे पास फोन आया था। उस समय ट्रंक काल चलते थे। मैं उस समय काफी खुश हुआ था। घर पास-पास था, इसलिए उनसे भाई जैसा रिश्ता हो गया था। विष्णु नारायण टंडन बताते हैं कि एक बार मेरे बड़े भाई सावन में बल्केश्वर महादेव की परिक्रमाम लगाने गए। रवि टंडन नहीं जा सके। वह खूब रोए। इसके बाद मां के कहने पर मैं उन्हें बसंत टॉकीज पर भल्ला खिलाकर वापस लौटा लाया। मां को बता दिया कि परिक्रमा पूरी हो गई।

पिता की जन्मस्थली देख खुश हुई थी रवीना
रवीना टंडन के साथ रवि टंडन
माइथान में रहने वाले भारतभूषण गप्पी के अनुसार, काफी कम लोगों को यह मालूम है कि रवीना का जन्म मुंबई में हुआ था। चार साल पहले एक कार्यक्रम में आईं रवीना टंडन से जब मैंने पूछा कि माइथान के बारे में कितना जानती हैं। उस पर उन्होंने कहा था कि माइथान मेरे पिता की वो जमीं हैं जहां से उनकी जीवन की सफलता की कहानी शुरू होती है। पापा मुझे माईथान की गलियों के बारे में बताते हैं, तो काफी उत्सुक हो जाती हूं। उन्होंने कहा था कि पिता की जन्मस्थली पर आकर गौरवान्वित महसूस करती हैं।

मृत्यु
फ़िल्म निर्देशक रवि टंडन की मृत्यु 11 फ़रवरी, 2022 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुई। उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित घर पर सुबह अंतिम सांसें लीं। वह बढ़ती उम्र संबधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की जानकरी उनकी बेटी रवीना टंडन ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी थी। पिता का अंतिम संस्कार रवीना ने ही किया।
📽️

1987 नजराना
1986 एक मैं और एक तू
1985 जवाब
राही बदल गए
बांड 303
1984 आन और शान
1982 ख़ुद-दार
1981 वक़्त की दीवार
1979 झूठा कहीं का
1978 चोर हो तो ऐसा
मुकद्दर
1976 जिंदगी
1975 अपने रंग हज़ार
खेल-खेल में
1974 मजबूर

निर्माण
1973 अनहोनी
निर्माता के रूप में
1986 एक मैं और एक तू
1975 अपने रंग हज़ार
1973 अनहोनी

सहायक निदेशक के रूप में
1963 ये रास्ते हैं प्यार के मुख्य

सहायक निदेशक
1960 शिमला में प्यार सहायक
लेखक के रूप में
1973 अनहोनी कहानी

अभिनेता के रूप में
1960 शिमला में प्यार

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