गुरुवार, 27 जुलाई 2023

राहुल बोस

फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक एवं अभिनेता राहुल बोस के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक 

एवं अभिनेता राहुल बोस 

*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
🎂जन्म27 जुलाई 1967 भारत
व्यवसायों
  • अभिनेता
  • निदेशक
  • पटकथा लेखक
  • सामाजिक कार्यकर्ता
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁
राहुल बोस एक भारतीय फिल्‍म अभिनेता, फिल्‍म निर्माता, फिल्‍म निर्देशक, पटकथा लेखक, सोशल ऐक्टिविस्‍ट और रग्बी प्‍लेयर हैं। जो हिंदी और बंगाली समेत भारत की अन्‍य भाषाओं की फिल्‍मों भी नजर आते हैं।

राहुल बोस का जन्‍म 27 जुलाई 1967 को कर्नाटक के बैंगलोर को हुआ था। बोस ने मात्र 6 साल की उम्र में अपना लीड रोल स्‍कूल के एक नाटक 'टॉम द पाइपर्स सन' में प्‍ले किया था। बोस एक अच्‍छे क्रिकेट प्‍लेयर भी हैं। उन्‍होंने भारत के मशहूर क्रिकेटर मन्‍सूर अली खान पटौदी से क्रिकेट की कोचिंग ली थी। 

राहुल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कैनन स्‍कूल से पूरी की है। इसके बाद उन्‍होंने मुंबई के ही सिंडेन्‍हम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्‍स से कॉलेज की पढ़ाई की है।

राहुल बोस ने कई भारतीय फिल्‍मों में अभिनय किया है साथ ही वह फिल्‍म निर्देशन, और पटकथा लेखन का भी काम करते हैं। बोस अब तक 100 से भी ज्‍यादा फिल्‍मों में काम कर चुके हैं।

पार्श्वगायिका शास्त्रीय संगीत गायिका के एस चित्रा

पार्श्वगायिका शास्त्रीय संगीत गायिका के एस चित्रा के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
🎂जन्म : 27 जुलाई 1963
पति: विजय शंकर
बच्चे: नंदना
इनाम: पद्म भूषण, पद्म श्री, ज़्यादा
माता-पिता: कृष्णन नायर, Santhakumari
भाई: के॰ एस॰ बीना, के॰ एस॰ महेश
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

कृष्णन नायर शान्तिकुमारी चित्रा (प्रचलित नाम- के. एस. चित्रा या चित्रा,भारत की प्रसिद्ध गायिका हैं। दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्मों की इस पार्श्वगायिका ने अपनी मधुर आवाज से लाखों लोगों का दिल जीता है। के. एस. चित्रा ने तमिल, तेलगू, मलयालम, हिंदी, बंगाली और उड़िया जैसी भाषाओं में 25,000 से अधिक गाने गाए हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों के पार्श्व गायन के इतिहास में वह पहली महिला गायक हैं, जिन्हें दक्षिण भारत की चार राज्यों की सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका के लिए सम्मानित किया गया। के. एस. चित्रा को वर्ष 2021 में 'पद्म भूषण' से भी सम्मानित किया गया है।

#परिचय

के. एस. चित्रा का जन्म केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम में 27 जुलाई, 1963 को हुआ था। उन्होंने अपने दिवंगत पिता कृष्णन नायर, जो कि एक प्रसिद्ध गायक और संगीतकार थे, के मार्गदर्शन में संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। के. एस. चित्रा ने संगीत में स्नातक किया और बाद में केरल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के. ओमानकुट्टी की देखरेख में संगीत में परास्नातक किया।

#फ़िल्मी_शुरुआत

मलयालम फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक एम. जी. राधाकृष्णन ने के. एस. चित्रा को उनकी फिल्म ‘अत्ताहसम’ और बाद में ‘स्नेहापुरमम मीरा’ और ‘नंजन एकानानु’ में मौका दिया। प्रसिद्ध तमिल संगीतकार इलैयाराजा ने उनको तमिल फिल्म उद्योग में फिल्म ‘नेथन अनंत कुयिल’ के माध्यम से परिचित करवाया। हिंदी फिल्म संगीत में के. एस. चित्रा ने फिल्म ‘लव’, ‘प्यार तूने क्या किया’, ‘विरासत’, ‘अक्स’, ‘अशोका’ और ‘रंगीला’ आदि जैसी फिल्मों में अपनी गायिकी से संगीत प्रेमियों के दिलों को जीता है। सारंगी (गिटार) वादक उस्ताद सुल्तान ख़ान के सहयोग से उनकी एल्बम ‘पिया बसंती’ काफी लोकप्रिय हुई थी। के. एस. चित्रा ने प्रसिद्ध ग़्ज़ल गायक गुलज़ार और भूपिंदर के साथ अपनी अगली एल्बम ‘सनसेट पॉइंट’ में गायन किया था।

के. एस. चित्रा को सलिल चौधरी, अनु मलिक, नदीम-श्रवण और ए. आर. रहमान जैसे प्रसिद्ध संगीत निर्देशकों के साथ काम करने का गौरव प्राप्त हुआ है।

#पुरस्कार_व_सम्मान

पद्म भूषण, 2021
के. एस. चित्रा को तमिल फिल्म ‘सिंधु भैरवी’ (1986), मलयालम फिल्म ‘नखक्षथंगल’ (1987), मलयालम फिल्म ‘वैशाली’ (1989), तमिल फिल्म ‘मिनसारा कनवू’ (1996) और हिंदी फिल्म ‘विरासत’ (1997) के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका की श्रेणी में पाँच बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2018 में के. एस. चित्रा क्रेग कफ़लिन, महासभा, न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका के अध्यक्ष द्वारा सम्मानित की गई थीं।
2019 में सुल्तान बिन मुहम्मद अल-कासिमी द्वारा सम्मानित की गई, जो शारजाह के अमीर शासक थे।
के. एस. चित्रा एकमात्र दक्षिण भारतीय महिला गायिका हैं, जिन्होंने 2001 में लंदन के प्रतिष्ठित कॉन्सर्ट हॉल रॉयल अल्बर्ट हॉल में अपना पहला संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

आमजद खान

महान अभिनेता अमज़द खान की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
🎂जन्म: 12 नवंबर 1940, 
⚰️मृत्यु: 27 जुलाई 1992, 
बच्चे: सीमाब खान, आहलम खान ,शादाब खान
पत्नी:  शीला खान(विवा. 1972–1992)
भाई: इम्तियाज खान, इनायत खान
माता-पिता: जयंत quamran sultan
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁
अमजद ख़ान  हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उनके द्वारा 'शोले' फ़िल्म में अभिनीत किरदार 'गब्बर सिंह' भारतीय सिनेमा के यादगार खलनायकों में से एक है। अपने कॅरियर में अमजद ख़ान ने 'शोले', 'परवरिश', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लावारिस', 'हीरालाल-पन्नालाल', 'सीतापुर की गीता', 'हिम्मतवाला' और 'कालिया' जैसी करीब 130 फ़िल्मों में काम किया। पर्दे पर एक-से-एक ख़तरनाक और अत्याचारी भूमिकाएँ निभाने वाले अमजद ख़ान वास्तविक जीवन में एक सभ्य, सुसंस्कृत एवं गरीबों की सहायता करने वाले नेकदिल इंसान थे। 'शोले' के गब्बर सिंह की भूमिका उनसे पहले अभिनेता डैनी को दी गयी थी, परन्तु समयाभाव के कारण जब उन्होंने इनकार कर दिया तो यह भूमिका अमजद ख़ान को मिल गयी। अमजद ख़ान ने डाकू गब्बर सिंह के चरित्र को फ़िल्मी पर्दे पर इस प्रकार जीवन्त कर दिया कि उसे अमर ही बना दिया।

अमजद ख़ान का जन्म 12 नवम्बर, सन 1940 को फ़िल्मों के जाने माने अभिनेता जिक्रिया ख़ान के पठानी परिवार में आन्ध्र प्रदेश के हैदराबाद शहर में हुआ था। अमजद ख़ान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जयंत फ़िल्म इंडस्ट्री में खलनायक रह चुके थे। अमजद ख़ान ने बतौर कलाकार अपने अभिनय जीवन की शुरूआत वर्ष 1957 में प्रदर्शित फ़िल्म 'अब दिल्ली दूर नहीं' से की थी। इस फ़िल्म में अमजद ख़ान ने बाल कलाकार की भूमिका निभायी। वर्ष 1965 में अपनी होम प्रोडक्शन में बनने वाली फ़िल्म 'पत्थर के सनम' के जरिये अमजद ख़ान बतौर अभिनेता अपने कॅरियर की शुरुआत करने वाले थे, लेकिन किसी कारण से फ़िल्म का निर्माण नहीं हो सका। सत्तर के दशक में अमजद ख़ान ने मुंबई से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बतौर अभिनेता काम करने के लिये फ़िल्म इंडस्ट्री का रुख किया।

बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म 'शोले' के किरदार गब्बर सिंह ने अमजद ख़ान को फ़िल्म इंडस्ट्री में सशक्त पहचान दिलायी, लेकिन फ़िल्म के निर्माण के समय गब्बर सिंह की भूमिका के लिये पहले डैनी का नाम प्रस्तावित था। फ़िल्म शोले के निर्माण के समय गब्बर सिंह वाली भूमिका डैनी को दी गयी थी, लेकिन उन्होंने उस समय फ़िल्म 'धर्मात्मा' में काम करने की वजह से शोले में काम करने से इन्कार कर दिया। 'शोले' के कहानीकार सलीम ख़ान की सिफारिश पर रमेश सिप्पी ने अमजद ख़ान को गब्बर सिंह का किरदार निभाने का अवसर दिया। जब सलीम ख़ान ने अमजद ख़ान से फ़िल्म 'शोले' में गब्बर सिंह का किरदार निभाने को कहा तो पहले तो अमजद ख़ान घबरा से गये, लेकिन बाद में उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और चंबल के डाकुओं पर बनी किताब 'अभिशप्त चंबल' का बारीकी से अध्ययन करना शुरू किया। बाद में जब फ़िल्म 'शोले' प्रदर्शित हुई तो अमजद ख़ान का निभाया किरदार गब्बर सिंह दर्शकों में इस कदर लोकप्रिय हुआ कि लोग गाहे-बगाहे उनकी आवाज़ और चालढाल की नकल करने लगे।

अपने 16 साल के फ़िल्मी कॅरियर में अमजद ख़ान ने लगभग 130 फ़िल्मों में काम किया। उनकी प्रमुख फ़िल्में 'आखिरी गोली', 'हम किसी से कम नहीं', 'चक्कर पे चक्कर', 'लावारिस', 'गंगा की सौगंध', 'बेसर्म', 'अपना खून', 'देश परदेश', 'कसमे वादे', 'क़ानून की पुकार', 'मुक्कद्दर का सिकंदर', 'राम कसम', 'सरकारी मेहमान', 'आत्माराम', 'दो शिकारी', 'सुहाग', 'द ग्रेट गैम्बलर', 'इंकार', 'यारी दुश्मनी', 'बरसात की एक रात', 'खून का रिश्ता', 'जीवा', 'हिम्मतवाला', 'सरदार', 'उत्सव' आदि है, जिसमें उन्होंने शानदार अभिनय किया। अमजद जी अपने काम के प्रति बेहद गम्भीर व ईमानदार थे। परदे पर वे जितने खूंखार और खतरनाक इंसानों के पात्र निभाते थे, उतने ही वे वास्तविक जीवन और निजी जीवन में एक भले हँसने-हँसाने और कोमल दिल वाले इंसान थे। फ़िल्म 'शोले' की सफलता के बाद अमजद ख़ान ने बहुत-सी हिंदी फ़िल्मों में खलनायक की भूमिका की। 70 से 80 और फिर 90 के दशक में उनकी लोकप्रियता बरक़रार रही। उन्होंने डाकू के अलावा अपराधियों के आका, चोरों के सरदार और हत्यारों के पात्र निभाए।

यह बात कम लोगों को पता है कि अमजद ख़ान उस कल्पना अय्यर को प्यार करते थे, जिसने तमाम फ़िल्मों में बेबस-बेगुनाह नायिकाओं पर बेपनाह जुल्म ढाए। भारी डील-डौल वाले गोरे-चिट्टे अमजद और दुबली-पतली इकहरे बदन की सांवली कल्पना अय्यर में देखने-सुनने में खासा अंतर था, लेकिन दोनों में एक गुण समान था। दरअसल, दोनों रुपहले पर्दे पर भोले-भाले निर्दोष पात्रों पर बड़े जुल्म ढाते थे। ये दोनों लोगों की वाहवाही नहीं, हमेशा उनकी हाय बटोरते थे। अमजद ख़ान की प्रेमिका कल्पना मॉडल थीं और एक मॉडल की मंजिल फ़िल्में ही होती हैं। इसलिए कल्पना ने मशहूर कॉमेडियन आई.एस. जौहर की फ़िल्म 'द किस' में काम करके अपनी अभिनय-यात्रा आरंभ की

पर्दे पर खलनायकी के तेवर दिख़ाने वाले अमजद निजी जीवन में बेहद दरियादिल और शांति प्रिय इंसान थे। अमिताभ बच्चन ने एक साक्षात्कार में बताया था कि अमजद बहुत दयालु इंसान थे। हमेशा दूसरों की मदद को तैयार रहते थे। यदि फ़िल्म निर्माता के पास पैसे की कमी देखते, तो उसकी मदद कर देते या फिर अपना पारिश्रमिक नहीं लेते थे। उन्हें नए-नए चुटकुले बनाकर सुनाने का बेहद शौक था। अमिताभ को वे अक्सर फोन कर लतीफे सुनाया करते थे।

एक कार दुर्घटना में अमजद बुरी तरह घायल हो गए। एक फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले में लोकेशन पर जा रहे थे। ऐसे समय में अमिताभ बच्चन ने उनकी बहुत मदद की। अमजद ख़ान तेजी से ठीक होने लगे। लेकिन डॉक्टरों की बताई दवा के सेवन से उनका वजन और मोटापा इतनी तेजी से बढ़ा कि वे चलने-फिरने और अभिनय करने में कठिनाई महसूस करने लगे। वैसे अमजद मोटापे की वजह खुद को मानते थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि- "फ़िल्म ‘शोले’ की रिलीज के पहले उन्होंने अल्लाह से कहा था कि यदि फ़िल्म सु‍परहिट होती है तो वे फ़िल्मों में काम करना छोड़ देंगे।" फ़िल्म सुपरहिट हुई, लेकिन अमजद ने अपना वादा नहीं निभाते हुए काम करना जारी रखा। ऊपर वाले ने मोटापे के रूप में उन्हें सजा दे दी। इसके अलावा वे चाय के भी शौकीन थे। एक घंटे में दस कप तक वे पी जाते थे। इससे भी वे बीमारियों का शिकार बने। मोटापे के कारण उनके हाथ से कई फ़िल्में फिसलती गई। 27 जुलाई, 1992 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दहाड़ता गब्बर हमेशा के लिए सो गया। अमजद ने हिन्दी सिनेमा के खलनायक की इमेज के लिए इतनी लंबी लकीर खींच दी थी कि आज तक उससे बड़ी लकीर कोई नहीं बना पाया है

डिम्पल कपाड़िया और राखी अभिनीत फ़िल्म 'रुदाली' अमजद ख़ान की आखिरी फ़िल्म थी। इस फ़िल्म में उन्होंने एक मरने की हालात में पहुंचे एक ठाकुर की भूमिका निभाई थी, जिसकी जान निकलते-निकलते नहीं निकलती। ठाकुर यह जानता है कि उसकी मौत पर उसके परिवार के लोग नहीं रोएंगे। इसलिए वह मातम मनाने और रोने के लिए रुपये लेकर रोने वाली रुदाली को बुलाता है। यह अलग बात है कि रुदाली के ठाकुर की मौत पर रोने वाला कोई नहीं था, लेकिन जब अमजद ख़ान की मौत हुई, तो मात्र फ़िल्म इंडस्ट्री ही नहीं, समूचा संसार रोया था, क्योंकि उनकी चर्चित फ़िल्म 'शोले' देश ही नहीं, विदेश में भी सराही गई थी। जिस तरह आज हॉलीवुड की फ़िल्मों की नकल हिंदी फ़िल्मों में हो रही है, 'शोले' के इस गब्बर की नकल तब हॉलीवुड की कई बड़ी फ़िल्मों में देखी गई। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि गब्बर रूपी अमजद ख़ान जरूर मर गया, मगर अमजद रूपी गब्बर न तो मरा है और न ही वह कभी मरेगा। वह तो एक किंवदंती की तरह अमर है।

कल्पना अय्यर

फ़िल्म अभिनेत्री गायिका कैबरे डांसर कल्पना अय्यर के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁ कल्पना अय्य

*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
कल्पना अय्यर
🎂जन्म26 जुलाई 1956 बॉम्बे

अभिनेत्री • गायिका • डांसर
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁
आमिर खान की फिल्म 'राजा हिन्दुस्तानी' का गाना ‘परदेसी परदेसी’ सिनेप्रेमी ने जरूर सुना होगा। इस गाने में आमिर खान के साथ कल्पना अय्यर थीं, जिनके बंजारा लुक और डांस ने हर किसी को अपना दीवाना बना दिया था। 26 जुलाई को बॉलीवुड की इसी मशहूर अदाकारा का जन्मदिन है। कल्पना का जन्म 26 जुलाई 1956 को मुंबई में हुआ था और वह एक जमाने में बॉलीवुड इंडस्ट्री की शानदार एक्ट्रेस और डांसर थीं। कल्पना अय्यर ने फिल्मों में आइटम नंबर्स को एक नई पहचान दी। जब भी उनका नाम आता है, तो उनके गाने फैंस के जहन में अपने आप उतर जाते हैं। लेकिन अपने करियर के अलावा, कल्पना अपनी लव लाइफ की वजह भी चर्चा में रहीं। आइए आज हम आपको कल्पना के करियर से लेकर अमजद खान संग उनके रिश्ते के बारे में बताते हैं।

कल्पना अय्यर ने मॉडलिंग के बाद बॉलीवुड की दुनिया में कदम रखा था। वह 70 के दशक की मशहूर मॉडल रह चुकी हैं। उन्होंने मिस वर्ल्ड पेजेंट में इंडिया को रिप्रेजेंट किया। इसी दौरान उन्हें राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘मनोकामना’ का ऑफिर मिला और ऐसे उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री की। इस फिल्म में कल्पना वेस्टर्न लुक में नजर आईं, जिसे काफी पसंद किया गया। इसके बाद कल्पना ने कई हिट फिल्मों में काम करके खुद के एक शानदार अभिनेत्री के साथ-साथ गजब की कैबरे डांसर के रुप में भी स्थापित किया।
1980 से लेकर 1990 तक कल्पना अय्यर ने लगभग 100 फिल्मों में काम किया है। वह 'कोई यहां नाचे नाचे', 'हरी ओम हरी', 'मुझे जान से भी प्यारा है' जैसे कई हिट गानों के लिए याद की जाती हैं। कल्पना अपने हर गाने में आकर्षित लगती थीं, जिस वजह से दर्शकों के लिए उनके लुक्स से निगाहें हटा पाना भी मुश्किल हो जाता था। कल्पना बेहतरीन एक्ट्रेस रही हैं बल्कि जबरदस्त पॉप सिंगर भी रही हैं। उन्होंने कई लाइव शोज में परफॉर्म भी किया

बॉलीवुड इंडस्ट्री में कल्पना अय्यर और 'शोले' के गब्बर यानी अमजद खान का अफेयर काफी चर्चा में रहा। दोनों एक साथ फिल्म ‘प्यार का दुश्मन’ में नजर आए थे। इस फिल्म के गाने ‘हरि ओम हरि’ में कल्पना ने अपने डांस से आग लगा दी थी और अमजद खान उन्हें निहारते हुए दिखे थे। दावा किया जाता है कि कल्पना अमजद खान के प्यार में पागल थीं और वह अभिनेता से शादी करना चाहती थीं। कल्पना अमजद से इतना प्यार करती थीं कि अभिनेता की मौत के बाद उन्होंने भी शादी नहीं की। कल्पना आज तक कंवारी हैं और फिल्मी दुनिया से दूर हैं।

कल्पना अय्यर फिल्मी दुनिया से अचानक गायब हो गईं। वह फिल्मी दुनिया और ग्लैमर की चकाचौंध से दूर दुबई में हैं और वहां अपना रेस्टोरेंट चला रही हैं। कल्पना अय्यर ने एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने बताया कि वह अब दुबई में हैं और वहां पर अपना बिजनेस चला रही हैं। इस दौरान अभिनेत्री ने अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी बात की थी।

कल्पना अय्यर ने कहा था, 'कुछ तकलीफों और परेशानियों के चलते मैं दुबई आई। निजी तौर पर मेरी जिंदगी में कुछ ऐसी चीजें हुईं जिनसे मैं बुरी तरह से टूट गई थी और मेरी वजह से मेरी फैमिली को भी काफी तकलीफ हो रही थी। मुझे लगने लगा था कि मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी और तभी राजन सिप्पी और उनकी वाइफ ने मुझे दुबई में आने का मौका दिया और काम दिया। इस तरह मैं दुबई में राजन के रेस्टोरेंट द मोगुल रूम में होस्टेस का काम करने लगी और बाद में मुझे एंबेसेडर होटल के मालिक ने अपने यहां नौकरी दी।'

इन्हों ने लग भग 100 फिल्मे की
अपने पूरे करियर में, अय्यर ने 100 से अधिक फिल्मों में काम किया है।

पूनम (1981)
हम से बढ़कर कौन (1981)
सत्ते पे सत्ता (1982)
हम हैं लाजवाब (1984)
नल्लावनुक्कु नल्लावन (1984) आइटम नंबर
अमीर आदमी ग़रीब आदमी (1985)
जख्मी औरत (1988)
मिल गई मंजिल मुझे (1989)
अभी तो मैं जवान हूं (1989)
अंजाम (1994)
गुंडाराज (1995)
हम साथ साथ हैं (1999)


बुधवार, 26 जुलाई 2023

अभिनेता विनय पाठक

विनय पाठक 
🎂जन्म 27 जुलाई 1968
 एक भारतीय थिएटर और फिल्म अभिनेता हैं । उन्होंने खोसला का घोसला , भेजा फ्राई , आइलैंड सिटी और जॉनी गद्दार सहित कई फिल्मों में अभिनय किया है और जिस्म , रब ने बना दी जोड़ी और माई नेम इज खान जैसी फिल्मों में सहायक भूमिका निभाई है ।
🎂27 जुलाई 1968 (उम्र 54)
बिहिया , बिहार , भारत
व्यवसाय
अभिनेता , टेलीविजन प्रस्तोता , फिल्म निर्माता , थिएटर अभिनेता
सक्रिय वर्ष
1996-वर्तमान
जीवनसाथी
सोनिका सहाय ​( एम.  2006 )
बच्चे
2
पाठक का बचपन धनबाद में बीता क्योंकि उनके पिता पुलिस विभाग में तैनात थे। उन्होंने 1982 तक बोर्डिंग स्कूल विकास विद्यालय , रांची में पढ़ाई की । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद वह उच्च अध्ययन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए।शायद उनके बीएफए कार्यक्रम स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय में उनके गुरुओं में प्रमुख फ़ार्ले रिचमंड थे, जिन्होंने उनसे 1995 में भारत और हिंदी थिएटर और फिल्म में लौटने का आग्रह किया था
स्टोनी ब्रुक में स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क में अध्ययन के दौरान पाठक को कई अभिनय भूमिकाएँ मिलीं, विशेष रूप से कॉमेडी फ़िल्मों खोसला का घोसला और भेजा फ्राई में ।  1999 में, उन्होंने टेलीविजन श्रृंखला हिप हिप हुर्रे में विन्नी की भूमिका निभाई । उन्होंने फिल्म दसविदानिया का भी निर्माण किया , जिसमें एक आम आदमी के मरने से पहले विदाई लेने की कहानी बताई गई थी। 

अपने अच्छे दोस्त रणवीर शौरी के साथ उन्होंने OYE शो की एंकरिंग की । दोनों ने मिलकर टॉक शो रणवीर विनय और कौन? की मेजबानी की। ., [6] साथ ही हाउस अरेस्ट , दुनिया गोल हैं और क्रिकेट क्रेज़ी । उन्होंने गैग-आधारित शो द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो का हिस्सा बनने के लिए अपने दोस्तों रणवीर, सुरेश मेनन और गौरव गेरा के साथ मिलकर काम किया ।

पाठक ने टीवी के लिए बनी फिल्म मर्डर अनवील्ड (2005) में इंस्पेक्टर गुरपाल बदाश की एक छोटी भूमिका निभाई, जिसमें कनाडा में सिख समुदाय को दिखाया गया था।

पाठक ने जॉनी गद्दार , आजा नचले , खोया खोया चांद और रब ने बना दी जोड़ी फिल्मों में अभिनय किया ।

प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस द्वारा निर्मित उनकी अगली फिल्म रात गई बात गई दिसंबर 2009 में भारत में रिलीज़ हुई थी

कृति सेनन

कृति सेनन 
*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

कृति सेनन 

🎂जन्म 27 जुलाई 1990
 एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में दिखाई देती हैं।
*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
कृति सेनन (जन्म 27 जुलाई 1990) एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में दिखाई देती हैं।
उन्होंने जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, जिसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए एक मॉडल के रूप में काम किया।
मनोवैज्ञानिक थ्रिलर 1: नेनोक्कडाइन (2014) के साथ तेलुगु सिनेमा में अपनी शुरुआत करने के बाद, सैनन ने सब्बीर खान की एक्शन कॉमेडी हीरोपंती (2014) में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला डेब्यू का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता, जो उनकी पहली बॉलीवुड रिलीज़ थी।
सैनन ने तब से व्यावसायिक रूप से सफल एक्शन कॉमेडी दिलवाले (2015) में अभिनय किया है, जो उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली रिलीज, रोमांटिक कॉमेडी बरेली की बर्फी (2017) और लुका छुपी (2019), और कॉमेडी हाउसफुल 4 (2019) में है।
उन्होंने कपड़ों की अपनी लाइन भी लॉन्च की है और कई ब्रांडों और उत्पादों का प्रचार करती हैं।
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

सेनन का जन्म नई दिल्ली में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल सेनन और दिल्ली विश्वविद्यालय में भौतिकी की प्रोफेसर गीता सेनन के घर हुआ था । उनका परिवार पंजाबी हिंदू है ।उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम में पढ़ाई की और बाद में जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी , नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की । अभिनेत्री बनने से पहले उन्होंने कुछ समय के लिए एक मॉडल के रूप में काम किया। उनकी छोटी बहन नुपुर भी एक अभिनेत्री हैं। 
सैनन का करियर व्यावसायिक रूप से सफल रोमांटिक कॉमेडी बरेली की बर्फी (2017) और लुका छुपी (2019) में अभिनय के साथ आगे बढ़ा , और उनकी सबसे ज्यादा कमाई वाली रिलीज़ सामूहिक कॉमेडी दिलवाले (2015) और हाउसफुल 4 (2019) के साथ आईं। मिमी (2021) में एक सरोगेट मां की मुख्य भूमिका निभाने के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। इस सफलता के बाद बच्चन पांडे (2022) और आदिपुरुष (2023) जैसी व्यावसायिक रूप से असफल फिल्मों की एक श्रृंखला आई , हालांकि कॉमेडी हॉरर फिल्म भेड़िया (2022) को खूब सराहा गया।

सैनन फोर्ब्स इंडिया की 2019 की सेलिब्रिटी 100 सूची में दिखाई दीं। उन्होंने कपड़ों की अपनी लाइन और एक फिटनेस कंपनी लॉन्च की है, और कई ब्रांडों और उत्पादों के राजदूत के रूप में भी काम करती हैं।

रोमेश शर्मा


......रोमेश शर्मा.......
*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

अभिनेता, फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता, टेलीविज़न अभिनेता
*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
रोमेश शर्मा

फ़िल्म निर्देशक, निर्माता और अभिनेता

जन्मतिथि: 27-जुलाई -1947

जन्म स्थान: गुरदासपुर, पंजाब, भारत

व्यवसाय: अभिनेता, फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता, टेलीविज़न अभिनेता
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

रोमेश ब्रिज शर्मा (जन्म 27 जुलाई 1947), जिन्हें व्यापक रूप से रोमेश शर्मा के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय फिल्म निर्माता, अभिनेता और निर्देशक हैं।
अपने बैनर रोमेश फिल्म्स के तहत, वह 30 वर्षों से अधिक समय से फिल्मों और टेलीविजन शो के निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
📽️

2005 दिल जो भी कहे बतौर लेखक निर्देशक अभिनेता आशिम नाम से पात्र
2002 शरारत 
1994 सुहाग 
1991 हम 
1986 मेरा धर्म 
1983 लाल चुनरिया 
1980 द बर्निंग ट्रेन 
1979 काला पत्थर 
1977 यही है ज़िन्दगी 
1975 सुनहरा संसार 
1974 परिणय

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...