जन्म
मुहम्मद युसुफ खान
*🎂11 दिसम्बर 1922*
पेशावर, ब्रिटिश भारत
मृत्यु
*⚰️07 जुलाई 2021 (उम्र 98)
हिंदूजा हॉस्पिटल मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
मृत्यु का कारण
उम्र संबधी बीमारी
राष्ट्रीयता
भारतीय
व्यवसाय
अभिनेता
कार्यकाल
१९४४-१९९९
धार्मिक मान्यता
इस्लाम
जीवनसाथी
सायरा बानो (वि॰ 1966–2021) (मृत्यु तक)
असमा रहमान (वि॰ 1981; वि॰वि॰ 1983)
माता-पिता
पिता:- लाला गुलाम सरवर (जमींदार और फल विक्रेता)
मां:- आयशा
संबंधी
नासिर ख़ान (अभिनेता) (भाई)
बेगम पारा (भाभी)
अयूब खान (अभिनेता) (भतीजा)
पुरस्कार
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार (सर्वोत्तम 8 बार)
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (1994)
अपने करियर के शुरुआती वर्षों में कई सफल त्रासद या दु:खद भूमिकाएं करने के कारण उन्हें मीडिया में 'ट्रेजिडी किंग' भी कहा जाता था। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार उनकी बहुत सी फ़िल्में इसलिए भी कामयाब हुईं क्योंकि जनता सिर्फ़ उनकी अदाकारी देखने आया करती थी फिर चाहे उन चलचित्रों में खास मनोरंजन के तत्व ना भी हों। इस प्रकार के वाक्या और किसी भी अदाकार के साथ नही हुएं हैं। उन्होंने बहुत सी बड़े पैमाने पर कामयाब फ़िल्मों में अदाकारी की है जो आजतक सबसे सफल चलचित्रों में गिनी जातीं हैं जैसे मुग़ल-ए-आज़म (१९६०), गंगा जमना (१९६१), इत्यादि। उन्होंने अपने करियर के दूसरे पड़ाव में भी कई अत्यंत कामयाब फिल्में दीं जब वह वृद्ध किरदार की भूमिका में भी प्रमुख किरदार निभा रहे थे। ऐसा वाक्या भी उनके अतिरिक्त किसी अदाकार के साथ नहीं हुआ है। उन्होंने फिल्मों में अदाकारी को रंगमंच से अलग किया और उसे नई परिभाषा दी जिसका प्रभाव उनके बाद के कलाकारों पर रहा।१९९८ में आई किला उनके करियर की आखिरी फ़िल्म थी। उन्हें वर्ष १९९४ में भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपने अभिनय और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार लाने के लिए उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार निशान-ए-इम्तियाज़ दिया गया जिसे प्राप्त करने वाले वे इकलौते भारतीय हैं।
दिलीप कुमार के जन्म का नाम मुहम्मद युसुफ़ खान था। उनका जन्म ब्रिटिश भारत के पेशावर (अब पाकिस्तान मे) में हुआ था। उनके पिता मुंबई आ बसे थे, जहाँ उन्होने हिन्दी फ़िल्मों में काम करना शुरू किया। उनका नाम उस वक्त के चलन के अनुसार बदल कर दिलीप कुमार कर दिया गया ताकि उन्हे हिन्दी फिल्मों में ज़्यादा पहचान मिले और उनका नाम एक हीरो की छवि के ऊपर जच सके।
दिलीप कुमार का 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की आयु में सुबह 7:30 बजे हिंदुजा अस्पताल, मुंबई में निधन हो गया। लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। वह टेस्टिकुलर कैंसर और फुफ्फुस बहाव के अलावा कई उम्र से संबंधित बिमारियों से पीड़ित थे। महाराष्ट्र सरकार ने उसी दिन जुहू मुस्लिम कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार को मंजूरी दी।
अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि कुमार को एक सिनेमाई किंवदंती के रूप में याद किया जाएगा, जबकि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि "उन्हें उपमहाद्वीप में प्यार किया गया था"। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और शौकत खानम मेमोरियल कैंसर अस्पताल के लिए एक ट्वीट में धन जुटाने के उनके प्रयासों को याद किया। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी कुमार और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
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