#24feb
संजय लीला भंसाली
🎂जन्मः 24 फ़रवरी 1964
भांजियां या भतीजियां: शर्मिन सेगल, सिमरन सेगल, शर्मिन सहगल
प्रोडक्शन कंपनी: भंसाली प्रोडक्शंस
इस संगठन की स्थापना की: भंसाली प्रोडक्शंस
माता-पिता: नवीन भंसाली, लीला भंसाली
बहन: बेला सेगल
हिन्दी फिल्म उद्योग बॉलीवुड के एक निर्देशक हैं। वह भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान के छात्र रह चुके हैं।
शानदार सेट, शाही किरदार, गानों में गहराई और दमदार कहानी..., संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) की फिल्मों की खासियत यहीं खत्म नहीं होती है। एडिटर और असिस्टेंट बनकर अपना करियर शुरू करने वाले भंसाली आज सिनेमा के मंझे हुए निर्देशक हैं। उन्होंने सिनेमा को हम दिल दे चुके सनम, देवदास, पद्मावत, राम-लीला और ब्लैक जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाकर इतिहास रच दिया।
पिता थे प्रोड्यूसर, फिर भी हालत थी मंदी
24 फरवरी 1963 को मुंबई में जन्मे भंसाली के पिता नवीन भंसाली भी प्रोड्यूसर हुआ करते थे, जिन्होंने जहाजी लुटेरा (1958) जैसी फिल्मों का निर्माण किया था। पिता भले ही ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े रहे, लेकिन हालत मंदी रही। बचपन से ही छोटा और बेरंग मकान देखा, गरीबी में गुजारा किया।
संजय लीला भंसाली का बचपन गरीबी में बीता। वह और उनकी बहन अपने माता-पिता के साथ चॉल में रहा करते थे। मां कपड़े सिलकर गुजारा करती थीं।
पिता थे प्रोड्यूसर, फिर भी हालत थी मंदी
24 फरवरी 1963 को मुंबई में जन्मे भंसाली के पिता नवीन भंसाली भी प्रोड्यूसर हुआ करते थे, जिन्होंने जहाजी लुटेरा (1958) जैसी फिल्मों का निर्माण किया था। पिता भले ही ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े रहे, लेकिन हालत मंदी रही। बचपन से ही छोटा और बेरंग मकान देखा, गरीबी में गुजारा किया।
संजय लीला भंसाली का बचपन गरीबी में बीता। वह और उनकी बहन अपने माता-पिता के साथ चॉल में रहा करते थे। मां कपड़े सिलकर गुजारा करती थीं।
1942: ए लव स्टोरी फिल्म से उन्होने, अपनी मां को श्रद्धांजली देने के लिये, अपने नाम मे "लीला" लिखना शुरू किया इन्होंने 2018 में प्रदर्शित हुई पद्मावत का भी निर्देशन किया जिस पर बहुत विवाद हुआ था।
भंसाली ने अपना कैरियर विधु विनोद चोपड़ा के साथ बतौर सहायक निर्देशक शुरू किया। विधु के साथ भंसाली ने परिन्दा और 1942: ए लव स्टोरी जैसी फिल्मे की सन 2002 मे आयी भंसाली निर्देशित फिल्म देवदास उस समय की सबसे महंगी फिल्म थी। इस फिल्म को के निर्माण में 50 करोड रुपये लगे थे और इसने करीब 100 करोड रूपये का व्यवसाय किया था। उस साल इस फिल्म ने 5 राष्ट्रीय पुरस्कार और 10 फिल्मफेयर पुरस्कार जीते थे। टाइम पत्रिका ने नई सदी के अब तक के सालों में बनी सर्वश्रेष्ठ दस फिल्मों में देवदास को आठ्वीं जगह दी है 2005 मे प्रदर्शित उनकी फिल्म ब्लैक के लिये उन्हे एक बार फिर से हिन्दी सिनेमा का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
फिल्में बतौर निर्माता
2007 साँवरिया
2005 ब्लैक
1999 हम दिल दे चुके सनम
2010 गुज़ारिश
फिल्में बतौर निर्देशक
2018 पद्मावत
2015 बाजीराव मस्तानी
2013 गोलियों की रासलीला रामलीला
2007 साँवरिया
2005 ब्लैक
2002 देवदास
1999 हम दिल दे चुके सनम
1996 खामोशी
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