अबरार अल्वी, जो एक सिने दिग्दर्शक, पटकथा लेखक,संवाद लेखक थे उनका जन्म 1जुलाई 1927
अबरार जी का इन्तकाल बंबई मे 18 नवंबर 2009मे हो गया...आज उनके जयंती पर शत शत नमन🙏🙏🙏🙏🙏🌺🎂💐
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अबरार मुल शब्द अरबी से अबरार का मतलब, पवित्रता,सुंदरता,ईश्वर से डरनेवाला,ऐसे नाम के एक फिल्म से जुडे हूए व्यक्तिमत्व के धनी,अबरार अल्वी, जो एक सिने दिग्दर्शक, पटकथा लेखक,संवाद लेखक थे उनका जन्म 1जुलाई 1927मे अयोध्या मे हुआ उनका बचपन उनके पिता के करियर की वजह से अकोला,खामगाव,होशांगाबाद,जबलपूर,और नागपूर मे बिता,बाद वो माॅरिस कालेज मे पढकर उन्होंने इंग्लिश मे डिग्री हासिल की ऊनका रुझान जादातर काॅलेज के अन्य प्रतियोगीता मे जादा रहता था खास कर डिबेटस मे वो बढचढकर हिस्सा लेते थे।इस वजह वहां उन्होने लेखक के रुप मे रेडिओ मे नौकरी भी कर ली,साथ मे एल एल बी मे स्नातक बन गये थे कुछ नाटक कथा लिखने बाद वो बंबई चले गये साल 1951मे वहां इन्डियन पिपल असोसिएशन थियटर से जुड गये ,पर उनका अभी कुछ तय नहीं हुआ के आगे अब क्या करना है,ऐसे ही चार माह गुजर गये.तब उनके चचरे भाई इर्शाद हसन,उन्हे जसवंत भी कहते थे वो गुरूदत्त की फिल्म 1953की बाज मे वो असिस्टंट डायरेक्टर के रुप मे काम कर रहे थे वो अबरार को साथ ले गये थे एक सिन मे गुरूदत्त जी को संवाद कहते हुए दिक्कत आ रही थी तो अबरार जी ने उनकी मदद की,फिर गुरूदत्त जी इतने प्रभावित हुए अबरार जी से की उन्होंने उनकी अगली फिल्म साहब,बिबी गुलाम के लिए संवाद लेखक का काम दे दिया वहां अबरार जी का करियर शुरू हो गया इतना दोस्ताना हो गया इन दोनों मे के गुरूदत्त जी के जिवन के सभी पहलू उन्हे पता थे*
उन्होंने गुरूदत्त की लगभग सभी फिल्म की पटकथा लिखी प्यासा,कागज के फुल,मिस्टर एन्ड मिसेस55, चौदहवी का चान्द,बहारे फिर भी आऐगी,गुड्डू,प्रोफेसर, प्रिन्स,शिकार,आर-पार आदी फिल्मे जो उन्होंने लेखक के रुप मे अपने नाम दर्ज की उन्हे साहाब बिबी और गुलाम को 1963मे सर्वोत्तम दिग्दर्शक का पुरस्कार मिला था,इसी फिल्म को दुसरा राष्ट्रीय सर्वोत्कृष्ट हिन्दी फिल्म का पुरस्कार भी इसी साल मिला था।
उन्होंने गुरूदत्त पर एक किताब भी लिखी थी नाम था गुरूदत्त के साथ एक दशक,
अबरार जी का इन्तकाल बंबई मे 18 नवंबर 2009मे हो गया...आज उनके जयंती पर शत शत नमन🙏🙏🙏🙏🙏🌺🎂💐
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