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शुक्रवार, 15 सितंबर 2023

एम एस सुब्बा लक्ष्मी

एम एस सुब्बुलक्ष्मी

जन्म नाम मदुरै शनमुखावदिवु सुब्बुलक्ष्मी
🎂जन्म 16 सितंबर 1916
मदुरै , मद्रास प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत

⚰️मृत 11 दिसंबर 2004
चेन्नई , तमिलनाडु , भारत

शैलियां भारतीय शास्त्रीय संगीत
व्यवसाय शास्त्रीय गायक
आप ने छोटी आयु से संगीत का शिक्षण आरंभ किया और दस साल की उम्र में ही अपना पहला डिस्क रिकॉर्ड किया। इसके बाद आपनी मा शेम्मंगुडी श्रीनिवास अय्यर से कर्णाटक संगीत में, तथा पंडित नारायणराव व्यास से हिंदुस्तानी संगीत में उच्च शिक्षा प्राप्त की। आपने सत्रह साल की आयु में चेन्नई ही विख्यात 'म्यूज़िक अकाडमी' में संगीत कार्यक्रम पेश किया। इसके बाद आपने मलयालम से लेकर पंजाबी तक भारत की अनेक भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किये।
अभिनय
श्रीमती सुब्बुलक्ष्मी ने कई फ़िल्मों में भी अभिनय किया। इनमें सबसे यादगार है १९४५ के मीरा फ़िल्म में आपकी मुख्य भूमिका। यह फ़िल्म तमिल तथा हिन्दी में बनाई गई थी और इसमें आपने कई प्रसिद्ध मीरा भजन गाए।

विजय पाटिल

विजय पाटिल (मूल नाम)
प्रसिद्ध नाम रामलक्ष्मण
🎂जन्म 16 सितंबर, 1942
जन्म भूमि ?
⚰️मृत्यु 22 मई, 2021
मृत्यु स्थान नागपुर, महाराष्ट्र
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'मैंने प्यार किया', 'हम आपके हैं कौन', 'हम साथ साथ हैं', ‘पत्थर के फूल’, ‘100 डेज’, ‘प्रेम शक्ति’, ‘मेघा’ और ‘तराना’ आदि।
विद्यालय भातखंडे शिक्षण संस्थान
प्रसिद्धि संगीतकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी मराठी फिल्ममेकर और अभिनेता दादा कोंडके ने रामलक्ष्मण को अपनी फिल्म 'पांडु हवलदार' के लिए बतौर संगीतकार साइन किया था। इसके बाद सूरज बड़जात्या की फिल्मों में उन्होंने कई हिट गाने दिए।
आप जगत के प्रसिद्ध संगीतकार थे। राजश्री प्रोडक्शंस की ब्लॉकबस्टर फ़िल्में- 'मैंने प्यार किया', 'हम आपके हैं कौन' और 'हम साथ साथ हैं' में किये गये अपने काम के लिए वह विशेषतौर पर जाने जाते हैं। संगीतकार रामलक्ष्मण का असली नाम 'विजय पाटिल'  था। वह संगीतकार जोड़ी राम-लक्ष्मण में से एक लक्ष्मण थे। जबकि उनके जोड़ीदार राम यानी की राम सुरेंद्र थे। राम सुरेंद्र की मृत्यु के बाद विजय पाटिल यानी लक्ष्मण ने अपने नाम के साथ राम भी जोड़ लिया और इस प्रकार वह रामलक्ष्मण के नाम से भी जाने-पहचाने गये। उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया। हिंदी फिल्मों के अलावा रामलक्ष्मण ने मराठी और भोजपुरी फिल्मों के लिए भी काम किया था। रामलक्ष्मण की मुख्य फिल्मों में ‘मैंने प्यार किया’, ‘पत्थर के फूल’, ‘100 डेज’, ‘प्रेम शक्ति’, ‘मेघा’, ‘तराना’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘हम साथ साथ हैं’ सहित अन्य हैं।
उन्होंने 70 से फिल्मों में संगीत दिया। उन्होंने अपने पिता और चाचा से संगीत की शिक्षा ली थी। बाद में उन्होंने 'भातखंडे शिक्षण संस्थान' में संगीत का अध्ययन किया। हिंदी फिल्मों के अलावा रामलक्ष्मण ने मराठी और भोजपुरी फिल्मों के लिए भी काम किया था। रामलक्ष्मण पहले इंडस्ट्री में ‘लक्ष्मण’ के नाम से जाने जाते थे। इस बीच उन्होंने एक अन्य संगीतकार 'राम' के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया। हिंदी सिनेमा जगत में राम-लक्ष्मण मिलकर संगीत देते थे। लेकिन साल 1976 में फिल्म ‘एजेंट विनोद’ (1977) में गाना गाने के बाद अचानक संगीतकार राम का निधन हो गया और इसके बाद संगीतकार लक्ष्मण उर्फ विजय पाटिल ने अपना पूरा नाम रामलक्ष्मण रख लिया।

कॅरियर
रामलक्ष्मण ने करीब 150 फिल्मों में संगीत दिया था, जिसमें हिंदी के अलावा मराठी और भोजपुरी भी शामिल है। मराठी फिल्ममेकर और अभिनेता दादा कोंडके ने उन्हें अपनी फिल्म 'पांडु हवलदार' के लिए बतौर संगीतकार साइन किया था। इसके बाद सूरज बड़जात्या की फिल्मों में उन्होंने कई हिट गाने दिए।  'मैंने प्यार किया' (1989)' के गाने सुपरहिट हुए थे। इसके बाद 'हम आपके हैं कौन (1994)' और 'हम साथ साथ हैं' (1999) में भी उन्होंने संगीत दिया था। इस फिल्म के सारे गाने लोग आज भी बहुत पसंद करते हैं। इसके अलावा उन्होंने 'एजेंट विनोद', 'तराना' और 'अनमोल' जैसी फिल्मों में भी संगीत दिया।

अपने चार दशक से अधिक लंबे कॅरियर में उन्होंने हिंदी, मराठी और भोजपुरी में 150 से अधिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया और मनमोहन देसाई, महेश भट्ट, जीपी सिप्पी, अनिल गांगुली और सूरज बड़जात्या जैसे प्रसिद्ध फिल्म निर्देशकों के साथ काम किया।

रामलक्ष्मण के निधन पर 'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर ने भी शोक जताया। दिग्गज गायिका ने संगीतकार लक्ष्मण के निधन पर दु:ख जताते हुए लिखा, 'मुझे अभी पता चला कि बहुत गुणी और लोकप्रिय संगीतकार रामलक्ष्मण जी का स्वर्गवास हो गया है। ये सुन के मुझे बहुत दु:ख हुआ। वो बहुत अच्छे इंसान थे। मैंने उनके कई गाने गाए जो बहुत लोकप्रिय हुए। मैं उनको विनम्रतापूर्ण श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं।'

प्रसून जोशी कवि

प्रसून जोशी

🎂जन्म 16 सितम्बर, 1968
जन्म भूमि अल्मोड़ा, उत्तराखंड
अभिभावक देवेन्द्र कुमार जोशी और सुषमा जोशी
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र गीतकार, लेखक
शिक्षा एम.एस.सी, एम. बी.ए.
पुरस्कार-उपाधि फ़िल्म 'तारे ज़मीं पर' के गाने 'मां...' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, शैलेंद्र सम्मान आदि
प्रसिद्धि 'दिल्ली.6’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘रंग दे बस्ती’, ‘हम तुम’ और ‘फना’ जैसी फ़िल्मों में कई सुपरहिट गाने लिखे हैं।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी प्रसून जोशी विज्ञापन जगत् में "विज्ञापन गुरु" के नाम से विख्यात तो हैं ही इसके साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी 'मैकऐन इरिक्सन' में कार्यकारी अध्यक्ष हैं। सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार हैं। प्रसून जोशी विज्ञापन जगत् में 'विज्ञापन गुरु' के नाम से विख्यात तो हैं ही, इसके साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी 'मैकऐन इरिक्सन' में कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वे इस कंपनी का एशिया महाद्वीप में सजृनात्मक निदेशक की भूमिका निभा रहे हैं। इन व्यवसायिक गतिविधियों के साथ-साथ वे संवेदनशील लेखक, बॉलीवुड में गीत और गज़लों के रचियताओं में उनका नाम शीर्ष पर है। सुपरहिट फ़िल्म ‘तारे ज़मीन पर’ के गाने ‘मां...’ के लिए उन्हें 'राष्ट्रीय पुरस्कार' भी मिल चुका है।
परिचय
प्रसून जोशी का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले में 16 सितम्बर, 1968 को हुआ था। प्रसून जोशी का पैतृक गाँव दन्या, ज़िला अल्मोड़ा है। प्रसून जोशी के पिता का नाम श्री देवेन्द्र कुमार जोशी और उनकी माता का नाम श्रीमती सुषमा जोशी है। उनका बचपन एवं उनकी प्रारम्भिक शिक्षा  टिहरी, गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली एवं नरेन्द्रनगर में हुई क्योंकि उनके पिता उत्तर प्रदेश सरकार में 'शिक्षा निदेशक' थे और उनका  कार्यकाल अधिकतर इन्हीं जगहों पर रहा। प्रसून जोशी बचपन से ही प्रकृति, सृष्टि द्वारा सृजित चीजों एवं प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रति आकर्षित रहे। इसलिए लेखन उनके स्वभाव में स्वत: ही प्रवेश कर गया। बचपन में वे खुद की हस्तलिखित पत्रिका भी निकालते थे और इस प्रकार लेखन उनका शौक़ बना। जहां तक गीतों की रचना का प्रश्र है उनके माता-पिता संगीत के बहुत ज्ञाता थे। जब उन्होंने उनसे संगीत विरासत में ग्रहण किया और वे उसकी बारिकियों से वाकिफ़ हुए तो फिर वो गीतों के रचनाकार बने। बड़े होकर जब प्रसून जोशी ने व्यवसायिक शिक्षा (एमबीए) पूरी की तब उन्हें लगा कि  उन्हें सृजन को दूसरे माध्यम से भी आगे बढ़ाना चाहिए। यह माध्यम विज्ञापन के अलावा दूसरा नहीं था। काम चाहे लेखन का हो या विज्ञापन का दोनों ही अपनी बात को दूसरों के दिलों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
शिक्षा
प्रसून जोशी की प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा उत्तराखण्ड के गोपेश्वर एवं नरेन्द्रनगर में हुई। उन्होंने एम.एससी., के बाद एम.बी.ए. की पढ़ाई भी की।

शास्त्रीय संगीत की दीक्षा
गीतकार प्रसून के लिखे गीतों से हम सब वाकिफ हैं, पर बहुत कम लोग जानते है कि वो उन्होंने उस्ताद हफीज़ अहमद खान से शास्त्रीय संगीत की दीक्षा भी ले रखी है। उनके उस्ताद उन्हें ठुमरी गायक बनाना चाहते थे। उन दिनों को याद कर प्रसून बताते हैं कि उनके पास रियाज़ का समय नहीं होता था, तो बाईक पर घर लौटते समय गाते हुए आते थे और उनका हेलमेट उनके लिए "अकॉस्टिक" का काम करता था।
कार्य क्षेत्र
प्रसून संगीत को अपना उपार्जन नहीं बना पाये। उनके पिता उन्हें प्रशासन अधिकारी बनाना चाहते थे, पर ये उनका मिज़ाज नहीं था, तो MBA करने के बाद आखिरकार विज्ञापन की दुनिया में आकर उनकी रचनात्मकता को ज़मीन मिली। बचपन से उन्हें हिन्दी और उर्दू भाषा साहित्य में रुचि थी। उनके शहर रामपुर के एक पुस्तकालय में उर्दू शायरों का जबरदस्त संकलन मौजूद था। मात्र 17 साल की उम्र में उनका पहला काव्य संकलन आया। कविता अभी भी उनका पहला प्रेम है। प्रसून मानते हैं कि यदि संगीत के किसी एक घटक की बात की जाए जो आमो ख़ास सब तक पहुँचता हो और जहाँ हमने विश्व स्तर की निरंतरता बनाये रखी हो तो वो गीतकारी का घटक है। 50 के दशक से आज तक फ़िल्म जगत् के गीतकारों ने गजब का काम किया है। "हम तुम", "फ़ना" और "तारे ज़मीन पर" जैसी फ़िल्मों के गीत लिख कर फ़िल्म फेयर पाने वाले प्रसून तारे ज़मीन पर के अपने सभी गीतों को अपनी बेटी ऐश्निया को समर्पित करते हैं, और बताते हैं कि किस तरह एक 80 साल के बूढे आदमी ने उनके लिखे "माँ" गीत की तारीफ करते हुए उनसे कहा था कि वो अपनी माँ को बचपन में ही खो चुके थे, गाने के बोल सुनकर उन्हें उनका बचपन याद आ गया। ए. आर. रहमान के साथ गजनी में काम कर रहे प्रसून से जब रहमान गीत को आवाज़ देने की "गुजारिश" की तो प्रसून ने बड़ी आत्मीयता से कहा कि जिस दिन आप धाराप्रवाह हिन्दी बोलने लगेंगे उस दिन मैं आपके लिए अवश्य गाऊंगा.देखते हैं वो दिन कब आता है।

उपलब्धियां
राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापनों में पुरस्कार। शुभा मुदगल तथा ‘सिल्क रूट’ के ऊपर चार सुपर हिट ‘एलबम्स’ में धुन रचना के लिए पुरस्कार। फ़िल्म ‘लज्जा’, ‘आँखें’, ‘क्यों’ में संगीत दिया। तीन पुस्तकें प्रकाशित कीं। ‘ठण्डा मतलब कोका कोला’ एवं ‘बार्बर शॉप-ए जा बाल कटा ला’ जैसे प्रचलित विज्ञापनों हेतु अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता मिली।

सम्मान और पुरस्कार
मशहूर गीतकार प्रसून जोशी को इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आज यहां 'शैलेंद्र सम्मान' प्रदान किया गया। युवा गीतकार प्रसून ने ‘दिल्ली.6’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘रंग दे बस्ती’, ‘हम तुम’ और ‘फना’ जैसी फ़िल्मों के लिए कई सुपरहिट गाने लिखे हैं। यह सम्मान पाने के बाद प्रसून कैफ़ी आज़मी और गुलज़ार की कतार में शामिल हो गये। इन लोगों को पहले शैलेंद्र सम्मान मिल चुका है।
उन्होंने कई हिंदी फ़िल्मों के लिए गाने भी लिखे हैं। सुपरहिट फ़िल्म ‘तारे ज़मीन पर’ के गाने ‘मां...’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

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