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गुरुवार, 25 जनवरी 2024
एस डी नारंग
विशाल आदित्य सिंह
कविता कृष्णा मूर्ति
कविता कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम
प्रसिद्ध नाम कविता कृष्णमूर्ति
अन्य नाम शारदा कृष्णमूर्ति
🎂जन्म 25 जनवरी, 1958
जन्म भूमि दिल्ली, भारत
अभिभावक पिता- टी.एस. कृष्णमूर्ति
पति/पत्नी एल. सुब्रमण्यम
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र गायिकी
पुरस्कार-उपाधि 'पद्मश्री' (2005), फ़िल्मफेयर पुरस्कार (चार बार, सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्वगायिका)
प्रसिद्धि पार्श्वगायिका
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी साल 1980 में कविता कृष्णमूर्ति ने अपना पहला पार्श्व गीत 'काहे को ब्याही' (फ़िल्म 'मांग भरो सजना') गाया। यह गाना बाद में फ़िल्म से हटा दिया गया था।
कविता कृष्णमूर्ति का जन्म 25 जनवरी सन 1958 को नई दिल्ली में हुआ था। उनका का असल नाम 'शारदा' है। उनके पिता 'एजुकेशन एंड कल्चर अफेयर्स मिनिस्ट्री' में कर्मचारी थे। भारत की विविधता का ही कमाल है कि उत्तर भारत के सबसे बड़े शहर में एक तमिल अय्यर परिवार की लड़की ने सबसे पहले जो संगीत सीखा, वह था बंगाल का रबींद्र संगीत। कविता महज 9 साल की थीं, जब उन्होंने लता मंगेशकर के साथ गाना गाया। साल था 1967। तब लता मंगेशकर किवदंती बनने की राह पर काफी आगे निकल चुकी थीं। लता मंगेशकर और कविता कृष्णमूर्ति ने एक टैगोर गीत रिकॉर्ड किया था। इसमें संगीत था हेमंत कुमार का।
कविता कृष्णमूर्ति का बचपन लुटियंस दिल्ली की सरकारी कॉलोनी में बीता। वह बड़े होकर आईएफएस अधिकारी बनना चाहती थीं। लेकिन फिर संगीत में ऐसी लौ लगी कि बलरामपुरी से क्लासिकल सीखने लगीं और आधी पढ़ाई में ही मुम्बई शिफ्ट हो गईं। कविता कृष्णमूर्ति ने मुंबई के मशहूर सेंट जेवियर्स कॉलेज से इकॉनमिक्स में बीए किया। इस दौरान वह हेमंत कुमार की बेटी रानू मुखर्जी से मिलीं। एक बार फिर से संगीत की राह खुली। मन्ना डे ने उनसे रेडियो के लिए कई जिंगल्स गवाए। फिर मुलाकात हुई हेमा मालिनी की माता जया चक्रवर्थी से। उन्होंने कविता को लक्ष्मीकांत तक पहुंचाया। लक्ष्मीकांत ने कविता को अपने संरक्षण में ले लिया।
कविता कृष्णमूर्ति वायलिन वादक एल. सुब्रमण्यम की पत्नी हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि- "एक बार उन्हें गायक हरिहरन के साथ मिलकर सुब्रमण्यम के लिए गाना गाना था, तब उनका विवाह नहीं हुआ था। सुब्रमण्यम का बहुत नाम था और इसलिए कविता उनसे बहुत घबराई हुई थीं, लेकिन उन्होंने बहुत धैर्य के साथ गाना पूरा किया। इसके बाद साथ काम करने के दौरान दोनों करीब आए और विवाह बंधन में बंध गए।
पसंदीदा अभिनेता व अभिनेत्री
एक बार एक साक्षात्कार में कविता कृष्णमूर्ति ने बताया था कि- "बचपन में उनको अभिनेता दिलीप कुमार बहुत पसंद थे। वह जब बड़ी हो रही थीं, तब अभिनेताओं में संजीव कुमार को पसंद करती थीं। उन्हें अमिताभ बच्चन और आमिर ख़ान भी पसंद हैं। अभिनेत्रियों में श्रीदेवी, रानी मुखर्जी और काजोल पसंद हैं। शबाना आज़मी को वह बेहतरीन अभिनेत्री मानती हैं। कविता कृष्णमूर्ति ने शबाना आज़मी, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, मनीषा कोइराला और ऐश्वर्या राय सरीखी शीर्ष अभिनेत्रियों के लिए गाने गाए हैं।"
🎧गीत
✍️कविता कृष्णमूर्ति ने पहला गाना कन्नड़ में गाया था। यदि किसी को ये लगता है कि वे सिर्फ 90 के दशक की टॉप गायिका रही हैं, तो यह गलत है। उनका आखिरी गाना 2011 में आई फ़िल्म 'रॉकस्टार' में सुना गया। 'तुमको जो पाया...' गाना कविता कृष्णमूर्ति की ही आवाज में है और साथ ही 2017 में फ़िल्म 'तुम्हारी सुलु' में उनका गाना 'हवा-हवाई...' लिया गया। अच्छी बात यह है कि इसमें उनकी आवाज को वैसा ही लिया गया है और उनकी आवाज में कोई बदलाव नहीं है। अपने इस लंबे सफर में कविता कृष्णमूर्ति ने कई गाने गाए हैं, जिनमें टॉप गानों पर निम्न गीत आते हैं-
क्रमांक गीत फ़िल्म वर्ष
1. निंबुड़ा-निंबुड़ा-निंबुड़ा हम दिल दे चुके सनम 1999
2. बोले चूड़ियां, बोले कंगना कभी खुशी कभी गम 2001
3. हवा-हवाई मिस्टर इंडिया 1987
4. नींद चुराई मेरी, किसने ओ सनम इश्क 1987
5. तू ही रे-तू ही रे बॉम्बे 1995
6. साजनजी घर आए, साजनजी घर आए कुछ-कुछ होता है 1998
7. ऐ वतन तेरे लिए कर्मा 1986
8. तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त मोहरा 1994
9. आई लव माई इंडिया परदेस 1997
10. डोला रे डोला रे डोला रे देवदास 2002
11. हम पे ये किसने हरा रंग डाला देवदास 2002
12. आंखों की गुस्ताखियां माफ हों हम दिल दे चुके सनम 1999
पद्मा रानी
बुधवार, 24 जनवरी 2024
पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी
सुभाष घई
#24jan
सुभाष घई
🎂जन्म 24 जनवरी, 1945
जन्म भूमि नागपुर, महाराष्ट्र
पति/पत्नी मुक्ता घई
संतान दो पुत्री- मेघना घई, मुस्कान घई
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिंदी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'कालीचरण', 'विश्वनाथ', 'कर्ज़', 'विधाता', 'कर्मा', 'हीरो', 'सौदागर', 'राम-लखन', 'ताल', 'खलनायक', 'परदेश' और 'ऐतराज़' आदि।
विद्यालय फ़िल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे
प्रसिद्धि फ़िल्म निर्माता-निर्देशक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी बॉलिवुड को नए ऐक्टर्स देने के लिए सुभाष घई ने एक ऐक्टिंग स्कूल की स्थापना भी की है। इसे दुनिया के टॉप-10 ऐक्टिंग स्कूलों में गिना जाता है।
24 जनवरी, 1945 को नागपुर में जन्मे सुभाष घई बचपन के दिनों से ही फ़िल्मों में काम करना चाहते थे। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने पुणे के 'फ़िल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया' में प्रशिक्षण लिया और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई आ गए। सुभाष घई ने अपने जीवन में महज 16 फ़िल्मों का निर्देशन किया है। इनमें से 13 फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही हैं। उनकी पहली फ़िल्म 'कालीचरण' खूब सफल रही थी। इस फ़िल्म की कहानी भी घई ने ही लिखी थी।
सुभाष घई ने साल 1970 में मुक्ता घई से विवाह किया। उनकी दो बेटियां हैं। इनमें से एक बेटी मेघना को उन्होंने गोद लिया था। बॉलिवुड को नए ऐक्टर्स देने के लिए सुभाष घई ने एक ऐक्टिंग स्कूल की स्थापना भी की है। इसे दुनिया के टॉप-10 ऐक्टिंग स्कूलों में गिना जाता है।
अपने कॅरियर के शुरुआती दौर में सुभाष घई ने कुछ फ़िल्मों में अभिनय किया, लेकिन बतौर अभिनेता अपनी पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके। बतौर निर्देशक सुभाष घई ने अपने कॅरियर की शुरुआत वर्ष 1976 में प्रदर्शित फ़िल्म 'कालीचरण' से की। फ़िल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। वर्ष 1978 में उन्होंने एक बार फिर से शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर 'विश्वनाथ' बनाई। इस फ़िल्म में शत्रुघ्न सिन्हा ने एक तेजतर्रार वकील की भूमिका निभाई थी। फ़िल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। इस फ़िल्म में शत्रुघ्न सिन्हा का बोला गया यह संवाद जली को आग कहते हैं, बुझी को राख कहते हैं, जिस राख से बारूद बने, उसे विश्वनाथ कहते हैं दर्शकों के बीच आज भी लोकप्रिय है।
वर्ष 1980 में प्रदर्शित फ़िल्म 'कर्ज' सुभाष घई के कॅरियर की एक और सुपरहिट फ़िल्म साबित हुई। पुनर्जन्म पर आधारित इस फ़िल्म में ऋषि कपूर, टीना मुनीम, सिमी ग्रेवाल, प्राण, प्रेमनाथ और राजकिरण ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इस फ़िल्म में सिमी ग्रेवाल ने नेगेटिव किरदार निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया था। 'कर्ज' टिकट खिड़की पर सुपरहिट फ़िल्म साबित हुई।
वर्ष 1982 में प्रदर्शित फ़िल्म 'विधाता' सुभाष घई के करियर की महत्वपूर्ण फ़िल्मों में शुमार की जाती है। इस फ़िल्म के जरिए सुभाष घई ने अभिनय सम्राट दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, संजीव कुमार, संजय दत्त जैसे मल्टी सितारों को एक साथ पेश किया। फ़िल्म ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए।
वर्ष 1982 में सुभाष घई ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी 'मुक्ता आर्ट्स' की स्थापना की, जिसके बैनर तले उन्होंने वर्ष 1983 में प्रदर्शित फ़िल्म 'हीरो' का निर्माण-निर्देशन किया। इस फ़िल्म के जरिए सुभाष घई ने फ़िल्म इंडस्ट्री को जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्रि के रूप में नया सुपरस्टार दिया।
वर्ष 1986 में सुभाष घई ने दिलीप कुमार को लेकर अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म 'कर्मा' का निर्माण किया। दिलीप कुमार, नूतन, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, नसीरुद्दीन शाह, श्रीदेवी, पूनम ढिल्लो और अनुपम खेर जैसे सुपर सितारों से सजी इस फ़िल्म के जरिए सुभाष घई ने दर्शकों के बीच देशभक्ति की भावना का संचार किया।
मंगलवार, 23 जनवरी 2024
नक्श लायलपुरी
काँटों से भी ख़ुशबू आए
देखें और दीवाना कर दें
गोया उनको जादू आए
कोई तो हमदर्द है मेरा
आप न आए आँसू आए
इश्क़ है यारो उनके बस का
जिन को दिल पर काबू आए
उन कदमों की आहट पाकर
फूल ही फूल लबे –जू आए
गूँज सुनी तेरे चरख़े की
पर्बत छोड़ के साधू आए
‘नक्श़’ घने जंगल में दिल के
फ़िर यादों के जुगनू आए
दिल का आईना हो गईं आँखें
ख़त का पढ़ना भी हो गया मुश्किल
सारा काग़ज़ भिगो गईं आँखें
कितना गहरा है इश्क़ का दरिया
उसकी तह में डुबो गईं आँखें
कोई जुगनू नहीं तसव्वुर का
कितनी वीरान हो गईं आँखें
दो दिलों को नज़र के धागे से
इक लड़ी में पिरो गईं आँखें
रात कितनी उदास बैठी है
चाँद निकला तो सो गईं आँखें
'नक़्श' आबाद क्या हुए सपने
और बरबाद हो गईं आँखें
मनुस्मृति
. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...
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