मंगलवार, 22 अगस्त 2023

विम्मी

खूबसूरत मगर बदनसीब अभिनेत्री विमी की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

विमी 
🎂जन्म 1943 
⚰️निधन 22 अगस्त 1977
 एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री थीं, जिन्होंने आबरू, हमराज और पतंगा जैसी भारतीय फिल्मों में अभिनय किया।  उन्होंने हमराज़ में सुनील दत्त के साथ अभिनय करके काफी लोकप्रिय हो गयीं 

विमी ने 1967 में बी आर चोपड़ा द्वारा निर्देशित हमराज में सुनील दत्त के साथ शुरुआत की। फिल्म हिट रही, लेकिन इससे उनके करियर को कोई मदद नहीं मिली।  वह पतंगा (1971) और वचन (1974) में शशि कपूर के साथ दिखाई दीं।  वह आबरू (1968) में दीपक कुमार के साथ प्रमुख नायिका थीं।  वह 1973 में पंजाबी फिल्म नानक नाम जहां है में दिखाई दीं। उनकी आखिरी फिल्म क्रोधी थी, जो 1977 में उनकी मृत्यु के चार साल बाद रिलीज हुई थी।

विमी एक पंजाबी सिख लड़की थी, जिसने एक उद्योगपति के बेटे शिव अग्रवाल से शादी की, जिनसे उनका एक बेटा और एक बेटी थी।  संगीत निर्देशक रवि ने कलकत्ता में एक पार्टी में उनसे मिलवाया और बाद में उन्हें और शिव को मुंबई आमंत्रित किया।  उन्होंने उन्हें बी आर चोपड़ा से मिलवाया और इस तरह विमी को उनकी पहली फिल्म मिली।
हमराज़ का गाना"ना सर झुका के जीओ, ना मुं छुपा छुपाको जीओ" में विमी की मनमोहक छवि ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
हमराज़ की सफलता के तुरंत बाद, उनकी अगली बड़ी फ़िल्म आबरू 1968 में रिलीज़ हुई हालाँकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाका नही कर सकी  यहां तक ​​कि अशोक कुमार और निरूपा रॉय जैसे दिग्गज कलाकार भी इसे बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके।
आबरू की विफलता के बाद विमी का कैरियर ढलान पर जाने लगा अब पत्रिकाओं में फोटोशूट के लिए उनकी डिमांड कम हो गई थीं।  पतंगा, शशि कपूर के साथ उनकी 1971 की फिल्म भी दर्शकों के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही।  इस तरह लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद वह गुमनामी में चली गईं।

सुख सुविधा की हर चीज़ थी विमी के पास विमी को कभी भी पैसे की कमी नहीं थी. उनके पति भी कोलकाता के बड़े व्यापारी थे. वो फिल्में सिर्फ अपने शौक के लिए किया करती थी. लोग बताये थे कि उन्हें कपड़ोंं का बड़ा शौक था, इसलिए उनके पास डिज़ाइनर कपडे बहुत होते थे. फिल्मों में काम करने की वजह से उन्होंने मुंबई में एक आलीशान घर भी ले लिया था. उस जमाने में उनके पास कई महंगी गाड़ी थी.
फिल्मों में सफल होना आसान है लेकिन उस सफलता को कायम रखना बहुत मुश्किल है. विमी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. शादी के बाद फिल्मों में वो जरूर आई, लेकिन कुछ समय बाद ही उनके रिश्ते में दरार पड़नी शुरू हो गयी. विमी जहां एक तरफ हिट फिल्में दे रही थी, वहींं दूसरी तरफ उन्हें अपनी ज़िन्दगी की फिल्म में कई उतार-चढ़ाव चल रहे थे. यह रिश्ता आखिरकार तलाक पर आकर ही खत्म हुआ.
अपनी खुशहाल शादी को नहीं बचा पाने का दुख विमी के कॅरियर पर भी पड़ा. तलाक लेने के बाद वह काफी तनाव में रहने लगी. उन्होंने उस वक़्त जो भी फिल्म की वह सब बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गयी. विमी अपने पर्सनल और प्रोफेशनल ज़िन्दगी दोनों से बेहद दुखी थी. वक्त के साथ ही उन पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता गया
तरफ से कर्जे में दब रही विमी के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था.वह हर मुकाम में असफल हो रही थी. उनके पास अब फिल्मों के ऑफर आने भी कम हो गए थे. अपनी बर्बादी को वह सह नहीं पा रही थी और खुद को शराब के हवाले कर दिया था. वह इतना ज्यादा शराब पीने लगी कि उनका लिवर ख़राब हो गया.
22 अगस्त 1977 को नानावती अस्पताल के जनरल वार्ड में जिगर की बीमारी के कारण विमी की मृत्यु हो गई।
उनके पास पैसे की कितनी कमी थी इस बात का अंदाज़ा ऐसे लगाया जा सकता है कि उनकी मौत के बाद उन्हें कंधा देने वाला भी कोई नहीं था. उनके मरने के बाद उनके बॉडी को किसी ठेले पर ले जाना पड़ा था. क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि उनकी शव यात्रा निकाली जाए

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