अभिनेता फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, गायक और संगीतकार उत्तम कुमार
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अरुण कुमार चटर्जी
प्रसिद्ध नाम उत्तम कुमार
🎂जन्म 03 सितम्बर, 1926
जन्म भूमि कोलकाता, बंगाल
⚰️मृत्यु 24 जुलाई, 1980
मृत्यु स्थान पश्चिम बंगाल
पति/पत्नी गौरी चटर्जी
संतान गौतम कुमार चटर्जी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र बांग्ला और हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'छोटी सी मुलाक़ात', 'अमानुष', 'आनंद आश्रम', 'क़िताब', 'दूरियां' आदि।
विद्यालय 'साउथ सबर्बन स्कूल (मेन)', कोलकाता; 'गोयेनका कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स एंड बिजनेस ऐडमिनिस्ट्रेशन'
प्रसिद्धि अभिनेता, निर्माता-निर्देशक, संगीतकार
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख सुचित्रा सेन, सिनेमा
अन्य जानकारी अभिनेता उत्तम कुमार की बतौर नायक पहली फ़िल्म 'दृष्टिदान' थी, जिसे मशहूर निर्देशक नितिन बोस ने निर्देशित किया था। कोलकाता में हाजरा अंचल में उनके नाम पर 'उत्तम थियेटर' है।
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उत्म कुमार हिंदी बांग्ला फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे।
उनका मूल नाम 'अरुण कुमार चटर्जी' था। मुख्य रूप से बंगाली सिनेमा में काम करने वाले उत्तम कुमार एक अभिनेता होने के साथ-साथ फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, गायक और संगीतकार भी थे। जिस तरह हिन्दी सिनेमा में राज कपूर और नरगिस की जोड़ी याद की जाती है, उसी तरह बंगाली सिनेमा में उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन का कोई मुकाबला नहीं था। बंगाली सिनेमा में उत्तम कुमार को 'महानायक' की पदवी दी गई है।
अभिनेता उत्तम कुमार की बतौर नायक पहली फ़िल्म 'दृष्टिदान' थी, जिसे मशहूर निर्देशक नितिन बोस ने निर्देशित किया था। सुचित्रा सेन के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई। सुचित्रा के साथ उनकी 'सप्तपदी', 'पौथे होलो देरी', 'हारानो सुर', 'चावा पावा', 'बिपाशा', 'जीवन तृष्णा' और 'सागरिका' जैसी फ़िल्में बेहद लोकप्रिय रहीं। बंगाली के साथ-साथ उन्होंने कई हिन्दी फ़िल्मों में भी अभिनय किया, जैसे-
'छोटी सी मुलाक़ात' - 1967 (स्वयं निर्माता)
'अमानुष' - 1975
'आनंद आश्रम' - 1977
'क़िताब' - 1979
'दूरियां' - 1979
उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन का कोई मुकाबला नहीं था। प्रेम को इस तीव्रता से वे अपने अभिनय में व्यक्त करते थे कि दर्शक दंग रह जाते थे। यही वजह रही कि दर्शक इस जोड़ी से कभी बोर नहीं हुए। दो दशक तक तीस फ़िल्मों में दोनों ने अपने अभिनय के रंग बिखेरे और इनमें से ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं। उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन बंगाली सिनेमा के व्यवसाय को एक बार फिर ऊपर की ओर ले गए, क्योंकि जब उन्होंने बंगाली सिनेमा में कदम रखा था, तब वहां के फ़िल्म उद्योग की हालत खस्ता थी। ऐसे में उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन के स्टारडम ने दर्शकों के बीच पहचान बनाई और बंगाली फ़िल्में फिर सफल होने लगीं। फ़िल्म 'अग्निपरीक्षा' से उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की जोड़ी सफल हुई थी। दोनों ने फ़िल्म में इस कदर डूब कर रोमांस किया कि कई लोग उन्हें पति-पत्नी मानने लगे। फ़िल्मी पर्दे पर जिस तरह से वे रोमांस करते थे, उस कारण आज भी कई लोग मानते हैं कि उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन में प्रेम था। पर्दे पर दर्शक दोनों को खुशहाल जोड़ी के रूप में देखना पसंद करते थे। फ़िल्म 'शिल्पी' में उत्तम कुमार के किरदार की आखिर में मौत दिखाई गई और इस कारण फ़िल्म फ्लॉप हो गई थी। सुचित्रा और उत्तम कुमार बेहतरीन कलाकार थे। दोनों साथ काम करते तो उनका अभिनय और निखर जाता था। उन्होंने कई अलग-अलग भूमिकाएँ अभिनीत कीं और अपने बेहतरीन अभिनय से यादगार बनाया। बिना कहे दोनों बहुत कुछ कह जाते थे और दोनों के रोमांटिक सीन में पर्दा जगमगाने लगता था। उन पर फ़िल्माए गए गीत सुपरहिट रहे।
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