बुधवार, 31 जनवरी 2024

अंगूरलता डेके

#31jan
अंगूरलता डेके 
🎂31 जनवरी 1986,
नलबाड़ी, असम

राष्ट्रीयता भारतीय
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
जीवन संगीआकाशदीप डेका
शैक्षिक सम्बद्धता
गुवाहाटी यूनिवर्सिटी
व्यवसाय राजनेता,अभिनेत्री

 एक असमिया अभिनेत्री व राजनेता हैं, जिन्हें मई 2016 में विधायक के रूप में चुना गया है।

अंगूरलता का जन्म असम के नलबाड़ी में हुआ था। राजनेता के रूप में अंगूरलता का सम्बन्ध भारतीय जनता पार्टी से है। वे असम के बटद्रोबा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। वे दिसंबर 2015में भाजपा में शामिल हुई थी। वे उन छह महिला उम्मीदवारों में से एक हैं जिन्हें भारतीय जनता पार्टी ने टिकट दिए थे, जिनमें से केवल दो ही चुनाव जीत सकी थी; और अंगूरलता उनमें से एक है।

लोकसभा चुनाव 2024 से कुछ महीने पहले भारतीय जनता पार्टी ने राज्य स्तर पर नेतृत्व बदलने का फैसला किया है. हालांकि राज्य में शीर्ष विभागों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. लेकिन पार्टी की महिला शाखा में एक बड़े फेरबदल में, असम में राज्य भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष को बदल दिया गया है. इसी क्रम में प्रदेश बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष अंगूरलता डेका को उनके पद से हटा दिया गया है. उनके स्थान पर स्वप्ना बानिया को प्रदेश महिला मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
असमिया फिल्‍मों की एक्‍ट्रेस अंगूरलता डेका असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतने में सफल रही हैं। वे बाताद्रोवा सीट से 6000 मतों से जीतीं। उन्‍होंने कांग्रेस के गौतम बोरा को हराया। गौतम बोरा कांग्रेस के दिग्‍गज नेता हैं और मंत्री भी रह चुके हैं
जिस सीट से अंगूरलता जीती हैं वह सीट अल्‍पसंख्‍यक बहुल है। अंगूरलता के चुनाव जीतने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूबसूरती को लेकर काफी चर्चा हुई।अंगूरलता असमिया फिल्‍मों का बड़ा नाम है। उन्‍होंने जुंदा इमान गुंडा, बाकोर पुतेक और सुरजस्त जैसी कामयाब और चर्चित फिल्‍में की। असमिया मोबाइल थियेटर में बेनजीर भुट्टो की भूमिका ने उन्‍हें लोकप्रिय बना दिया।अंगूरलता ने एक्‍टर आकाशदीप से पिछले साल शादी की। दोनों की एक बेटी भी है। अंगूरलता ने एमएनसी बालिका महाविद्यालय से स्‍कूली शिक्षा ली। इसके बाद गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से 2006 में ग्रेजुएशन किया।अंगूरलता ने एक्‍टर आकाशदीप से पिछले साल शादी की। दोनों की एक बेटी भी है। अंगूरलता ने एमएनसी बालिका महाविद्यालय से स्‍कूली शिक्षा ली। इसके बाद गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से 2006 में ग्रेजुएशन किया।

प्रीति जिंटा


#31jan 
प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रीति जिंटा
 
🎂31 जनवरी 1975

एक भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री है। वे हिन्दी, तेलगू, पंजाबी व अंग्रेज़ी फ़िल्मों में कार्य कर चुकी है। मनोविज्ञान में उपाधी ग्रहण करने के बाद ज़िंटा ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत दिल से.. में 1998 से की और उसी वर्ष फ़िल्म सोल्जर में पुनः दिखी इन फ़िल्मों में अभिनय के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ नई अदाकारा का पुरस्कार प्रदान किया गया और आगे चलकर उन्हें फ़िल्म क्या कहना में कुँवारी माँ के किरदार के लिए काफ़ी सराहा गया। उन्होंने आगे चलकर भिन्न-भिन्न प्रकार के किरदार अदा किए व उनके अभिनय व किरदारों ने हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्रियों की एक नई कल्पना को जन्म दिया।

जिंटा को 2003 में फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार कल हो ना हो फ़िल्म में उनके अभिनय के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने सर्वाधिक कमाई वाली दो भारतीय फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमे काल्पनिक विज्ञान पर आधारित फ़िल्म कोई... मिल गया 2003 और रोमांस फ़िल्म वीर-ज़ारा (2004) शमिल है जिसके लिए उन्हें समीक्षकों द्वारा बेहद सराहा गया। उन्होंने आधुनिक भारतीय नारी का किरदार फ़िल्म सलाम नमस्ते और कभी अलविदा ना कहना में निभाया जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में उच्च-कमाई वाली फ़िल्में रही इन उपलब्धियों ने उन्हें हिन्दी सिनेमा के मुख्य अभिनेत्रियों में से एक बना दिया उनका पहला अंतर्राष्ट्रीय किरदार कनेडियाई फ़िल्म हेवन ऑन अर्थ में था जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सिल्वर ह्यूगो पुरस्कार 2008 के शिकागो अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में प्रदान किया गया।

फ़िल्मों में अभिनय के आलावा जिंटा ने बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन में कई लेख लिखे है, साथ ही वे एक सामाजिक कार्यकर्त्ता, टेलिविज़न मेज़बान और नियमित मंच प्रदर्शनकर्ता है। वे पीज़ेडएनज़ेड इण्डिया प्रोडक्शन कंपनी की संस्थापक भी है जिसकी स्थापना उन्होंने अपने पूर्व-साथी नेस वाडिया के साथ की है और दोनों साथ-ही-साथ इंडियन प्रीमियर लीग की क्रिकेट टीम किंग्स XI पंजाब के मालिक भी है।

ज़िंटा का जन्म शिमला, हिमाचल प्रदेश में राजपूत में हुआ था। उनके पिता दुर्गानंद जिंटा भारतीय थलसेना में अफसर थे जब वे 13 वर्ष की थी तब उनके पिता एक कार दुर्घटना में चल बसे और उनकी माँ, निलप्रभा, को गंभीर चोंटें आई जिसके चलते वे दो वर्षों तक बिस्तर पर ही रही। ज़िंटा ने इस दुखद हादसे को अपने जीवन का अहम मोड बताया जिसके चलते वे जल्द ही समझदार व गंभीर बन गई।उनके दो भाई है, दीपांकर और मनीष, एक बड़ा और एक छोटा। दीपांकर भारतीय थलसेना में अफसर है व मनीष कैलिफोर्निया में रहते है।

ज़िंटा बचपन में लड़कों जैसे रहती थी, उन्होंने अपने पिता की सैन्य पार्श्वभूमी को अपने परिवार के रहन सहन पर बेहद प्रभावी बताया। वे बच्चों को अनुशासन और समय की पाबन्दी का महत्व समझते थे।उन्होंने शिमला के कॉन्वेंट ऑफ़ जीज़स एंड मेरी बोर्डिंग विद्यालय में पढ़ाई की. हालाँकि बोर्डिंग विद्यालय में उन्हें अकेलापन महसूस होता था परन्तु उन्होंने ये भी कहा की उन्हें वहाँ "..बेहद बढ़िया दोस्त भी मिले"।छात्रा के तौर पर उन्हें साहित्य से प्यार हो गया, खास कर विलियम शेक्सपियर और उनकी कविताओं से जिंटा के अनुसार उन्हें विद्यालय का कार्य बेहद पसंद था और उन्हें अछे अंक भी मिलते थे। अपने खाली समय में वे बास्केटबॉल जैसे खेल खेलती थी।

18 वर्ष की आयु में विद्यालय से शिक्षण पूरा करने के पश्च्यात उन्होंने सेंट बेडेज़ कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने अंग्रेज़ी ऑनर्स में उपाधी ग्रहण की और मनोविज्ञान में उपाधी के लिए दाखिला लिया अपराधी मनोविज्ञान में स्नाकोत्तर उपाधी ग्रहण करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग की शुरुआत की। ज़िंटा का पहला टेलिविज़न विज्ञापन पर्क चोकोलेट के लिए था जो उन्हें 1996अपने एक मित्र के जन्मदिन की पार्टी में एक निर्देशक से रूबरू होने के करण मिला था।निर्देशक ने उन्हें ऑडिशन देने के लिए मना लिया और उनका चयन कर लिया गया। इसके बाद उन्होंने कई विज्ञापनों में कार्य किया जिनमे लिरिल साबुन का विज्ञापन उल्लेखनीय है।

1997  में ज़िंटा फ़िल्म-निर्माता शेखर कपूर से मिली जब वे अपने एक मित्र के साथ ऑडिशन पर गई थी और वहाँ उन्हें भी ऑडिशन देने का प्रस्ताव दिया गया। उनका ऑडिशन देखकर कपूर ने उन्हें अभिनेत्री बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हें बतौर अभिनेत्री अपनी शुरुआत कपूर की फ़िल्म तारा रम पम पम से ऋतिक रोशन के साथ करनी थी परन्तु फ़िल्म रद्द कर दिया गया। कपूर ने बाद उनकी सिफ़ारिश निर्देशक मणी रत्नम की फ़िल्म दिल से... के लिए की ज़िंटा को अब भी याद आता है की जब उन्होंने फ़िल्म उद्द्योग में पाँव रखा तब उनके दोस्त उन्हें चिढ़ाते थे की वे "सफ़ेद साड़ी पहन कर बारिश में नाचेंगी" जिसके चलते उन्हें भिन्न-भिन्न पात्र साकारने का प्रोत्साहन मिला

ज़िंटा ने कुंदन शाह की क्या कहना का चित्रीकरण शुरू किया परन्तु इसकी रिलीज़ 2000 तक टाल दी गई। एक अन्य फ़िल्म सोल्जर में देरी के कारण उनकी पहली रिलीज़ फ़िल्म दिल से... 1998 ) बन गई जो शाहरुख खान और मनीषा कोइराला के साथ थी।उन्हें फ़िल्म में प्रीती नायर, एक आम दिल्ली के परिवार की लड़की व खान की मंगेतर के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस फ़िल्म को नए कलाकार को लॉन्च करने के हेतू से बेहद अपारंपरिक माना गया क्योंकि इसमें उनका पात्र केवल 20 मिनट के लिए ही पर्दे पर था। इसके बावजूद उनका किरदार लोगों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा. अपने इस पात्र के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री पुरस्कार का नामांकन प्राप्त हुआ। उन्होंने अपना पहला मुख्य किरदार एक्शन-ड्रामा फ़िल्म सोल्जर (1998 ) में निभाया जो उस वर्ष की हीट फ़िल्म रही. उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ नई अदाकारा का पुरस्कार दिल से... और सोल्जर फ़िल्मों में अभिनय के लिए प्रदान किया गया।

ज़िंटा ने दो तेलगू फ़िल्मों, प्रेमंते इदेरा (1998 ), वेंकटेश के साथ; और राजा कुमरुदु (1999) महेश बाबु के साथ, कार्य किया। उन्होंने संघर्ष में अक्षय कुमार के साथ मुख्य किरदार अदा किया। यह फ़िल्म द साइलेंस ऑफ़ द लैम्ब्स (1991) पर आधारित थी व इसका निर्देशन तनूजा चंद्रा द्वारा व लेखन महेश भट्ट द्वारा किया गया था। ज़िंटा ने इसमें सीबीआई अफसर रीत ओबेरॉय की भूमिका निभाई जो एक हत्यारे से प्यार कर बैठती है। यह फ़िल्म बॉक्स-ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रही परन्तु जिंटा के अभिनय को समीक्षकों ने काफ़ी सराहा.

ज़िंटा की 2000 में पहली भूमिका ड्रामा फ़िल्म क्या कहना में थी जो अचानक एक बॉक्स-ऑफिस सफलता बन गई। फ़िल्म में कुँवारी माँ व युवा गर्भधारण जैसी समस्याओं पर प्रकाश डाला गया था और इसके चलते ज़िंटा को जनता व समीक्षकों द्वारा बेहद सराहा गया। उनकी कुँवारी माँ प्रिया बक्षी का पात्र जो सामाजिक अवधारणाओं का मुकाबला करती है, ने उन्हें कई पुरस्कारों के नामांकन प्राप्त करवाए जिनमे उनका पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार नामांकन शामिल है।

उसी वर्ष ज़िंटा विधु विनोद चोपरा की फ़िल्म मिशन कश्मीर में संजय दत्त व ऋतिक रोशन के साथ नज़र आई। कश्मीर की वादियों में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान रची यह फ़िल्म आतंकवाद और जुर्म के विषय पर आधारित थी। ज़िंटा का किरदार सुफिया परवेज़, एक टेलिविज़न रिपोर्टर व रोशन के बचपन के प्यार का था। द हिन्दू ने उनके प्रदर्शन के बारे में कहा, "प्रीटी ज़िंटा हमेशा की तरह अपनी चुलबुले अभिनय से गंभीर कहानी में रंग भर देती है"। यह फ़िल्म एक व्यापारिक सफलता रही व उस वर्ष की भारत की तीसरी सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्म रही।

2001 में ज़िंटा को फरहान अख्तर की राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार विजेता फ़िल्म दिल चाहता है में अपनी भूमिका के लिए बेहद सराहा गया। भारतीय युवाओं के जीवन पर आधारित यह फ़िल्म वर्तमान मुंबई में रची गई थी व इसका केन्द्र तिन दोस्तों (आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना) के जीवन में हुए एक बड़े बदलाव पर था। जिंटा का पात्र आमिर खान की प्रेयसी शालिनी का था। दिल चाहता है समीक्षकों के बिच लोकप्रिय रही और कुछ के अनुसार यह भारतीय युवाओं के वास्तविक चित्रण का बढ़िया नमूना है। यह फ़िल्म एक भारत में अधिक सफल नहीं रही। यह बड़े शहरों में अच्छा व्यवसाय कर सकी परन्तु छोटे शहरों में यह असफल रही क्योंकि इसका विषय शहरी जीवनशैली पर आधारित था। रेडिफ़.कॉम में ज़िंटा के बारे में लिखा की "... वह बेहद खूबसूरत व चुलबुली है और असमंजस और असली भावनाओं से जुंझ रही है।"

2001 में ज़िंटा की तीन अन्य फ़िल्में रिलीज़ हुई जिनमे अब्बास-मस्तान की रोमांस ड्रामा चोरी चोरी चुपके चुपके, जिसे भरत शाह पर चल रहे मुकद्दमे के करण एक वर्ष देर से रिलीज़ किया गया, शामिल है। यह फ़िल्म बॉलीवुड की पहली फ़िल्मों में से एक थी जिसने विवादस्पद किराए प्रसव के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया। ज़िंटा ने मधुबाला की भूमिका अदा की जो एक अच्छे दिल की वैश्या है जिसे एक माँ बनने के लिए किराए पर रखा जाता है। शुरुआत में यह किरदार अदा करने के लिए तैयार न होने के बावजूद उन्होंने निर्देशक के मानाने पर इसे स्वीकार कर लिया और पात्र की तयारी के लिए मुंबई के कई बारों और नाइटक्लबों में गई व वेश्याओं के हाव भाव व भाषा को समझा। उन्हें अपनी भूमिका के लिए दूसरी बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री पुरस्कार का नामांकन प्राप्त हुआ।

2002 में ज़िंटा ने एक बार फिर कुंदन शाह के साथ कार्य करते हुए पारिवारिक ड्रामा फ़िल्म दिल है तुम्हारा में रेखा, महिमा चौधरी और अर्जुन रामपाल के साथ नज़र आई। हालाँकि फ़िल्म बॉक्स-ऑफिस पर सफल नहीं रही परन्तु उनके द्वारा अभिनीत गोद लि गई बेटी शालू का पात्र बेहद सराहा गया।

सुरैया

#15jun 
#31jan 

सुरैया जमाल शेख़
प्रसिद्ध नाम सुरैया

🎂जन्म 15 जून, 1929
जन्म भूमि गुजरांवाला, पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान)
⚰️मृत्यु 31 जनवरी, 2004
मृत्यु स्थान मुम्बई, भारत

पति/पत्नी अविवाहित
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनय और गायन
मुख्य फ़िल्में 'मिर्ज़ा ग़ालिब', 'खिलाड़ी', 'जीत', 'विद्या', 'दो सितारे' आदि।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी हिंदी फ़िल्मों में अपार लोकप्रियता हासिल करने वाली सुरैया उस पीढ़ी की आख़िरी कड़ी में से एक थीं जिन्हें अभिनय के साथ ही पार्श्व गायन में भी निपुणता हासिल थी।

, हिन्दी फ़िल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका थीं। 40वें और 50वें दशक में इन्होंने हिन्दी सिनेमा में अपना योगदान दिया। अदाओं में नज़ाकत, गायकी में नफ़ासत की मलिका सुरैया जमाल शेख़ ने अपने हुस्न और हुनर से हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नई इबारत लिखी। वो पास रहें या दूर रहें, नुक़्ताचीं है ग़मे दिल, और दिल ए नादां तुझे हुआ क्या है जैसे गीत सुनकर आज भी जहन में सुरैया की तस्वीर उभर आती है।
जीवन परिचय
15 जून, 1929 को गुजरांवाला, पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मी सुरैया अपने माता पिता की इकलौती संतान थीं। नाज़ों से पली सुरैया ने हालांकि संगीत की शिक्षा नहीं ली थी लेकिन आगे चलकर उनकी पहचान एक बेहतरीन अदाकारा के साथ एक अच्छी गायिका के रूप में भी बनी। सुरैया ने अपने अभिनय और गायकी से हर कदम पर खुद को साबित किया है।

फ़िल्मी कैरियर
सुरैया के फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत बड़े रोचक तरीक़े से हुई। गुजरे ज़माने के मशहूर खलनायक जहूर सुरैया के चाचा थे और उनकी वजह से 1937 में उन्हें फ़िल्म 'उसने क्या सोचा' में पहली बार बाल कलाकार के रूप में भूमिका मिली। 1941 में स्कूल की छुट्टियों के दौरान वह मोहन स्टूडियो में फ़िल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने गईं तो निर्देशक नानूभाई वकील की नज़र उन पर पड़ी और उन्होंने सुरैया को एक ही नज़र में मुमताज़ महल के बचपन के रोल के लिए चुन लिया। इसी तरह संगीतकार नौशाद ने भी जब पहली बार ऑल इंडिया रेडियो पर सुरैया की आवाज़ सुनी और उन्हें फ़िल्म 'शारदा' में गवाया। 1947 में भारत की आज़ादी के बाद नूरजहाँ और खुर्शीद बानो ने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली, लेकिन सुरैया यहीं रहीं।

देवानंद और सुरैया
एक वक़्त था, जब रोमांटिक हीरो देव आनंद सुरैया के दीवाने हुआ करते थे। लेकिन अंतत: यह जोड़ी वास्तविक जीवन में जोड़ी नहीं पाई। वजह थी सुरैया की दादी, जिन्हें देव साहब पसंद नहीं थे। मगर सुरैया ने भी अपने जीवन में देव साहब की जगह किसी और को नहीं आने दिया। ताउम्र उन्होंने शादी नहीं की और मुंबई के मरीनलाइन में स्थित अपने फ्लैट में अकेले ही ज़िंदगी जीती रहीं। देव आनंद के साथ उनकी फ़िल्में 'जीत' (1949) और 'दो सितारे' (1951) ख़ास रहीं। ये फ़िल्में इसलिए भी यादगार रहीं क्योंकि फ़िल्म 'जीत' के सेट पर ही देव आनंद ने सुरैया से अपने प्रेम का इजहार किया था, और 'दो सितारे' इस जोड़ी की आख़िरी फ़िल्म थी। खुद देव आनंद ने अपनी आत्मकथा 'रोमांसिंग विद लाइफ' में सुरैया के साथ अपने रिश्ते की बात कबूली है। वह लिखते हैं कि सुरैया की आँखें बहुत ख़ूबसूरत थीं। वह बड़ी गायिका भी थीं। हां, मैंने उनसे प्यार किया था। इसे मैं अपने जीवन का पहला मासूम प्यार कहना चाहूंगा।

प्रमुख फ़िल्में
शमा (1961)
मिर्ज़ा ग़ालिब (1954)
दो सितारे (1951)
खिलाड़ी (1950)
सनम (1951)
कमल के फूल (1950)
शायर (1949)
जीत (1949)
विद्या (1948)
अनमोल घड़ी (1946)
हमारी बात (1943)
गायन
अभिनय के अलावा सुरैया ने कई यादगार गीत गाए, जो अब भी काफ़ी लोकप्रिय है। इन गीतों में, सोचा था क्या मैं दिल में दर्द बसा लाई, तेरे नैनों ने चोरी किया, ओ दूर जाने वाले, वो पास रहे या दूर रहे, तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी, मुरली वाले मुरली बजा आदि शामिल हैं।

मंगलवार, 30 जनवरी 2024

आकाशदीप सिंह बाठ

#30jan
आकाशदीप सिंह बाठ

🎂जन्म 30 जनवरी 1992

एक भारतीय पंजाबी फिल्म निर्देशक, निर्माता, लेखक और पटकथा लेखक हैं। बाथ ने माईसेल्फ घेंट (2014) के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की ।  2011 में, बाथ अपने अंग्रेजी उपन्यास अनहद-द मैन ऑन मिशन के साथ एक प्रकाशित लेखक बन गए । आकाशदीप 18 साल के थे जब उन्होंने पहली बार अपनी अंग्रेजी फिक्शन प्रकाशित की थी  और 22 साल के थे जब उन्होंने अपनी पहली पंजाबी फीचर फिल्म, माईसेल्फ घैंट रिलीज की , इस तरह वह पंजाबी फिल्म उद्योग में सबसे कम उम्र के फिल्म निर्देशक बन गए।
📽️
अकाली बबर निर्देशक, पटकथा लेखक

मैं खुद घांट हूं सह-निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक

हम योद्धा हैं सह-निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक

समीप कंग

#30jan 
स्मीप कांग

जन्म
30 जनवरी 1973 
पटियाला , पंजाब , भारत
व्यवसाय
लेखक, निर्देशक, निर्माता, अभिनेता

मेरी वाहुति दा वियाह (2007) और चक दे ​​फट्टे (2008) जैसी फिल्मों का निर्देशन करने के बावजूद , समीप कांग ने 2012 में कॉमेडी फिल्म कैरी ऑन जट्टा से निर्देशक के रूप में लोकप्रियता हासिल की , जो ब्लॉकबस्टर बन गई और उच्चतम फिल्मों में से एक भी बन गई। उस वर्ष की सबसे अधिक कमाई करने वाली पंजाबी फीचर फिल्में। उन्होंने 2013 में कॉमेडी फिल्म लकी दी अनलकी स्टोरी के साथ कैरी ऑन जट्टा के अधिकांश कलाकारों के साथ फिर से काम किया । यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही. इसके बाद, उन्होंने भाजी इन प्रॉब्लम का निर्देशन किया , जो बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार करने में सफल रही, लेकिन उनकी पिछली दो फिल्मों की तरह सफल नहीं रही।

📽️फिल्मोग्राफी📽️

1999 महौल ठीक है
2006 एक जिंद एक जान
2006दिल अपना पंजाबी
2007 मेरी वोहटी दा विया
2008 चक दे ​​फट्टे
2008 26जुलाई बरिस्ता में
2011 यारा ओ दिलदारा
2012 कैरी ऑन जट्टा
2013 लकी दी अनलकी स्टोरी
2013 समस्या में भाजी
2014 डबल डि ट्रबल
2014 मिस्टर एंड मिसेज 420
2015 सेकेंड हैंड पति
2016 वैसाखी सूची
2016 ताला
2018 लावण फेरे
2018जारी रखे जट्टा 2
2018 वदाइयाँ जी वदाइयां
20019बैंड वाजे
2019नौकर वहुति दा निर्माता
2019झूठा कहीं का
2022 बाई जी कुट्टंगे 
2022गोल गप्पे 
2023जारी रखें जट्टा 3

सुनंदा शर्मा

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सुनंदा शर्मा 

🎂जन्म की तारीख और समय: 30 जनवरी 1992, फतेहगढ़ चूडिय़ां (मजीठा के पास)
माता-पिता: विनोद कुमार शर्मा, सुमन शर्मा

एक भारतीय गायिका और अभिनेत्री हैं। उन्होंने "बिली अख" गीत से अपनी शुरुआत की। शर्मा ने हाल ही में फिल्म सज्जन सिंह रंगरूट में सह-कलाकार दिलजीत दोसांझ और योगराज सिंह के साथ अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। सुनंदा शर्मा ने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत "तेरे नाल नचना" गाने से की थी।

सुनंदा शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत कवर गाने गाकर और यूट्यूब पर वीडियो रिकॉर्डिंग अपलोड करके की।लोकप्रियता बढ़ने के बाद, अंततः उन्होंने अपना पहला एकल, "बिली अख" रिलीज़ किया। 2017 में रिलीज हुआ उनका एक गाना 'जानी तेरा ना' यूट्यूब पर 334 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है ।

उन्होंने पीटीसी पंजाबी म्यूजिक अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ डेब्यू महिला गायिका का पुरस्कार जीता ।2017 में उन्होंने ब्रिट एशिया टीवी म्यूजिक अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनय का पुरस्कार जीता ।"बारिश की जाए" को भारत भर के दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है। सुनंदा शर्मा को पीटीसी पंजाबी चैनल पर प्रसारित शो 'हुनर पंजाब दा - सीजन 2' के लिए एंकर के रूप में होस्ट करने के लिए आमंत्रित किया गया था। सुनंदा शर्मा को भारत के संगीत उद्योग की नई बॉस लेडी के रूप में जाना जा रहा है। 
📽️
2018 नवाबज़ादे
2019 लुका छुपी
2020 जय मम्मी दी

सोमवार, 29 जनवरी 2024

अरविंद जोशी

#05aug
#29jan 
अरविंद जोशी

🎂जन्म 05 अगस्त, 1929
जन्म भूमि पुणे, महाराष्ट्र
⚰️मृत्यु 29 जनवरी, 2021
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

संतान पुत्र- शरमन जोशी, पुत्री- मानसी जोशी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिंदी सिनेमा
प्रसिद्धि अभिनेता
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी अरविंद जोशी ने 'इत्तेफाक', 'शोले', 'अपमान की आग, 'खरीदार', 'ठिकाना' और 'नाम' जैसी तमाम फिल्मों में सहायक कलाकार के तौर पर छोटी-छोटी भूमिकाएं भी निभाई थीं।
अरविंद जोशी 
 जानेमाने भारतीय अभिनेता थे। मुख्यत: वह गुजराती रंगमंच से जुड़े हुये थे। उनके पुत्र शरमन जोशी भी हिंदी फ़िल्म जगत में मशहूर अभिनेता के रूप में जाने जाते हैं। अरविंद जोशी ने कई हिंदी सीरियलों में भी काम किया था।

अरविंद जोशी ने फिल्म 'अपमान की आग', 'शोले' और 'इत्तेफाक' जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई थी।
हिंदी सिनेमा के साथ-साथ गुजराती नाटकों में भी अरविंद जोशी ने काम किया।
उनकी दो संतान हैं, जिनमें बेटे का नाम शरमन जोशी है तो वहीं बेटी का नाम मानसी जोशी है।
अरविंद जोशी कलाकारों के परिवार से ताल्लुक रखते थे। वह तो अभिनेता थे ही, साथ ही उनके बेटे शरमन जोशी और दामाद रोहित रॉय भी अभिनेता हैं। इसके साथ ही अरविंद जोशी की बहन सरिता जोशी भी मशहूर एक्ट्रेस थीं।
अरविंद जोशी ने कई हिट गुजराती फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी पहचान गुजराती नाटकों में अभिनय करने और गुजराती नाटकों के निर्देशक के तौर पर बनीं।
यदि हिंदी फिल्मों की बात करें तो अरविंद जोशी ने 'इत्तेफाक', 'शोले', 'अपमान की आग, 'खरीदार', 'ठीकाना' और 'नाम' जैसी तमाम फिल्मों में सहायक कलाकार के तौर पर छोटी-छोटी भूमिकाएं भी निभाईं। उन्होंने कई हिंदी सीरियलों में भी काम किया था।
अरविंद जोशी का मुंबई के नानावटी हॉस्पिटल में 29 जनवरी, 2021 को निधन हुआ। उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया। उनका अंतिम संस्कार विले पार्ले में स्थित श्मशान घाट पर हुआ।

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...