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शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

रीटा भादुड़ी

रीता भादुड़ी

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1955
जन्म भूमि लखनऊ, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 17 जुलाई, 2018
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनय
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी रीता भादुड़ी का नाम जरीना वाहब के साथ उनकी बहन के रूप में कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

हिन्दी सिने जगत की जानीमानी अभिनेत्री थीं। सन 1968 से वह फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं। अपने पांच दशक के कॅरियर में रीता भादुड़ी ने 'कभी हां कभी ना', 'क्या कहना', 'दिल विल प्यार व्यार' और 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' जैसी फिल्मों में काम किया और प्रसिद्धि पाई। उन्होंने गुजराती फिल्मों में भी काम किया था।

परिचय
चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का जन्म 4 नवम्बर सन 1955 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। गौरतलब है कि अपने तीन दशक लंबे कॅरियर में रीता भादुड़ी 30 से ज्यादा टीवी धारावाहिकों के अलावा लगभग 70 फ़िल्मों में नज़र आईं। टीवी शो की बात करें तो ‘छोटी बहू’, ’कुमकुम’, साराभाई वर्सेस साराभाई’, ‘अमानत’ ‘एक महल हो सपनों’ जैसे धारावाहिक हैं। जबकि फ़िल्मों की बात करें तो रीता भादुड़ी ‘सवान को आने दो’, ‘विश्वनाथ’, ‘अनुरोध’ से लेकर हाल के वर्षों में ‘क्या कहना’ और ‘दिल विल प्यार व्यार’ जैसी फ़िल्मों में नज़र आई थीं।

प्रसंग

अक्सर लोग रीता जी के सरनेम की वजह से उन्हें जया भादुड़ी की बहन समझा करते थे। 2011 में हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने एक वाकया बताया था। उन्होंने बताया था कि एक बार जब मैं जयपुर आई थीं तो किसी ने मुझसे पूछा था कि "क्या मैं जया भादूड़ी की बहन हूं?" ये सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया था। उनका कहना था कि "मुझे इंडस्ट्री में इतने साल हो गए हैं, लेकिन लोगों को अभी तक ये नहीं पता चला कि हम दोनों में कोई कनेक्शन नहीं है। लोग मुझे जया की बहन समझने की गलती कर देते हैं।"

रीता भादुड़ी का नाम आदित्य पंचोली की पत्नी जरीना वाहब के साथ भी कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

कार्य के प्रति लगन

रीता भादुड़ी ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि- "बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों के डर से क्या काम करना छोड़ दें। मुझे काम करना और व्यस्त रहना पसंद है। मुझे हर समय अपनी खराब हालत के बारे में सोचना पसंद नहीं, इसलिए मैं खुद को व्यस्त रखती हूं। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे इतनी सपोर्टिव और समझने वाली कास्ट और क्रू के साथ काम करने का मौका मिला है।" रीता भादुड़ी ने अपनी एक्टिंग और काम से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई थी।

मृत्यु

फ़िल्म और टीवी की चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का निधन 17 जुलाई, 2018 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ। वह 62 साल की थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी दोनों किडनी काफी कमजोर हो गयी थीं और लंबे समय से वह हर दूसरे दिन डायलिसिस के लिए जाया करती थीं। अपने अंतिम दिनों में रीता जी मुंबई के सुजय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं, जहां उनका इलाज चल रहा था।

सोमवार, 17 जुलाई 2023

कानन देवी

प्रसिद्ध अभिनेत्री,गायिका,एवं फ़िल्म निर्माता कानन देवी की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
🎂जन्म की तारीख और समय: 22 अप्रैल 1916
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 17 जुलाई 1992
कानन देवी भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका और फ़िल्म निर्माता थीं। उनका मूल नाम 'कानन बाला' था। भारतीय सिनेमा जगत् में कानन देवी का नाम एक ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने न केवल फ़िल्म निर्माण की विधा बल्कि अभिनय और पार्श्वगायन से भी दर्शकों के बीच अपनी ख़ास पहचान बनाई थी। बगैर प्रशिक्षण हासिल किए कानन ने गायन की दुनिया में प्रवेश किया और अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। वह पहली बांग्ला कलाकार थीं, जिन्हें भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1976 में 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।
फ़िल्मी शुरुआत
कानन देवी का जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा में 22 अप्रैल, 1916 को एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था के दिनों में ही उनके दत्तक पिता रमेश चन्द्र दास की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारी को देखते हुए कानन देवी अपनी माँ के साथ काम में हाथ बंटाने लगीं। कानन देवी जब सिर्फ़ 10 वर्ष की ही थीं, तब अपने एक पारिवारिक मित्र की मदद से उन्हें 'ज्योति स्टूडियो' द्वारा निर्मित फ़िल्म 'जयदेव' में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद कानन देवी को ज्योतिस बनर्जी के निर्देशन में राधा फ़िल्म्स के बैनर तले बनी कई फ़िल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करने का मौका मिला। वर्ष 1934 में प्रदर्शित फ़िल्म 'माँ' बतौर अभिनेत्री कानन देवी के सिने कैरियर की पहली हिट फ़िल्म साबित हुई।
सफलता
कुछ समय के बाद कानन देवी न्यू थियेटर में शामिल हो गईं। इस बीच उनकी मुलाकात रायचंद बोराल से हुई, जिन्होंने कानन देवी के सामने हिन्दी फ़िल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा। तीस और चालीस के दशक में फ़िल्म अभिनेता या अभिनेत्रियों को फ़िल्मों में अभिनय के साथ ही पार्श्वगायक की भूमिका भी निभानी पड़ती थी। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कानन देवी ने भी संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उस्ताद अल्लारक्खा और भीष्मदेव चटर्जी से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अनादि दस्तीदार से रवीन्द्र संगीत भी सीखा। वर्ष 1937 में प्रदर्शित फ़िल्म 'मुक्ति' बतौर अभिनेत्री कानन देवी के सिने करियर की सुपर हिट फ़िल्म साबित हुई। पी.सी.बरुआ के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद कानन देवी न्यू थियेटर की चोटी की कलाकारों में गिनी जाने लगी थीं।
मुंबई_आगमन
सन 1941 में कानन देवी ने न्यू थियेटर छोड़ दिया और अब वे स्वतंत्र तौर पर काम करने लगीं। 1942 में प्रदर्शित फ़िल्म 'जवाब' बतौर अभिनेत्री कानन देवी के सिने करियर की सर्वाधिक हिट फ़िल्म साबित हुई। इस फ़िल्म में उन पर फ़िल्माया गया यह गीत- "दुनिया है तूफान मेल", उन दिनों श्रोताओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद कानन देवी की 'हॉस्पिटल', 'वनफूल' और 'राजलक्ष्मी' जैसी फ़िल्में भी प्रदर्शित हुई, जो टिकट खिड़की पर सुपरहिट रहीं। अपनी इस सफलताओं के बाद कानन देवी ने सन 1948 में फ़िल्म नगरी मुंबई (भूतपूर्व बम्बई) का रुख़ किया। 1948 में ही प्रदर्शित फ़िल्म 'चंद्रशेखर' एक अभिनेत्री के रूप में कानन देवी की अंतिम हिन्दी फ़िल्म थी। फ़िल्म में उनके नायक की भूमिका अशोक कुमार ने निभाई थी।
पुरस्कार
वर्ष 1949 में कानन देवी ने फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया। 'श्रीमती पिक्चर्स' के अपने बैनर तले कानन देवी ने कई सफल फ़िल्मों का निर्माण किया। वर्ष 1976 में फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में कानन देवी के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें फ़िल्म जगत् के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। कानन देवी बंगाल की पहली अभिनेत्री बनीं, जिन्हें यह पुरस्कार दिया गया था।
↔️फ़िल्मी सफर
अपने तीन दशक लंबे सिने कैरियर में उन्होंने लगभग 60 फ़िल्मों में अभिनय किया। उनकी अभिनीत उल्लेखनीय फ़िल्मों में- 'जयदेव', 'प्रह्लाद', 'विष्णु माया', 'माँ', 'हरि भक्ति', 'कृष्ण सुदामा', 'खूनी कौन', 'विद्यापति', 'साथी', 'स्ट्रीट सिंगर', 'हार-जीत', 'अभिनेत्री', 'परिचय', 'लगन', 'कृष्ण लीला', 'फैसला' और 'आशा' आदि शामिल हैं।
फ़िल्म_निर्माण
कानन देवी ने अपने बैनर 'श्रीमती पिक्चर्स' के तहत कई फ़िल्मों का निर्माण भी किया। उनकी फ़िल्मों में कुछ हैं-
वामुनेर में (1948)
अन्नया (1949)
मेजो दीदी (1950)
दर्पचूर्ण (1952)
नव विद्यान (1954)
आशा (1956)
आधारे आलो (1957)
राजलक्ष्मी ओ श्रीकांता (1958)
इंद्रनाथ, श्रीकांता औ अनदादीदी (1959)
अभया ओ श्रीकांता (1965)
निधन
अपनी निर्मित फ़िल्मों, पार्श्वगायन और अभिनय के जरिए दर्शकों के बीच ख़ास पहचान बनाने वाली कानन देवी 17 जुलाई, 1992 को इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

रविवार, 16 जुलाई 2023

संजय नार्वेकर

संजय नार्वेकर
🎂जन्म 17 जुलाई
1962 (उम्र)61)
सिंधुदुर्ग , महाराष्ट्र
राष्ट्रीयता
भारतीय
पेशा
अभिनेता
सक्रिय वर्ष
1994-वर्तमान
जीवनसाथी
असिता नार्वेकर
बच्चे
आर्यन एस नार्वेकर
संजय नार्वेकर (जन्म 1962) एक भारतीय अभिनेता हैं जो हिंदी और मराठी सिनेमा में काम करते हैं। वह मुख्य रूप से एक मराठी अभिनेता हैं, जो टीवी शो और फिल्मों में काम करते हैं। 
लोकप्रिय हिंदी फिल्म वास्तव (1999) में रघु ( संजय दत्त ) के साथी "डेढ़ फुटिया" (उनके चरित्र के छोटे कद का जिक्र करते हुए डेढ़ फुट का ) के उनके चित्रण को आलोचकों और दर्शकों द्वारा सराहा गया था। एक जैसे।एक साधारण दलित व्यक्ति, धरती पुत्र, अगले दरवाजे वाले व्यक्ति का उनका ऑन-स्क्रीन चित्रण उनकी अधिकांश फिल्मों के साथ-साथ उनके वास्तविक जीवन में भी उनकी सबसे विशिष्ट और प्यारी विशेषता बनी हुई है। सिद्धार्थ जाधव के साथ , उन्होंने कई हिट मराठी फिल्मों में काम किया है , जो समकालीन मराठी सिनेमा में सबसे सफल और प्रफुल्लित करने वाली जोड़ियों में से एक है ।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...