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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

ऋचा मीणा

ऋचा मीना एक हिंदी फिल्म अभिनेत्री, मॉडल और निर्देशक हैं। 

🎂 16 फरवरी 1992 
को जयपुर, राजस्थान में हुआ था। 

ऋचा मीणा Mardaani 2 (2019), Ghumantu - The Wanderer (2020) और Daddy (2017) में अपने काम के लिए मशहूर हैं।
वह राजस्थान के मीना आदिवासी समुदाय से हैं। उन्होंने अपना टेलीविज़न डेब्यू डर सबको लगता है नामक श्रृंखला से किया। वह बचपन से ही फिल्म और उद्योग के बारे में उत्सुक रही हैं। उन्होंने 2014 में फिल्म रेड गोल्ड से डेब्यू किया। ऋचा 2011 में नेशनल ज्योग्राफिक डॉक्यूमेंट्री में दिखाई दीं। उन्होंने विज्ञापनों में भी काम किया। वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती है और उसे पढ़ना, यात्रा करना और नृत्य करना पसंद है। वह विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी शामिल हैं और पेटा, यूनिसेफ और सेव द चिल्ड्रन जैसे गैर सरकारी संगठनों का समर्थन करती हैं।

इस जीवनी का दूसरा संस्करण...

ऋचा मीना का जन्म 16 फरवरी 1992 को जयपुर में हुआ था। बहुत छोटी उम्र से ही, उन्होंने कई विभिन्न स्कूल और सामुदायिक नृत्य प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। जब वह ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तब वह एक थिएटर वर्कशॉप से ​​जुड़ीं। उन्होंने साल 2017 में फिल्म द रनिंग शादी से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने नेहा सिन्हा की भूमिका निभाई।

उसी वर्ष, वह अर्जुन रामपाल के साथ फिल्म डैडी में दिखाई दीं , जहां उन्होंने गीता गवली की भूमिका निभाई। उन्होंने फिल्म कसाई में भी भूमिका निभाई और मर्दानी 2 में एक कैमियो भूमिका निभाई। वह फिल्म तीन मुहूर्त में भी दिखाई दीं। उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि ऑस्कर विजेता गुजराती फिल्म चेलो स्लो में उनकी उपस्थिति थी। उन्होंने स्ट्रॉन्गर, ओपियम, घुमंतू-द वांडरर और कई अन्य लघु फिल्मों में भी कई किरदार निभाए। उन्होंने विभिन्न ब्रांडों के लिए कई विज्ञापनों में भी काम किया

शोभनांनद (शोभा आनंद)

#16feb 
शोमा आनंद

 🎂जन्म 16 फरवरी 1958

जीवनसाथी तारिक शाह
​​( एम.  1987; मृत्यु 2021 )
बच्चे सारा
एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेत्री हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ऋषि कपूर के साथ प्रमोद चक्रवर्ती की रोमांटिक-क्राइम फिल्म बारूद में की, फिर उसी व्यक्ति द्वारा निर्मित और निर्देशित पतिता में भूमिका निभाई । उनकी कुछ अन्य फ़िल्में भी थीं जिनमें वह मुख्य भूमिका में थीं, जैसे 1980 के दशक की जागीर और कुली । 1990 के दशक के उत्तरार्ध से लेकर वर्तमान तक, उन्होंने जैसी करनी वैसी भरनी , कुली , हंगामा , क्या कूल हैं हम और कल हो ना हो जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएँ निभाई हैं ।

शोमा आनंद को 80 के दशक में एक खास पहचान मिली थी। एक्ट्रेस की शुरुआती करियर की बात करें तो अभिनेत्री ने ऋषि कपूर के साथ फिल्म बारूद में काम किया था। यह प्रमोद चक्रवर्ती की ओर से बनाई गई रोमांटिक-क्राइम फिल्म थी। वहीं ऋषि कपूर संग डेब्यू करने के बाद अभिनेत्री ने फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया। क्या आप इसके पीछे का कारण जानते हैं। अगर नहीं तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको इसके बारें में कुछ खास बातें बताने वाले हैं।
शोमा आनंद का करियर
इस फिल्म के बाद अभिनेत्री को काफी काम मिले थे लेकिन अभिनेत्री को कभी लीडिग रोल नहीं मिला। उन्हें अक्सर हीरोइन के बजाय सपोर्टिंग रोल ही मिला करता था। शोमा आनंद 1980 और 1990 के दशक में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था। 90 की बात करें तो इस दशक में अभिनेत्री का करियर सही चल रहा था।
हालांकि इस समय उनकी जिंदगी में एक्टर तारिक शाह की एंट्री हुई। उस दौरान शोमा को तारिक से प्यार हो गया था। इसके बाद अभिनेत्री ने 1997 में तारिक संग शादी करने का फैसला किया। रिपोर्ट्स की मानें तो अभिनेत्री का करियर शादी के बाद से ही खराब होता चला गया।
और परिवार का सपोर्ट ना मिलने पर शोमा ने इंडस्ट्री को कहा अलविदा
शोमा कभी इंडस्ट्री को नहीं छोड़ना चाहती थी। हालांकि शादी के बाद उनके परिवार ने उन्हे कभी सपोर्ट नहीं किया जिसके कारण परिवार का सपोर्ट ना मिलने पर अभिनेत्री ने इंडस्ट्री में अलविदा कह दिया। छोटे पर्दे पर भी अभिनेत्री ने काम किया था। वही साल 2021 अभिनेत्री के लिए काफी खराब रहा। इस साल अभिनेत्री के पति का निर्धन हो गया था। हालांकि अब अभिनेत्री अपने बच्चे के साथ खुश है।

📽️
दुख भंजन तेरा नाम (1974) पंजाबी मूवी में...रजनी की बहन की भूमिका में
बारूद (1976)... सीमा बख्शी
आज़ाद (1978 फ़िल्म) ... रेखा शर्मा
प्रेम जाल (1979)
आरट्टू (1979 फ़िल्म) मलयालम (1979)
पतिता (1980)...रजनी
आप के दीवाने (1980)...मीना
जुदाई (1980)...मनीषा आर नारायण
करण (1981)
खारा खोटा (1981)... संगीता
ज्वाला दहेज की (1983)
जीना है प्यार में (1983)
अफसाना दो दिल का (1983)
हिम्मतवाला (1983)... चंपा
हम से ना जीता कोई (1983)...सुधा
पंचविन मंजिल (1983)...कविता
कुली (1983)... दीपा अयंगर
मैं आवारा हूं (1983)...शबाना रशीद
बिंदिया चमकेगी (1984)
घर एक मंदिर (1984)... सपना
जागीर (1984)...आशा
शान (1985)
सलमा (1985)... मुमताज
हम दो हमारे दो (1985)
घर द्वार (1985)... चंदा
पाताल भैरवी (1985)
महक (1985)
आज का दौर (1985)...शारदा कपूर
कातिल और आशिक (1986)
आग और शोला (1986)... लक्ष्मी (उषा की बड़ी बहन)
स्वराग से सुंदर (1986)
नफ़रत (1987)
जागो हुआ सवेरा (1987)
घर का सुख (1987)
'सीतापुर की गीता' (1987)... पिंकी श्रीवास्तव
खूनी महल (1987)... रीना
सात बिजलियां (1988)
औरत तेरी यही कहानी (1988)
दरिया दिल (1988)... सपना
प्यार का मंदिर (1988)... सपना
चरणों की सौगंध (1988) .....गीता
बड़े घर की बेटी (1989)...मनोहर की पत्नी
जैसी करनी वैसी भरनी (1989)...सपना कुमार
दाता (1989)... अलका
इन्साफ का खून (1991)
कर्ज़ चुकाना है (1991)... सपना
घर परिवार (1991)
नसीब वाला (1992)...रीता (अशोक की पत्नी)
धरतीपुत्र (1993)...मीनाबाई
प्रोफेसर की पड़ोसन (1994)...प्रोफेसर की मेनका
प्यार कोई खेल नहीं (1999)
शादी करके फंस गया यार (2002)... जज
हंगामा (2003)...श्रीमती अंजलि तिवारी
कल हो ना हो (2003)... लज्जो कपूर की बहन
थोड़ा तुम बदलो थोड़ा हम (2004)
क्या कूल हैं हम (2005)...डॉ. स्क्रूवाला की पत्नी
भागमती - भाग्य की रानी (2005)
लव के चक्कर में (2006)...काजल
जीवन साथी (2009)...श्रीमती दर्शन मणिभाई पटेल
लाड गेया पेचा (2010)... तीज कौर (बलजीत की माँ)
आसा मी आशी टी (2013) ( मराठी फिल्म )
फैमिलीवाला (2014)

आई एस जोहर

#16feb
#10march 
आई एस जौहर
आई एस जौहर नाम से विख्यात इंदरजीत सिंह जौहर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे।
🎂 16 फ़रवरी 1920, तलागंग, पाकिस्तान
⚰️: 10 मार्च 1984, मुम्बई

बच्चे: अनिल जौहर, अम्बिका जौहर
शिक्षा: Forman Christian College, University, Lahore

जन्म तालगंगा, पंजाब, ब्रिटिश भारत
पेशा
अभिनेता निर्देशक, निर्माता, लेखक
कार्यकाल
1931-1984
जीवनसाथी
रम्मा बंस (तलाकशुदा)
सोनिया सहनी
पुरस्कार
1971: सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: जॉनी मेरा नाम

आई.एस.जौहर, भारत का वो हरफनमौला कलाकार, जिसे नई जनरेशन करण जौहर के ताऊ के रूप में जानती है। ये करण जौहर से भी ज्यादा पॉपुलर और इंटरनेशनल स्टार थे, जो हॉलीवुड की ऑस्कर विनिंग फिल्म तक में नजर आ चुके हैं।
आज यानी 16 फरवरी को कॉमेडी के लिए मशहूर आई एस जौहर की 103वीं बर्थ एनिवर्सरी है। जौहर पाकिस्तान के निवासी थे, एक शादी में भारत आए और लाहौर में ऐसे दंगे शुरू हुए कि इन्हें भारत में ही बस जाना पड़ा।

भारत में लोग जौहर को इंडियन चार्ली चैपलिन कहते थे, लेकिन जौहर को ये अपनी बेइज्जती जैसा लगता था, बल्कि इसे वो अपनी बेइज्जती मानते थे।

बहुत ही शानदार कलाकार थे जौहर
आई.एस. जौहर…एक ऐसे कलाकार थे, जो एक्टर, राइटर, फिल्में प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी करते थे। आई.एस. जौहर का पूरा नाम इंदरजीत सिंह जौहर था। इनका जन्म 16 फरवरी 1920 को तलागंग, झेलम जिले में हुआ था, जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान के हिस्से में आया था।

पांच बार की शादी, पांचों ही पत्नियों को दिया तलाक
आई.एस. जौहर बहुत ही टेलेंटेड कलाकार थे और अपने अतरंगी अंदाज के लिए जाने जाते थे। आईएस जौहर ने 5 बार शादी की और अपनी पांचों ही पत्नियों को तलाक भी दे दिया था.आईएस जौहर ने पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को भी फिल्मों में हीरोइन बनने का ऑफर दे दिया था।असल जिंदगी में मस्तमौला और बेबाक आई.एस. जौहर की शख्सियत इतनी कमाल थी कि अपनी हाजिर जवाबी से वो बड़ों-बड़ों की बोलती बंद कर देते थे। सरकार उनके रवैये से इस कदर परेशान रहती थी कि उनकी फिल्मों पर बैन लगा दिया जाता था।
उनका बचपन कई ट्रैजडी के नाम रहा, एक शादी में पाकिस्तान से भारत आए, लेकिन दंगों के चलते कभी घर नहीं लौट सके। उनका एक जुड़वां भाई भी था, जिसकी बदमाशियों पर आई.एस. जौहर को पिटाई पड़ती थी।

जब भाई बड़ा होकर गुंडागर्दी करने लगा, तो पुलिस इन्हें पकड़कर जेल में डाल देती थी। इससे भी बड़ा सदमा तब लगा जब भाई ने हमशक्ल होने का फायदा उठाकर उनकी गर्लफ्रेंड से शादी कर ली। आई.एस.जौहर अपनी मौत भी राज रखना चाहते थे, बच्चों से कहते थे कि जब मर जाऊं तो किसी को इत्तला मत करना।
आई.एस.जौहर बचपन से पढ़ाई में अव्वल थे, लेकिन उनका जुड़वां भाई गुंडागर्दी और बदमाशी किया करता था।
आई.एस.जौहर, हिंदी सिनेमा के सबसे पढ़े-लिखे कलाकार कहे जाते थे। उन्होंने इकोनॉमिक्स और पॉलिटिक्स में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद LLB की पढ़ाई की थी। आजादी से पहले इतनी पढ़ाई करना आम नहीं था।

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

भपपी लहड़ी

#27nov
#16feb 
बप्पी लाहिड़ी
पूरा नाम बप्पी लाहिड़ी
प्रसिद्ध नाम बप्पी दा
अन्य नाम अलोकेश लाहिड़ी (मूल नाम)
🎂जन्म 27 नवम्बर, 1952
जन्म भूमि कोलकाता, पश्चिम बंगाल
⚰️मृत्यु 16 फ़रवरी, 2022
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
अभिभावक पिता- अपरेश लाहिड़ी
माता- बंसरी लाहिड़ी

पति/पत्नी चित्रणी लाहिड़ी
संतान रेमा (पुत्री), बाप्पा (पुत्र)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय हिन्दी सिनेमा
प्रसिद्धि गायक व संगीतकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी बप्पी लाहिड़ी और मिथुन चक्रवर्ती की जोड़ी ने बॉलिवुड में ऐसी धूम मचाई थी कि सब डांस और डिस्को म्यूजिक के दीवाने हो गए थे।
बप्पी लाहिड़ी (अंग्रेज़ी: Bappi Lahiri, जन्म- 27 नवम्बर, 1952; मृत्यु- 16 फ़रवरी, 2022) प्रसिद्ध भारतीय गायक और संगीतकार थे। उनका वास्तविक नाम 'अलोकेश लाहिड़ी' था। सोने के गहनों से लदे बप्पी लाहिड़ी के संगीत में अगर डिस्को की चमक-दमक नज़र आती थी तो उनके कुछ गाने सादगी और गंभीरता से परिपूर्ण हैं। 'बप्पी दा' के नाम से मशहूर बप्पी लाहिड़ी ने सन 1970 से 1990 के दशक के दौरान भारतीय सिनेमा को 'आई एम ए डिस्को डांसर', 'जिमी जिमी', 'पग घुंघरू', 'इंतेहान हो गई', 'तम्मा तम्मा लोगे', 'यार बिना चैन कहां रे' और 'चलते चलते' जैसे बहतरीन डिस्को गीत दिए थे।
परिचय
बप्पी लाहिड़ी का जन्म 27 नवंबर, 1952 को कोलकाता में हुआ था। वह एक धनाढ्य संगीत घराने से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता अपरेश लाहिड़ी एक प्रसिद्ध बंगाली गायक थे। उनकी माता बांसरी लाहिड़ी भी बांग्ला संगीतकार थीं। बप्पी दा अपने माता-पिता की अकेली संतान थे। बचपन से ही उन्होंने विश्व प्रसिद्ध होने के सपने देखना शुरू कर दिया था। तीन साल की उम्र में तबला सीखने के साथ उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की। संगीतकार किशोर कुमार और एस. मुखर्जी उनके संबंधी थे। उन्होंने संगीत अपने माता-पिता से ही सीखा और 19 साल की उम्र में पहली बार उन्हें बंगाली फिल्म 'दादु' में गाना गाने के लिए चुना गया।

बप्पी लाहिड़ी अपने हिट नंबरों के लिए उतने ही प्रसिद्ध थे, जितने सोने के प्रति उनके आकर्षण के लिए। बप्पी लाहिड़ी को 80 और 90 के दशक के 'डिस्को किंग' के रूप में जाना जाता था। 'नमक हलाल', 'डिस्को डांसर' और 'डांस डांस' जैसी फिल्मों में उनके गितों ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्धि हासिल की थी। 2000 के दशक में बप्पी लाहिड़ी ने 'द डर्टी पिक्चर' के लिए 'ऊह ला ला', 'गुंडे' के लिए 'तूने मारी एंट्री', 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' के लिए 'तम्मा तम्मा' और हाल ही में 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' के लिए 'अरे प्यार कर ले' जैसे गाने गाए। उन्होंने आखिरी बार 2020 की फिल्म 'बागी 3' के लिए गीत की रचना की थी।

व्यक्तित्व
बप्पी लाहिड़ी की बात हो और उनके स्टाइल पर नजर ना जाए ऐसा हो ही नहीं सकता। महंगे और सोने के गहने पहनने वाले बप्पी लाहिड़ी हमेशा रॉकस्टार की लुक में नजर आते थे। बातचीत के ढंग से भी वह एक ऐसा मिश्रण लगते थे जिसमें भारतीय रंग रूप के साथ अधिक मात्रा में विदेशी फैशन हो। उनके पहनावे में अधिकतर ट्रैकसूट या कुर्ता पायजामा होता था। इसके साथ ही बप्पी लाहिड़ी अपने धूप के चश्मों को गर्मी हो या सर्दी कभी नहीं छोड़ते थे।

कॅरियर
बप्पी लाहिड़ी 19 साल की उम्र में ही बॉलिवुड में नाम कमाने के लिए मुंबई चले गए थे। साल 1973 में उन्हें हिन्दी फिल्म 'नन्हा शिकारी' में गाना गाने का मौका मिल गया। हालांकि उन्हें बॉलिवुड में असली पहचान 1975 की फिल्म “जख्मी” से मिली। इस फिल्म में उन्होंने मोहम्मद रफ़ी और किशोर कुमार जैसे महान गायकों के साथ गाना गाया। इसके बाद तो जैसे बप्पी दा का गाना सबकी जुबान पर छाने लगा। इसके बाद दौर आया बप्पी लाहिड़ी और मिथुन चक्रवर्ती की जोड़ी का। इस दोनों की जोड़ी ने बॉलिवुड में ऐसी धूम मचाई कि सब डांस और डिस्को म्यूजिक के दीवाने हो गए। उन्होंने मिलकर 'डिस्को डांसर', 'डांस डांस', 'कसम पैदा करने वाले की' जैसी फिल्मों को अपने गानों से ही हिट बना दिया।

बॉलिवुड में गायकों का एक अलग ही मुकाम रहा है। हर गायक का एक अलग ही तरीका होता है। लेकिन कई बार इन्हीं गायकों में से कोई गायक अपना एक ऐसा स्थान बनाता है जो बाकियों से बिलकुल जुदा होता है। ऐसे ही गायकों में से एक थे 'बप्पी दा' यानि बॉलिवुड के पहले रॉक स्टार बप्पी लाहिड़ी। हिन्दी सिनेमा में बिना हिन्दी से छेड़छाड़ किए बप्पी दा ने संगीत को नई दिशा दी। उन्होंने अपने एलबमों में अशोक कुमार और आशा भोंसले की आवाज का बखूबी इस्तेमाल किया। एलिशा चिनॉय और ऊषा उथुप के साथ मिलकर उन्होंने कई हिट नंबर दिए। हालांकि उन पर कई बार विदेशी धुनों को भी चुराने का आरोप लगा, पर उन्होंने आगे बढ़ने पर ही जोर दिया। 1990 के दशक में बप्पी दा फिल्मों से पूरी तरह अलग होकर अपने एलबमों पर ही काम करने लगे थे।

सोने से प्रेम
बप्पी लाहिड़ी की एक और खासियत उनके गहने थे। गले में सोने की मोटी चेन और भारी-भारी अंगूठियां पहने बप्पी लाहिड़ी को देखने वाले सोने की दुकान तक कहते थे। लेकिन सच तो यह था कि बप्पी लाहिड़ी को सोने से बेहद लगाव था और वह सोने को अपने लिए लकी मानते थे।

कुछ खास गाने
बप्पी लाहिड़ी के हिट गानों में से कुछ निम्न हैं-

याद आ रहा है तेरा प्यार -
आई एम ए डिस्को डांसर
बॉम्बे से आया मेरा दोस्त - आप की खातिर
ऐसे जीना भी क्या जीना है - कसम पैदा करने वाले की
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए - मनोकामना
रात बाकी - नमक हलाल
यार बिना चैन कहां रे - साहब
ऊ ला ला ऊ ला ला - द डर्टी पिक्चर
पॉप का तड़का
बप्पी लाहिड़ी ने बॉलिवुड में गीतों को पॉप का तड़का लगाया और भारतीय दर्शकों को एक नया स्वाद प्रदान किया। भारतीय संगीत जगत में एक समय ऐसा भी था जब बप्पी लाहिड़ी का नाम आते ही लोगों के जहन में झुमते हुए गानें और बेहतरीन म्यूजिक घूमता था।

मृत्यु
बप्पी लाहिड़ी का निधन 16 फ़रवरी, 2022 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ। उन्होंने मुंबई में जुहू के क्रिटी केयर अस्पताल में रात 11 बजे आखिरी सांस ली। दिग्गज गायक बप्पी लाहिड़ी काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह कोरोना वायरस से भी संक्रमित हो गए थे, जिसके चलते उनकी मुसीबत और बढ़ गई थी। वहीं बप्पी दा का इलाज कर रहे डॉक्टर्स ने कहा था- 'बप्पी जी करीब एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें 14 फ़रवरी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन 15 फ़रवरी के दिन अचानक उनकी सेहत काफी बिगड़ गई और उनके परिवार ने हमारे एक डॉक्टर को घर बुलाया और उन्हें तुरंत अस्पताल लाया गया। बप्पी लाहिड़ी को स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतें थीं जिसके चलते उनका देर रात ओएसए ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के कारण उनका निधन हो गया।

बुधवार, 1 नवंबर 2023

तनवीर नकवी (गीतकार)

आवाज़ दे कहाँ है दुनिया मेरी जवां है जैसा गीत लिखने वाले प्रसिद्ध गीतकार तनवीर नकवी की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

🎂जन्म : 16 फ़रवरी 1919, लाहौर, पाकिस्तान
⚰️मृत्यु : 01 नवंबर 1972, लाहौर, पाकिस्तान

तनवीर नकवी एक पाकिस्तानी गीतकार और कवि थे।  उन्होंने 200 फिल्मों के लिए गीत लिखे, जिनमें लोलीवुड और बॉलीवुड शामिल हैं उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी शुरुआत अब्दुल रशीद कारदार द्वारा निर्देशित स्वामी फिल्म  से की, और बाद में पंद्रह वर्षों तक पाकिस्तानी फिल्म उद्योग में सक्रिय रहे उन्होंने अनमोल घड़ी फिल्म के लिए "आवाज़ दे कहाँ है" गीत लिखने के बाद पहचान हासिल की।

उनका जन्म लाहौर, ब्रिटिश भारत (आधुनिक लाहौर, पाकिस्तान में) में हुआ था  वह मूल रूप से ईरान के फारसी लेखकों के परिवार से थे, और नूरजहाँ की बहन, ईदन बाई से शादी की।

एक गीतकार के रूप में, उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत 1946 में कम उम्र में की, लेकिन पाकिस्तान जाने के बाद, उन्होंने उर्दू और पंजाबी भाषा की फ़िल्मों के लिए गीत लिखे, जिनमें पाकिस्तान की पहली फीचर फ़िल्म तेरी याद भी शामिल है 
फ़िल्म निर्देशक ए आर कारदार के निमंत्रण पर तनवीर नकवी बॉम्बे गए   फिल्मों में अपनी शुरुआत से पहले वह गज़ल लिख रहे थे, लेकिन बाद में हिंदी, उर्दू और पंजाबी फिल्मों के लिए गीत लिखे  उन्हें पाकिस्तान के देशभक्ति गीत के लिए गीत लिखने का श्रेय भी दिया जाता है, जिसका शीर्षक "रंग लायेगा शहीदों का लहू" है, जिसे नूरजहाँ ने गाया था।  उन्होंने यह गीत अपनी एक कविता से लिखा है।  अपने करियर के दौरान, उन्होंने "शाह-ए-मदीना यशरब के वली" और "जो ना होता तेरा जमाल ही" जैसे दो प्रमुख नात लिखे भारतीय उपमहाद्वीप के विभाजन से पहले, नकवी को 1950 और 1970 के दशक के बीच पंजाबी कविता और साहित्य में सबसे महान शास्त्रीय लेखकों में से एक माना गया था। 

विभाजन के बाद, पाकिस्तान फिल्म उद्योग ने ज्यादा फिल्मों का निर्माण नहीं किया और 1952 के अंत तक इसने केवल पांच फिल्में बनाईं।  बाद में, एक पाकिस्तानी फिल्म निर्माता ख्वाजा खुर्शीद अनवर ने गीतकार के रूप में तनवीर नकवी सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर काम किया।  टीम 1956 और 1958 के बीच कुछ फिल्में बनाने में सफल रही

📽️प्रसिद्ध फिल्में

अनमोल घड़ी 1946
जुगनू 1947
तेरी याद1948
नाता 1955
झूमर 1959
नींद 1959
कोयल 1959
सलमा 1960
शाम ढले 1960
घूँघट 1962
अज़रा 1962
सीमा 1963
हमराज़ 1967

भारत में संगीत निर्देशक के रूप में।

1. कुरमई (पंजाबी) (1941)
2. इशारा (1943)
3. परख (1944 फ़िल्म) (1944)
4. यतीम (1945)
5. परवाना (1947 फ़िल्म) (1947)
6. पगडंडी (1947)
7. आज और कल (1947)
8. सिंघार (1949)
9. निशाना (1950)
10. नीलम परी (1952)
बहन भाई 1969
अत ख़ुदा दा वैर 1970

पाकिस्तानी फ़िल्मों में संगीत निर्देशक के रूप में

1. इंतेज़ार (1956) 
2. मिर्ज़ा साहिबान (1956)
3. ज़हर-ए-इश्क (1958) 
4. झूमर (1959)
5. कोयल (1959) 
6. अयाज़ (1960)
7. घूंघट (1962) 
8. चिंगारी (1964)
9. हवेली (1964)
10. सरहद (1966)
11. हमराज़ (1967)
12. गुड्डो (पंजाबी) (1970)
13. हीर रांझा (पंजाबी) (1970) 
14. पराई आग (1971)
15. सलाम-ए-मोहब्बत (1971)
16. शिरीन फरहाद (1975)
17. हैदर अली (1978)
18. मिर्ज़ा जाट (पंजाबी) (1982)

🌹उनके कुछ लोकप्रिय 🌹

पापी पपीहा रे पी पी ना बोल बैरी" सुरैया द्वारा गाया गया, डीएन मधोक के गीत , फिल्म परवाना 
"जब तुम ही नहीं अपनी दुनिया ही बेगानी है" सुरैया द्वारा गाया गया, डीएन मधोक के गीत , फिल्म परवाना 
"जिस दिन से पिया दिल ले गए, दुख दे गए, चैन नहीं आए" नूरजहाँ द्वारा गाया गया, कतील शिफाई के गीत , फ़िल्म इंतज़ार (1956) 
"चली रे चली रे, बैरी आस लगा काय चली रे" नाहिद नियाजी द्वारा गाया गया, तनवीर नकवी के गीत , फिल्म झूमर (1959) 
"रिम झिम रिम झिम पर्रे फुवार, तेरा मेरा नित का प्यार" नूरजहाँ और मुनीर हुसैन द्वारा गाया गया, तनवीर नकवी के गीत , फिल्म कोयल (1959) 
"सुनो अर्ज़ मेरी कमली वाले" जुबैदा खानम द्वारा गाया गया, कतील शिफाई के गीत , फिल्म ज़हर-ए-इश्क (1958) 
"सल्लू अलाही-ए-वा-अले-ही, जो ना होता तेरा जमाल ही" जुबैदा खानम , कौसर परवीन द्वारा गाया गया, तनवीर नकवी के गीत, फिल्म अयाज़ (1960) 
ए रोशनियों के शहर बता मेहदी हसन द्वारा गाया गया , तनवीर नकवी के गीत, फिल्म चिंगारी (1964) 

01 नवंबर 1972 को लाहौर, पाकिस्तान में उनका निधन हो गया।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...