रविवार, 18 फ़रवरी 2024

निम्मी(नवाब बानो)


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निम्मी(नवाब बानो)
🎂जन्म की तारीख और समय: 18 फ़रवरी 1933, आगरा
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 25 मार्च 2020, मुम्बई

पति: एस० अली रज़ा (विवा. 1965–2007)
माता-पिता: वहीदान, अब्दुल हक़ीम

नवाब बानो अपने मंचीय नाम निम्मी से प्रसिद्ध हिन्दी फिल्मों की 1950 से 1960 के दशक की अभिनेत्री थी भारतीय हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। उनका असली नाम 'नवाब बानू' था। बॉलीवुड की इस मासूम- सी ख़ूबसूरत अभिनेत्री का राज कपूर ने फ़िल्मी दुनिया से परिचय करवाया था। हालांकि निम्मी की फ़िल्मी शुरुआत सहायक अभिनेत्री के तौर पर राज कपूर और नर्गिस अभिनीत फ़िल्म बरसात' ( 1949) से हुई थी। दिलचस्प बात तो यह भी है कि इस ख़ूबसूरत अभिनेत्री पर राज कपूर की नज़र उस समय पड़ी, जब वे एक फ़िल्म की शूटिंग देख रही

थीं। निम्मी अपनी समकालीन नायिकाओं मधुबाला, नर्गिस, नूतन , मीना कुमारी , सुरैया और गीता बाली के समान ही प्रतिभाशाली थीं। निम्मी ख़ूबसूरत आँखों वाली सम्मोहक अभिनेत्री मानी जाती हैं। फ़िल्म में उनकी भूमिका को कभी भी सहनायिका के रूप में नहीं लिया

गया। उन पर बहुत-सी फ़िल्मों के यादगार गीत फ़िल्माए गए थे। निर्देशक के. आसिफ़ की फ़िल्म 'लव एंड गॉड' उनकी आखिरी फ़िल्म थी।


अभिनेत्री निम्मी का जन्म 18 फ़रवरी, 1933 को आगरा में हुआ था। उनकी माँ का नाम वहीदन था, जो अपने दौर की मशहूर गायिका और अभिनेत्री थीं। निम्मी के पिता अब्दुल हकीम मिलिट्री में ठेकेदार थे। जब निम्मी केवल नौ वर्ष की थीं, तब इनकी माँ का स्वर्गवास का हो गया। उनके पिता ने निम्मी को ऐबटाबाद रहने के लिए दादी के पास भेज दिया। निम्मी के पिता स्वयं आगरा छोड़ कर मेरठ आ गये।


सन 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद शरणार्थियों की भीड़ में निम्मी और उनकी दादी भी थीं। निम्मी अपनी दादी के साथ बम्बई (वर्तमान मुम्बई) आ गयीं, जहाँ उनकी मौसी ज्योति रहती थीं, जो की हिन्दी फ़िल्मों में काम करती थीं। अब बम्बई निम्मी का नया आशियाना था, जहाँ एक रिफ्यूजी लड़की इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए तैयार थी।


निम्मी कभी स्कूल नहीं गई थीं। इसलिए घर की पढ़ाई ने उन्हें उर्दू तक ही सीमित रखा। वैसे फ़िल्मों में काम करते समय उन्होंने अंग्रेज़ी जरूर सीखी थी, लेकिन वे

बातचीत अपनी ही जुबान में करती थीं। एक दिन काम करते वक्त निम्मी की मुलाकात लेखक अली रजा से हुई। संवाद की रिहर्सल कराने के लिए अली रजा ने निम्मी की मदद की। बाद में अली रजा ने ही उनमें शायरी का शौक़ पैदा कर दिया। बाद में यह शायरी दोस्ती और प्यार में बदल गई तो निम्मी ने लेखक-पटकथाकार अली रजा से शादी कर ली


सन 1948 में प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता निर्देशक महबूब ख़ान, सेंट्रल स्टूडियो बम्बई में अपनी फ़िल्म 'अंदाज़' की शूटिंग कर रहे थे। 'अंदाज़' में दिलीप कुमार और राज कपूर के साथ थीं नर्गिस। इन तीनों ने पहली और आखिरी बार एक साथ काम किया था। निम्मी भी यहाँ मौजूद थीं। वह अक्सर शूटिंग देखने आती थीं। यहीं उन्हें राज कपूर ने देखा। उन दिनों राज कपूर फ़िल्म 'बरसात' ( 1949 ) के लिए एक नए चेहरा तलाश रहे थे। 'अंदाज' के सेट पर निम्मी का शर्मीला व्यवहार देखने के बाद 'बरसात' में अभिनेता प्रेमनाथ के साथ निम्मी को ले लिया गया। फ़िल्म 'बरसात' में निम्मी हृदयहीन शहरी प्रेम नाथ आदमी को प्यार करती है। निम्मी ने इस फ़िल्म में एक मासूम पहाड़ी गड़ेरिन की भूमिका निभाई थी


'बरसात' फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर इतिहास बनाया। 'बरसात' को अभूतपूर्व महत्त्वपूर्ण और व्यावसायिक सफलता मिली थी। स्थापित और लोकप्रिय सितारों नर्गिस, राज कपूर और प्रेमनाथ की मौजूदगी के बावजूद निम्मी ने अपना किरदार बखूबी निभाया था। फ़िल्म के लोकप्रिय शीर्षक गीत "बरसात में हम से मिले तुम", "जिया बेक़रार है", "पतली कमर है" सभी निम्मी पर फ़िल्माये गये थे। 'बरसात' में पहली बार हिन्दी फ़िल्मों

में बलात्कार का सीन सामने आया और यह बलात्कार क्लासिक बन गया। फ़िल्म का चरमोत्कर्ष भी नवेली अभिनेत्री के इर्द-गिर्द घूमता रहा। 'बरसात' की भारी सफलता ने निम्मी को स्टार बना दिया। राज कपूर (भवंरा), देव आनंद (सज़ा, आँधियाँ) जैसे चोटी के नायकों के साथ निम्मी ने काम किया। ' दीदार' ( 1951 ) और 'दाग' ( 1952 ) जैसी फ़िल्मों की सफलता के बाद दिलीप कुमार के साथ उनकी बहुत लोकप्रिय और भरोसेमंद स्क्रीन जोड़ी साबित हुई।


25 मार्च 2020 में मुम्बई में उनका निधन हो गया

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