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मंगलवार, 23 जनवरी 2024

नरेंद्र चंचल

नरेन्द्र चंचल
#16oct
#22jan 
🎂16 अक्टूबर 1940
⚰️22 जनवरी 2021

एक भारतीय गायक थे, जो धार्मिक गीतों और भजनों में माहिर थे।नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर, 1940 को नामक मंडी, अमृतसर में एक धार्मिक पंजाबी परिवार में हुआ था और 22 जनवरी, 2021 को उनका निधन हो गया। वह एक धार्मिक माहौल में बड़े हुए, जिसने उन्हें भजन और आरती गाना शुरू करने के लिए प्रेरित किया।  वह लंबे समय से बीमार थे और अपोलो अस्पताल दिल्ली में दोपहर 12:15 बजे उनका निधन हो गया सालों के संघर्ष के बाद, चंचल ने 1973 की फिल्म बॉबी के लिए बॉलीवुड गीत बेशक मंदिर मस्जिद गाया और फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक अवार्ड जीता  उन्होंने अमेरिकी राज्य जॉर्जिया की मानद नागरिकता भी अर्जित की।चंचल ने मिडनाइट सिंगर नामक एक आत्मकथा जारी की है जो उनके जीवन, संघर्षों और कठिनाइयों को बताती है।  वह 29 दिसंबर को हर साल कटरा वैष्णो देवी का दौरा करते थे और अंतिम दिन अपने प्रोग्राम का प्रदर्शन करते थे मस्तिष्क की जटिलताओं के कारण 22 जनवरी 2021 को दोपहर 12:15 बजे नई दिल्ली में उनका निधन हो गया

सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

लच्छू महाराज

लच्छू महाराज
🎂जन्म- 16 अक्टूबर, 1944, बनारस 
⚰️मृत्यु- 27 जुलाई, 2016
 भारत के जानेमाने तबला वादक थे।
अभिभावक वासुदेव महाराज
पति/पत्नी टीना (फ़्राँसीसी महिला)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय शास्त्रीय संगीत
प्रसिद्धि तबला वादक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सन 1972 में भारत सरकार की ओर से लच्छू महाराज ने 27 देशों का दौरा किया था। 1972 में ही केंद्र सरकार की ओर से उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित करने का प्रस्ताव किया गया था, किंतु उन्‍होंने 'पद्मश्री' लेने से मना कर दि‍या।
लच्छू महाराज 
 जन्म- 16 अक्टूबर, 1944, बनारस मृत्यु- 27 जुलाई, 2016) भारत के जानेमाने तबला वादक थे। उन्होंने बनारस घराने की तबला बजाने की परम्परा को आगे बढ़ाया था। उनके कई शिष्य देश-विदेश में तबला बजा रहे हैं। लच्छू महाराज बेहद सादगी पसंद व्यक्ति थे, यही कारण था कि उन्होंने कभी कोई सम्मान ग्रहण नहीं किया।

लच्छू महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नगरी बनारस में 16 अक्टूबर, सन 1944 में हुआ और वे वहीं पले-बढ़े। इनके पिता का नाम वासुदेव महाराज था। लच्छू महाराज बारह भाई-बहनों में चौथे थे।
एक फ़्राँसीसी महिला टीना से लच्छू महाराज ने विवाह किया था। उनकी एक पुत्री है, जो स्विट्जरलैण्ड में है।
पूरी दुनिया में अपनी पेशेवर प्रस्तुति के अलावा लच्छू जी ने कई बॉलीवुड फ़िल्मों के लिए भी तबला बजाया।
लच्छू महाराज के वादन की विशेषता थी कि उनके पिता वासुदेव महाराज ने विभिन्न घरानों के तबला वादकों की देखभाल करते हुए उनके घरानों की शेष वंदिशों को संग्रहित कर लच्छू महाराज को प्रदान किया।
लच्छू महाराज ने अपने विकट अभ्यास के ज़रिये स्वतंत्र तबला वादक एवं संगत दोनों में ख्याति प्राप्त की। आप गायन, वादन एवं नृत्य तीनों की संगत में निपुण थे।
लच्छू महाराज एक स्वाभिमानी एवं पारंपरिक कलाकार थे, जिन्होंने छोटे मोटे स्वार्थों के लिए कोई भी गलत समझौते नहीं किये।
हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता गोविन्दा लच्छू महाराज के भांजे हैं। उन्होंने बचपन में ही लच्छू महाराज को अपना गुरु मान लिया था। गोविन्दा ने तबला बजाना लच्छू महाराज से ही सीखा। लच्छू महाराज जब कभी भी मुम्बई जाते तो गोविन्दा के घर पर ही रुकते थे।
सन 1972 में भारत सरकार की ओर से लच्छू महाराज ने 27 देशों का दौरा किया था। 1972 में ही केंद्र सरकार की ओर से उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित करने का प्रस्ताव किया गया था, किंतु उन्‍होंने 'पद्मश्री' लेने से मना कर दि‍या। वे कहते थे- "श्रोताओं की वाह और तालि‍यों की गड़गड़ाहट ही कलाकार का पुरस्‍कार होता है।"
लच्छू महाराज का निधन 27 जुलाई, 2016 को हुआ था। उनकी अंतिम संस्कार बनारस के मणिकर्णिका घाट पर किया गया।
फ़िल्मी सितारे गोविन्दा ने लच्छू महाराज के निधन पर लिखा कि- "पंडित लच्छू महाराज का निधन भारतीय शास्त्री संगीत की दुनिया के लिए बहुत बडी क्षति है। वह लब्ध प्रतिष्ठित तबला वादक थे।" कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उन्हें तबला के सिरमौरों में एक बताया और उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी लच्छू महाराज के निधन पर दु:ख प्रकट किया। प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी ने भी लच्छू महाराज के निधन पर शोक जताया और कहा कि ऐसे कलाकार हमेशा पैदा नहीं होते।

नरींदर चंचल

नरेंद्र चंचल
प्रसिद्धि भजन गायक मातेश्वरी भगत
🎂जन्म 16 अक्टूबर, 1940
जन्म भूमि अमृतसर, पंजाब
⚰️मृत्यु 22 जनवरी, 2021
मृत्यु स्थान दिल्ली

अभिभावक माता- कैलाशवती
पिता- चेतराम खरबंदा

पति/पत्नी नम्रता चंचल
संतान दो बेटे, एक बेटी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र गायकी
मुख्य फ़िल्में बॉबी, बेनाम, रोटी कपड़ा और मकान, आशा तथा अवतार आदि।
प्रसिद्धि भजन गायक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी राजेश खन्ना और शबाना आज़मी अभिनीत फिल्म 'अवतार' में महेंद्र कपूर और आशा भोंसले के साथ नरेंद्र चंचल का गाया गीत 'चलो बुलाया आया है माता ने बुलाया है' माता की बेहद प्रसिद्ध भेंटों में शु्मार है। मुख्य रूप से उन्हें माता के भजन गायक के रूप में जाना जाता था। नरेंद्र चंचल ने बहुत-से भजन और हिंदी फिल्म में गीत गाए थे। उनके गीत के बिना हर दुर्गा पूजा अधूरी होती थी। पूरे उत्तर भारत में उनका बड़ा नाम था। नरेंद्र चंचल की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर शोमैन राज कपूर की फिल्मों के लिए भी गाने गाए। फ़िल्म 'बेनाम' आदि में।
चंचल अपनी माता की वजह से नरेंद्र चंचल की भजनों में रुचि बढ़ी थी। उन्होंने बचपन से ही अपनी मां को माता रानी के भजन गाते सुना था। नरेंद्र चंचल अपनी पहली गुरु अपनी मां को माना करते थे। इसके बाद उन्होंने प्रेम त्रिखा से संगीत सीखा। फिर वह भजन गाने लगे। नरेंद्र चंचल ने 'मिडनाइट सिंगर' नामक एक बायोग्राफी भी जारी की, जो उनके जीवन, संघर्षों और कठिनाइयों को बताती है।

नरेंद्र चंचल ने सालों साल के संघर्ष के बाद 1973 में फिल्म 'बॉबी' के लिए बॉलीवुड गीत 'बेशर्क मंदिर मस्जिद' गाया और फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक अवार्ड अपने नाम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने 'रोटी कपडा और मकान' जैसी बड़ी फ़िल्म के लिए भी गाने गए। उन्होंने भक्ति गीतों की दुनिया में अपनी एक अनोखी पहचान बनाई। नरेंद्र चंचल ने अमेरिकी राज्य जॉर्जिया की नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी।
🌹लोकप्रियता🌹
नरेंद्र चंचल पिछले कई दशकों से कीर्तन और जगरातों की दुनिया में सक्रिय थे। उन्होंने राज कपूर की फिल्म 'बॉबी' में 'बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो' गाना गाया। ये गाना आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इस गाने से उन्हें पहचान मिली।
नरेंद्र चंचल ने 1974 में 'बेनाम' फिल्म में 'मैं बेनाम हो गया' गीत गाया। 1974 में ही उन्होंने 'रोटी कपड़ा और मकान' में 'बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई' गाने को आवाज दी।

फिल्म 'आशा' (1980) में नरेंद्र चंचल ने 'तूने मुझे बुलाया' गीत गाया, जो काफी हिट हुआ था। इसके बाद 1983 में फिल्म 'अवतार' के लिए उन्होंने भजन 'चलो बुलावा आया है' गाया। ये शबाना आज़मी और राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था। यह गाना भी बेहद लोकप्रिय हुआ। इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। इसके अलावा उन्होंने 1985 में फिल्म 'काला सूरज' के लिए 'दो घूंट पिला दे' और 1994 में फिल्म 'अनजाने' के लिए 'हुए हैं कुछ ऐसे वो हमसे पराए' गीत गाया।

कोरोना पर भजन 

मार्च 2020 में नरेंद्र चंचल का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें वे मां दुर्गा का एक भजन गाते दिखे थे। इसमें उन्होंने कोरोना का भी जिक्र किया था। नरेंद्र चंचल द्वारा जगराते में गाया गया उनका वीडियो लोगों के बीच काफी पॉपुलर हुआ। इसमें उन्होंने गाया कि "डेंगू भी आया और स्वाइन फ्लू भी आया, चिकन गोनिया ने शोर मचाया, कित्थे आया कोरोना?"

मृत्यु
भजन सम्राट नरेंद्र चंचल का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में 22 जनवरी, 2021 को निधन हुआ। वह 80 साल के थे। नरेंद्र चंचल पिछले तीन महीने से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक़, शुक्रवार के दिन दोपहर करीब 12.30 पर उन्होंने अंतिम सांस ली। गायक नरेंद्र चंचल के ब्रेन में क्लोटिंग थी।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दु:ख जताया। उन्होंने लिखा- "लोकप्रिय भजन गायक नरेंद्र चंचल जी के निधन के समाचार से अत्यंत दु:ख हुआ है। उन्होंने भजन गायन की दुनिया में अपनी ओजपूर्ण आवाज से विशिष्ट पहचान बनाई। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम् शांति"।

मेने अपने कनाडा प्रवास के दौरान नरेंद्र चंचल के निधन पर शोक व्यक्त किया। और लिखा- "ये जानकर बहुत दु:ख हुआ कि प्रतिष्ठित और सबसे ज्यादा प्यारे नरेंद्र चंचल हमें छोड़कर चले गए। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना। उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना"।

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