राहुल गांधी को 2 साल की सजा “मोदी सरनेम मामले” में, यानी एक आपराधिक मानहानि (criminal defamation) केस में सूरत की अदालत ने सुनाई थी।
किस केस में सजा सुनाई गई?
2019 में कर्नाटक की रैली में राहुल गांधी ने कहा था: “सभी चोरों का सरनेम क्यों मोदी होता है?” यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरनेम को लेकर था।
गुजरात के भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने इस बयान को लेकर सूरत की एक मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि का केस दर्ज कराया, जिसके तहत राहुल गांधी को आईपीसी की धारा 499 (मानहानि) और 500 (उससे जुड़ी सजा) के तहत दोषी पाया गया और 2 साल कैद की सजा सुनाई गई।
उस सजा का परिणाम क्या था?
इस सजा के कारण, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत लोकसभा सचिवालय ने उन्हें लोकसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया और वायनाड सीट खाली हो गई।
हालांकि अदालत ने सजा को 30 दिन के लिए निलंबित कर दिया था और उन्हें जमानत दे दी, ताकि वह राज्य के उच्च न्यायालय में अपील कर सकें; बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा पर रोक लगा दी।
केवल 30 दिन के लिए।
इस केस में राहुल गांधी की अपील का क्या परिणाम आया?
राहुल गांधी ने “मोदी सरनेम मानहानि वाले केस” में सूरत की सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपर की अदालतों में अपील की, जिसका अब तक का मुख्य परिणाम यह है कि उन्हें राहत तो मिली है, लेकिन केस पूरी तरह घटित नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला हुआ?
- सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि (conviction) और सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है, यानी अभी तक वे अपनी लोकसभा सदस्यता बहाल करने के लिए सक्षम माने जा रहे हैं।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि सजा पर रोक तब तक जारी रहेगी जब तक सूरत की सत्र अदालत से अपील पर अंतिम फैसला नहीं आता; यानी मामला अभी “लंबित” है।
निचली अदालत में अपील का परिणाम?
- सूरत की सत्र अदालत ने शुरू में राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता जारी रहने का रास्ता बंद हो गया था (लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट की रोक ने स्थिति बदल दी)।
संक्षेप में: इस केस में राहुल गांधी की अपील से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अभी‑के‑अभी सजा और अयोग्यता से राहत दी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी सूरत की सत्र अदालत में लंबित है और वहाँ की अपील पर जो भी फैसला आएगा, वह भविष्य में उनकी राजनीतिक स्थिति और सदस्यता को असर डाल सकता है।
आने वाला समय राहुल गांधी के लिए ठीक नहीं। क्यों कि अपील करने की अवधि 30 दिन थी ये 30 दिन मोदी की बुराई करने में ही निकल जाएंगे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें